माननीय ब्लागर बंधुओं, आप सभी को गुडी पडवा (नव वर्ष) की हार्दिक शुभकामनाएं.
नववर्ष के शुभारंभ के पावन अवसर पर हास्य व्यंग के लिये आज ताऊ डाट इन की तरफ़ से बैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की स्थापना की घोषणा करते हुये हमें बहुत ही सुखद अनुभूति हो रही हैं.
सम्मान के बारे में:-
एवम प्रमाण पत्र
इस सम्मान का उद्देश्य ब्लाग जगत में हास्य व्यंग के लेखन को प्रोत्साहन देना और हास्य व्यंग्यकारों को सम्मानित करना है. हम जानते हैं कि एक स्वस्थ समाज की सुदृढ़ता के लिए ऐसे लेखन का बहुत महत्व है. इसके लिये समस्त सूचनाएं इस प्रकार हैं.
1. बैशाखनंदन स्वर्ण सम्मान - 2010 (एक पुरस्कार)
पुरस्कार स्वरुप सम्मान राशि रु. 5,100/= (पांच हजार एक सौ रुपिये)
एवम प्रमाण पत्र
यह पुरस्कार चुनी गई सर्वश्रेष्ठ रचना को दिया जायेगा.
2. बैशाखनंदन रजत सम्मान - 2010 ( पांच पुरस्कार)
पुरस्कार स्वरुप सम्मान राशि रु. 500/= (पांच सौ रुपये) प्रत्येक
एवम प्रमाण पत्र
एवम प्रमाण पत्र
3. बैशाखनंदन कांस्य सम्मान - 2010 (ग्यारह पुरस्कार)
1. इस प्रतियोगिता में 30 अप्रेल 2010 तक रचनाएं भेजी जा सकती है.
2. रचनाओं मे हास्य कविता एवम हास्य-व्यंग के लेख शामिल किये जायेंगे.
3. एक रचनाकार अपनी अधिकतम ५ प्रकाशित-अप्रकाशित मौलिक रचनाएं भेज सकता है पर वह केवल एक ही पुरस्कार का हकदार होगा.
यहां प्रकाशित से मतलब केवल रचनाकार के ब्लाग या उनकी स्वयं के कापीराईट में प्रकाशित पुस्तक की रचना से है.
आपसे निवेदन है कि प्रत्येक रचना को अलग अलग इमेल से भेजने की कृपा करें. यानि एक इमेल से एक बार मे एक ही रचना भेजे.
5. हमें प्राप्त रचनाओं मे से जो भी रचना प्रतियोगिता में शामिल होने लायक पायी जायेगी उसे हमारे सहयोगी ब्लाग ताऊजी डाट काम पर प्रकाशित कर दिया जायेगा, जो इस बात की सूचना होगी कि प्रकाशित रचना प्रतियोगिता में शामिल कर ली गई है
6. 11 मई 2010 से चुनी गई पुरस्कृत रचनाओं का प्रकाशन ताऊ डाट इन पर विजेता रचनाकारों के नामों की घोषणा के साथ प्रारंभ कर दिया जायेगा.
7. इन रचनाओं पर ताऊ डाट इन का कापीराईट रहेगा. और कहीं भी प्रकाशन का अधिकार हमें होगा.
8. रचनाओं को पुरस्कृत करने का अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ ताऊ डाट इन के संचालकों के पास सुरक्षित रहेगा. इस विषय मे किसी प्रकार का कोई पत्र व्यवहार नही किया जायेगा और ना ही किसी को कोई जवाब दिया जायेगा.
9. इस प्रतियोगिता के समस्त अधिकार और निर्णय के अधिकार सिर्फ़ ताऊ डाट इन के पास सुरक्षित हैं. प्रतियोगिता के नियम किसी भी स्तर पर परिवर्तनीय है.




53 comments:
Tuesday, March 16, 2010 5:19:00 AM
नववर्ष के उपलक्ष में आप द्वारा की गए इस संजीवनी घोषणा का स्वागत करता हूँ. ताऊ जी को सपरिवार नववर्ष की शुभकामनाएँ.
Tuesday, March 16, 2010 6:27:00 AM
बहुत ही सराहनीय प्रयास |
हमारा नाम तो इन प्राप्त होने वाली रचनाओं को पढने वालों की सूचि में शामिल कर लीजिए |
Tuesday, March 16, 2010 6:52:00 AM
ताउ जी,
बैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिए
आपको हार्दिक शुभकामनाएं।
राम राम
Tuesday, March 16, 2010 6:52:00 AM
nice
Tuesday, March 16, 2010 6:55:00 AM
आप तो गंभीर हो गए -बहुत बधाई और साधुवाद इस घोषणा के लिए !
