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भीम और दुर्योधन का टेस्ट : ब्लागाचार्य द्वारा टी.आर.पी. बढाने के लिये?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र महल में आज अकेले ही बैठे हैं. महारानी ताई गांधारी शायद किसी काम से राजमहल के अंदर गई है. रामप्यारे अभी अभी आकर महाराज के पास खडा हुआ है और मिस समीरा टेढी राजमहल के पिछले दरवाजे से प्रवेश कर ही रही हैं. यूं तो महाराज अंधे हैं पर किसी के भी आने की खुशबू महाराज को बिल्कुल सटीक लग जाती है.


जैसे ही रामप्यारे आकर खडा हुआ महाराज ने पूछा - आवो रामप्यारे आवो, हम तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे. असल में हम राजकुमारों के लिये चिंतित थे, सारे राजकुमार रोहतक की तिलयार झील पर पिकनिक के लिये आज्ञा लेने आये थे पर वहां से लौट कर ना तो कोई प्रणाम करने आया और ना किसी ने शक्ल दिखाई?

दरबार हाल में महाराज, पास खडा रामप्यारे और पिछले दरवाजे से आती हुई मिस समीरा टेढी


रामप्यारे - ताऊ महाराज की जय हो! अब वहां से कोई राजमहल में लौटा हो तब ना आपको प्रणाम करने आयेगा? कुछ राजकुमार वहां से सीधे काम धंधे के लिये निकल गये और कुछ राजकुमार जबलपुर चले गये. वहां दिन में एक होटल में सम्मेलन किया और रात में वहीं महफ़िल जमाई.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - वाह रामप्यारे वाह! तुम तो सब खबर रखते हो? ये तो बहुत अच्छी बात बताई कि कुमारों ने रात को होटल में गीत संगीत की महफ़िल जमायी. असल में महफ़िल जमाना तो राजकुमारों को ही शोभा देता है. आखिर कुमार किसके हैं? हमें उनकी कारगुजारियों पर बहुत ही फ़ख्र हो रहा है., पर हमको ये बतावो कि वहां कुमारों ने आपस में टांग खिंचाई तो नही कि ना?

रामप्यारे - महाराज, अब छोडिये इस बात को. आखिर आपके राजकुमार हैं तो टांग खिंचाई के बिना किसी काम को कैसे कर सकते हैं? और चूंकी वो आपके लख्ते जिगर हैं और मैने सदियों से आपका नमक खाया है सो उनकी असली कारगुजारियां तो मैं किसी को भी नही बता सकता. आप इस नाचीज रामप्यारे की तरफ़ से निश्चिंत रहें महाराज.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - पर रामप्यारे ये तो बतावो कि सिर्फ़ टांग ही खींची ना...कहीं किसी की तोड तो नही डाली? हमें जरा भीम और दुर्योधन की नियत पर यकिन नही हो पाता...ना जाने क्यों...हमको हमेशा कुछ खुटका सा लगा रहता है....खैर ये बतावो... आगे वहां क्या क्या हुआ?

रामप्यारे - महाराज सारी रात महफ़िल की खुमारी के बाद कुमार सुबह सुबह उठकर भेडाघाट भ्रमण को निकल गये, फ़िर वहां दाल बाटी गक्कड भुर्ता के साथ खींच खांचकर अपने अपने स्थान को गमन कर गये? पर महाराज श्री आप चिंतित से क्युं दिखाई दे रहे हैं? अब तो राजकुमार वयस्क हो गये हैं. उनकी चिंता छोडिये और वृद्धावस्था का आनंद लिजिये.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - अब वृद्धावस्था का मजा क्या खाक लें रामप्यारे, हम चिंतित ना हों तो क्या करें? बात ही ऐसी है. अभी थोडी देर पहले आचार्य द्रोण का संदेशा आया था कि वो भीम और दुर्योधन की बुद्धि का टेस्ट लेना चाहते हैं कि उन दोनों मे कौन अधिक बुद्धिमान है? . अब भला ये कोई बात हुई कि उनकी बुद्धि का टेस्ट ले रहे हैं? हमें तो आचार्य की नीयत पर शक हो रहा है...कहीं कूछ गडबड जरूर है.

रामप्यारे - महाराज की जय हो! महाराज इस युग में लेखन बुद्धि के सहारे ही श्रेष्ठता का चयन किया जाता है. आप चिंतित ना हों. आचार्य द्रोण बहुत ही महारत और योग्यता वाले आचार्य हैं वो अवश्य ही कोई फ़ैसला कर लेंगे.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - अरे रामप्यारे, पहलवानों की श्रेष्ठता का चयन मलयुद्ध या कुश्ती से होना चाहिये ना कि लेखन से. अरे भीम और दुर्योधन को बुद्धि से क्या लेना देना? उनकी श्रेष्ठता का पता करना है तो एक दंगल आयोजित करवा लिया जाये या गदा युद्ध. पर ना जाने आचार्य द्रोण की बुद्धि बुढापे में क्यों सठिया रही है?

इतनी देर में ही मिस समीरा टेढी ने आकर महाराज को नमन जुहार करते हुये पूछा - महाराज श्री क्या हुआ? किसकी बुद्धि सठिया रही है?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र समीरा जी के आने से किंचित प्रसन्न होकर बोले - आईये आईये समीरा जी...असल में हम आचार्य द्रोण की बात कर रहे थे.

