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ताऊ की पुस्तक समीक्षा (छीछालेदर) की पुरातन दुकान का शुभारंभ

हाय एवरी वन, मैं ताऊ टीवी का चीफ़ रिपोर्टर रामप्यारे शाम के मुख्य न्यूज बुलेटिन में आपका स्वागत करता हूं.

आज की मुख्य और खास एवं एक मात्र खबर यह है कि ताऊ महाराज ने आज ब्लॉगरों की पुस्तक समीक्षा यानि कि उनकी छीछालेदर करने की अपनी दुकान का खुद ही उदघाटन किया. इस शुभ अवसर पर एक विशाल एवं विराट आयोजन के दौरान मात्र एवं मात्र एक ब्लागर महोदय पधारे, अतः यह कहा जा सकता है कि यह आयोजन फार द ब्लॉगर, आफ द ब्लागर एवं बाई द ब्लॉगर यानि शुद्ध लोकतांत्रिक रहा. उनके विशिष्ट एक मात्र अथिति कम ब्लॉगर कम रिपोर्टर टाईप गणमान्य और ताऊ महाराज के मध्य हुये वार्तालाप के चुनिंदा अंश आपके सामने प्रस्तुत हैं.

ब्लागर : ताऊ महाराज, ये बताईये कि आपने ये काहे की दुकान खोली है?

ताऊ महाराज - वत्स, निरे मूर्ख लगते हो? देख नही रहे हो कि ये नई पुस्तकों की छीछालेदर...ओह सारी..सारी...मेरा मतलब नई पुस्तकों की समीक्षा करने की दुकान है?

ब्लागर : पर ताऊश्री, आपको पुस्तकों की समीक्षा का अनुभव कहां है?

ताऊ महाराज - अनुभव की क्या पूछते हो वत्स? किसी की छीछालेदर करने के लिये अनुभव और ज्ञान आवश्यक नही होता और हम तो यूं भी पढे लिखे PFWRBFRPS डिग्री होल्डर हैं.

ब्लागर - ताऊ महाराज, ये डिग्री कौन सी है और कहां से प्राप्त की है? कभी इसका नाम सुना नही है?

ताऊ महाराज - अरे बावलीबूच, यहां कोई पढा लिखा तो है नही, अगर पढोगे लिखोगे तब ही डिग्रीयों के बारे में जानोगे. इस डिग्री का फ़ुल फ़ार्म " पांचवीं फ़ेल विद राज भाटिया फ़्राम रोहतक प्राईमरी सकूल" है. एक भी बंदा इतना क्वालिफ़ाईड नही है इस ब्लाग जगत में.

ब्लागर - जी ताऊ महाराज, अब ये बताईये कि आप किस आधार पर इन पुस्तकों की समीक्षा करेंगे?

ताऊ महाराज - समीक्षा का कोई आधार नही होता, हम तो सीधी साधी समीक्षा में विश्वास रखते हैं. बात को उलट पुलट कर नही कहते.

ब्लागर - ताऊ महाराज मैं कुछ समझा नही...तनिक विस्तार से इस पर रोशनी डाल देते तो लोगों को कुछ सहुलियत होती.

ताऊ महाराज - वत्स, हमने पहले ही कहा था कि ये प्रकृति तीन गुणों के आधार पर चलती है. और समीक्षक भी इन्हीं तीन गुणों के आधीन समीक्षा करता है. अलबता हम ज्यादा पढे लिखे हैं तो किसी भी पुस्तक की छीछालेदर हम वजन के हिसाब से कर देते हैं.

ब्लागर महोदय तनिक आश्चर्यचकित होते हुये बोले - ताऊश्री, ये वजन वाली बात कहां से आगई? यानि पुस्तक के वजन और समीक्षा में क्या संबंध है?

ताऊ महाराज - अरे बावलीबूच, बिना वजन के दुकान कैसे चल सकती है? हमने समीक्षा यानि छीछालेदर करने की दुकान खोली है कोई धर्मादे की दुकान नही खोली है.




ब्लागर - ताऊ श्री जरा इस पर भी विस्तार पूर्वक रोशनी मार दें तो समीक्षा करवाने वालों को सहुलियत रहेगी.

