पिछले अंक मे आपने पढा था कि खुशदीप ने ताऊ को पिछले जन्म में लेजाकर सवाल पूछना शुरु किया. ताऊ अब अपने पिछले जन्म मे जब वो झंडू सियार था वहां पहुंच गया. अब यहां पर ताऊ को हम ताऊ झंडू नेता के नाम से जानेंगे... अब आगे पढिये.
खुशदीप : हां तो झंडू नेता जी, अब ये बताईये कि आपको क्या दिखाई दे रहा है?
ताऊ झंडू : जंगल मे विद्रोह...बगावत...मारकाट ..चारों तरफ़ आजादी की लडाई चल रही है.
खुशदीप : और क्या दिखाई देरहा है? आप क्या कर रहे हैं?
ताऊ झंडू : मैं...मैं...मेरे गले मे एक लेपटोप लटका हुआ है...मैं रिपोर्टिंग कर रहा हूं....
खुशदीप : हां ताऊ झंडू, आगे बता...क्या हुआ?
ताऊ झंडू : अभी अभी खबर आई है कि राजा शेरसिंह जी, जो कि महल मे घेर लिये गये थे उनको जनता ने महल मे घुसकर बंदी बना लिया है...चारो तरफ़ खुशी की तेज लहर सी दौडती दिख रही है....और अब सब तरफ़ शांति है...लोग अब अमन चैन से प्रजातंत्र मे रहने की सोच रहे हैं...अब सब तरफ़ जनता का राज होगा.
खुशदीप : हां तो ताऊ झंडू, नू बता कि अब वहां चुनाव हुये कि क्या हुआ? क्या दीख रहा है अब?
ताऊ झंडू : अब सब आजादी मे शामिल नेताओं की मिटींग चल रही है. एक मिनट...एक मिनट...
खुशदीप : हां ताऊ झंडू बोल..बोल के बोलरया था?
ताऊ झंडू : हां..अब साफ़ दिख भी रहा है और सुनाई बःई देरहा है...हमारा नेता कैसा हो? झंडू सियार जैसा हो? ये नारे तेज होते जारहे हैं. भीड सभा स्थल के आसपास इकठ्ठी हो रही है.
खुशदीप : हां और बता ताऊ झंडू..आगे क्या हो रहा है?
ताऊ : झंडू : हां तो आगे ....सभी के विरोध के बावजूद...एक रिटायर्ड और थके से स्वतंत्रता सेनानी रमलू हाथी को देख पा रहा हूं...एक मिनट...एक मिनट....
खुशदीप : हां बता ..आगे के हुआ?
ताऊ झंडू : हां अब रमलू दादा स्पीच दे रहे हैं...उन्होंने खडे होकर बोलना शुरु किया.....मेरी जंगल की प्यारी प्रजा....आप सबके सहयोग से और कुर्बानियों से हमने राजशाही को उखाड फ़ेंका है. आप मुझे सरपंच बना कर जंगल का राज सौपना चाहते हैं..पर मैं स्वेच्छा से झंडू नेताजी को सरपंच बनाना चाहता हूं..इनकी अथक रिपोर्टिंग और सूझबूझ से हम यह जंग जीतने मे कामयाब हुये हैं...मैं अब थक चुका हूं..आपकी सेवा मैं करता रहुंगा और इनको सब मार्गदर्शन भी देता रहुंगा...
खुशदीप : आगे बोल ताऊ झंडू..आगे बोल..इब के होरया सै?
ताऊ झंडू : इब आगे ...मुझको जंगल का सरपंच बना कर राजकाज सौंप दिया गया है. मैं एक उंचे से सिंहासन पर बैठा हूं...सब मेरा कहना मानते हैं..सब अमन चैन चल रहा है....
इतनी ही देर मे खुशदीप के मोबाईल की घंटी बजती है. ...वो फ़ोन उठाकर...हैल्लो..हैल्लो..अरे भाई मैं खुशदीप बोलरया सूं..थम कुण बोलरे हो?..
उधर से आवाज आई - अरे खुशदीप भाई...मैं समीरलाल..बोलरया सूं कनाडे से...आवाज भी नही पीछाणते के
आजकल..
