Powered by Blogger.

हाथ पांव में दम नहीं, हम किसी से कम नहीं :दिल्ली गैग रेप

दस बजे रात को लड़की घर से बाहर क्या कर रही थी?
ब्वॉय फ्रेंड के साथ रात को बाहर निकलेगी तो यही होगा.
पुलिस कहां तक संरक्षण देगी?
प्रतिरोध  भी उसका दुस्साहस, 

उन्होनें आगे कहा 
हाथ पांव में दम नहीं, हम किसी से कम नहीं.
छह लोगों से घिरने पर लड़की ने चुपचाप समर्पण क्यों नहीं कर दिया?
कम से कम आंते निकालने की नौबत तो नहीं आती.
सुविधाओं और अधिकारों का महिलाओं ने गलत इस्तेमाल किया है.
इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस का रवैया बिलकुल ठीक है.

असंवेदनशीलता का आलम यह रहा कि
इस भाषण पर वहां मौजूद ज्यादातर अफसर मौन रहे.

उपरोक्त विचार ताऊ के नही हैं. बल्कि एक बुद्धिजीवी महिला के हैं.  अफ़्सोस जनक  है कि ऐसा बेहूदा और डरपोक  बयान एक महिला ने दिया है.   आज  सुबह सुबह ही अखबार के फ़्रंट पेज पर दिल्ली गैंग रेप पर यह खबर पढकर मन ग्लानि से भर गया. मध्यम प्रदेश यानि मध्य प्रदेश महिला दुष्कर्मों में अब्बल क्यों है? इसका जवाब प्रदेश के बुद्धिजीवियों की सोच ही लगती है. और दुख तब होता है जब ये विचार किसी महिला बुद्धिजीवी के हों.

 (पूरी खबर यहां पढ सकते हैं)

शेम...शेम....शेम....
================================================


जी करता है तेरा ताऊ-मार्शल करवा दूं...



24 comments:

  1. जब समाज में भेड़िए घूम रहे हों, तब यही कहा जाएगा ना। किसी में हिम्‍मत नहीं है कि यह कहे कि भेड़ियों को बन्‍द करो। समाज तो डरा हुआ है और इसे डराने का काम फिल्‍मवाले बखूबी कर रहे हैं। फिल्‍म की पुलिस या तो भ्रष्‍टाचारी है या फिर मसखरी है। प्रशासन और राजनेता डाकुओं से भी अधिक भयानक है। ऐसी छवि जब समाज में प्रतिष्‍ठापित हो जाएगी तब समाज डरेगा नहीं तो क्‍या करेगा? जंगल में जाते हैं तब रात को बाहर नहीं निकलते, क्‍योंकि जानवर शिकार के लिए रात को ही निकलते हैं। पहले समाज डर समाप्‍त करे फिर कोई उपदेश नहीं देगा।

    ReplyDelete
  2. आवश्यकता है कि इन्हें कठोर सज़ा मिले जिससे औरों को सबक रहे ...

    ReplyDelete
  3. इससे ज्यादा शर्म क्या होगी ...
    सीना जोरी भी है लोगों की ...

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (28-12-2012) के चर्चा मंच-११०७ (आओ नूतन वर्ष मनायें) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

    ReplyDelete
  5. बहुत गलत बोला मोहतरमा ने ।

    ReplyDelete
  6. यह बात तो समझ मेन आती है की अपनी सुरक्षा खुद की ज़िम्मेदारी है .... लेकिन समर्पण वाली बात जो कही गयी है वो निंदनीय है ... शर्मनाक बयान ।

    ReplyDelete
  7. ऐसे बयान देनी वाली के लिए तो मेरे पास एक ही शब्द है जो इतना घटिया है कि यहाँ ब्लॉग पर लिख ही नहीं पा रहा हूँ !!

    ReplyDelete
  8. स्‍वागत है ताऊ
    लगता है इब ही हाजिर हुए हैं
    पुनर्जन्‍म लेकर।

    ReplyDelete
  9. Ye to Koi baat nahi ki ladki raat ko bhar kya kar rahi thee, ya usne kam kapde pahne the, lakde kabhi bhee aaie unhe to koi lakdi nahi pakdati , ya lakde nage ghoome tab bhee unhe koi nahi pakdta, agar aisa hone lage to saare lakde bina kapdo ke ghoome..to koi bhee kabhi bhee kahi bhee ja sakta hai ..

