खुशदीप के टी.वी.शो "नाच छमकछल्लो नाच" में रामप्यारी

मेहरवान..कद्रदान...सलाम नमस्ते. आज "ताऊ मदारी एंड कम्पनी" लुट गयी बर्बाद होगई...किसी जालिम ने ताऊ मदारी के सब स्टाफ़ को लालच में फ़ंसाकर ताऊ से अलग करवा दिया. यानि सब ताऊ को छोडकर चले गये.

रामप्यारे उर्फ़ "प्यारे" जिसे ताऊ ने इतना समझदार गधा बनाया वो भी वक्त पर साथ छोड गया. सैम, बीनू फ़िरंगी, हीरामन, चंपाकली और अनारकली सब के सब चले गये....बचे सिर्फ़ ताऊ मदारी और रामप्यारी.

हुजूर..आज मेरे पास खेल दिखाने के लिये कुछ भी नही बचा...ना कबूतर..ना अंडा....ना सांप...बस खाली पिटारा और सूनी बीन है....

बेचने के लिये ताऊ प्राडक्ट भी नही बचे...सारे ताऊ प्राडक्ट जाते समय "प्यारे" झाडू लगाकर साथ लेगया.....ऐसे मे नौबत भूखों मरने की है या भीख मांगने की.

यानि सब कुछ खल्लास...हाथ में रह गया "खाली डिब्बा खाली बोतल"....

भीख मांगकर गुजारा करने की बात को रामप्यारी ने सिरे से नकार दिया. रामप्यारी बोली - ताऊ भीख तो बुजदिल मांगा करते हैं....हम फ़िर से अपनी मदारी मंडली खडी करेंगे. पुराने दिन फ़िर लौटेंगे....

मैने कहा कि रामप्यारी इतना आसान नही है. हमारे पास खेल दिखाने को एक सांप भी नही बचा...सिर्फ़ बीन है...नये सांप आजकल बहुत जहरीले हैं...जहरीले भी क्या बल्कि वो आस्तीन के सांप होते हैं..मीठे मीठे बोलकर कब काट लेंगे ? कहां ले जाकर मरवा डालेंगे? पता भी नही चलेगा. आजकल के सांपों का यकीन नही किया जा सकता.

रामप्यारी बोली - ताऊ अबकी बार हम मदारी मंडली मे नाच गाने के कार्यक्रम दिखायेंगे?

मैने कहा - रामप्यारी तू भूखी प्यासी कैसे डांस करेगी? और तेरे को डांस आता भी नही है.

रामप्यारी बोली - ताऊ मैने डांस की स्पेशल ट्रेनिंग ले रखी है... और खुशदीप अंकल के टी. वी. शो "नाच छमकछल्लो नाच" में भी मैं सलेक्ट होकर भाग ले रही हूं...मुझे यहां से भी वोट मिल ही जायेंगे...और देखना वो कंपीटिशन भी मैं ही जीतूंगी...सारे ब्लागर्स के वोट तो मुझे ही मिलेंगे.... आप तो मजमा लगावो और बीन बजावो..मैं डांस करती हूं ..फ़िर देखना कैसे नोटों (टिप्पणीयों) की बरसात होती है...और इसी की वजह से मैं इंटरनेशनल डांस कंपीटीशन भी जीत लूंगी....

तो आईये मेहरवान..कद्रदान...ये देखिये..रामप्यारी का स्पेशल छमकछल्लो डांस....इस डास मे हेमा मालिनी, माधुरी दिक्षित और यहां तक की पुराने जमाने की आशा पारिख..वैजयंतीमाला भी मेरी रामप्यारी का मुकाबला नही कर सकती...

इस फ़ोटो पर चटका लगाकर रामप्यारी को वोट देकर विजयी बनाईये.
पैसा डालना है तो ताऊ के सामने रखी झोली पर चटका लगायें. और रामप्यारी को वोट देने के लिये नाचती हुई रामप्यारी की फ़ोटो पर चटका लगायें.


तो मेहरवान कद्रदान...आपसे गुजारिश है कि रामप्यारी को "नाच छमकछल्लो नाच" कंपीटीशन मे विजयी बनने के लिये आपके वोट की बहुत जरुरत है....मेहरवान इस मुश्किल घडी में हम कहां जायें? किसके पास वोट मांगने जायें?

आपसे हाथ जोडकर गुजारिश है कि ऊपर नाचती हुई रामप्यारी की फ़ोटो को चटका (क्लिक) लगाकर एक वोट उसको देने की कृपा करें और नगद पैसा यहां रखी ताऊ की फ़ोटो के सामने रखी झोली पर चटका लगाकर डाल दें...

मेहरवान आपकी बडी मेहरवानी होगी...ताऊ की झोली मे पैसे डालें या ना डालें आपकी मर्जी..पर नाचती हुई रामप्यारी की फ़ोटो पर चटका लगाकर उसको वोट जरुर दें... एक वोट का सवाल है अन्नदाता...प्लीज..प्लीज..प्लीज आपके कीमती और बहुमुल्य वोट रामप्यारी की और ताऊ की किस्मत संवार सकते हैं...