मगर वैशाखनंदन के बजाय कोई और नाम रखें प्लीज -भले ही हास्य के लिए वैशाखनंदन आगे आयेगें मगर उन्हें वैशाखनंदन कहना/के रूप में सम्मानित कदाचित उचित नहीं है.
कोई गधा कहलवाना थोड़े ही चाहेगा -मंचीय कविता की बात अलग है ! मंच गया बात गयी !
हास्य व्यंग ब्लॉग सम्मान सा सीधा सा कुछ न क्यों रख दें !
सीमा जी को उनके नए काव्य संकलन पर बहुत बधायी !
Tuesday, March 16, 2010 7:09:00 AM
नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें ....
शुभ हो ...!!
Tuesday, March 16, 2010 7:09:00 AM
बहुत सुन्दर और मनभावन पोस्ट!
आपने तो मन ललचा दिया!
भारतीय नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!
Tuesday, March 16, 2010 7:38:00 AM
वाह, अच्छा प्रयास है ?
Tuesday, March 16, 2010 8:34:00 AM
नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें ....
शुभ हो!
Tuesday, March 16, 2010 8:40:00 AM
ताऊ !
एक अच्छे कार्य के लिए बधाई स्वीकार करें , डॉ अरविन्द मिश्र के सुझाव पर गौर अवश्य कीजियेगा , मगर कुछ शंकाएं हैं ....
क्या वाकई मामला गंभीर है ?
नोट नकली तो नहीं होंगे ?
अगर आप वाकई गंभीर हैं तो कहीं यहाँ इलेक्शन लड़ने की तो नहीं सोच रहे क्योंकि इस गंभीरता से टी आर पी शर्तिया बढ़ेगी?
Tuesday, March 16, 2010 8:52:00 AM
इन रचनाओं पर ताऊ डाट इन का कापीराईट रहेगा. और कहीं भी प्रकाशन का अधिकार हमें होगा.
मगर ताऊ जो पहले छप चुकी हैं उसका अधिकार केवल आपके पास कैसे रहेगा? मुझे समझ नही आया। क्या ये अधिकार केवल एक रचना के लिये है या पाँचों रचनाओं के लिये ?
Tuesday, March 16, 2010 8:55:00 AM
सार्थक पहल!
आपको भी नव संवत्सर की मांगलिक शुभकामनाएँ.
Tuesday, March 16, 2010 9:07:00 AM
हिन्दी की सेवा के लिये यह आपका बहुत ही सराहनीय प्रयास है!
Tuesday, March 16, 2010 9:24:00 AM
उपयोगी व्यंग्य कांड
Tuesday, March 16, 2010 9:29:00 AM
@ निर्मला कपिला जी
भविष्य के अधिकार हमें भी होंगे कि हम छाप सकें. लेखक के अधिकार तो उसके पास होंगे ही.
रामराम.
Tuesday, March 16, 2010 9:35:00 AM
अरे वाह...अब तो लगता है कि कुछ न कुछ उम्दा लिख के तो भेजना ही पड़ेगा
Tuesday, March 16, 2010 9:48:00 AM
अरे वाह...अब तो लगता है कि कुछ न कुछ उम्दा लिख के तो भेजना ही पड़ेगा
Tuesday, March 16, 2010 9:48:00 AM
बहुत सुन्दर और मनभावन पोस्ट!
आपने तो मन ललचा दिया!
भारतीय नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!
Tuesday, March 16, 2010 9:51:00 AM
पुरस्कार राशि में 5000 रूपए ही है या और कुछ? नवसम्वतसर की हार्दिक बधाई। इस नेक कार्य के लिए भी बधाई।
Tuesday, March 16, 2010 10:06:00 AM
शीर्षक पढ़कर लगा शायद कोई हास्य पोस्ट होगी परन्तु यहाँ तो गंभीरता दिखाई दी.
अरविन्द जी की बात पर गौर किया जाना चाहिये.
प्रयास सराहनीय है.
सीमा जी को उनकी नयी किताब के लिए बहुत बहुत बधाई.
Tuesday, March 16, 2010 11:01:00 AM
इस सराहनीय कार्य की शुरूआत के लिये शुभकामनायें
बिल्कुल सही वक्त पर सही कदम उठाया है जी आपने, वरना आजकल तो सभी गौतम गंभीर बने जा रहे हैं। गर्म वातावरण में अब ठंडी फुहारें आने वाली हैं।
धन्यवाद
प्रणाम स्वीकार करें
Tuesday, March 16, 2010 12:33:00 PM
पहले तो लगा कि ताऊ ने कोई हास्य-व्यंग्य लिखा है - टाइप्ड हो जाने के खतरे तो होते ही हैं!
