क्या शोख थीं अदाएं, ख़्वाबों में रह गयी हैं !



तनिक  सी गुफ़्तगू  करली कि तमाशा बना दिया
झौंका था हवाओं का दुनियां ने तूफ़ान बना दिया
             *****

तेरी आशिकी में  अपने दिल को बिगाड बैठा
जिंदगी,  सुकून  में  थी,  घर को  उजाड बैठा !
              *****

क्या शोख थीं अदाएं,  ख़्वाबों में रह गयी हैं !
आते हो ख्यालों में,जब खुशियाँ बह गयी हैं !   
              *****

आतिशे इंतकाम में,  घर का   चमन  उजाड़ा !
जब तुम न मिल सके तो खुद को ही है,पछाड़ा 
               *****

ख्वाहिश थी दर पे तेरे , दीवाना मैं ही होता 
सब मुझसे बौने होते , मैं ही तुम्हारा होता !  

               *****

Comments

  1. ख्वाहिश थी दर पे तेरे,दीवाना मैं ही होता
    सब मुझसे बौने होते,मैं ही तुम्हारा होता !

    बहुत उम्दा,सुंदर गजल ,,

    Recent post: ओ प्यारी लली,

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  2. ताऊ ,
    ग़ज़ल में भी आ गए महाराज !! बधाई

    ख्वाहिश थी दर पे तेरे , दीवाना मैं ही होता
    सब मुझसे बौने होते , मैं ही तुम्हारा होता !

    यह ख्वाहिश तो पूरी हो गयी आपकी, सब वैसे भी आपके ( चालू ) आगे कहाँ ठहरते हैं प्रभू !

    अगर यह रचना में आप गंभीर है तो मुझे आपके बुढापे की चिंता है ताऊ !
    मंगल कामनाएं ताई के लिए !

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    1. सतीश जी, हमारे बुढापे की चिंता करने के लिये धन्यवाद, नीचे लिखे प्वाईंट्स पर ध्यान दिया जाये.

      1. हम रामायण कालीन माता सीता के आशीर्वाद प्राप्त ताऊ हैं, सतयुग से कल्युग तक तो बुढापा आया नही, अब क्या खाक आयेगा?

      2. आपकी जिज्ञासा है कि इस रचना में आप गंभीर हैं तो......सतिश जी गंभीर तो हम ताई के साथ शादी करके भी नही हुये तो अब क्या खाक गंभीर होंगे.:)

      3. हमारी इस रचना को जिस्मानी ना समझकर रूहानी समझकर गौर करें, हमारा मतलब आपको साफ़ समझ आ जायेगा.

      रामराम.

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  3. तेरी आशिकी में अपने दिल को बिगाड बैठा
    जिंदगी, सुकून में थी, घर को उजाड बैठा !

    किस चक्कर में आ गए ??? ये आग का दरिया है और डूब के जाना है ..... सारे धंधे चौपट हो जाएंगे ।

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    1. हा...हा...हा...हा...

      समझ में आई या नहीं ई ...ई ...ई...
      उम्र का ख़याल करो !!!!

      संगीता जी का आभार वैसे ताऊ समझने वाली चीज़ नहीं ...

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    2. ताऊ ...
      ये धंधे मुझे दे ..दे...

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    3. संगीता जी, सही कहा आपने, परमात्मा के इश्क पर बढना इक आग का दरिया ही तो है. आभार.

      रामराम.

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    4. सतीश जी अब क्या समझना और क्या समझाना? जिस रस्ते पर कदम बढा दिये हैं तो फ़िर वापिस क्या खींचना. आभार.

      रामराम

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    5. सतीश जी सारे धंधों के फ़ार्मुले ताऊ बताने को तैयार है, आप तो जब चाहे तब ले लीजिये.:)

      रामराम.

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  4. ताऊ आप तो गजल में भी माहिर हो, बढ़िया रचना है
    हर पंक्ति लाजवाब है !

    ख्वाहिश थी दर पे तेरे , दीवाना मैं ही होता
    सब मुझसे बौने होते , मैं ही तुम्हारा होता !

    प्रेम साधारण हो की असाधारण इसके आगे हर चीज
    बौनी लगती है ,ख्वाहिश तो हो दीवाना होने की !

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    1. यह तारीफ़ कुछ अधिक गंभीर लग रही है ...
      ताऊ का दिमाग खराब हो जाएगा !
      pleeese..

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    2. सुमन जी, सही कहा आपने, उमर खैयाम को भी सिर्फ़ इसीलिये गलत समझा गया और उनकी गजल रूबाईयां सिर्फ़ मयखानों की शोभा बन गई, सतीश जी तो लगता है हमें उमर खैयाम ही बना कर छोडेंगे.:)

      रामराम.