इधर से खुशदीप बोलने लगा --अरे रे समीरजी...रामराम..जी रामराम.....हुक्म करो जी मालकां..
समीरलाल जी - अरे भई हुक्म काहे का?..जरा ताऊ की पोलपट्टी अच्छी तरह खोलना..पहली बार चक्कर मे चढा है....कहां तक पूछताछ हुई?
खुशदीप : अजी पूछताछ मे तो ताऊ...कोई बहुत बडा स्वतंत्रता सेनानी लाग रया सै...इब लगता है..सीरीयल का भट्टा बैठना तय है...स्वतंत्रता सेनानी के किस्से कौन पसंद करेगा?
समीर जी - आप नू करो..जरा ताऊ के शादी विवाह के किस्से के बारे मे पूछना शुरु करो..कुछ ना कुछ उगलेगा ही..फ़िर नमक मिर्च लगा लेना.
खुशदीप : हां ये आपने बहुत सही सलाह दी..बस अब शुरु करता हूं उसी लाईन पर.....और अब पूछताछ का दौर आगे बढा.
खुशदीप : हां तो ताऊ झंडू..नू बता कि तेरी ताई..अरे मेरा मतलब..हमारी ताई और आपकी लुगाई कहां है इस वक्त?
ताऊ झंडू : मुझे दिख नही रही है अभी कहीं....
खुशदीप मन ही मन जाड (दांत) पीसते हुये बोला - ताऊ झंडू..तेरे से सारे राज उगलवा कर रहुंगा...और खुशदीप ने डाक्टर को इशारा किया ..और डाक्टर ने एक इंजेक्शन ताऊ के और ठोक दिया...और थोडी देर मे असर होते ही फ़िर बात चीत का सिलसिला शुरु हुआ.
खुशदीप : ताऊ झंडू..नू बता कि तेरी शादी किससे हुई?
ताऊ झंडू : अरे इब साफ़ साफ़ दिखण लाग रया सै....जब मैं सरपंच बन गया तब मेरी शादी झुनकू भेडिये की पांचवी रुपवती कन्या झुनिया से हुई?
खुशदीप : ताऊ झंडू , एक बात समझ ना आई कि तू सियार और वो भेडिया? यह बेमेल विवाह कैसे हुआ?
ताऊ झंडू : असल मे झुनकू भेडिया मुझे नीची जाति का समझ कर अपना दामाद नही बनाना चाहता था..पर जब मैं सरपंच बन गया तो..तो मैने ऐसी चाल चली की उसको अपनी कन्या कि शादी मुझसे करनी ही पडी.
खुशदीप : ताऊ झंडू...ये तो बडी रोचक बात हो गई? जरा याद करो ठीक से और बताओ...कि क्या हुआ था?
ताऊ झंडू : हुआ ये था कि जब मैं सरपंच बन गया तो पूरे जंगल की सत्ता पर मेरा अधिकार होगया. और अब मुझे सिर्फ़ झुनिया से शादी करनी थी. पर झुनकू भेडीय़ा तैयार नही था. उधर झुनिया की सगाई भी एक सुंदर और शरीफ़ पढे लिखे लडके से होगई. तो मेरी चिंता बढ गई. जबरदस्ती और अगवा करके शादी करने मे मेरी इमेज खराब होने का डर था. सो मैने एक चाल चली.
खुशदीप : वो क्या चाल थी ताऊ झंडू?
ताऊ झंडू : एक दिन मैं शाम को नदी किनार की उंची चट्टन पर अपने अंगरक्षकों के साथ खडा था कि वो लडका उधर आ निकला, जिसकी झुनिया के साथ सगाई हुई थी.
खुशदीप : फ़िर क्या हुआ ?
ताऊ झंडू : हुआ ये कि उसको देखते ही मेरे अंदर का नेता जाग उठा...मैने तुरंत उसको रोका और पूछा...इधर क्यों आया है?
वो बोला - सर, पानी पीने आया हूं.
मैने कहा : क्यों बे साले? गाली देता है?
