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अथ: श्री ताऊभारत कथा

महाभारत काल में महाराज धृतराष्ट्र जन्मांध ही पैदा हुये थे और उनकी जन्म जन्म की जीवनी संगिनी महारानी गांधारी ने महाराज धृतराष्ट्र की दृष्टिहीनता की वजह से अपनी आंखों पर उस समय जो पट्टी बांधी वह आज तक नही उतारी. पति पत्नि दोनों दृष्टिहीन हों तो जीवन की गाडी खींचना बडा मुश्किल हो जाता है ऊपर से हस्तिनापुर जैसे विशाल राज्य का राजकाज देखने की जिम्मेदारी आन पडे तो समस्या की विकरालता आप समझ सकते है. तो ऐसे में उनकी मदद के लिये संजय का उनसे जुडाव हुआ. यूं समझिये कि महाराज और महारानी की आंखे ही था संजय. तब से ही तीनों का अमिट और अटूट साथ रहा है.

महाराज धृतराष्ट्र, महारानी गांधारी और देवी कुंति ने उस जन्म में अंत समय दावानल में समाधिस्थ होकर प्राणोत्सर्ग किया था. और इस हेतु वन गमन के समय संजय भी साथ ही आया था. वन में तपस्वियों का जीवन जीते समय एक दिन दावानल ने उनको चारों तरफ़ से घेर लिया तो महाराज धृतराष्ट्र ने संजय को जबरदस्ती जंगल से भगा दिया. और उन तीनों ने समाधिस्थ होकर स्वयं को भस्म कर लिया.

पर संजय भी कब मानने वाला था? जंगल से बाहर निकल कर सन्यासी होगया और बाद में संजय ने अपनी दिव्य दृष्टि से जान लिया कि महाराज और महारानी ने कहां जन्म लिया है? बस उन्हीं के साथ साथ वो भी जन्म लेता रहा. महाराज धृतराष्ट्र और महारानी गांधारी का तबसे आज तक अटूट साथ चला आ रहा है और संजय भी उनके साथ ही है. तबसे बस नाम और स्थान बदलते रहते हैं बाकी तो वो तीनों मौजूद ही हैं.

इस सारे कालखंड को अगर मैंने आपको सुनाना शुरु किया तो युगों मे पूरा नही होगा. और ब्लाग पोस्ट की अधिकतम लंबाई अगर एक पेज से ज्यादा हो तो कोई पढने सुनने वाला नही मिलता. तो मैं आपको सीधे महाराज धृतराष्ट्र के बीच के जन्मों को छोडकर वर्तमान जन्म के वर्तमान समय पर लिये चलता हूं.

इस जन्म में महाराज धृतराष्ट्र ने ताऊ महाराज के रूप में जन्म लिया है. और महारानी गांधारी ने ताई महारानी के रूप में. ताऊ महाराज तो युगों से जन्मांध ही पैदा होने की कसम खाये हुये हैं और ताई महारानी का प्रण है कि वो बिना महाराज के दृष्टि पाये अपनी आंखों की पट्टी नही उतारेगी. जब इन दोनों का ही ये प्रण है तो संजय अपनी प्रतिज्ञा कैसे तोड सकता है? संजय इस जन्म में रामप्यारे के रूप ताऊ महाराज और महारानी ताई के साथ है. तो आईये अब आपको ताऊभारत कथा सुनाता हूं.

ये लो मैं भी कहां से कहां की बातों पर आगया? और अभी तक आपको अपना परिचय मैने दिया ही नही. आप समझ रहे होंगे कि मैं संजय उर्फ़ रामप्यारे तो नही? नही आपने बिल्कुल गलत समझा. मैं रामप्यारे नही हूं. मैं तो काल हूं यानि समय. मैं कभी बीतता नही हूं. बल्कि सब कुछ मेरे सामने घटता है. और वहीं से मैं आपको कभी अतीत तो कभी वर्तमान की घटनाओं से रूबरू करवाता रहूंगा.

