अरै सत्यानाशी कोरोना तू ताऊ के घर क्यूंकर आया?

जैसे ही कोरोना के चलते मोदीजी ने लोक डाऊन की घोषणा की, ताऊ की बांछे खिल गई। अब 3 सप्ताह का पूरा आराम, ना जल्दी उठना, ना आफिस जाना और ना ही घर का कोई सामान लेने बाजार जाना... वाह, यह आराम तो पृथ्वी पर शायद वर्तमान काल के मनुष्यों के अलावा किसी ने ही भोगा होगा अब तक। 

ताऊ का दिल बाग बाग हो रहा था तभी ताई की आवाज आई - सुणै सै के?
ताई बोली - ईब कल तैं झाड़ू पौंछे वाली, रोटी बनाने वाली कोई नही आएगी। 
ताऊ बोला - चिंता क्यों करती हो, हम मिल जुलकर घर का सब काम कर लेंगे।



ताई बोली - मुझे मालूम है तुम कितने भले हो। हम अपने अपने काम का बंटवारा कर लेते है। 
ताऊ बोला यह भी ठीक है। बताओ मुझे क्या क्या करना है?

ताई बोली - सुबह उठते ही चाय बनाने का काम तुम्हारा और पीने का काम मेरा। फिर  मंजन ब्रश करके योगा करने का काम मेरा तब तक झाड़ू बुहारी और पौंछा करने का काम तुम्हारा।

ताई काम का यह सब बंटवारा लठ्ठ पास में रखकर ही कर रही थी सो ताऊ चुपचाप हाँ में गर्दन हिलाते हुए बोला - ठीक है और कुछ?

ताई बोली - अभी तो सारे दिन के काम बाकी पड़े हैं...इसके बाद बाथरूम में नहाने का काम मेरा, फिर बाथरूम साफ करने और लत्ते (कपड़े) धोने का काम तुम्हारा।

नहा धोकर भगवान की दिया बत्ती करने का काम मेरा  तब तक रोटी सब्जी बनाने का काम तुम्हारा. 
इसके बाद खाना टेबल पर लगाने का काम तुम्हारा और खाने का काम मेरा.
खाना खाने के बाद आराम करने का काम मेरा तब तक झूंठे बर्तन भांडे साफ़ करने का काम तुम्हारा.

अब तक ताऊ समझ गया था कि मन गया उसका तो लोक डाऊन......

ताई गंगाराम (लठ्ठ) पर हाथ फ़िराते हुये बोली - दोपहर में टीवी देखने और आराम का काम मेरा और तब तक घर के गार्डन की सफ़ाई का काम तुम्हारा. फ़िर शाम को चाय नाश्ता बनाने का काम तुम्हारा और नाश्ता करने और चाय पीने का काम मेरा. इसी तरह रात को खाना बनाने का काम तुम्हारा और खाने का काम मेरा.

ताऊ का सारा उत्साह काफ़ूर हो चुका था. मन ही मन बोला - अरे मोदी जी....ये लोक डाऊन से तो अच्छा था कि ताऊ की घेट्टी (गला) ही दबा देता. इतने काम करके तो वैसे ही कोरोना हो जायेगा.

ताऊ सर पकड कर ताई के पास बैठने लगा तो ताई ने लठ्ठ फ़टकारते हुये कहा - "परै नै मर ले"   (दूर होकर बैठ)....पता नहीं है क्या? मोदीजी ने कहा है कि कम से कम दो मीटर दूर होकर बैठना है...

ताऊ बोला - हो गया सब काम का बंटवारा या कुछ बाकी रह गया? 
ताई लठ्ठ उठाते हुये बोली - ज्यादा बकबास मत कर, यह तो शुकर मना कि तुम्हारे हिस्से मैंने सब सीधे सरल काम ही रखे हैं. अब एक रात का काम बाकी बचा है,  रात को लेटकर टीवी देखने का काम मेरा और मेरे सोने तक पांव दबाने का काम तुम्हारा.

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Comments

  1. वाह वाह ताऊ जी। आते ही सारी पोल खोल शुरू हो गयी। ताई जी को हमारा प्रणाम कहियेगा। ताऊ आपकी बहुत जरूरत महसूस हो रही है आज ब्लॉगिंग में अपना लट्ठ तैयार करके रखें। मेरे कहे से तो कोई आ नहीं रहा रफ़्तार में। आपके लट्ठ से ही आ जावे। ताऊ वो पहेली प्रतियोगिता वो राम प्यारी सब बहुत मिस कर रहे हैं। आइए दोबारा सबको लेकर। प्रणाम

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  2. वाह बहुत खूब।
    और ले ताई से पंगा....?

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  3. ताऊ को भारी पड़ गया लॉक डाउन :)

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  4. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (20-04-2020) को 'सबके मन को भाते आम' (चर्चा अंक-3677) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    रवीन्द्र सिंह यादव

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  5. वाह! बहुत बढ़िया लिखा है आपने। पढ़कर मजा आ गया।

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  6. हाय ताऊ ये तो बड़ी बेइंसाफी हो गयी।  इससे तो अच्छा मोदी जी  टूर पर भेजा होता और लॉक डाउन हो जाता।  कम से कम फ़ोन से ताई से हाल चाल लेते रहते और लट्ठ को भी आराम मिल जाता।

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