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कैसे गुजरी तमाम रात, बताऊं कैसे ?



कैसे गुजरी तमाम रात, बताऊं कैसे ?
रात भर करवटें बदलीं , सुनाऊं कैसे ?


"बेचैनी का बुरा आलम, 
दर्दे दिल तुझको, दिखाऊं कैसे ?

लग रहा भोर हो चुकी अबतो, 
रात के जख्म,  छुपाऊं कैसे ?

जीने की कोई तमन्ना ही नही,
जिंदगी का  बोझ,  उठाऊं कैसे ?

तन्हाई मुझको पुकारे यारो 
सजदे में सर अब, झुकाऊं कैसे ?



31 comments:

  1. ~बेचैनी के इस आलम में....
    दिल ढूँढे किसको... बताऊँ कैसे... ~
    ऐसे ही! आपकी शायरी पढ़कर ये पंक्तियाँ पढ़कर दिमाग़ में आ गयीं.... :)

    ~सादर!!!

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  2. आजकल गज़लें बहुत लिखी जा रही हैं ताऊ ...
    बधाई !

    और हाँ , धंधा कैसा चला रहा है ??

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    1. यह गज़लें ताई को सुनाने का दिल है यार ...

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  3. मन उहापोह की सुंदर अभिव्यक्ति .........

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  4. ज़िंदगी का बोझ तो उठाना ही पड़ेगा .... भले ही जीने की तमन्ना हो या नहीं .... तो हंस कर ही उठाया जाए ... उदासी लिए हुये खूबसूरत गज़ल

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  5. बहुत सुंदर गजल

    यहाँ भी पधारे ,

    हसरते नादानी में

    http://sagarlamhe.blogspot.in/2013/07/blog-post.html

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज सोमवार (22-07-2013) को गुज़ारिश प्रभु से : चर्चा मंच 1314 पर "मयंक का कोना" में भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. हास्य के साथ ग़ज़ल में भी आपका दिल और दिमाग करतब दिखाता है !
    लाजवाब !

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  8. जीने की कोई तमन्ना ही नही,
    जिंदगी का बोझ, उठाऊं कैसे ?

    जीवन की इन राहों पर
    पता नहीं कब तक है चलना
    थके कदम कहते है रुक जाना
    समय कहता है चलते रहना
    भले ही सांसों का अंत आया
    पर सफर का अंत कब आया ?

    बहुत बढ़िया रचना, रचना की उदासी मन को गहरे तक
    छू गई ताऊ, व्यंग्य के साथ आपकी हर रचनाओं में
    एक गहराई होती है !

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  9. मन बेढंगा है, किससे खुसफुसाऊँ..

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  10. काव्यमयी रूमानी मूढ़ में लग रहे है ताऊ जी,:) बहुत बढ़िया !

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  11. मन की उलझनों को दर्शाती सुंदर भावभिव्यक्ति...

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  12. तन्हाई मुझको पुकारे यारो
    सजदे में सर अब, झुकाऊं कैसे

    बेहतरीन ग़ज़ल| मकता कमाल का है .......दिल से मुबारकबाद|

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  13. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जानिए क्या कहती है आप की प्रोफ़ाइल फोटो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  14. जीने की कोई तमन्ना ही नही,
    जिंदगी का बोझ, उठाऊं कैसे ?

    जिंदगी का दिल तोडा है आज,
    ये बात आपको समझाऊं कैसे !

    ऐसी उदासीन ग़ज़ल क्यों ?

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  15. बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...

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  16. एक पोस्ट में 6 सवाल..
    :-)
    बढ़िया ग़ज़ल ..
    सादर
    अनु

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  17. ग़ज़ल में उदासियाँ हैं परन्तु अच्छी कही गयी है.

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  18. बहुत ही सुंदर, मैंने भी एक कोशिश की है गजल लिखने की,पहली गजल लिखी है, आप भी यहाँ पधारे


    यहाँ भी पधारे
    गुरु को समर्पित
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_22.html

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  19. ... किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही ...

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  20. बहुत खुबसूरत ग़ज़ल ...आभार

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  21. कैसे गुजरी तमाम रात, बताऊं कैसे ?
    रात भर करवटें बदलीं , सुनाऊं कैसे ?

    सुन्दर है अति सुन्दर प्रस्तुति .

    बाप (शिव बाबा )को गुड नाईट कहके सोवो गुड मोर्निंग कहके उठो ,घोड़े बेचके सोवो

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  22. बात हमदम से करें
    बात हम-कदम से करें
    दर्द कम होगा जरूर
    जिंदगी पे होगा गुरूर ।

    उदासी आपको सूट नही करती । हंसते हंसाते रहें ।

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  23. तन्हाई मुझको पुकारे यारो
    सजदे में सर अब, झुकाऊं कैसे ?
    - लेखन भी वाणी की वंदना है ,माने 'सजदा'!

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  24. वाह बहुत खूब
    राम राम

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  25. waah bahut badhiya aise sawal iske abav khood hi dhundhna hoga ....

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  26. kya baat hai taauji! behad khubsurat :)

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