महाराज ताऊ, बीच मे पीछे की तरफ़ रामप्यारे और महारानी ताई


ताऊ महाराज चिंतित से बैठे हैं. पास ही महारानी ताई आंखों पर एज युजअल पट्टी बांधे बैठी हैं. वो भी कुछ उद्विग्न सी हैं. रामप्यारे उनके पीछे ऊपर बैठा अपनी दिव्य दृष्टि से कुछ देखने का प्रयास कर रहा है.

ताऊ महाराज : हे महारानी....आजकल ये क्या होरहा है? हमारे ब्लागपुत्र /पुत्रियों को क्या हो गया है?

ताई महारानी : हे ब्लागार्य पुत्र...मैं भी बहुत चिंतित हूं. समझ नही पारही हूं कि ये लडाई झगडे हमारे जीवन में हजारों साल से क्यों पीछा नही छोडते? हे रामप्यारे...तुम ही कुछ प्रकाश डालो ना इस पर....आखिर ये हो क्या रहा है?

रामप्यारे : महारानी की जय हो. हे महारानी, अब मैं क्या बताऊं? मैने आपको और महाराज को जो द्वापरकालीन महाभारत का आंखों देखा हाल सुनाया था उससे यह ब्लागभारत युद्ध सर्वथा भिन्न दिखाई पड रहा है.

ताऊ महाराज : हे रामप्यारे, तुम पहेलियां ना बुझावो. हमें स्पष्ट बताओ कि आखिर माजरा क्या है? और इसके पीछे कारण क्या है? हमारी उत्सुकता बढती जारही है. कहीं हमारे शाही ब्लागपुत्रों/पुत्रियों पर तो कोई आंच नही आयी है ना?

रामप्यारे : महाराज अब मेरे कुछ समझ में आये तो बताऊं. द्वापरकालीन महाभारत में तो सिर्फ़ दो खेमे थे. और जो भी युद्ध के लिये आया वो इस खेमे या उस खेमे में होगया. पर यहां कॊई एक खेमा हो तो बताऊं.

ताई महारानी : रामप्यारे, साफ़ साफ़ बताओ, मुझे चिंता होने लगी है अपने ब्लागपुत्र/पुत्रियों की.... आखिर बात क्या है? तुम चुप से क्यों हो रामप्यारे? तुम कुछ छुपाना तो नही चाहते ना? कहीं कुछ अशुभ तो नही होगया?

रामप्यारे : नही महारानी जी. मैं भला क्यों छुपाऊंगा पर ये भी नही कह सकता कि गलती किसकी है? पहले तो मुझे यहां एक से ज्यादा खेमे नजर आ रहे हैं. और कोई समीकरण ही समझ नही आरहे हैं. यहां दुश्मन के दुश्मन दोस्त वाला फ़ार्मुला भी नही लग रहा है. यहां कभी तो ऐसा लग रहा है कि ये इस खेमे का है और थोडी देर बाद ही वो दूसरे, तीसरे और चौथे खेमे में नजर आने लगता है. मामला काफ़ी उलझन का है.

ताऊ महाराज : हे रामप्यारे, अब तुम मुझे ये बताओ कि इस साजिश को कहीं गांधार कुमार शकुनि तो नही चला रहे हैं.? ना जाने गांधार कुमार कब टीन एज से बाहर निकलेंगे? द्वापर में जुआ सट्टा और पांसे कंचे खेलने का शौक पाले हुये थे और इस जन्म में लोगों को भिडवाकर मनोरंजन करने का शौक पाले हुये हैं. रामप्यारे ना जाने क्यों मुझे तो सब गांधार कुमार की ही शरारत दिखाई देती है.

रामप्यारे : ताऊ महाराज की जय हो....गांधार नरेश तो आजकल चलित दूरभाष पर भिडे रहते हैं और स्वयं गांधार की गद्दी बचाने के चक्कर में हैं. जहां तक मैं देख पा रहा हूं एक टोपी वाले और एक मूंछ वाले ने उनका साम्राज्य करीब करीब छीन ही लिया है. उनका साम्राज्य डूबा ही समझो. वो तो आजकल आरोप प्रत्यारोप की राजनिती में उलझे हैं. पर जैसी कि उनकी फ़ितरत रही है लोगों को भिडाने और अनर्गल प्रलाप करने से कभी चूकते नही हैं....अत: उनकी तरफ़ से भी थोडी सावधानी की आवश्यकता तो है ही आपको.

