Powered by Blogger.

अगर लामप्याले और मिस समीला टेढी के कहने पर चले तो....

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र राजमहल के तलघर में बने अपने गुप्त कक्ष में चिंता मग्न बैठे हुये हैं. पास ही मिस समीरा टेढी गमजदा बैठी हुई है. दोनों के चेहरे पिटे हुये से लग रहे हैं. जब से वो तोतला व्यक्ति राजमहल के बाहर से ऊलजलूल बक कर गया है, तब से ही ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र मानसिक रूप से अस्थिर से हो गये हैं. पिछले दो दिनों के ताजा हालात जानकर महाराज और भी चिंतित हो गये हैं. वैसे ताऊ महाराज कर भी क्या सकते हैं? शायद वो तो महाभारत काल में भी नाम के महाराज थे और आज भी कोई फ़र्क नही हैं. महाराज ताऊ की रोनी सूरत से अच्छे अच्छे धोखा खा जाते हैं.

चिंता मग्न ताऊ महाराज, बेशर्म रामप्यारे एवम गमजदा मिस समीरा टेढी


हमेशा अपने बडे बडे दांत फ़ाडने वाला, लंबे कानों को इतराकर हमेशा ऊंचे रखने वाला और आंखों को ऊंची नीची नचा कर बात करने वाला रामप्यारे भी अपनी गर्दन झुकाये झेंपते हुये खंबे की आड में बैठ गया है, पूरे माहोल में एक सन्नाटा सा छाया हुआ है.

मिस टेढी और रामप्यारे को ये अंदाज तक नही था कि बाजी इस तरह हाथ से फ़िसल जायेगी? ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र महाभारत काल में युद्ध हारने के बाद का समय याद करके अपने अंतर्मन में हिल उठे थे. महाराज को अभी यहां का राजकाज संभाले हुये कुछ ही समय तो हुआ था... अब वो रामप्यारे और मिस समीरा टेढी के मजबूत कंधों पर राजकाज का बोझ डालकर चैन की बंशी बजाने लगे थे वर्ना तो महाराज का जीवन हमेशा ही झंझावातों से घिरा हुआ ही रहा है.

रामप्यारे ने महाराज को गमगीन देखकर बोलना शुरू किया : हे हस्तिनापुर सम्राट , ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र आपकी जय हो! महाराज आप चिंता क्यों करते हैं? अभी भी बाजी हाथ से नही गई है. मेरे रहते आप चिंता ना करें, आप मुझ पर यकीन करें, मेरे कानून ज्ञान का भरोसा करें....मैं इस संकट से आपको निकाल ही लूंगा....आप थोडा धैर्य धरिये.....

रामप्यारे को बीच में ही टोकते हुये मिस समीरा टेढी बोली - रामप्यारे जी, आप का कानून भगवान जाने कब काम आयेगा? आपने ही मुझे भी उलटी सीधी पट्टी पढाकर अपने साथ सवाल जवाब में बिठा लिया, और मैं भी कर्मजली..जनमजली आपकी बातों में आकर जनता से उल्टा सीधा कह बैठी...आपको पता है सारे हस्तिनापुर की जनता सडकों पर उतर आयी है...जनता को अब रोकपाल बिल से कम कुछ भी मंजूर नही है. और आप अब भी कानून की दुहाई दे रहे हैं..?

रामप्यारे ने मिस टेढी की बातें सुनकर अपनी गर्दन फ़र्श में घुसेड ली और अपने खुरों से फ़र्श को कुरेदने लगा.....

ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र कुछ बोलना ही चाहते थे कि इतने में ही राजमहल के बाहर से उसी तोतले व्यक्ति की जोर जोर से आवाज आने लगी....वो बोले जा रहा था....अले ताऊ महालाज...तुम कुछ तो शलम कलो...तुम्हारी राज करने की ख्वाहिश ने महाभारत तलवा डाला था जबकि तुम जानते हो कि तुममें हस्तिनापुर के महाराज बनने की औकात नही थी और अब भी तुम्हारी इसी राज करने की इच्छा ने सारे हस्तिनापुर की जनता का जीवन नर्क बना डाला है....ताऊ महालाज अब भी सुधल जावो और जनता के हक जनता को सौंप दो...अगर लामप्याले और मिस समीला टेढी के कहने पर चले तो इनका तो कुछ नही बिगडेगा...हस्तिनापुर के महाराज होने नाते अब भी इतिहास तुमको माफ़ नही तलेगा.

तोतले की बात सुनकर रामप्यारे और मिस समीरा टेढी का चेहरा तमतमा गया अगर उनका बस चलता तो उस तोतले की अभी अर्थी उठवा देते और ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र अब तक तो बुढ्ढे और अंधे होने का नाटक करते आये थे अब शायद बहरे होने का भी नाटक करने लगे? इतनी झन्नाटेदार आवाजे, जो पूरे हस्तिनापुर में गूंज रही हैं, वो उन्हें सुनाई क्यों नही देती? शायद ताऊ महाराज धॄतराष्ट्र अंधे के साथ साथ सच में ही बहरे भी होगये हैं.....

