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एक पर एक फ़्री वाला वरदान चाहिये.

 तुम आजकल की लडकियों को क्या हो गया है?
बहु, कब तक बिस्तर पर मुंह फ़ुलाये पडी रहोगी?

बहु किसी तरह अपनी दोनों बेटियों को लेकर अपने पिता के घर लौट आई. जिसने भी सुना उसने पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी.  पिता और भाई ने वकील से परामर्श किया. वकील साहब ने पुलिस केस करने की बजाय सिर्फ़  घरेलू हिंसा व गुजारा भत्ते के वाद लगाने की सलाह दी. शुरू से आखिर तक समस्त घटना क्रम का विवरण देते हुये केस लगा दिये गये.

उधर ससुराल में जैसे ही नोटिस सम्मन तामिल हुये कि सास गुस्से से उफ़न पडी. बहु की इतनी मजाल कि उसने हमारे खिलाफ़ केस लगाये? पति भी गुस्से से उबल रहा था, उसका बस चलता तो वहीं से बैठे बैठे गोली मार देता.

इतनी ही देर में बाबाश्री ताऊ महाराज वहां प्रकट हो गये और उनको गुस्से में लाल पीला होते हुये देखकर उनसे कुछ वरदान मांग लेने की पेशकश की. आप तो जानते ही हैं कि बाबाश्री ताऊ महाराज सर्वज्ञ हैं, कुछ भी कर सकते हैं.

सास ने वरदान मांगा कि उसका एक खून माफ़ किया जाये.
बाबाश्री ने पूछा - किसका खून करोगी?
सास बोली - बहु का.

अब बाबाश्री ताऊ महाराज पति की और मुखातिब हुये तो पति बोला - मुझे भी एक खून माफ़ माफ़ किया जाये,  लेकिन साथ ही एक पर एक  फ़्री वाला वरदान चाहिये.

बाबाश्री ताऊ महाराज बोले - एक पर एक फ़्री वाला लेकर क्या करेगा?
पति बोला - पत्नी को तो मां (यानि बहु की सास) निपटा देगी. मैं अपने ससुर और साले को निपटा दूंगा.

बाबाश्री ताऊ महाराज ने पूछा - अब ससुर और साले ने क्या बिगाड दिया तुम्हारा?
पति बोला - उन दोनों कमीनों की मदद  से ही उस कमीनी ने हम पर ये  केस लगाने की हिम्मत जुटाई  हैं. वर्ना उसकी इतनी मजाल कहां?

18 comments:

  1. नयी पुरानी हलचल का प्रयास है कि इस सुंदर रचना को अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    जिससे रचना का संदेश सभी तक पहुंचे... इसी लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 26/05/2014 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...

    [चर्चाकार का नैतिक करतव्य है कि किसी की रचना लिंक करने से पूर्व वह उस रचना के रचनाकार को इस की सूचना अवश्य दे...]
    सादर...
    चर्चाकार कुलदीप ठाकुर
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  2. हाँ ये बात तो है ,कहीं से कोई आसरा न मिलता तो वह कुछ नहीं कर सकती थी .ससुर-साले दोषी हैं उनने दान कर दिया , अब क्या मतलब उन्हें ?
    यह मानसिकता तो जाने कब से चली आ रही है .

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  3. हंसी मजाक में बहुत ही गंभीर बात कह दी आप ने...अपने पड़ोस में भारत में ऐसा केस हमने देखा था ..दहेज़ उत्पीडन कानून का गलत इस्तमाल होते देखा था ..
    लेकिन किसी को जान से मार डालना कोई सही रास्ता नहीं है.

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  4. ओह..ये कहानी पहले दो भाग से जुडी है ...तब तो यह घरेलू हिंसा का ही और सही मामला बना है.मानसिक प्रताड़ना का भी!

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  5. अब फंसा मुसीबत मे बाबा श्री ताऊ महाराज !
    हम तो कहते हैं , पोटली उठाओ और सारे वरदान लड़की वालों को दे आओ !

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (27-05-2014) को "ग्रहण करूँगा शपथ" (चर्चा मंच-1625) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  7. काश ताऊ बाबा बहु के सम्क्ष प्रकट भए होते और उसने भी "एक के साथ एक मरी" वाला वरदान माम्गा होता!!

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  8. बहु को बेटी न मानने और उसपर अत्याचार करने की मानसिकता ... लड़की ससुराल में चुप रहे और उसके घरवाले चुपचाप सुनते देखते रहे ....कमोवेश आज भी बहुत से परिवारों में देखकर दुःख होता है .. .
    चिंतनशील प्रस्तुति

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  9. बहुत सुन्दर ताऊ खूब कहते हो

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  10. एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी..इसे ही कहते हैं..

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  11. ताऊ जी बड़ा लपेट के मारा है...बहुत खूब...

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  12. कथा के अगले चरण की प्रतीक्षा है , ताऊ महाराज किसको निपटाएंगे !

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  13. कहानी की तीसरी कड़ी देर से पढ़ रही हूँ,
    देखते है ताऊ महाराज अगली कड़ी में क्या कमाल करते है !

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  14. मानसिकता को बदलने का वरदान दो ताऊ श्री उनको ...
    सच से सामना करवाओ ... दिव्य दृष्टि से ही उनको उनके कर्मों का फल दिखाओ शायद बदलाव आ जाये ...

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  15. बताओ भला इन नालायकों की सोच का...

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  16. इसे ही कहते हैं नपुंसक आक्रोश ,दुर्योधनी अकड़, कांग्रेसी अहंकार। स्साला बाबा !

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