"रिश्ते"

पता नही आजकल रिश्ते इतने नाजुक क्यों होगये हैं? और आभासी रिश्ते तो वाकई पल पल इधर उधर बिखरते नजर आते हैं. कभी कभी तो इस पत्थर की फ़र्श पर लिखे शब्दों की तरह नजर आने लगते हैं. अक्सर सोचता हूं कि क्या यही रिश्ते हैं?


“रिश्ते”

रिश्तों के ये बंधन

क्या एक नाजुक डोर जैसे होते हैं

जो हल्की सी तकरार की आंधी में

चरमरा कर टूट जाए

या फिर

सूखे पत्तों की तरह

एक हवा के झौंके संग

बह निकलें.

कभी सोचता हूं

रिश्ते क्या ताश का महल होते हैं?

जो एक कम्पन भर में बिखर जाये

या फिर इतने कमजोर

की रेत के बने घरोंदे की तरह

बरखा की चंद बूंदों में ढह जाये

पता नही ये रिश्ते क्या होते हैं?

 

आभार : सुश्री सीमा गुप्ता

31 comments:

  बेचैन आत्मा

Thursday, March 18, 2010 5:19:00 AM

रिश्तों की अबूझ पहेली पर भावुक अभिव्यक्ति अच्छी लगी. कोई दार्शनिक पढ़ेगा तो लंबा व्याख्यान देगा.

  Suman

Thursday, March 18, 2010 6:53:00 AM

nice

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

Thursday, March 18, 2010 7:03:00 AM

सुश्री सीमा गुप्ता जी ने बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है! इसे पढ़वाने के लिए ताऊ को धन्यवाद देता हूँ!

  संजय भास्कर

Thursday, March 18, 2010 7:18:00 AM

बहुत सुन्दर रचना । आभार
ढेर सारी शुभकामनायें.

  संजय भास्कर

Thursday, March 18, 2010 7:18:00 AM

“रिश्ते” रिश्तों के ये बंधन क्या एक नाजुक डोर जैसे होते हैं जो हल्की सी तकरार की आंधी में चरमरा कर टूट जाए या फिर सूखे पत्तों की तरह एक हवा के झौंके संग बह निकलें. कभी सोचता हूं रिश्ते क्या ताश का महल होते हैं?


ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है .

  क्षत्रिय

Thursday, March 18, 2010 7:33:00 AM

ताऊ जी !
सही रिश्ते कभी नहीं बिखरते | पल -पल बिखरने वाले रिश्ते तो दिखावटी होते है जिनका बिखरना और बनना कोई मायने नहीं रखता |

  RaniVishal

Thursday, March 18, 2010 8:00:00 AM

मुझे लगता है की जो रिश्ते समय और परिस्थिति के साथ बिखर जाए ....उन रिश्तों का होना भी क्या ?
सुन्दर अभिव्यक्ति .....धन्यवाद!!l

  खुशदीप सहगल

Thursday, March 18, 2010 8:18:00 AM

कितने अजीब रिश्ते हैं यहां पर,
दो पल मिलते हैं, साथ-साथ चलते हैं,
जब मोड़ आए तो बच कर निकलते हैं,
कितने अजीब रिश्ते हैं यहां पर...

जय हिंद...

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Thursday, March 18, 2010 8:23:00 AM

होते हैं रिश्ते कमजोर भी और मजबूत भी। यह तो इस बात पर निर्भर करता है कि वे आपस में कितने इलेक्ट्रॉन शेयर करते हैं।

  डॉ. मनोज मिश्र

Thursday, March 18, 2010 8:33:00 AM

बेहतरीन भाव की रचना है ताऊ जी ...

  Udan Tashtari

Thursday, March 18, 2010 8:39:00 AM

ओह! बहुत गहरे उतरे भाव!

  'अदा'

Thursday, March 18, 2010 9:01:00 AM

रिश्तों पर बहुत ही गहरी बात कह दी आपने...
और एक बात किसी भी रिश्ते की कोई गारंटी नहीं है आज के युग में....
रिश्तों को पालना पड़ता है उनपर काम करना पड़ता है ...
टेकन फॉर ग्रांटेड कोई रिश्ता नहीं...माँ और बच्चे का भी नहीं...
बहुत अच्छी प्रस्तुति...