वो बोला - सर गाली तो आप देरहे हैं, साफ़ साफ़ "साले" बोल रहे हैं? मैने कहां गाली दी आपको?
मैने कहा : अबे, फ़िर "सर" कहके गाली दी? हरामजादे ठहर तेरे को तो मैं बताता हूं? अबे हम नेता हैं..हम साले, हरामजादे की कुछ भी गाली दे सकते हैं..पर तू कौन? हमको सर की गाली देने वाला?
वो बोला - जबान संभालिये अपनी...आप साला हरामजादा..बोले जा रहे हैं...
मैने कहा - अबे ठहर साले ..तेरे को तो मैं बताता हूं...और मैने मेरे अंगरक्षकों को इशारा किया..उस कच्चे से बालक को पकड कर मूंडी मरोड दी गई और हम और हमारे अंगरक्षक उसको वहीं चट कर गये..
खुशदीप : इसके बाद क्या हुआ ताऊ?
ताऊ झंडू : बस नेताओं की तरह जंगल थाने मे मेरे अंगरक्षकों ने रिपोर्ट लिखवा दी कि झुनकू का होने वाला दामाद पानी पीने नदी किनारे आया था. तेज बहाव मे पैर फ़िसल गया और झंडू नेताजी और उनके अंगरक्षकों के लाख कोशीश करने पर भी वो बचाया नही जा सका....मेरे अंगरक्षकों को इस बात पर सेवा मेडल दिलवा दिये गये.
खुशदीप : आगे क्या हुआ झंडू ताऊ?
झंडू ताऊ : उधर झुनकू भेडिये के घर रोना पीटना मचा था. सब झुनिया जैसी सुंदर और रुपवती लडकी की किस्मत को कोस रहे थे. और झुनकू और उसकी बीबी इस सदमे मे थे कि अब इस लडकी से कौन शादी करेगा?
शाम को हम पहुंचे अपनी पूरी तैयारी के साथ झुनकू के यहां गम व्यक्त करने.वहां वही रोना पीटना...वही पुराना खटराग चल रहा था...अब झुनिया के हाथ कैसे पीले होंगे? कौन इसका हाथ थामेगा?
हम तुरंत खडे हुये और सबको डांट लगाई...खबरदार किसी ने झुनियां की किस्मत को कोसा तो...अरे अब हम वो लडका तो वापस नही ला सकते, पर हम मर थोडी गये?
खुशदीप : हां हां..ताऊ झंडू, बता बता और आगे चल..अब आई असली बात..जो इस सीरीयल को हिट करवायेगी...
ताऊ झंडू : अब इसके बाद हमने घोषणा कर दी कि हम करेंगे झुनिया से शादी...हमारे इतनी घोषणा करते ही हमारे चेले चमचे जो कि ट्रेंड थे, उन्होने हमारी जयजय कार के नारे बुलंद कर दिये और किसी को कुछ समझ आता उसके पहले ही पंडित चंपू बंदर जी ने झुनिया का हाथ पकडकर हमारे हाथ मे दे दिया और सात चक्कर खिलवा दिये फ़ेरों के नाम पर...बस हमारे इस कार्य कि बहुत भूरी भूरी प्रशंशा हुई. अगले दिन जंगल के सारे अखबार जो कि हमारे ही सेट किये हुये थे...उन्होने जबरदस्त कवरेज दिया और हमारी ख्याति गरीब का मसीहा के तौर पर चहुं और फ़ैल गई....... (क्रमश:)
(शेष अगले भाग मे.....)




29 comments:
Friday, December 18, 2009 7:11:00 AM
अच्छी पोस्ट।
Friday, December 18, 2009 7:36:00 AM
ये तो कुछ समझ आता है खुशदीप...पर तृप्ति जैन तो ज्यादातर को मनुष्य ही दिखा रही है। वो समझ से बाहर है। मानव जामा 84 लाख जोनियों के बाद मिलता है।
Friday, December 18, 2009 7:40:00 AM
मजेदार श्रंखला चल रही है !