आप प्लीजिया कर ज्यादा से ज्यादा वोट दिजिये...सुबह से आज रात तक वोटिंग लाईन खुली हैं...आपसे हाथ जोडकर निवेदन है कि आज आप और कोई काम नही करें..बस यहां रामप्यारी की फ़ोटो को चटका लगाकर वोट देते रहिये.

सोचिये आपको कितनी खुशी होगी जब ब्लागवुड की तरफ़ से रामप्यारी "नाच छमकछल्लो नाच" का खिताब लेकर आयेगी...

तो मेहरवान कद्रदान ...... अंत में फ़िर आपसे गुजारिश है कि ऊपर की फ़ोटो मे रामप्यारी की फ़ोटो पर आज दिन भर चटके लगाकर वोट देते रहिये....और उसे "नाच छमकछल्लो नाच" कंपीटीशन में विजयी बनाइय़े.

आप सबका एडवांस में धन्यवाद....

-ताऊ मदारी एंड कंपनी.

31 comments:

  Arvind Mishra

Thursday, April 01, 2010 5:19:00 AM

ये चटका वटका छोडो ताऊ अपने डेरे का पता बताओं फौरन कुछन ऑनलाइन मदद भेजता हूँ .....तुम कितने कहते छाताये हो अपुन को नहीं मालूम क्या ? मगर दोस्ती के रिश्ते के खातिर क्या क्या नहीं करना पड़ता -पर आज हम चटका न लगायेगें -क्या न कहते तो हम न लगाते -वो कहते हैं न की कहने पर धोबी गधे पर नहीं चढ़ता -

  संजय भास्कर

Thursday, April 01, 2010 6:23:00 AM

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

  Suman

Thursday, April 01, 2010 6:51:00 AM

nice

  डॉ. मनोज मिश्र

Thursday, April 01, 2010 7:05:00 AM

नये सांप आजकल बहुत जहरीले हैं...जहरीले भी क्या बल्कि वो आस्तीन के सांप होते हैं..मीठे मीठे बोलकर कब काट लेंगे ? कहां ले जाकर मरवा डालेंगे? पता भी नही चलेगा. आजकल के सांपों का यकीन नही किया जा सकता.....
सत्य वचन ताऊ जी,धन्यवाद.

  खुशदीप सहगल

Thursday, April 01, 2010 7:17:00 AM

देखा ताऊ बुरे वक्त मे यो भतीजा ही काम आया...

रामप्यारी के लिए तो मैंने गाना भी सीख लिया है...

नाच मेरी बुलबुल के पैसा मिलेगा,
कहां कद्रदान तुझे ऐसा मिलेगा...

जय हिंद...

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Thursday, April 01, 2010 7:25:00 AM

ताऊ आइटम मजेदार है।

  मनोज कुमार

Thursday, April 01, 2010 7:25:00 AM

बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर अभिवादन।

  वाणी गीत

Thursday, April 01, 2010 8:04:00 AM

सांप सिर्फ दिखाने के डरावने होते हैं ...बहुत कम साँपों में ही जहर होता है ...आधे तो डर के मारे ही मर जाते हैं ...:):)
रामप्यारी ..विजयी भाव ....!!

  Ratan Singh Shekhawat

Thursday, April 01, 2010 8:12:00 AM

वाह ! बहुत मजेदार !
हमारा मुर्खता क्रमांक रहा 82
पता तो था कि फोटो पर चटका लगते ही मुर्ख बनने का सर्टिफिकेट मिलेगा पर मुर्ख बनाने का तरीका जानने के लिए हम भी बन बैठे |

  सतीश सक्सेना

Thursday, April 01, 2010 8:17:00 AM

ताऊ !
मुझे तो इसके पीछे भी कोई चाल लगती है ! तुम्हारी मंडली के छटे छटाये चेले कहीं नहीं जायेंगे गले में हारमोनियम लटकाए तुम्हारे आसपास ही होंगे ...मौके की तलाश हो रही होगी ! और ताऊ प्रोडक्ट तो तुमने ब्लैक मार्केटिंग के लिए तहखाने में छिपाए होंगे !
राम राम !

  डॉ महेश सिन्हा

Thursday, April 01, 2010 8:38:00 AM

अच्छी प्रस्तुति

  ललित शर्मा

Thursday, April 01, 2010 8:46:00 AM

नाईस वेरी वेरी नाईस
वोट दे दिया है-
संकट के समय भतीजा ही काम आता है।

:):):):):):)

  P.N. Subramanian

Thursday, April 01, 2010 8:56:00 AM

सुन्दर मनोरंजक प्रस्तुति.