मिस समीरा टेढी - क्यों क्या हुआ आचार्य द्रोण को? सब कुशल मंगल तो है ना? कोई चिंता वाली बात तो नही है?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - समीरा जी, हम भीम या दुर्योधन के लिये चिंतित नही हैं...हम तो आचार्य द्रोण के लिये चिंतित हैं...

रामप्यारे बीच मे ही पूछ बैठा - महाराज, बुद्धि का फ़ैसला तो भीम और दुर्योधन में किसी का होना है और आप चिंतित हो रहे हैं आचार्य के लिये? बात कुछ समझ नहीं आई?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - रामप्यारे तू भी निरा गधे का गधा ही है. अरे भीम और दुर्योधन अपने ही हैं...कोई भी हारे कोई भी जीते. खिचडी से घी बहेगा तो अपनी ही थाली मे गिरेगा. और हम आचार्य द्रोण के लिये चिंतित इस वजह से हैं कि चाहे वो किसी को भी जिताये...जो भी हारेगा वो लानत मलामत तो आचार्य की ही करेगा ना?
बेचारे ब्लागाचार्य द्रोण..............

मिस समीरा टेढी - महाराज आप नाहक ब्लागाचार्य द्रोण के लिये परेशान हो रहे हैं. अब ब्लागाचार्य द्रोण द्वापर जितने भी सीधे और सरल नही रहे. बिना मतलब वो कोई काम नही करते.

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - समीरा जी आप पहेलियां क्यों बुझा रही हैं? साफ़ साफ़ कहिये ना ....आखिर इसके पीछे ब्लागाचार्य का मंतव्य क्या है?

मिस समीरा टेढी - महाराज ताऊ श्री, आप नये जमाने को नहीं समझते. यह टेस्ट तो ब्लागाचार्य द्रोण ने अपनी टी. आर.पी. बढाने के लिए कराया है. भीम और दुर्योधन से उसका क्या लेना देना. वो जब लड़ेंगे तो टी आर पी तो ब्लागाचार्य की ही बढ़ेगी. वरना तो शाही शिक्षक को ट्यूशन के लिए स्टूडेंट का टंटा लग जाये. वैसे भी सूखी तन्खाह में आजकल कहाँ गुजारा?

ताऊ महाराज धृतराष्ट्र - ओह समीरा जी, आप कितनी जीनियस हैं? इतने जटिल प्रश्न का आपने सोलहों आने सही उत्तर देकर हमारी जिज्ञासा का शमन कर दिया... आईये अब डिनर के लिये चलते हैं......

(क्रमश:)

16 comments:

  1. रामप्यारे र ताऊ का सम्वाद!
    अक बढ़िया ब्यंग्य!

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  2. अथ श्री आधुनिक ब्लॉग महाभारत कथा -जय जय हो जय हो ....शंख ध्वनि भी लगा दें ! और पार्श्व से उठती फिफहिरियों की आवाज !

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  3. वाह ताऊ वाह ! क्या शानदार और मजेदार व्यंग्य लिखा है !!

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  4. आखिर समीरा टेढी ने समस्या का हल कर दिया | अब ताऊ महाराज निश्चिन्त रहे |

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  5. सारी बौद्धिक प्रतिभा तो मिस समीरा टेढी के पास ही है, कौन सा ब्लॉग है उनका।

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  6. ताउ
    जे इशारा किधर को है

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  7. बहुत अच्छे ताउ जी!करारा व्यंग बहुत बढिया है ...लेकिन पता नही चला कि ब्लॉगर द्रोणाचार्य इस कलियुग में और किस किस नाम से जाने जाते है?

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  8. ib test i.q ka nahi.....manne to t.r.p ka dikhh riya hai.........

    tau ko pranam.

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  9. जे हो मिस समीरा टेडी की ... और ताऊ श्री को भी राम राम ...

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  10. वैसे भी सूखी तन्खाह में आजकल कहाँ गुजारा?
    बिल्कुल सही।

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  11. Asli MahaBharat ab shuru hui.....VYASPEETH par viraje Tau Maharaaj ki Jai....

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  12. अरे राम प्यारे तू सच मे निरा गधा हे रे, तुने बताये क्यो नही महा राज को वहां सुंदर सुंदर राज कुमारो ने पागल लोमडी की खुब खिचाई की, तो लोमडी खिसियाई बहुत, लेकिन इन राज कुमारो के आगे उस की एक ना चली, ओर फ़िर भेष बदल कर इन सीधे साधे ओर हद से ज्यादा शरीफ़ राज कुमारो को डराने लगी, यह सब सुन कर महा राज बहुत खुश होते रे, ओर तुझे ईनाम देते.राम राम

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  13. वाह वाह ताऊ, क्या छायावादी कटाक्ष है। इशारा कुछ कुछ तो समझ में आ रहा है। हा हा आप भी ना। बड़े वो हैं।

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  14. लेट पढ़ पाया ताऊ ! माफ़ करना ...
    इस सिरीज़ को पहले बना कर बाद में पाठकों से जवाब मांगो ना ! मेरे जैसे मूर्खों का काम आसान हो जाएगा ताऊ, और तुम भी परेशानी से बच जाओगे !
    राम राम !

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