  Dr. Smt. ajit gupta

Thursday, March 18, 2010 10:05:00 AM

रिश्‍ते और आभासी रिश्‍ते दोनों ही का यही हश्र है। आजकल महफूज भाई दिखायी नहीं देते पहले भी उनकी खोज-पुकार हुई थी। लेकिन अब वे बिल्‍कुल ही गायब हैं, कहीं पता लगे तो बताइएगा।

  भारतीय नागरिक - Indian Citizen

Thursday, March 18, 2010 11:29:00 AM

पता नहीं ??
अबूझ पहेली हैं..

  Ram Krishna Gautam

Thursday, March 18, 2010 11:44:00 AM

Are! Taau, Apne to Emotional kar dia... Well! Rishton ke emotions ko prakat karti ye kavita bahut achchhi lagi...





"RAM"

  अल्पना वर्मा

Thursday, March 18, 2010 1:11:00 PM

बहुत दिनों बाद आप ने कविता लिखी है.
***कविता भी बेहद गंभीर भाव लिए है.
रिश्ते कांच से नाज़ुक होते हैं..
बेहतर कहें तो अनसुलझी पहेली जैसे...***

  राज भाटिय़ा

Thursday, March 18, 2010 2:19:00 PM

सीमा जी रिश्ते तो हमेशा ही रहते है, बस हम ही स्वार्थी बन जाते है, हमीं दुर हो जाते है....
बहुत सुंदर कविता
धन्यवाद

  shikha varshney

Thursday, March 18, 2010 4:29:00 PM

बेहतरीन कविता...इससे रहीम का एक दोहा याद आया
" रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाए,
टूटे से फिर न जुड़े ,जुड़े गाँठ पड़ जाये."
बस ऐसे ही होते हैं रिश्ते बहुत सहेज कर रखना चाहिए इन्हें.

  वन्दना

Thursday, March 18, 2010 4:53:00 PM

rishton ki dor bahut hi nazuk hoti hai.........ek bahut hi sashakt rachna.......seema ji ko badhayi.

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

Thursday, March 18, 2010 6:26:00 PM

सीमा जी की इस भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए आपको भी धन्यवाद...
बहुत अच्छी लगी रचना!!

  Rekhaa Prahalad

Thursday, March 18, 2010 7:04:00 PM

Hum sabhi Rishto ko samajhne aur nibhane me hi lage hue hai; sundar prastuti ke liye seema ji ko abhinandan aur tauji ko dhanyawad.

  निर्मला कपिला

Thursday, March 18, 2010 7:19:00 PM

बहुत सुन्दर कविता है सीमा जी को बधाई

  AlbelaKhatri.com

Thursday, March 18, 2010 7:42:00 PM

abhinav kavita .....

  M.A.Sharma "सेहर"

Thursday, March 18, 2010 8:01:00 PM

रिश्ते विश्वास और प्रेम से सहेजे जाते हैं...फिर जीने की रह दिखाते हैं !

बहुत खूब लिखा है

Seemaji aur taauji ko Dhanywaad !

  प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

Thursday, March 18, 2010 8:10:00 PM

अच्छी प्रस्तुति........बधाई.....

  डॉ महेश सिन्हा

Thursday, March 18, 2010 9:20:00 PM

रिश्ते वही जीवंत रह पते हैं जो रिसते नहीं
आँधी तूफान से जो टूट जायें वो रिश्ते नहीं

  मनोज कुमार

Thursday, March 18, 2010 10:48:00 PM

बहुत अच्छी प्रस्तुति!

  Anil Pusadkar

Thursday, March 18, 2010 11:27:00 PM

ताऊ जी रिश्ते तो रिश्ते हैं,मानो तो रिश्ता दिल और धड़कन ्का होता है वर्ना।खैर बढिया रचना पहने का मौका दिया आपने,सीमा जी को बधाई अच्छी रचना के लिये और आभार आपका।

  अभिषेक ओझा

Friday, March 19, 2010 1:14:00 AM

वैसे जो टूट जाएँ वो रिश्ते ही क्या ! बढ़िया लगी ये रचना.

  चंदन कुमार झा

Friday, March 19, 2010 2:51:00 AM

बेहतरीन रचना !!!

  Apanatva

Friday, March 19, 2010 7:16:00 AM

ise blog par gambheer rishto ko le kavita .....?

kavita acchee lageepar meree soch alag hai rishte saans ke sath sath chalte hai jeete hai aap nazar andaz karde to iseme rishte kya kare.......

ताऊ उवाच :-:


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