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आज कुछ लिखने का मूड नही है ताऊ

आज एक अक्षर भी लिखने का मूड नही है। अब ये किसी के हाथ में तो है नही की मोबाईल हाथ मे पकड़ा दिया और कहा कि लिखो। लिखने के लिए कोई मूड होता है, कोई टॉपिक होता है जिस पर निगाह गड़ जाए और पोस्ट बाहर निकल आये।

आज जब दिमाग एकदम पैदल चल रहा है तो कहां से लिखें? ना जी ना, आज दिमाग खाली है। और तो और आज कमेंट करने के लिए भी दिमाग में कोई खुराफाती आईडियाज नही उछले हैं सुबह से अभी तक तो पोस्ट चेपना तो दूर की बात है।

आप भी गजब के पाठक हैं जो अभी तक यह नहीं पूछा कि ताऊ क्या बात हो गई जो दिमाग बन्द होगया? हाँ तो ये हुई ना कोई बात, हम बिना पूछे ही बता देते हैं कि आज सुबह सुबह उठते ही ताई ने आदेश दिया कि फ्रिज में दूध रखा है जरा चाय तो बनाते जाना मार्निंग वाक पर जाने से पहले। इतने में घर के बाहर से गुप्ताजी ने बांग लगादी की चलो घूमने का टाइम हो गया है।

अपना मूड तो था नही पर यह सोच कर बनाने लगे कि सुबह सुबह कौन झखमारी करेगा, चलो बना देते हैं। हमने चाय पत्ती पानी शक्कर मिलाकर गैस पर चढ़ा दिया और मार्निंग वाक के लिए निकलने लगे तो याद आया कि चाय को दूध की भी जरूरत होगी सो जल्दी में फ्रिज में से दूध समझकर छाछ को पतीले में डाला और यह कहते हुए निकल लिए की चाय 5 मिनट बाद तैयार हो जाएगी, तुम छानकर पी लेना, हम गुप्ताजी के साथ घूमने जा रहे हैं।

वापसी में देखा तो ताई लठ्ठ लिए बैठी थी, ये हमारा रोज का काम है सो हड्डियों को थोड़ा कड़क करके खड़े होगये की दो चार पड़ने ही वाली है। आप जानते हैं कि ताऊ की कसूर पूछने की आदत नही है, चुपचाप हड्डियां कड़क करके खड़ा होजाता है।

ताई आंख दिखाते हुए बोली, आज लठ्ठ का इस्तेमाल नहीं करूंगी बस आज तो तुम जो चाय चढ़ाकर गए थे उसे पीयो, यही सजा है तुम्हारी। और वो छाछ वाली चाय का पतीला हमारी तरफ खिसका दिया।
पहली ही घूँट में जो मुंह का स्वाद किरकिरा हुआ वो अभी तक नही सुधरा। हम चाय छोड़कर निकल भागने की फिराक में थे पर देखा वो लठ्ठ लिए दरवाजे पर पीढ़े पर बैठी खुद की बनाई चाय पी रही थी।

डर के मारे सारी चाय पी गए जैसे भगवान भोलेनाथ ने विष का आचमन किया था। वो तो भगवान थे सो इतने युगों से भी विष उनके गले मे ही विराजमान है। हम ठहरे साधारण प्राणी , हमको गले मे अटकाने की कला आती नही सो गले से होती हुई सीधी पेट मे उतर गयी। पेट में पहुंचकर उस चाय ने हमारी क्या हालत की होगी, यह आप समझ सकते हैं।

अब बताइये ऐसे में कोई कैसे पोस्ट लिख सकता है। तो आज अपुन कुछ नही लिखेंगे और कमेंट में भी सिर्फ लाइक बटन ही दबाएंगे।

3 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "नयी बहु - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. हा हा...इतना कुछ होने के बाद भी लाइक बटन दबा रहे हैं वो क्या कम बात है। :-p :-p

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  3. बेहतरीन लेखक तो वही है जो मूड न होने बावजूद भी इतना सुंदर लिखे
    अच्छे मूड में तो कोई भी अच्छा लिखता है ! और हाँ अगली बार ताई के लिए
    जब भी चाय बनाना ध्यान से प्रेम से बनाना ताऊ ! :)

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