    ReplyDelete
  10. मानसिकता बदलने की जरूरत है, कपड़े बदलने की नहीं, किसी ने सही कहा है कि शिक्षा से आप अच्छे विचार दे सकते हैं, किंतु वास्तविकता में उसके संस्कार और अंदर के पशु को नहीं बदल सकते हैं ।

    ReplyDelete
  11. पता नहीं कैसे कैसे तर्क कुतर्क उछल कर सामने आ रहे हैं।

    ReplyDelete
  12. " ए राजू !"

    राजू :-- का मास्टर जी !

    "जे हिरनियों को छोड़ने उल्लू जाएंगे तो जेइ होगा....."

    ReplyDelete
  13. कोई निहायत बेहूदा औरत जान पड़ती है। औरत के नाम पर कलंक है !

    ReplyDelete
  14. ताऊजी, दोबारा लिखना कब से शुरू किया? पता भी नहीं चला।
    वेलकम बैक।

    ReplyDelete
  15. समझ नहीं आता इन्होंने बच्चों को कैसे रखा होगा...बेचारे बच्चे !!:-(

    ReplyDelete
  16. एक महिला नेत्री के मुंह से ऐसी बातें!धिक्कार है ऐसी महिला प्रतिनिधियों पर जो इतना घटिया सोच सकती हैं.


    ReplyDelete
  17. ये हमारे देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों के दिमागी दिवालियेपन को दर्शाता है....
    सार्थक प्रस्तुति।।।
    नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं।।।

    ReplyDelete
  18. देश की ये हालात देख कर अब तक तो शब्द भी मौन हो चुके हैं :(

    ReplyDelete
  19. प्रभावी लेखन,
    जारी रहें,
    बधाई !!

    ReplyDelete
  20. दिन तीन सौ पैसठ साल के,
    यों ऐसे निकल गए,
    मुट्ठी में बंद कुछ रेत-कण,
    ज्यों कहीं फिसल गए।
    कुछ आनंद, उमंग,उल्लास तो
    कुछ आकुल,विकल गए।
    दिन तीन सौ पैसठ साल के,
    यों ऐसे निकल गए।।
    शुभकामनाये और मंगलमय नववर्ष की दुआ !
    इस उम्मीद और आशा के साथ कि

    ऐसा होवे नए साल में,
    मिले न काला कहीं दाल में,
    जंगलराज ख़त्म हो जाए,
    गद्हे न घूमें शेर खाल में।

    दीप प्रज्वलित हो बुद्धि-ज्ञान का,
    प्राबल्य विनाश हो अभिमान का,
    बैठा न हो उलूक डाल-ड़ाल में,
    ऐसा होवे नए साल में।

    Wishing you all a very Happy & Prosperous New Year.

    May the year ahead be filled Good Health, Happiness and Peace !!!

    ReplyDelete
  21. ताउ इसने कुछ ज्यादा हल्का फुल्का से लिया लेकिन मैँ एक बात सिरीयसली यहाँ जरुर कहना चाहुँगा कि सौ गलती लोहार कि हो लेकिन एक ना एक गलती लोहा का भी होता हैँ इसे आज कोइ देखना नही चाह रहा पर जो हैँ वो तो हैँ ना देखनेँ से बदलेँगी नही ..! दामिनी या इसके जैसे कई लडकिया कि खरब कब से न्यूज मेँ पढतेँ आ रहेँ हैँ वर्तमान की बात नही कर रहा मुझे बहुत पहले से पेपर पढने से डर लगनेँ लगा था कही आज भी ....
    सडकोँ पर कितनेँ कंकड पडेँ रहतेँ हैँ तो क्या ये कहकर जुता ना पहनेँ कि ये सफाई कर्मचारी कि गलती हैँ ...कंकड हमेँ गडेँगा ,..कर्मचारी को नही इसलिए जुता हमेँ पहनना पडेँगा ..सेल्फ डिफेँस ..भी कोई चिज हैँ ये कराटेँ से नही हमारी ज्ञान से मिलेँगा हमारी संस्कृती से मिलेँगा ..आप समझ गयेँ ना मैँ क्या कहना चाहता हुँ ज्यादा लिँखुगाँ तो मेरे कमेँट आपकी पोस्ट से बडेँ हो जायेँगेँ ।

    ReplyDelete
  22. छह लोगों से घिरने पर लड़की ने चुपचाप
    समर्पण क्यों नहीं कर दिया?
    ये कहने वाली एक औरत हैँ और इसमेँ एक माँ का दिल हैँ अपनी बेटी के मृत देखनेँ के डर से कल्पित एक रुदन का स्वर हैँ जिसे अपनी बेटी चाहिए ...

    ReplyDelete