ताऊ महाराज - हां अब सुबह से ये पहली बार तुमने कायदे की बात पूछी है. बात ऐसी है कि हम किसी के साथ भेदभाव नही करते. सबको एक ही आंख से देखते हैं. अत: हमने रेट फ़िक्स कर दिये हैं.

ब्लागर - रेट फ़िक्स कर दिये हैं? मतलब पुस्तक समीक्षा करने के? यानि आप पुस्तक समीक्षा रूपये लेकर करेंगे?

ताऊ महाराज - हां भई हां, आखिर आर्थिक युग है और हमको भी बाल बच्चे पालने हैं.

ब्लागर - ये रेट किस प्रकार से फ़िक्स किये हैं? जरा वो भी बता देते तो बडी कृपा होती.

ताऊ महाराज - वत्स, अगर किसी को अपनी पुस्तक की ब्लागरत्व गुण प्रधान समीक्षा करवानी हो तो उसकारेट २१,०००/ रूपया और ताऊत्व गुण प्रधान का रेट १५,०००/ रूपया रखा है.

ब्लागर - जी ताऊ महाराज, और जलागरत्व गुण प्रधान समीक्षा का क्या रेट रखा है ताऊश्री?

ताऊ महाराज - नही जलागरत्व गुण प्रधान समीक्षा का हम कोई चार्ज नही लेते.

ब्लागर - क्या मतलब ताऊश्री? बात कुछ समझ में नही आई.

ताऊ महाराज - जलागरत्व गुण प्रधान समीक्षा में समीक्षा कम छीछालेदर ज्यादा करनी पडती है और जो लेखक हमको नगद नारायण नही भेजता या हमारे संप्रदाय का सदस्य नही होता उसकी पुस्तक की छीछालेदर हम जलागरत्व गुण प्रधान तत्व के आधीन करते हैं. या कहले कि ये लेखक समुदाय को डराने के काम आती है जिससे वो हमारे मठ के सदस्य बनकर हमको नगद नारायण वाला लिफ़ाफ़ा भिजवा दिया करें.

ब्लागर - ताऊश्री, अब ये आपके मठ और सदस्य वाली बात कहां से आगई?

ताऊ महाराज - अरे यार तुम हर बात मेरे ही मुंह से क्यों कहलवाना चाहते हो? तुम कहीं विरोधी खेमे के जासूस तो नही हो?

ब्लागर - नही नही ताऊ महाराज, मैं तो आपका शिष्य हुं. आप चिंता नही करें. मेरी बात का जवाब दें.

ताऊ महाराज - बात ऐसी है कि जो हमारे मठ का सदस्य बनेगा, हमारी पोस्ट पर थोक के भाव में कमेंटकरेगा, हमारे संप्रदाय को बढायेगा, उसको हम समीक्षा में १५ प्रतिशत का स्पेशल डिस्काऊंट देते हैं.

ब्लागर - ताऊ श्री ये बताईये कि अगर आपको किसी ने किताब ही नही भेजी तो फ़िर समीक्षा कैसे करोगे?

ताऊ महाराज - अरे तू निरा मूर्ख है, मेरा शिष्य होने लायक योग्यता नही है तुझमें....इतनी सी बात नही समझ पाया कि किताब कोई भेजे या नही भेजे, किसी से लेलो या बाजार से सौ दो सौ रूपये में खरीद लो...और बिना करवाये ही पहले उसकी जलागरत्व गुण प्रधान छीछालेदर करके मेल करदो कि ये समीक्षा छाप रहा हूं......फ़िर फ़ोन लगालो...सामने वाला आपके हाथ जोडेगा और तुरंत ब्लागरत्व गुण प्रधान समीक्षा की फ़ीस भेज देगा.

ब्लागर - वाह ताऊ महाराज वाह. बहुत खूब. आपका कोई और संदेश...जो आप नवीन पुस्तक लेखकों को देना चाहें?

ताऊ महाराज - अवश्य बालक अवश्य....हम उन लेखकों से ये सीधी तरह से निवेदन करना चाहेंगे जिन्होने हमको समीक्षा के लिये पुस्तकें तो भेज दी हैं पर फ़ीस नही भेजी हैं. वो कृपया फ़ीस तुरंत भेजे और ताऊ की छीछालेदर करने वाली दुकान के खुलने की खुशी में अर्ली बर्ड डिस्काऊंट प्राप्त करें या फ़िर अपनी पुस्तक की जलागरत्व गुण प्रधान चर्चा झेलने को तैयार रहें.