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    3. सतीश जी, इस रास्ते पर चलने की पहली शर्त ही दिमाग का खराब होना है.:) तथाकथित स्वस्थ दिमाग इन रास्तों पर चलने की सोच भी नही सकता.:)

      रामराम

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  5. अहा ताऊ! एक दम शानदार . श्रीमान सक्सेना साहब की बातों पर ध्यान मत दीजियेगा, घुटनों का क्या है, आजकल तो बदल भी जाते हैं ... :)

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    1. हा हा हा.... घुटनों का इलाज अच्छा बताया.:)

      रामराम.

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  6. जिन्दगी अकेली, क्या शानदार है, क्या सूझा, पा ली बेगार है।

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    1. सही है, आदमी सोचता है सारा बोझ उसी के कंधों पर है और इसी धुन में सारी उम्र बेगार ही करता रहता है.

      रामराम.

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  7. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (02-06-2013) के चर्चा मंच 1263 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  8. bahud umda njm.

    adrneeyon! rchna ka swagat krnen;aur tauji ko haath ajmaane den (ghazal) men.

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    1. बहुत आभार धीरेंद्र जी.

      रामराम.

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  9. तेरी आशिकी में अपने दिल को बिगाड बैठा
    जिंदगी, सुकून में थी, घर को उजाड बैठा ! badi saralta se dil ki bat kah dee ....ati sundar ....
    *****

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  10. ताउजी

    आश्चर्य जनक सुप्रभात !

    आप को हर फन में माहिर हैं ....ये आपने लिखा ?

    ताऊ हैं या महा ताऊ या छुपे रुस्तम ताऊ ? :))

    जय हो आपकी

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    1. आभार सेहर जी, हुआ ये था कि कुक के छुट्टी पर होने की वजह से आजकल ताई का दिमाग रसोई में 48 डिग्री पर भन्नाया रहता है. बस इसी भन्नाहट में जमा दिये दो चार लठ्ठ और हमें सीधे परमात्मा से इश्क करने की सूझ पडी.:)

      रामराम.

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  11. ye taoo ko baithe bithaye kya ho gaya!

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    1. ताऊ का दिमाग खराब होने से ताऊ पगला गया है.:)

      रामराम.

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  12. बहुत सुंदर रचना
    मैं तो आपको पढ़ता रहता हूं, प्रशंसक हूं आपका।

    नोट : आमतौर पर मैं अपने लेख पढ़ने के लिए आग्रह नहीं करता हूं, लेकिन आज इसलिए कर रहा हूं, ये बात आपको जाननी चाहिए। मेरे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर देखिए । धोनी पर क्यों खामोश है मीडिया !
    लिंक: http://tvstationlive.blogspot.in/2013/06/blog-post.html?showComment=1370150129478#c4868065043474768765

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  13. तेरी आशिकी में अपने दिल को बिगाड बैठा
    जिंदगी, सुकून में थी, घर को उजाड बैठा ..

    ऐसा होता है ताऊ .. इसलिए तो कहते हैं इश्क आग का दरिया है ...
    इससे जितना बचके रहो अच्छा है ...
    पर शेर सभी लाजवाब है ताऊ श्री ...

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  14. शुक्रिया दिगंबर भाई, अब जिस रस्ते चल पडे हैं उस पर चल कर भी देख लेते हैं. आग के दरिया से ज्यादा तो कुछ नही आयेगा?:)

    रामराम.

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  15. ताऊ आज हमारे फिर उभर के आये
    हर अंदाज़ निराला ताऊ का हमको भाये....
    स्वस्थ रहें !

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  16. आज मान गए कि ताऊ की महिमा अपरम्‍पार है।

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  17. तनिक सी गुफ़्तगू करली कि तमाशा बना दिया
    झौंका था हवाओं का दुनियां ने तूफ़ान बना दिया
    ....बहुत खूब ..

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  18. गजल में भी माहिर हो, बढ़िया रचना है

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  19. तनिक सी गुफ़्तगू करली कि तमाशा बना दिया
    झौंका था हवाओं का दुनियां ने तूफ़ान बना दिया
    वाह! वाह! वाह!
    यह तो बड़ा उम्दा शेर है!
    आप ने तो बड़े अच्छे शेर लिखे हैं ..
    बहुत बढ़िया !

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  20. अरे ग़ज़ल????
    किसी गलत blog पर तो नहीं आ गए हम...या ताऊ आपका blog हैक तो नहीं हो गया :-)

    सादर
    अनु

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  21. सीस काटि भुइंयाँ धरो, ता पर राखो पाँव,
    दास कबीरा यों कहै, ऐसा हो तो आव।
    मैं घर जारा आपना, लिया मुरैरा हाथ,
    अब घर जारौं ताहि का जो चलै हमारे साथ। - कबीर

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