महारानी ताई : हे ब्लागार्य महाराज, आप जरा कृष्ण को दूरभाष पर संदेश दिजिये कि इन ब्लागपुत्र/पुत्रियों में संधि वार्ता करवा दे.

ताऊ महाराज : हे रामप्यारे जरा कृष्ण से तो बात करवा दे, क्या पता वो ही कुछ शांति स्थापित करवा सकें?

रामप्यारे : हे ब्लागार्य महाराज, आप और महारानी ताई बहुत भोले हैं और कृष्ण चौसठ कला निधान है. आज तो वो बहुत थके हैं क्योंकि कल और परसों दो दिन लगातार अपना जन्म दिन मना कर थक गये होंगे सो नींद निकाल रहे होंगे.

महारानी ताई : तो रामप्यारे, तुम एक बार बात करके तो देखो. क्या पता वो जाग रहे हॊं और शांति कायम हो जाये?

रामप्यारे चलित दूरभाष पर कृष्ण से बात करके बोला : हे ब्लागार्य महाराज ताऊ और महारानी ताई, अब मैं जो कुछ कहने जा रहा हूं वो ध्यान पूर्वक और हिम्मतपूर्वक सुनने का साहस कर लिजिये.

ताऊ महाराज अपनी अंधी आंखों को मिचमिचाते हुये बोले : हे रामप्यारे, तुम सस्पेंस बनाकर हमारे दिल की धडकने ना बढाया करो, हम वैसे ही दिल की सर्जरी वर्जरी करवाकर जैसे तैसे इसको धडकाते रहने का इंतजाम कर रखें हैं...ऊपर से तुम्हारी ये बातें...जल्दी बयान करो.

रामप्यारे : हे ब्लागार्य ताऊ महाराज, आप जरा दिल को पकड लिजिये और सुनिये - कृष्ण तो बोले कि मैं तो आर्याव्रत छोडकर पताल लोक में रहने आगया हूं और ताऊ महाराज की कोई मदद नही करूंगा क्योंकि द्वापर में महारानी गांधारी (वर्तमान में महारानी ताई) के श्राप से ही मेरे वंश का नाश हुआ था. मैं भला उस बात को कैसे भुला सकता हूं? मुझसे मदद की कोई उम्मीद ना रखी जाये.

चिंतित से ताऊ महाराज कक्ष में इधर उधर घूमने लगे. वातानुकूलन यंत्र के चलते रहने के बावजूद भी पसीने की बूंदे उनकी कनपटी पर उभर आई और गहन सोच में पड गये. महारानी ताई को ब्लागपुत्र/पुत्रियों के भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी.

(क्रमश:)

31 comments:

  1. ब्लॉग महाभारत जबरदस्त । सच ही तो है कोई एक खेमा हो तो बतायें ।

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  2. आदरणीय ताऊजी
    रामराम
    ये महाभारत तो असली वाली से भी ज्यादा रोचक लग रही है ....आभार !

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  3. यहां कभी तो ऐसा लग रहा है कि ये इस खेमे का है और थोडी देर बाद ही वो दूसरे, तीसरे और चौथे खेमे में नजर आने लगता है. मामला काफ़ी उलझन का है.
    ताऊ के हरयाणवी लट्ठ की बात ही कुछ और है।

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  4. वाह ! शानदार कथा !
    क्रमश: का इन्तजार !

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  5. ताऊ दा जवाब नहीं
    घनचक्कर भी चक्कर में पड़ जावे।
    लेकिन इस स्क्रीप्ट को फ़िल्माना कब शुरु कर रहे हैं।
    शीघ्र मुहुर्त करें।

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  6. यहां कभी तो ऐसा लग रहा है कि ये इस खेमे का है और थोडी देर बाद ही वो दूसरे, तीसरे और चौथे खेमे में नजर आने लगता है. मामला काफ़ी उलझन का है....
    हमारे भी बचे- खुचे दिमाग का दही जम गया है यह उलझन सुलझाने में ...बड़ा कंफ्यूजन है ...!