25 comments:

  1. लग तो यही रहा है कि महाराज घृतराष्ट्र गूंगे और अंधे ही नहीं बहरत्व को भी प्राप्त करते जा रहे हैं । दोनों खतरनाक सलाहकारों से मुक्त होकर ही राजहित में कुछ सोचा जा सकता है ।

    ReplyDelete
  2. सही कहा वोट लेने के बाद जनता के प्रति सरकारे ऐसी ही अंधी बहरी हो जाती है और सोचती है आम आदमी ने उन्हें वोट नहीं दिया बल्कि पांच साल के लिए अपने हाथ काट के उन्हें दे दिये है और अब कोई कुछ भी बोल नहीं सकता है |

    ReplyDelete
  3. सामयिक मुद्दे पर जबरदस्त ध्यानाकर्षण है,बहुत बढ़िया,आभार.

    ReplyDelete
  4. सटीक व्यंग्य है। सत्ता के भूखे सुधरते कहाँ हैं। पहले शेर बन रहे थे, फिर मौका नहीं लगा तो सीधे हो गये, अभी मौका लग जायेगा तो फिर अकड जायेंगे।

    ReplyDelete
  5. परवाह मत करो ताऊ ....राजधानी ही बदल लो यार ...
    शुभकामनायें आपको !

    ReplyDelete
  6. ताऊ जी अब क्या कहूँ .....क्या करार तमाचा मारा है .....देखते हैं आगे क्या होता है ....!
    राम राम

    ReplyDelete
  7. वर्तमान धृतराष्‍ट्र तो बिजूका जैसे हैं, बस पक्षियों को डराते हैं कि कोई है, बाकि सभी असलियत जानते हैं।

    ReplyDelete
  8. पुराने पात्र भी आज की ही बात कर रहे हैं।

    ReplyDelete
  9. जय हो ताऊ महाराज की .

    विजय

    ReplyDelete
  10. hum balton te liye ye thushi ti baat
    hai ti hamale piyale tau......apne
    pulane lang me laut aa rahe hain....


    planam.

    ReplyDelete
  11. ताऊ की जय हो.. आज तो बस अपना ही कहा हुआ एक पुराना शेर याद आ गया:
    हमने जिसको बिठाया संसद में,
    वो तो बहरा था, बेजुबान भी था!!

    ReplyDelete
  12. बहुत ग़ज़ब का लिखते हैं आप...

    ReplyDelete
  13. धृतराष्ट्र महाराज तो जानबूझकर बेशर्मी से अंधे-बहरे बने बैठे हैं लेकिन आँखों पर पट्टी बाँधे गाँधारी और दुर्योधन असली गुनहगार हैं। इन दोनों से देश को मुक्ति मिले तो देश का भला हो।

    @चला बिहारी ब्लॉगर बनने,
    हमने कहाँ बैठाया धृतराष्ट्र को संसद में, गाँधार (इटली) की गाँधारी ने बैठाया।

    ReplyDelete
  14. काश धृतराष्ट्र को तोतली आवाज़ ढंग से सुनाई दे

    ReplyDelete
  15. रोकपाल बिल लाओ वरना जाओ!!!

    ReplyDelete
  16. रोकपाल बिल में ऐसे सलाहकार....धन्य भये/

    ReplyDelete
  17. सलाहकारों का रोल बड़ा खतरनाक रहता है!!!

    ReplyDelete
  18. ताऊ पोडकास्ट बना कर दाल दो ... सबको सुनने में और भी मज़ा आ जाएगा ...
    व्यंग धार तेज है बहुत ...
    कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं ...

    ReplyDelete
  19. जनता को तो बेवकूफ बनना ही है..

    ReplyDelete
  20. अच्छा लिखा है. सचिन को भारत रत्न क्यों? कृपया पढ़े और अपने विचार अवश्य व्यक्त करे.
    http://sachin-why-bharat-ratna.blogspot.com

    ReplyDelete
  21. अच्छा लिखा है. सचिन को भारत रत्न क्यों? कृपया पढ़े और अपने विचार अवश्य व्यक्त करे.
    http://sachin-why-bharat-ratna.blogspot.com

    ReplyDelete
  22. ताऊ श्री जरा होश में आईये.
    तोतले के बोल सब गोल कर देंगें.

    कुछ समय के लिए मेरे ब्लॉग पर
    चले आईयेगा.नेक नियत रखेंगें तो
    श्रद्धा-विश्वास से सब समाधान हो जायेगा.

    ReplyDelete