इस आयोजन के लिए दिली शुभकामनाएँ. :)
Tuesday, March 16, 2010 12:33:00 PM
पहले तो लगा कि ताऊ ने कोई हास्य-व्यंग्य लिखा है - टाइप्ड हो जाने के खतरे तो होते ही हैं!
इस आयोजन के लिए दिली शुभकामनाएँ. :)
Tuesday, March 16, 2010 12:37:00 PM
ताऊ जी आज तो आपने जोर का झटका दे दिया :)
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हिंदी के प्रचार-प्रसार की दिशा में यह अत्यंत सराहनीय प्रयास है ! इस तरह की पहल एवं आयोजन अत्यंत आवश्यक है !
सम्मान प्रतियोगिता के लिए आपको हार्दिक शुभकामनाएं।
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आदरणीय सीमा जी को उनकी कृति "विरह के रंग" के लिए ढेर सारी बधाई !
मैं अवश्य इस काव्य संकलन को पढना चाहूँगा !
Tuesday, March 16, 2010 2:30:00 PM
ताउ जी,
बैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता का पहला ईनाम शायद मै जीत भी जाऊ, लेकिन उसे पाने के लिये जब मुझे आना होगा उस का खर्च कोन देगा, जो करीब एक लाख के आसपास बेठता है.....:) पहले यह सोच लो...... वैशाखनंदन के बजाय आप गधा नंदन रखे, उल्लू नंदन रखे, साण्णू कोई फ़र्क नही, जबाब फ़टा फ़ट दे,ओर साथ मै ही एक टिकट ओर होटल की बुकिंग भेज दे:)
आपको भी नव संवत्सर की मांगलिक शुभकामनाएँ.
बैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता के लिए
आपको हार्दिक शुभकामनाएं।
ओर आप का धन्यवाद
राम राम
Tuesday, March 16, 2010 2:46:00 PM
वाह, अच्छा प्रयास है
नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें .
Tuesday, March 16, 2010 2:49:00 PM
ताऊ प्रयास तो वाकई बहुत बढिया है...लेकिन हम नहीं समझते कि ऊपर वाले नें हमें वैसाखनन्दन बनने की काबलियत बख्शी है:-)
नववर्ष और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!!
Tuesday, March 16, 2010 3:05:00 PM
बहुत ही सराहनीय प्रयास है पर जैसा कि इस पोस्ट का शीर्षक देखकर लगा...वैसा ही शायद सबको'वैशाखनंदन' नाम से भ्रम हो जायेगा और इस से इस योजना की गंभीरता पर शायद कुछ असर पड़े ...वैसे इस कदम से निश्चय ही लोगों को हास्य व्यंग लिखने की प्रेरणा मिलेगी.
Tuesday, March 16, 2010 3:09:00 PM
गुडी पडवा की शुभकामनायें...
हास्य व्यंग के लेखन को बढ़ावा देने का सराहनीय प्रयास ....बधाई
Tuesday, March 16, 2010 3:15:00 PM
इस सम्मान का उद्देश्य ब्लाग जगत में हास्य व्यंग के लेखन को प्रोत्साहन देना और हास्य व्यंग्यकारों को सम्मानित करना है.
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आउट! यू आर आउट जीडी! :(
Tuesday, March 16, 2010 3:17:00 PM
बहुत ही सराहनीय प्रयास है!
Tuesday, March 16, 2010 3:17:00 PM
Bahut Shaandar Aayojan hai TAAU... Bahut Bahut Abhaar...
"RAM"
Tuesday, March 16, 2010 4:10:00 PM
ताऊ आपको और आपके सभी परिवार वालों को नव वर्ष की शुभकामनाएं |
Tuesday, March 16, 2010 4:23:00 PM
@ निर्मला कपिला जी
आपके द्वारा उठाये बिंदू को मद्देनजर रखते हुये निम्न स्पष्टीकरण अब प्रतियोगिता के बारे में :- के बिंदू क्रमांक - ३ में जोडा गया है.
यहां प्रकाशित से मतलब केवल रचनाकार के ब्लाग या उनकी स्वयं के कापीराईट में प्रकाशित पुस्तक की रचना से है.
रामराम.