    कहीं ये बिग बॉस की कारस्तानी तो नहीं है ...खुद अलग -थलग बैठे सब देखर मुस्किया रहे हों कहीं ...:):)

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  7. वाह ताऊ ये तो महाभारत का भाग दो जैसे लग रहा है |सचमुच बहुत रोचक प्रस्तुति है | तर्कसंगत आज के माहौल में |
    जरुर प्रतीक्षा रहेगी अगले अंश की
    रामराम

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  8. अथ श्री ताऊ महाभारत कथा :)

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  9. आदरणीय ताऊ सा,

    सामयिक ताउभारत कथा का रोचक प्रस्तूतिकरण।
    अगले एपीसोड का बेसब्री से इंतजार!

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  10. ""जहां तक मैं देख पा रहा हूं एक टोपी वाले और एक मूंछ वाले ने उनका साम्राज्य करीब करीब छीन ही लिया है.""

    हा हा हा हाँ हा हा अहा ओह हो क्या बात है .

    सिंघासन हिल उठा
    जब ब्लागरों ने ठानी थी ...
    जब खूब लड़ा ब्लागरी
    यही तो उसकी मर्दानगी थी ...
    ब्लागरों पर जब जब विपत्ति आई
    तोते ने जब अपनी नाक हिलाई
    अब उसकी नाक की शामत आई है
    समय आ गया है
    अब ब्लागरों ने भ्रकुटी तानी है
    अब ब्लागरों ने उस तोते से
    अब कन्नी काटी है ....

    ये पंक्तियाँ मैंने उस समय लिखी थी जब ताऊ और रामप्यारी आपसी चर्चा में व्यस्त थे .... और ब्लागर नगर में जब महाभारत का युद्ध चल रहा था .

    हीएईईईईई

    ReplyDelete
  11. ""जहां तक मैं देख पा रहा हूं एक टोपी वाले और एक मूंछ वाले ने उनका साम्राज्य करीब करीब छीन ही लिया है.""

    हा हा हा हाँ हा हा अहा ओह हो क्या बात है .

    सिंघासन हिल उठा
    जब ब्लागरों ने ठानी थी ...
    जब खूब लड़ा ब्लागरी
    यही तो उसकी मर्दानगी थी ...
    ब्लागरों पर जब जब विपत्ति आई
    तोते ने जब अपनी नाक हिलाई
    अब उसकी नाक की शामत आई है
    समय आ गया है
    अब ब्लागरों ने भ्रकुटी तानी है
    अब ब्लागरों ने उस तोते से
    अब कन्नी काटी है ....

    ये पंक्तियाँ मैंने उस समय लिखी थी जब ताऊ और रामप्यारी आपसी चर्चा में व्यस्त थे .... और ब्लागर नगर में जब महाभारत का युद्ध चल रहा था .

    हीएईईईईई

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  12. ""जहां तक मैं देख पा रहा हूं एक टोपी वाले और एक मूंछ वाले ने उनका साम्राज्य करीब करीब छीन ही लिया है.""

    हा हा हा हाँ हा हा अहा ओह हो क्या बात है .

    सिंघासन हिल उठा
    जब ब्लागरों ने ठानी थी ...
    जब खूब लड़ा ब्लागरी
    यही तो उसकी मर्दानगी थी ...
    ब्लागरों पर जब जब विपत्ति आई
    तोते ने जब अपनी नाक हिलाई
    अब उसकी नाक की शामत आई है
    समय आ गया है
    अब ब्लागरों ने भ्रकुटी तानी है
    अब ब्लागरों ने उस तोते से
    अब कन्नी काटी है ....

    ये पंक्तियाँ मैंने उस समय लिखी थी जब ताऊ और रामप्यारी आपसी चर्चा में व्यस्त थे .... और ब्लागर नगर में जब महाभारत का युद्ध चल रहा था .

