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टॉपर में क्या रखा है...लोवर टॉपर बनिये

बात लिखूं ...जज्बात लिखूं ..?
आजकल टाप या टॉपर शब्द हवा में ऐसे सरपट दौड़ ही  नही रहा बल्कि  तैर रहा है की मछली भी शर्मा कर रह जाये। संस्कृत व्याकरण के हिसाब से टॉप भी धातु है यानी शब्द निर्माण के लिए कच्चा माल। अब कच्चे माल से आप कुछ भी बनाले, आपके पास आटा, घी और शक्कर है तो आप लड्डू भी बना सकते हैं और हलवा भी, मर्जी आपकी। किसके घुटनों में दम है जो आपको रोक ले?

हमारे पास आज मूल धातु यानी शब्द है "टॉप", तो  इस कच्चे माल से बने कुछ  व्यंजन तो आपने अवश्य ही चखे होंगे। टॉप से टापना तो आपने सुना ही होगा यानी जो इधर उधर धक्के खाकर शाम को वापस ठीये पर लग लिया वो कहलाया टापने वाला। और ये तो आप जानते ही होंगे कि टापा किनके पीछे जाता है? बनिया धन के पीछे टापता है, ज्ञानी ज्ञान के पीछे, लेखक छपास के पीछे, व्यंगकार पंच के पीछे और छिछोरेे लड़के छोरियों के पीछे टापते रहते हैं।

इस टापने ने बड़े बड़े साम्राज्य बना भी दिए और बिगाड़ भी दिए। किशन भगवान हद दर्जे के पक्के टापू इंसान  थे, गोपियों के पीछे टापते टापते योगेश्वर बन गए। संसार मे जितनी मौज किशन भगवान ने ली उत्ती मौज बाकी सारे संसार ने भी नही ली होगी। संसार मे इसीलिए सबसे ज्यादा भक्त किशन जी के ही हैं, चारों तरफ इस्कान मंदिर हों या अन्य रासलीलाएं हों, भगवान किशन जी का बोलबाला है।

और मजे की बात कि टाप और टापना, ये दो ही शब्द थे अभी तक। इसका तीसरा रूप बनाया स्वयं भगवान किशन जी ने और वो भी चंद दिनों पहले। अपने केजरी भाई किशन जी के बड़े फैन हैं और उन्हीं के मार्ग पर चलते हैं यानी कर्म के मार्ग पर। तो एक दिन वो  केजरीवाल के सामने प्रकट हो गए और बोले - क्या चाहिए? मांग ले भक्त, में तेरी सेवा पूजा और कर्म के सिद्धांत से अति प्रसन्न हूँ। केजरी भाई ठहरे बनिया आदमी, सोचने लगे मैं मांगूगा तो  चींटी जैसा कम ही मांग पाऊंगा और भगवान अपनी मर्जी से देंगे तो कुछ बड़ा हाथी सरीखा ही देंगे। तो खसयाते हुए बोले प्रभु आप ही देदो अपनी मर्जी से।

अब आप तो जानते हैं किशन भगवान सीधा सीधा तो किसी को कुछ देते नहीं। बड़ा घुमा फिराकर आदमी को लटपट मुर्गे  जैसा चक्करघिन्नी बनाये बिना कुछ भी नही देते हैं। अब देखिए ना पांडवों को हस्तिनापुर का राज भी दिलाया, तो अपनी पूरी मौज लेने के बाद और सारे नाच नचवाकर ही दिलवाया तो केजरी को कौनसा सीधा सीधा देने वाले थे?  अतः भगवान बोले -भक्त में तुम्हें "टॉपर" के रूप में देखना चाहता हूं। मेरे जैसे ही तुम भी टॉपर बनोगे और किशन जी ने केजरी की मति में कपिल मिसरा को केनिबेट से बाहर करने की बात डाल दी और खुद जाकर कपिल मिसरा की आत्मा में घुसकर अपने शिष्य को टॉपर बनाने के लिए उससे रोज दो चार आरोप केजरी पर लगवाना शुरू कर दिए। उसके बाद से सारे शोशल मीडिया में केजरी के अलावा कोई टॉपर नही बचा। बोलिये मुरली वाले कि जय।

