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समीरलाल "समीर" की विसंगति : ताऊ

विसंगति


भूख लगी है!!

बेटा रोया


मजदूर का इसलिए

कि उसे भूख मिटाना है..

रुखा सूखा जो मिल जाये

खाना है!!



अमीर के बेटे के लिए

भूख तो सिर्फ

एक बहाना है...

दरअसल उसे आज फिर

पिज्ज़ा खाना है!!


अतिथी पोस्ट:-
-समीर लाल ’समीर’

27 comments:

  1. सच्चाई है
    सटीक

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  2. सही कहा, सर।
    कहीं पढ़ा था कि "खाने का सही समय कौन सा है?"
    जवाब - "गरीब को जब मिल जाये, और अमीर का जब मन करे।"
    अब ये और बढ़ा देते हैं उसमें कि "क्या खाना चाहिये"
    गरीब को जो मिल जाये और अमीर का जो मन करे।

    विसंगतियां कुछ लोगों के लिये तर्कसंगत भी होती हैं।

    आभार

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  3. बहुत खूब | शानदार रचना !
    जब से शहर में रहने लगे है तब से बाजरे के सोगरे भी किसी पिज्जा से कम नहीं लगते

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  4. समीर लाल जी तो कलम के धनी हैं ही!
    अमीरी व गरीबी में अन्तर बताती रचना बहुत ही प्रभावशाली है!
    इस रचना को पढ़वाने के लिए ताऊ का आभार!

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  5. गरीब और अमीर की व्यथा तो सभी समझते हैं ...जो इनके बीच में आते हैं ...उनका दर्द कौन लिखेगा ...??

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  6. संक्षिप्त और प्रभावशाली कविता।

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  7. बड़ा गंभीर व्यंग्य है ताऊ जी

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  8. भूख और गरीबी अमीरी का
    बहुत ही उम्दा चित्रण

    आभार

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  9. शीर्षक देख कर भागता आया की लगता है ताऊ ने समीर लाल को घेर लिया है !
    मगर यहाँ तो आज ताऊ भी गंभीर हो गया ...इब क्या कहें .....?

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  10. सही कहा, कहीं धुप तो कहीं छाँव!

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  11. भूख मिटाना और भूख एक बहाना!
    यह भी एक अंतर है गरीब और अमीर में !

    शायद यह बीच का वर्ग ही है जो इस अंतर को देख पाता है और महसूस करता है .

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  12. samir laalji dar nahin lagtaa aisaa likhne me .kyaa aap nahin jaante 'growth rate 9 per cent '
    (p .c )hai .
    garibon kaa kyaa hai -naa ho kameez to paanvon se pet dhak lengen ,ye log kitne munaasib hain is safar ke liye .veerubhaai 1947.blogspot.com

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  13. भूख तो सब को समान रूप से ही लगती है.. किसी को क्षुधा शान्त करने के लिये जूठन भी नहीं मिलती और किसी की क्षुधा इन्सानी रक्त और मांस से भी शान्त नहीं होती..

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  14. इन दो बच्चो के बीच तीसरे बच्चे की कमी खलती है या तो समीर जी परिवार नियोजन वालो से डर गए या ताऊ तक पहुचने से पहले ही गुम हो गया है क्यों कि मुझे तो ये दोनों ही बच्चे अपनी जिंदगी में मस्त दिखाई दे रहे है |ज्यादा परेशान तो वो तीसरा है जो झूठ मूठ अपनी शान को बनाए रखने की कोशिश करता है |

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  15. सत्य को बयाँ करती एक उम्दा प्रस्तुति।

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  16. कम शब्दों में गहरी बात

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  17. असलियत हैं कभी नहीं बदलनी

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  18. अच्छा आप इधर हैं :)

    अप्रतिम

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  19. इंडिया की फाइव स्टार कल्चर के बच्चे इतने फल-फू.....ल रहे हैं कि डॉक्टर जंक फूड को उनकी जान का दुश्मन बता रहे हैं...

    भारत के अभावों से ग्रस्त गांवों या शहरों के स्लम के बच्चे इतने कुपोषित हैं कि जान बचाने के लिए ही रूखी-सूखी रोटी का इंतज़ाम ही भारी हो रहा है...

    आई लव माई इंडिया...

    मेरा भारत महान...

    जय हिंद...

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  20. प्रासंगिक......वस्तु विषय पर "लालाजी" का सटीक एवं धारदार प्रहार !!!!

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