योगा में गुण बहुत हैं करते रहिए रोज....

योगा में गुण बहुत हैं करते रहिए रोज
गंगू तेली छाँडिकर बनोगे राजा भोज

अब आप कहेंगे कि ये कहां से चंडूखाने की गप्प के गले में रस्सी डालकर उठा लाये हैं? पर यकीन मानिए हम सही कह रहे हैं कोई इसरो का सेटेलाइट हवा में नही छोड़ रहे हैं। हम बात योग की नही कर रहे बल्कि योगा की कर रहे हैं। दोनों में जमीन आसमान का फर्क है। योग में वो बात नही है जो योगा में है।

योग तो बेचारा आदिकाल से ज्योतिष की किताबों में छुपा बैठा था या साधु महात्माओं के संग हिमालय की कन्दराओं में सोया हुआ था। किसी बाबा या हठयोगी ने जिद ही पकड़ ली तो कभी कभार जाग लेता था वरना तो योग पर पूरी कुम्भकर्ण की नींद सवारी करती थी।

और ज्योतिष शास्त्र में जो योग दुबक कर बैठा था उसको करना तो दूर बल्कि पढ़ पढ़कर ही आदमी निंदिया जाता था। आपको शायद पता नही होगा कि हमारे मित्र संटू भिया कबाड़ी होने के साथ साथ ही एक पहुंचे हुए ज्योतिषी भी हैं। सटीक भविष्यवाणी करने के अलावा सभी रोग, प्रेम में सफलता, किसी को भी पलक झपकते ही वश में कर लेना, सम्मोहन,  वशीकरण, सौतन से छुटकारा और दो घण्टे से कम समय मे शत्रु को वश में कर लेने के सफल उपाय करवाने में भी सिद्धहस्त हैं। 

एक दिन हमने भी उनसे पूछ लिया कि भिया आजकल सरकार ने नींद की गोलियों पर प्रतिबंध लगा दिया और हमे बिना गोली के नींद नही आती तो भिया बोले इसमें कौन सी बड़ी बात है? वो तो तुम थोड़ी दूर रहते हो वरना हम तो इस योग के बल पर पूरे नलिया बाखल के लोगों को बिना नींद की गोली खिलाये सुला देते हैं। योग का जाप करो , जाप करने के पहले ही नींद आ जायेगी।

भिया ने हमे हस्त लिखित योग जाप का फार्मूला पकड़ा दिया और बोले बस बिस्तर पर लेटकर पहले....विषकुंभ प्रीति आयुष्मान सौभाग्य शोभन अधिगण्ड सुकर्मा धृति शूल गण्ड वृद्धि ध्रुव व्याघात हर्षन वज्र सिद्धि व्यतीपात वरीयान परिध शिव सिद्ध साध्य शुभ शुक्ल ब्रह्म एन्द्र एवम वैधृति योग का अभ्यास करना इसके बाद आनन्दादि योग करना - आनन्द कालदण्ड धूम्राक्ष प्रजापति सौम्य ध्वांक्ष ध्वज श्रीवत्स वज्र मुद्गर छत्र मित्र मानसाख्य पद्माख्य लुम्बक उत्पात मृत्यु काण सिद्ध शुभ अमृत मूसल गद मातंग राक्षस चर स्थिर वर्द्धमान.........

हमने कहा भिया तुम क्यों हमारे मजे ले रहे हो ये तो ज्योतिष की शब्दावली सी दिख रही है? फिर हमने अपना ताऊत्व पेलते हुए अपना ज्ञान बघारने का मौका नही चूकते हुए कहा- योग सुलाने का नही जगाने का काम करता है...लोगों को जोड़ने का काम करता है....देखो अभी राष्ट्रपति जी के चुनाव में जेडीयू ने एनडीए को समर्थन दे दिया और लालूजी  टापते ही रह गए......सारी विपक्षी एकता योग के सामने धरी रह गई कि नही....ये सब योग की महिमा है.........
भिया हमारा ज्ञान सुनकर सिरे से ही उखड़ गए और तुनकते हुए बोले - तुमको मुफ्त की सलाह पच नही रही है वरना हम तो इन्हीं योगों से मारण, वशीकरण और सौतन से छुटकारा करवाने के बीस तीस हजार ले लेते हैं।