वैसे अभी तक टॉपर शब्द पर केजरी भाई का कॉपीराइट तो हुआ नही है सो स्टूडेंट क्यों पीछे रहते, उन्होंने बिहार में टॉपर घोटाला करवा डाला। अरे भाई समाजवादी राज है वहां तो एकाधिकार किस बात का। खुली छूट है, सभी बने टॉपर। क्या जरूरी है कि किशन भगवान के वरदान बिना टॉपर नही बना जा सकता? और गणेश तो टॉपर भी इस लेवल का बना की अब टॉपर शब्द शाप देने के काम आने लगा है। पड़ौसने आजकल झगड़ती हैं तो झन्नाटेदार गालियों की बजाय आजकल शाप देती हैं कि "जा तेरा बेटा इस साल टॉपर बन जाये" युवा शक्ति की जय।

वैसे टॉपर होने की चाह कालजयी रही है। जहां भी टॉपर होने की गुंजाइश नही हो वहां भानगढ़ का किला बन जाया करता है। ब्लागिंग के जमाने में चिठ्ठाजगत में 40 की टॉपर लिस्ट के लिए ब्लागर दिन रात लगे रहते थे। टाप 40 में आने का मतलब की अब मठाधीशी का दावा ठोक दिया गया है। और टाप 10 में जगह पाने के लिए तो कपिल मिसरा की जोर आजमाइश भी हल्की पड़ जाए क्योंकि टाप 10 में जगह पाने का मतलब था कि अब मठाधीश बन गए।  और जैसे ही चिठ्ठाजगत बन्द हुआ कि ब्लागर भी भानगढ़ बन गया। जो अब ब्लागरों की सिसकती आहों में ही जिंदा बचा है। बोलिये ब्लाग मठाधीशों की जय।

टॉपर शब्द की महिमा अपरंपार है, सिनेमा में टॉपर होना हो तो खानों की तनातनी,  क्लास में टॉपर होना हो तो मां बाप से तनातनी इत्यादि इत्यादि के मुरब्बे चखे जा सकते हैं। जीवन में हर तरफ टॉपर होने के लिए दौड़ चल रही है।

अब भगवान कृष्ण के बाद यदि कोई टॉपर दुनियां में बचता है तो वो है "व्यंगकार"।
जी, आप ठीक समझे भगवान के बाद किसी का नम्बर लगता है और जो सर्वत्र पूज्यनीय है तो वो प्राणी है "व्यंगकार"। असल में जो किसी भी एक शब्द को लटपट मुर्गा बना सकने की कूव्वत रखता हो, वो होता है व्यंगकार।
जैसे मुर्गे को लटपट बनाने के लिए कड़ाही और कड़छी को बजाना पड़ता है, कुछ मिर्च मसाले और मक्खन डालना पड़ता है, वैसे ही शब्द को बजाने की कला में ये प्राणी महारत रखता है या कहलें की मुंडी नीचे करके ये सामने वाले को कहीं भी सींग घुसेड़ने  की कला में माहिर होता है। शब्द का चाहे पेट फ़टे, पीठ टूटे, इस बात की परवाह नही करता। कई बार तो ये शब्दों की टांगों में भी अपने सींग अटका कर उसे पंगु बना डालता है, हां ये बात भी सत्य है कि कई बार इस सींगबाजी के चक्कर मे ये अपने सींग भी तुड़वा बैठता है।

तो इतने आदरणीय माननीय होकर कुछ नया ईजाद करना तो बनता है सो एक नया शब्द उछाल दिया "लोवर टॉपर"। और हम इस शब्द का पुरजोर समर्थन करते हैं, सींग घुसेड़ने के लिए इससे ज्यादा मस्त शब्द कोई हो ही नही सकता। इसमें चाहे जितने सींग घुसेडो, कोई कुछ नही कहेगा और फिर आम के आम गुठलियों के दाम, यानी सींग घुसेड़ना मुफ्त और सींग टूटने का डर भी नहीं।
तो हम सभी से निवेदन कर देते हैं कि हम टॉपर हों या ना हों पर लोवर टॉपर पर हम अपना एकाधिकार रखते हैं। और इसके कॉपीराइट की प्रक्रिया हमने शुरू कर दी है।
यदि किसी ने हमारे अधिकार क्षेत्र में घुसने की कोशिश की तो यह एलओसी का उल्लंघन माना जायेगा। फिर इसकी कड़ी से कड़ी निंदा करते हुए सामने वाले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब किया जाकर जात बिरादरी से बाहर करवाने के लिए इंटर नेशनल कोर्ट में मुकदमा लगवाया जाएगा।

2 comments:

  1. अरे बाप रे टॉपर की इत्ती सारी बैराइटी, मजेदार ढंग से उधेड़ा है

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