फ़्रेंचाईजी लेने के इच्छुक जन भी संपर्क कर सकते हैं. उचित डिपाजिट लेकर फ़्रेंचाईजी दी जायेगी.

28 comments:

  1. दुकानदारी के लिए शुभकामनाएं। वैसे पहले ही ऐसी समीक्षा दुकाने देशभर में खुली हुई हैं, एक और सही।

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  2. वाह जी मजा आ गया। ये भी खूब रही।
    चित्र में ताऊ प्रकाशन की किताबें नजर आ रही हैं तो लगे हाथ ये भी बता दें कि किताब छपवाने की फीस क्या है क्योंकि अपनी तो कोई किताब है ही नहीं समीक्षा क्या खाक कराएँगे?

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  3. ताऊ जी, राम राम ,समीक्षा की दुकान आपकी चलती रहे यह मेरी शुभकामना है | नए व्लागर के लिए कोई नया प्लान हो तो बताइयेगा आपके व्लाग पर पहली बार आया हूँ टिपण्णी करना रचना के साथ नाइंसाफी है |आभार

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  4. आदरणीय ताऊजी,
    15% डिस्काउन्ट से मन अति हर्षित हुआ । 18,000/- नगदनारायण का लिफाफा भेज रहा हूँ । वैसे तो 17,850/- होते हैं । पुस्तक की बजाय फिलहाल तो आप नजरिया ब्लाग की ही समीक्षा कर दें । पुस्तक प्रेस से छपकर आते ही फिर सेवा का मौका दूंगा । धन्यवाद...

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  5. आप ने खुद दुकान का उद्घाटन कर दिया, यह अच्छी बात नहीं है। कम से कम हमें ही फोन कर दिया होता। हम सिर्फ थर्ड एसी के किराए में आप के यहाँ आ सकते थे। वैसे समीक्षा का काम बहुत बढ़ जाए तो इस बंदे को याद कर लेना। हम पेटीकाँट्रेक्ट पर ये काम करने को तैयार हैं। जो फीस आप को मिलेगी उस से साठ परसेंट में।

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  6. इतनी बडी पोस्ट मे कही भी ताऊ ने राम प्यारे का नाम नही आने दिया, इसी लिये राम प्यरे रुठ कर भाग गया, वर्ना राम प्यारे ही आधी कीमत मे पुस्तको की समीक्षा कर देता.

    राज भाटिया
    PFWRBFRPS

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  7. परम आदरणीय ताऊ !
    बाई गोड , आपकी स्वउद्घाटन की हुई दूकान इतनी बढ़िया चलेगी शायद किसी को अनुमान न होगा ! सुशील बाकलीवाल जैसे कद्रदान और दिनेश राय द्विवेदी जैसे लोग भी तेरे लिए पेटी पर काम करने को तैयार होगये !

    मुझसे कोई नाराजी तो नहीं ताऊ ...मैनें भी तेरा गुणगान कम नहीं किया है !

    ध्यान रखना ताऊ जी ! ताऊ मैं कुछ और सस्ते में करने को तैयार हूँ ..

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  8. बहुत ही उम्दा रचना , बधाई स्वीकार करें .
    आइये हमारे साथ उत्तरप्रदेश ब्लॉगर्स असोसिएसन पर और अपनी आवाज़ को बुलंद करें .कृपया फालोवर बनकर उत्साह वर्धन कीजिये

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  9. 'maya maha thagni hum jaani'
    kyaa..? taushree ab budhaape me bhi trigun me lipt hote jaa rahe ho. Dukan vagaira ka dhanda to bachcho ko karne ke liye chod diya hota.

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  10. क्या क्या जोरदार टाईटल लगाया है तूने ताऊ -मन ललक ललक जाए रे -एक भेज दें न डाक से

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  11. बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
    अभी तो आपके पास काफी काम पड़ा है!
    मेज पर जो पुस्तकों का ढेर लगा है पहले उनकी समीक्षा तो कीजिए!

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  12. अच्छा हुआ ताऊ जो तुमने हमरे प्राइमरी के स्कूल की लाज रख ली ..........