  Dr. Smt. ajit gupta

Thursday, April 01, 2010 9:35:00 AM

चटका लगाना तो छोरे छापरों का काम है, हम तो फटका लगाते हैं। रामप्‍यारी का अच्‍छी तरह से नचाओ हम घर बैठे ही झटके के साथ फटका लगाएंगे। इस देश में या तो जीते लालू या फिर रामप्‍यारी। खुदा खेर करे।

  kunwarji's

Thursday, April 01, 2010 9:58:00 AM

mast hai ji...

  वन्दना

Thursday, April 01, 2010 11:26:00 AM

हा हा हा………।मूर्ख बनाने का अच्छा प्रयास्।

  अन्तर सोहिल

Thursday, April 01, 2010 11:45:00 AM

मूर्ख नम्बर 91 और 92 दोनों ही मैं हूं जी
अब इनाम में मुझे अप्रैल का फूल ही दीजियेगा
आज तक देखा नही है ये फूल (आईना भी नही देखा आज मैनें) :-)

प्रणाम

  महेन्द्र मिश्र

Thursday, April 01, 2010 1:15:00 PM

जब आप दोनों ही बचें हैं तो खूब डांस करें और रामप्यारी को आज के दिन गोभी का फूल उपहार में दें ...कैसा रहेगा जब दो यार मिलकर खूब खायेंगे गोभी ....हा हा हा

  EJAZ AHMAD IDREESI

Thursday, April 01, 2010 2:02:00 PM

भैया आपने लिखा तो ब्लोगवाणी ने सर आँखों पे बिठाया... मैंने लिखा तो एक दिन बाद ही सदस्यता ही बर्खास्त कर डाली... वह रे ब्लोगवाणी तू कब बनेगी मीठीवाणी...

मेरा लेख यहाँ पढ़ें
http://laraibhaqbat.blogspot.com/

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

Thursday, April 01, 2010 2:09:00 PM

ताऊ रामप्यारी के डांस का तो आनन्द जरूर ले लिया..लेकिन आज कोई चटका वटका लगाने का न तो मूड है ओर न ही टाईम :-)
जै राम जी की....

  अल्पना वर्मा

Thursday, April 01, 2010 2:29:00 PM

:D..100 vin april fool main bani!

  'अदा'

Thursday, April 01, 2010 3:03:00 PM

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें...

  सुशील कुमार छौक्कर

Thursday, April 01, 2010 5:42:00 PM

वाह रामप्यारी तो गजब का डांस कर लेती है।

  भारतीय नागरिक - Indian Citizen

Thursday, April 01, 2010 6:30:00 PM

ताऊ का स्टाईल तो रामप्यारी से भी गजब है..

  Anil Pusadkar

Thursday, April 01, 2010 6:47:00 PM

ab to fans kar dobaara yanha aa rahe hai.hans bhi nahi sakte.

  अजय कुमार झा

Thursday, April 01, 2010 7:05:00 PM

0हम हैं उल्लू नंबर 115 ,ताऊ जी ...बिल्लन से कह दें कि ड्रा में अपना नाम आना ही चाहिए ..डांस वांस तो अपने बांए पैर का कमाल है , अगले डीआईडी में हम उसको चैंपियन बनवा ही देंगे ...मगर ईनाम हमारा पक्का होना चाहिए
अजय कुमार झा

  नरेश सिह राठौङ

Thursday, April 01, 2010 8:18:00 PM

अरे ताऊ क्या क्या खेल दिखावेगा |

  विनोद कुमार पांडेय

Thursday, April 01, 2010 9:42:00 PM

वाह बहुत बढ़िया..क्या आत्मविश्वास है.. फिर से मदारी मंडली तैयार करेंगे..बढ़िया प्रस्तुति बधाई

  मो सम कौन ?

Thursday, April 01, 2010 10:05:00 PM

ताऊजी रामराम।
आज तक हमेशा यही कहा है कि मेरे भरोसे मत रहियो, आज कहूं सूं कि मेरा इंटरव्यू ले ले और मंडली में शामिल कर ले(राम प्यारे की कमी पूरी कर दूंगा, उसा समझदार तो ना हूं, पर काम चल जाग्गा)। और ज्यादा जोगी मठ उजाड़ होया ही करै सै, चिंता नहीं करनी है बस।
राम राम।

  Udan Tashtari

Friday, April 02, 2010 2:15:00 AM

वोट दे दिया...रामप्यारी की जीत पक्की!!


आज मूर्ख दिवस मनाने में इतना व्यस्त रहा कि कहीं किसी ब्लॉग पर जाना हुआ नहीं यद्यपि दिवस विशेष का ख्याल रख यहाँ चला आया हूँ और आकर अच्छा लगा. धन्यवाद!!

  राज भाटिय़ा

Friday, April 02, 2010 2:19:00 AM

ताऊ जी लॆख तो मजे दार है लेकिन चित्र नही दिखाई दे रहा, चटका कहा लगाये?

ताऊ उवाच :-:


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