हमने कहा भले आदमी तुम हो ही छोटी सोच के, योग को जानकर भी रहे तुम तोता छाप ज्योतिषी ही और वही वशीकरण सौतन से छुटकारे वाले उपाय करवाकर लोगों को मूर्ख बनाने का काम करने वाले। और इसमें भी तुम्हारा पूरा नही पड़ता तो कबाड़ी का धंधा अलग से करना पड़ता है। और दूसरी तरफ देखो बाबा रामदेव के योग को। बाबा योग करवाते करवाते अरबों रुपयों का साम्राज्य खड़ा कर चुके हैं, सारी मल्टी नेशनल पानी भरने लगी है बाबा के आगे और एक तुम अपने आपको देखो, योग को जानकर भी तुम एक तोताछाप ज्योतिषी और एक कबाड़ी ही रहे...शर्म आनी चाहिए तुमको।

अबकी संटू भिया सच मे भिनक लिए, बोले देखो यार तुम कसम से हमारा भेजा तो खराब करो मति, हम भी पहुंचे हुए योगाचार्य हैं, कसम से सही बता रहे हैं, हमें गुस्सा आगया तो तुम्हे इतै ही आदमी से बन्दर बनाकर पटक देंगे....फिर रोना हमारे नाम से....अरे तुम क्या समझते हो कि हमने कोशिश नही की? हमने तो विक्रम चौधरी के हॉट योगा और पावर योगा को मात देने की तैयारी कर ली थी और संटू योगा तैयार कर लिया था और इतै भौत पापुलर भी हो गया था....
अब चौंकने की बारी हमारी थी सो हमने उत्सुकता से पूछा - भिया फिर आप कबाड़ी क्यों बन गए? आपको तो अमेरिका निकल लेना था पहली फुर्सत में।
हां, हमने पासपोर्ट वीजा सबकी तैयारी कर ली थी और कूच करने ही वाले थे कि हाट योगा वाले योगा गुरु के सेक्सुअल हैरेसमेंट की खबर आगई और वो रमलू भिया चाय वाले ने हमको डरा दिया कि तुम्हारा संटू योगा तो हॉट योगा से भी पावरफुल हैगा...और तुम चक्करों में फंस सकते हो...बस हमने सोचा उन्हां परदेश में कुछ ऊंच नींच हो गई तो मुश्किल में फंस जाएंगे इसलिए हमने वहां जाना कैंसिल कर दिया, और यहीं पर ज्योतिष योग करने लगे और साथ मे ये कबाड़ी का पुश्तैनी धंधा सम्भाल लिया।

भिया की बात सुनकर लगा कि भिया तो जीती जागती मायनस योगा की मिसाल हैं। वैसे चारों तरफ योग और खालिस योग ही नजर आता है। एक तरफ हमारे भिया मायनस योग के उदाहरण हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी वालो ने योग को ट्रिपल प्लस करके लगता है कि योग को हाईजैक ही कर लिया है। वैसे बिना योग यानी बिना जुड़ाव के संसार बेकार है। इसी जुड़ाव को संसार का विस्तार भी कह सकते हैं। संसार मे चहुं और योग की माया ही नर्तन कर रही है और ज्ञानी अज्ञानी कौन बच पाया है इस योग माया से। हम तो इसी निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि स्वस्थ शरीर, सफल उद्यमी, सफल प्रेमी या कुछ भी सफलता के साथ करना हो तो योग से जुड़ जाइये, बस सब कुछ आपके कदमों में होगा।

Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (25-06-2016) को "हिन्दी के ठेकेदारों की हिन्दी" (चर्चा अंक-2649) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. योगियों की माया है चारों तरफ ... और सभी योग कर रहे हैं किसी न किसी तरह का आज ... मस्त ताऊ ...

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