समीरलाल "समीर" की विसंगति : ताऊ

विसंगति


भूख लगी है!!

बेटा रोया


मजदूर का इसलिए

कि उसे भूख मिटाना है..

रुखा सूखा जो मिल जाये

खाना है!!



अमीर के बेटे के लिए

भूख तो सिर्फ

एक बहाना है...

दरअसल उसे आज फिर

पिज्ज़ा खाना है!!


अतिथी पोस्ट:-
-समीर लाल ’समीर’

27 comments:

  M VERMA

Wednesday, May 05, 2010 5:19:00 AM

सच्चाई है
सटीक

  मो सम कौन ?

Wednesday, May 05, 2010 6:17:00 AM

सही कहा, सर।
कहीं पढ़ा था कि "खाने का सही समय कौन सा है?"
जवाब - "गरीब को जब मिल जाये, और अमीर का जब मन करे।"
अब ये और बढ़ा देते हैं उसमें कि "क्या खाना चाहिये"
गरीब को जो मिल जाये और अमीर का जो मन करे।

विसंगतियां कुछ लोगों के लिये तर्कसंगत भी होती हैं।

आभार

  Ratan Singh Shekhawat

Wednesday, May 05, 2010 6:19:00 AM

बहुत खूब | शानदार रचना !
जब से शहर में रहने लगे है तब से बाजरे के सोगरे भी किसी पिज्जा से कम नहीं लगते

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

Wednesday, May 05, 2010 6:21:00 AM

समीर लाल जी तो कलम के धनी हैं ही!
अमीरी व गरीबी में अन्तर बताती रचना बहुत ही प्रभावशाली है!
इस रचना को पढ़वाने के लिए ताऊ का आभार!

  अविनाश वाचस्पति

Wednesday, May 05, 2010 6:46:00 AM

सच सनातन रहेगा।

  Arvind Mishra

Wednesday, May 05, 2010 6:49:00 AM

सचमुच विसंगति

  वाणी गीत

Wednesday, May 05, 2010 6:54:00 AM

गरीब और अमीर की व्यथा तो सभी समझते हैं ...जो इनके बीच में आते हैं ...उनका दर्द कौन लिखेगा ...??

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Wednesday, May 05, 2010 7:15:00 AM

संक्षिप्त और प्रभावशाली कविता।

  अजय कुमार

Wednesday, May 05, 2010 7:22:00 AM

बड़ा गंभीर व्यंग्य है ताऊ जी

  ललित शर्मा

Wednesday, May 05, 2010 7:37:00 AM

भूख और गरीबी अमीरी का
बहुत ही उम्दा चित्रण

आभार

  सतीश सक्सेना

Wednesday, May 05, 2010 8:16:00 AM

शीर्षक देख कर भागता आया की लगता है ताऊ ने समीर लाल को घेर लिया है !
मगर यहाँ तो आज ताऊ भी गंभीर हो गया ...इब क्या कहें .....?

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Wednesday, May 05, 2010 8:32:00 AM

सही कहा, कहीं धुप तो कहीं छाँव!

  पी.सी.गोदियाल

Wednesday, May 05, 2010 9:49:00 AM

सटीक !

  अल्पना वर्मा

Wednesday, May 05, 2010 9:52:00 AM

भूख मिटाना और भूख एक बहाना!
यह भी एक अंतर है गरीब और अमीर में !

शायद यह बीच का वर्ग ही है जो इस अंतर को देख पाता है और महसूस करता है .

  राम त्यागी

Wednesday, May 05, 2010 10:59:00 AM

wah ...sahi likha

  veerubhai

Wednesday, May 05, 2010 11:02:00 AM

samir laalji dar nahin lagtaa aisaa likhne me .kyaa aap nahin jaante 'growth rate 9 per cent '
(p .c )hai .
garibon kaa kyaa hai -naa ho kameez to paanvon se pet dhak lengen ,ye log kitne munaasib hain is safar ke liye .veerubhaai 1947.blogspot.com

  भारतीय नागरिक - Indian Citizen

Wednesday, May 05, 2010 11:13:00 AM

भूख तो सब को समान रूप से ही लगती है.. किसी को क्षुधा शान्त करने के लिये जूठन भी नहीं मिलती और किसी की क्षुधा इन्सानी रक्त और मांस से भी शान्त नहीं होती..

  Shekhar Kumawat

Wednesday, May 05, 2010 11:14:00 AM

badhai saheb ko

  नरेश सिह राठौङ

Wednesday, May 05, 2010 12:18:00 PM

इन दो बच्चो के बीच तीसरे बच्चे की कमी खलती है या तो समीर जी परिवार नियोजन वालो से डर गए या ताऊ तक पहुचने से पहले ही गुम हो गया है क्यों कि मुझे तो ये दोनों ही बच्चे अपनी जिंदगी में मस्त दिखाई दे रहे है |ज्यादा परेशान तो वो तीसरा है जो झूठ मूठ अपनी शान को बनाए रखने की कोशिश करता है |

  वन्दना

Wednesday, May 05, 2010 12:31:00 PM

सत्य को बयाँ करती एक उम्दा प्रस्तुति।

  rashmi ravija

Wednesday, May 05, 2010 12:45:00 PM

कम शब्दों में गहरी बात

  यशवन्त मेहता "फ़कीरा"

Wednesday, May 05, 2010 2:26:00 PM

असलियत हैं कभी नहीं बदलनी

  ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

Wednesday, May 05, 2010 5:54:00 PM

गजब की विसंगति।

  डॉ महेश सिन्हा

Wednesday, May 05, 2010 7:10:00 PM

अच्छा आप इधर हैं :)

अप्रतिम

  खुशदीप सहगल

Thursday, May 06, 2010 12:24:00 AM

इंडिया की फाइव स्टार कल्चर के बच्चे इतने फल-फू.....ल रहे हैं कि डॉक्टर जंक फूड को उनकी जान का दुश्मन बता रहे हैं...

भारत के अभावों से ग्रस्त गांवों या शहरों के स्लम के बच्चे इतने कुपोषित हैं कि जान बचाने के लिए ही रूखी-सूखी रोटी का इंतज़ाम ही भारी हो रहा है...

आई लव माई इंडिया...

मेरा भारत महान...

जय हिंद...

  राज भाटिय़ा

Thursday, May 06, 2010 1:25:00 AM

बहुत सही कहा जी

  SELECTION & COLLECTION SELECTION & COLLECTION

Thursday, May 06, 2010 1:38:00 AM

प्रासंगिक......वस्तु विषय पर "लालाजी" का सटीक एवं धारदार प्रहार !!!!

ताऊ उवाच :-:


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