क्या मैं इसकी अम्मा लगती हुं ?
Tuesday, August 9, 2011 at 9:23 PM Posted by ताऊ रामपुरिया
परसों भरी दोपहर की बात
अकस्मात कनाट प्लेस पर
एक क्युट सी छोरी ने ताऊ को रोका
ताऊ को पहचानने मे हो गया धोखा !
ताऊ-सुलभ लज्जा से नजर झुकाए
ताऊ वहां से चुपचाप गुजर गये
बस इत्ती सी बात पर
उस क्यूटनी के बाल
मारे गुस्से के बिखर गये
क्यूटनी पहले तो जोर जोर से चीखी
फ़िर बिफ़र कर चिल्लाने लगी-
आसपास के जवान लोगो, जल्दी आवो
इस शरीफ़जादे ताऊ से मुझको बचाओ
मैं पलकों मे अवध की शाम
होठों पर बनारस की सुबह
जुल्फ़ों मे शबे-मालवा
और चेहरे पर बंगाल का जादू रखती हूं
फ़िर भी इस लफ़ंगे ताऊ ने मुझे नही छेडा
क्या मैं इसकी अम्मा लगती हुं ?
ताऊ बोल्यो अरे छोरी
जो तू समझ री सै वा बात कोनी
मैं तो जन्म को आंधलो धृतराष्ट सूं
तू मन्नै दीखी कोनी
क्यूटनी सी वा छोरी बोली
रे ताऊ तू आंधला बणकै
झूंठ बोलकै
घणै मजे ले रया सै
यदि तू सच म्ह ही आंधला सै
तो रिश्वत के नोटों की गड्डियां
किस तरियां गिणरया सै?
ताऊ बोल्यो रे छोरी
बात तो तू सांची कहवै सै
पर रिश्वत के नोट गिणकर
उनको स्विस बैंकों म्ह जमा करवाकर
मन्नै आनंद घणा आवै सै
रे बावली छोरी सुण
मन्नै तेरी अवध की शाम,
बनारस की सुबह,
शबे-मालवो
और बंगाल को जादू
रिश्वत का नोटां कै सामणै
बेकार नजर आवै सैं
और बावली छोरी जरा सोच
तेरे मेरे बीच
किम्मै उंच नीच हो जाती
तो ताई लठ्ठ लेकै
के थारै बाप के पास जाती ?
और सबसे बडी बात भी सुणले
मैं आंधलो धॄतराष्ट्र कोनी
या पोल भी तो खुल जाती
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About Me
- ताऊ रामपुरिया
- अब अपने बारे में क्या कहूँ ? मूल रुप से हरियाणा का रहने वाला हूँ ! लेखन मेरा पेशा नही है ! थोडा बहुत गाँव की भाषा में सोच लेता हूँ , कुछ पुरानी और वर्त्तमान घटनाओं को अपने आतंरिक सोच की भाषा हरयाणवी में लिखने की कोशीश करता हूँ ! वैसे जिंदगी को हल्के फुल्के अंदाज मे लेने वालों से अच्छी पटती है | गम तो यो ही बहुत हैं | हंसो और हंसाओं , यही अपना ध्येय वाक्य है | हमारे यहाँ एक पान की दूकान पर तख्ती टंगी है , जिसे हम रोज देखते हैं ! उस पर लिखा है : कृपया यहाँ ज्ञान ना बांटे , यहाँ सभी ज्ञानी हैं ! बस इसे पढ़ कर हमें अपनी औकात याद आ जाती है ! और हम अपने पायजामे में ही रहते हैं ! एवं किसी को भी हमारा अमूल्य ज्ञान प्रदान नही करते हैं ! ब्लागिंग का मेरा उद्देश्य चंद उन जिंदा दिल लोगों से संवाद का एक तरीका है जिनकी याद मात्र से रोम रोम खुशी से भर जाता है ! और ऐसे लोगो की उपस्थिति मुझे ऐसी लगती है जैसे ईश्वर ही मेरे पास चल कर आ गया हो ! आप यहाँ आए , मेरे बारे में जानकारी ली ! इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ !
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33 comments:
Tuesday, August 09, 2011 9:51:00 PM
सो ताऊ अब छोरियों के चक्कर में कवि भी बन गया ....
जय हो ...
Tuesday, August 09, 2011 10:21:00 PM
बहुत बढिया।
------
बारात गई उड़ !
ब्लॉग के लिए ज़रूरी चीजें!
Tuesday, August 09, 2011 10:37:00 PM
लठ साथ में लेकर चलना चहिये ताऊ ने ।
म्हारी भी जय हो ।
Wednesday, August 10, 2011 1:26:00 AM
ताऊ श्री कहाँ बहकने लगे हो.
जरा होश में आओ.