    हीएईईईईई

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  13. अरे ये तो बडा गडबड झाला हो गया ………………।बेचारे ताउ कहाँ फ़ंस गये…………………बस अब महाभारत जैसा उपाय मत खोजना …………………एक और कुरुक्षेत्र मत बनवा देना………………………हा हा हा।

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  14. ताऊ जी,इस ब्लांग युद्ध से हम तो दुर ही भले, ओर हम किसी खेमे मै नही, हम तो इन गोरो मै रह कर सीख गये कि आपसी लडाई मै लाभ दुसरो को मिलता है लडने वाला मुर्ख ही बनता है, तो जनाब सब खेमे तोड कर एक खेमा बनाओ जी, वो है प्यार का खेमा, जिसे नही रहना इस खेमे मै उसे पाकिस्तान की बाढ मै बाढ ग्रस्त लोगो की मदद के लिये भेज दो, कुछ पुन्य कर लेगा, फ़िर जब वो तालिवानो के हातो चढ गया तो उन को भी जन्नत की टिकट ले देगा... आप की ताऊ ताई भारत बहुत अच्छी लगी, ्वेसे मै तो सोचा था कि यह महाराज धृतराष्ट्रजी कही हमारे प्यारे प्यारे ईमान दार ओर भोले भाले...... ना हो, जिन्हे सिर्फ़ अपनी पार्टी ओर मेम के सिवा कुछ दिखाई नही देता.
    राम राम

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  15. बहुत अच्छी महाभारत है | बी आर चोपडा ग्रुप से बचा के रखीयगा | वो पार्ट२ की तैयारी में है|

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  16. ...बड़ा कंफ्यूजन है...


    ताऊ के दिमाग पर इत्ता प्रेशर स्वास्थय के लिए ठीक नाए...आराम से हुक्का गुड़गुड़ाओ और चैन से सो जाओ. :)

    मस्त महाभारत विवरण है.

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  17. ताऊ इस वाली महाभारत में कृ्ष्ण जी की कब ऎन्ट्री होगी. होगी भी या नहीं ? :)

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  18. बहुत लाजवाब पोस्ट है आज तो !
    व्यंग्य का व्यंग्य और मनोरंजन मुफ्त में!
    --
    ताई का यह रूप और ताऊभक्ति देख कर अच्छा लगा!

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  19. देखें इस महाभारत के कौरव क्या गुल खिलाते हैं :)

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  20. ताऊ,
    रचैगा एक और महाभारत, दीखे है। हो लेण दे, देखी जाओगी।
    देखी के जाओगी, हम देखांगे और के?

    रामराम।

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  21. मजा आ गया ताऊ जी, नया महाभारत चल रहा है ब्लॉग पर। दो खेमे नहीं हैं यहां तो कई खेमे हैं। सही फरमाया आपने।

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  22. जय हो ...पहेली किधर है आज की ?

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  23. कल सुबह ऑफ़िस जाते समय रास्ते में यह ताऊभारत कथा पढ़ रहा था, जबरदस्त मजा आ गया।

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  24. मैं तो आर्याव्रत छोडकर पताल लोक में रहने आगया हूं और ताऊ महाराज की कोई मदद नही करूंगा क्योंकि द्वापर में महारानी गांधारी (वर्तमान में महारानी ताई) के श्राप से ही मेरे वंश का नाश हुआ था. मैं भला उस बात को कैसे भुला सकता हूं? मुझसे मदद की कोई उम्मीद ना रखी जाये.

    संधि वार्ता भी कहाँ काम आई थी ...कलयुग की महाभारत पर अच्छा लेख ...

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  25. ...ये ताउ-भारत तो महाभारत को भी पीछे धकेल रहा है!....जय हो ताउरव-तांडवो की!

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  26. बढ़िया महाभारत है ....आगे की प्रतीक्षा में ...

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  27. ये महाभारत देखकर तो असली वाली देखने को मन ही नहीं करता हे।


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