Tuesday, March 16, 2010 5:10:00 PM
क्या बात है ताऊ जी ,बहूत ही सार्थक प्रयास है | उम्मीद करते है अब कुछ उम्दा रचना पढने और लिखने का अवसर मिलेगा | इस नव वर्ष पर आपको बहूत बहूत बधाई |
Tuesday, March 16, 2010 5:59:00 PM
ताऊजी रामराम,
हृदय परिवर्तन हो गया दीखै सै।
अपनी तो वही पुरानी बात सै कि म्हारे भरोसे न रहिये, जिसे देणा हो दे देणा ईनाम।
नव वर्ष संवत्सर की हार्दिक बधाई।
Tuesday, March 16, 2010 6:25:00 PM
अब मेरा क्या होगा ताऊ जी, हम तो हास्य लिख ही नही पाते। बड़ी नाइंसाफी है जी। अगर हास्य लिख पाते तो पहला ईनाम हमारा ही होता :) खैर पढ कर ही हँस लेंग़े जी।
Tuesday, March 16, 2010 7:09:00 PM
aaj se hee jut jaate hain....
Tuesday, March 16, 2010 8:15:00 PM
ताऊ जी, यह बहुत गम्भीर और अच्छा प्रयास है. बस नाम बदल दें तो बहुत अच्छा लगेगा.
Tuesday, March 16, 2010 8:49:00 PM
बहुत सार्थक प्रयास है, नाम बदल दें और अच्छा रहेगा.
Tuesday, March 16, 2010 11:09:00 PM
बहुत ही सराहनीय प्रयास |नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें
Tuesday, March 16, 2010 11:29:00 PM
ताऊ जी को सपरिवार नववर्ष की शुभकामनाएँ.
Wednesday, March 17, 2010 12:11:00 AM
नव वर्ष की बधाईयां स्वीकार करें.
आपका यह प्रयास स्तुत्य है.
Wednesday, March 17, 2010 3:48:00 AM
नव-संवत्सर पर ताऊ के इस नए प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनाएं!
Wednesday, March 17, 2010 7:45:00 AM
बहुत बहुत बधाई इस महत्वपूर्ण शुरूआत के लिए, और उससे भी बढ़कर इस बात की प्रसन्नता है मुझे कि यह खुशियां बांटने की राह में सही कदम है, जो आज सबसे दुरूह कार्य है...वर्ना रोने-धोने में देर ही कितनी लगती है :)
Wednesday, March 17, 2010 8:01:00 AM
Taauji Ramram.
Navtsar ki mangal kamanae sapariwar swikaren.
Aaj to aane me bahut der ho gai...suchana bahut acchi lagi , beshak bahut sarahaniya kadam hai yah...Dhanywaad.
Wednesday, March 17, 2010 2:27:00 PM
बढ़िया कार्य के लिए बहुत बहुत बधाई! सुन्दर प्रस्तुती!
Wednesday, March 17, 2010 3:13:00 PM
टाइटल तो मस्त मिलेगा जितने पर :)
Wednesday, March 17, 2010 6:08:00 PM
प्रयास तो वाकई सराहनीय हैं. शुभकामनाएं !!
Monday, March 22, 2010 9:58:00 AM
आदरणीय ताऊ जी दिल से आभारी हूँ की आपने मेरे विरह के रंग काव्य संग्रह को अपनी इस प्रतियोगिता में शामिल किया. हास्य व्यंग प्रतियोगिता आयोजन के लिए हार्दिक शुभकामनाये और बधाई, आपका ये सराहनीय प्रयास बेहद सफल होगा इन्ही शुभकामनाओ के साथ......दिल से आभार ....
regards
Wednesday, March 24, 2010 11:57:00 AM
बहुत बढ़िया ....
ईनाम भले किसी को मिले बैसाख नंदन तो मै ही हूँ
यहाँ पाठकों के जनरल नॉलेज के लिए बता दूँ कि बैसाख नंदन है क्या -
हो हुआ यूँ कि सर्वप्रिय प्राणी गधा जब सर्दियों में हरी हरी घास चरता है तो घास बहुतायत में होती है...पेट जल्दी ही भर जाता है लेकिन पीछे मुड कर देखा तो बोला अरे! अभी दो मीटर ही चारा ... और इसी सोच में दुबला हो जाता है कि मेरी खानगी कम हो गयी है ... और बैसाख माह में जब गर्मी से सारी घास सूख जाती है तो चरते चरते दूर तक निकल जाता है ... पीछे मुड कर देखा तो बोला ओह! आज तो दो किलोमीटर चर गया ? और इसी खुशी में मोटा हो जाता है ... ये है सकारात्मक सोच का जादू ... सो सोच सकारात्मक रखिये और बैसाख नंदन कहलाइए
शुभकामनाएं
Thursday, March 25, 2010 6:45:00 AM
सार्थक एवं सराहनीय प्रयास!
हिन्दी के सम्वर्धन में यह मील का पत्थर
साबित होगा!
Thursday, August 26, 2010 10:31:00 PM
पहली टिप्पणी मेरी थी. सोचता हूँ अंतिम भी मैं ही कर दूँ. क्या इस प्रतियोगिता का परिणाम अगले वैशाख तक आने की संभावना है?
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