    वैसे पुस्तक समीक्षा के रेट सुनकर हमरा बीपी बढ़ रहा है ......लग रहा है इस जनम में तो हम अपनी पुस्तक छपवाने से रहे ?

    सादर
    प्रवीण त्रिवेदी
    (प्राइमरी के मास्साब)
    आलवेज पास आउट प्राइमरी स्कूल
    फतेहपुर

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  13. मेरे ब्लाग में मैलवेयर की चेतावनी आ रही थी.. सभी गैजेट हटा भी दिये लेकिन गूगल ने उसे फिर भी नहीं आजाद किया इसलिये नया ब्लाग बना लिया..

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  14. ताऊ तेरी हिम्मत तु कर दुकानदारी हमको तो घुमने से ही टेम कोई ना । ताऊ एक बात मेरी भी सुन ले दुकानदारी तेरे केल्ले के बस कि बात ना । ताई कु भी अपने गेल्ला लगा लियो । ओर सुन जाट खोपडी की कैन्क किताब तेरे धोरे है मझे जरुर बता दियो
    जाट देवता की राम राम ।

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  15. ताऊ! एक गड़बड़ कर दी न, तभी कहते हैं कि हम जैसे छुटभैयों से भी सलाह ले लिया करो.. पुरातन दुकान तो लिख दिया, ये लिखना भूल गये कि हमारी कोई शाखा अन्यत्र नहीं.. अब देखिये लोग सस्ते में तैयार हो गये हैं छीछालेदर करने को!!

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  16. ठीक सै ताऊ, खूब चालैगी दुकान।
    एक समीक्षा छोटी सी हम भी कर दें? पहली फ़ोटो में ’मुल्य’ लिखा है ’मूल्य’ की जगह। म्हारी कमीशन की चिंता मत करिये, हम अमैच्योर समीक्षक हैं:))

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  17. वैसे तो पहले ऐसी करवा चुके हैं समीक्षा कि अब कोई शौक बाकी न रहा....

    मगर फिर भी, गालिब, एक उम्मीद बाकी है अभी और थोड़े से पैसे भी...सो आपको भिजवा रहा हूँ..पुनः समीक्षा के लिए....


    इस बार निपटे तब तो न उम्मीद बाकी रहेगी और न ही पैसे. ध्यान रखना ताऊ!!!

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  18. ब्लॉग समीक्षा की रेट क्या है ताऊ जी !

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  19. ताऊ जी
    जलागरत्व स्टाईल में किसी दूसरे के ब्लॉग की समीक्षा का क्या चार्ज है?

    प्रणाम

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  20. बढ़िया ताऊ , इतनी रोचक छीछालेदार पहली बार ...

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  21. LAGTA HAI KOI FIELD KHALI NAHI.....JAISE HI KOI NAYA FORMULA TAU LATA HAI......KOR-KAMPITITION
    CHELE-CHAPATE SURU KAR JATE HAIN....

    GHANI PRANAM.

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  22. देखो ताऊ अपनी तो किताब छपी नही है अभी तक तो तब तक जो है उनकी करो फिर सोचते है अगर सही करोगे तो छपवा कर भेज देंगे समीक्षा के लिये…………दुकानदारी के लिए शुभकामनाएं।

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  23. "shiv bhaijee rail-bajat ke liye"
    sayar ricurut kar rahe the .... udhar
    prayasrat hone ke karan "yahan ki
    bharti" ki khabar nahi lagi........

    agar samikshak mil jave to asst. ke
    liye hame 'second' kar deve.....

    ghani pranam

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  24. दूकान तो गज़ब खोली है ..शुभकामनाये ले ही लीजिए.

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  25. धंधा तो बढ़िया है,आभार.

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  26. आखिर रेट बता कर आ गए न ताऊगिरी पर, अपनी पुस्तक के साथ ही आप का बताया रेट दो बोरी चवन्नियो के रूप में भेज रही हूँ | चाहे कोनो वाली भी समीक्षा कर डालिए चर्चा तो हर हाल में होगी ही |

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  27. पुस्तक समीक्षा यानि कि उनकी छीछालेदर हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा ये ताऊ जी के ही बस का काम है, छीछालेदर का नया कम मुबारक हो ताऊ जी हा हा हा हा हम भी भिजवा रहे है एक दो पुस्तक हा हा हा
    regards

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