Wednesday, August 10, 2011 4:15:00 AM
ताऊ ने आज कमाल कर दिया
घणी दोपहरी में बबाल कर दिया
Wednesday, August 10, 2011 5:23:00 AM
रिश्वत के नोटों ने ताऊ को भी कवि बना ही दिया !
Wednesday, August 10, 2011 7:04:00 AM
वाह ताऊ !
Wednesday, August 10, 2011 9:39:00 AM
जय हो।
Wednesday, August 10, 2011 11:00:00 AM
मतलब ये ताऊ की जो पैसे का मोह और ताई का डर ना होता तो ...............:))
Wednesday, August 10, 2011 11:58:00 AM
वाह रे ताऊ तूं तो घणी कविताई भी करे हो .....मुला ई जो लिखे हो -
मन्नै तेरी बनारस की सुबह,
शबे-मालवो और बंगाल को जादू
तो सरासर ज्यादती है ..बनारस की मुस्कान से छेड़ छाड़ मत करियो
और हाँ ऊ बंगाल वाली छोरी तो जादू चला के गयी तो फिर ना लौटी है अब तक!
Wednesday, August 10, 2011 12:15:00 PM
मन्ने तो लागै सै के घृतराष्ट्र भी नुए मौज लिया करता होगा। :)
Wednesday, August 10, 2011 12:15:00 PM
चलिये ,इसी बहाने एक हास्य कविता बन गई!
Wednesday, August 10, 2011 12:38:00 PM
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।
http://tetalaa.blogspot.com/
Wednesday, August 10, 2011 3:08:00 PM
वाह...कमाल की रचना...
Wednesday, August 10, 2011 3:38:00 PM
taau sirph hariyanavi se kaam nahin chalta, sath men dhritrashtra hone ka madha hua certificate bhi hona chahie . tabhi bachenge .
Wednesday, August 10, 2011 5:39:00 PM
yah bhi yek badhiya aandaj.....pasand aaya...
Wednesday, August 10, 2011 7:17:00 PM
अमेरिका ने एक मशीन बनाई, जिसमें नोट डालो तो उसमें से एक कन्या निकलती थी। उन्होंने बडी उम्मिदों से उस मशीन को भारत भेजा। पर यहां के लोगों ने मुंह बिचका दिया पूछने पर पता चला कि बहूमत को ऐसी मशीन चाहिए जिसमें कन्या को डालें तो दूसरी तरफ से नोट निकलें।
Wednesday, August 10, 2011 9:12:00 PM
laage hai va chhori ib aandhdi holi hogi.
ha.ha.ha.
tau tamne to khoob rang jamayo
manne tharo yo ishtayil ghano hi pasand aayo.
Wednesday, August 10, 2011 9:56:00 PM
ताऊ के चरणों में वन्दन!
Wednesday, August 10, 2011 10:25:00 PM
बात से फिर बात क्या बनी यहाँ ताऊ जी रचना बन गई |
बहुत खूब |
Thursday, August 11, 2011 7:54:00 AM
very humorous style,to describe the them ,very sensible and effective
fried, ... fabulous... thanks ji /
Thursday, August 11, 2011 9:08:00 AM
ज्यादा ऊँच-नीच की तो समीरा टेड़ी ताऊ की खाट खड़ी कर देगी तो ताऊ सावधान।
Thursday, August 11, 2011 1:15:00 PM
ताऊ अब तो छोरियों से दूर ही रहो. इसी में भलाई है.
Thursday, August 11, 2011 6:29:00 PM
ताऊ-सुलभ लज्जा ...आह!!
Thursday, August 11, 2011 7:14:00 PM
ताऊ!
आज बस खड़ा होकर तालियाँ बजा रहा हूँ.. छा गए! कमाल की निगाह है और धृतराष्ट्र बने फिरते हो आप!! (तालियाँ)
Friday, August 12, 2011 12:23:00 PM
मनोरंजक!
Friday, August 12, 2011 12:53:00 PM
बहुत बढिया,वाह.
Friday, August 12, 2011 1:45:00 PM
लाजवाब प्रस्तुती!
Friday, August 12, 2011 5:55:00 PM
tau ghanaa chhaa gayaa....
Sunday, August 14, 2011 3:59:00 PM
ताऊ अपाने रंग में बापस आ रहे हो ... ये देख कर मज़ा आ रहा है ...
पर इन छोरियां के फेर में कैसे पढ़ गए ...
Sunday, August 14, 2011 5:50:00 PM
बहुत बढिया,वाह.....
Tuesday, August 16, 2011 12:10:00 PM
राम राम ताऊ
वाह बेहतरीन !!!!
.....कमाल की रचना...!
Saturday, September 24, 2011 5:42:00 AM
ताऊ, थारी कविता घणी कामल सै। पर यो गलत बात कर दी, माड़ा सा उस छोरी का दिल रख लेणा था। नोटों की फ़िक्र म्हारे ऊपर छोड़ दियो अगली बार, हम संभाल लेंगे:)
रामराम।
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