गठबंधन टूटा रे हाय..बरेली के बाजार में......

कई दिनों से लिखने का मूड ही नहीं हो रहा है, कुछ लिखने बैठो तो कोई ना कोई काम आ टपकता है और कुछ काम ना टपके तो ताई का लठ्ठ  सर पर सवार रहता है. ऐसे में लिखने का स्विच आफ़ मोड में  ही रहता है. इसी मूड के चलते  हैड मास्साब के आदेश का पालन करने के लिये व्यंग में भी कहीं सींग घुसेडने की इच्छा नहीं हो रही है. व्यंग लिखना कोई आसान काम नही है. व्यंग लिखते हुये सींग घुसेडने पडते हैं और ये सींग भी कोई ऐसे वैसे नही होने चाहिये. व्यंग के लिये बछडे जैसे सींग होने चाहिये जो होते भी हैं और नही भी होते और हम ठहरे बुढ्ढे बैल...अब बुढ्ढे बैल के सींग किसी को ज्यादा घुसेडियादो तो फ़ोकट में फ़ौजदारी में फ़ंसने का अलग लफ़डा....और मास्साब ने भी विषय दे दिया "गठबंधन".....अब ऐसे कठिन विषय पर कहां अपने बुढ्ढे सींग घुसेडें ? लालू कंपनी को घुसेड दो तो वो नाराज....पता नहीं कब वो जड से हमारी सत्ता को उखाड फ़ेंके? और दूसरे पक्ष को तो आप सींग घुसडने की सोच ही नही सकते. उनकी अभी तक पुरानी अदावत ही चल रही हैं, बेचारे अहमक पटेल के पीछे पडे हैं.....इसलिये हमने तय कर लिया कि "गठबंधन" में सींग नहीं घुसेडेंगे.....तो बस नहीं घुसेडेंगे.
कहावत प्रसिद्ध है कि चोर चोरी से जाये पर हेराफ़ेरी से ना जाये....सो लिखना नहीं हो रहा तो सोचा कुछ पढा ही जाये, इसी इच्छा के चलते ब्लाग पोस्ट पढने वाली आवारागी में निकल पडे. आजकल कुछ लोग नियमित से लिखने लगे हैं सो इस आवारगी में भी काफ़ी मसाला मिल जाता है. घूमते घामते हम पहुंच गये सदाबहार ब्लागर काजल कुमार जी के ब्लाग पर और इधर उधर नजर दौडाते हुये  हमारी नजर पडी "बरेली के बाज़ार में चुटि‍या कटी रे"  ....वाले कार्टून पर....बस गठबंधन और चुटियाबंधन का सारा माजरा समझ में आगया. यदि अपनी मर्जी से ही कोई बंधन तोडना हो तो किसी दूसरे को क्या दोष दिया जाये?
असल में गठबंधन तोडने के लिये नीतीश बाबू ने जैसे माहोल बनाया, अपने को पाक साफ़ दिखाया, अपने भविष्य को समझा तो उन्हें लग गया कि इस लठबंधन में बने रहने के बजाये चाय कंपनी में चाय बनाना ही स्वर्णिम भविष्य का द्वार है सो उन्होंने लालू जी को धोबीपाट दे मारा और चाय की केतली को सिगडी पर चढा दिया.  लालू जी इस धोबीपाट के लिये शायद पूरी तरह तैयार नहीं थे सो वो सन्निपात के रोगी की तरह गठबंधन धर्म वाले राग की महफ़िल, तीन ताल में, मिडिया पर सजा बैठे, एक प्रबुद्ध महात्मा की तरह जनता को गठबंधन माहात्म्य सुनाते रहे.
लालू जी और नीतीश जी दोनों के,  लठबंधन धर्म के प्रवचनों को सुनकर महिलाओं को अपने चुटियाबंधन से निजात पाने का एक अचूक फ़ार्मुला मिल गया. असल में ये चोटी कटुआ कोई  है ही नही बल्कि ये तो नितीश जी की तरह,  स्वयं महिलाओं ने चुटिया से आजादी पाने का नायाब फ़ार्मुला खोज लिया है. अब जिनको भी इससे मुक्ति पाकर बाब कट हेयर स्टाईल रखनी है, वो चोटी कटुआ का नाम लगा रही हैं और अपनी दिली इच्छा पूरी कर रही हैं.
लालू नीतीश के गठबंधन को तोडने का सारा दोष सरकार पर आ रहा है और इसी तरह चोटी कटुआ से बचाने का दबाव भी सरकार पर आ रहा है. अब बताईये इसमे सरकार क्या करे? लालू नीतीश ने अपना गठबंधन भी खुद तोडा और महिलाएं भी अपना चुटिया बंधन खुद ही तोड रही हैं तो सरकार को दोष क्यों? यदि कोई चोटी कटुआ होता तो जरूर किसी ना किसी पुरूष पर भी अवश्य हाथ आजमाता. चोटी कटुआ के पास महिला पुरूष में भेदभाव करने का कोई उपाय भी नही है. अंधेरे में सोया पुरूष है या महिला....ये उसे कैसे मालूम पडेगा?
फ़िलहाल अपना लिखने का कोई मूड है ही नही सो गठबंधन टूटे या चुटिया बंधन टूटे, हमे इससे क्या? हमारी रक्षक तो माता बखेडा वाली है. जब भी संकट आता है उसका सवा पांच आने का परसाद बोल देते हैं और पनौती टल जाती है.
  
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Comments

  1. गठबंधन , लट्ठबंधन , चुटियाबंधन -- ताऊ के व्यंग बाणों ने तो बंधनों में बांध कर रख दिया। वाह , क्या खूब लिखा है !

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  2. प्रसाद सिर्फ बोलना पड़ता है कि चढ़ाना भी पड़ता है ?
    नहीं ...सिर्फ इसलिए पूछा क्योंकि माता कुछ अलग सी हैं ना !!

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  3. ये गठबंधनी लफडा है ही बुरा :)

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  4. गज़ब कलम है ताऊ की !!

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  5. इब सारी बातें ठीक हैं ... ब्लोगिंग का गठबंधन न टूटने पाए ताऊ .... इतना ध्यान रख लियो ... सत्ता का झगड़ा न खदानों जाए फिर से

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  6. बहुत सही और सटीक लिखा

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  7. चुटिया बंधन :) बहुत सटीक ताऊ

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  8. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-08-2017) को "लड़ाई अभिमान की" (चर्चा अंक 2687) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-08-2017) को "लड़ाई अभिमान की" (चर्चा अंक 2687) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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