Friday, December 18, 2009 7:49:00 AM
बढ़िया श्रंखला चल रही है ! जारी रहे !!
ताऊ श्री !
झंडू सरपंच की तरह यहाँ भी कुछ लोग है जिन्हें सर सर कहते रहने के बावजूद वे लोग साले ,ब्लडी आदि बोलते रहते है | शायद उनका चरित्र भी झंडू सरपंच की तरह ही हो |
अगली कड़ी का इन्तजार |
Friday, December 18, 2009 8:01:00 AM
अबे, फ़िर "सर" कहके गाली दी? हरामजादे ठहर तेरे को तो मैं बताता हूं? अबे हम नेता हैं..हम साले, हरामजादे की कुछ भी गाली दे सकते हैं..पर तू कौन? हमको सर की गाली देने वाला?
जय हो ताऊ की. असली राज उगलवाया गया है आज तो खुशदीप भाई ने.
Friday, December 18, 2009 8:02:00 AM
बहुत मजेदार और रोचक प्रसंग चल रहा है.
Friday, December 18, 2009 8:33:00 AM
हा हा!! वैसे आदम योनि की बड़ी गाली आपने ही दी 'साले' बोल कर..इससे कोहराम मच सकता है..जगह जगह चर्चा में आ जाओगे और खुशदीप तो भग निकलेंगे..झंडु जी टंग जायेंगे हमेशा की तरह!!
यही है सिलसिला गालियों का..दिलवाता कोई है..पिटता कोई है!! जरा संभलना!!
मस्त रहा!! अगली कड़ी का इन्तजार!!
Friday, December 18, 2009 8:42:00 AM
ऐसा ऐसा इंजेक्शन ठोंका कि ताऊ तौव्वा गया लगता है
Friday, December 18, 2009 9:16:00 AM
वाह क्या बात है अब ताऊ की असलीयत पता चली। वैसे ये एपिसोड कब टेलीकास्ट हो रहा है? खुशदीप जी का धन्यवाद नहीं तो ये ताऊ कहाँ किसी के काबू मे आने वाले थे।
Friday, December 18, 2009 9:21:00 AM
ताऊ का पहले का जनम तो और भी खतरनाक निकला। पर क्या? इस जनम में तो बहुत से नेता इस से भी खतरनाक हैं। और इस जनम तो ताऊ बहुत नशेड़ी हो गया है। एक इंजेक्शन का असर इतनी जल्दी उतर गया कि दूसरा ठोकना पड़ा।
Friday, December 18, 2009 9:25:00 AM
यो एकदम ठीक चल रया से खुशदीप भाया....ताऊ ने कैसे कैसे लपेट लपेट के ताई ने शीशे में उतारा सब पोल पट्टी इब खुल री है । मन्ने पक्की खबर है कि यो एपिसोड हिट जा रहा ...वा ऐड है न ....मैक्स लाईफ़ इश्योंरेंस वाले ..अरे वही केले ..पेट साफ़ रखते हैं वाली ...उनाने भी केइ है कि हमकू भी बीच का पांच घंटे का टैम दे दो ..अपना विज्ञापन दिखाना है ....ताऊ झंडू नेता सियार बनके भी घणा स्मार्ट लागे है ...जे सादी न करी होती तो ......राहुल महाजन को हटा के ताऊ का स्वयंवर करवाते ..दी परफ़ैक्ट ताई .फ़िर ताऊ ताई और वो...बस चैनल तो हिट था समझो
Friday, December 18, 2009 9:34:00 AM
अब इसके बाद हमने घोषणा कर दी कि हम करेंगे झुनिया से शादी...हमारे इतनी घोषणा करते ही हमारे चेले चमचे जो कि ट्रेंड थे, उन्होने हमारी जयजय कार के नारे बुलंद कर दिये और किसी को कुछ समझ आता उसके पहले ही पंडित चंपू बंदर जी ने झुनिया का हाथ पकडकर हमारे हाथ मे दे दिया और सात चक्कर खिलवा दिये फ़ेरों के नाम पर...बस हमारे इस कार्य कि बहुत भूरी भूरी प्रशंशा हुई. अगले दिन जंगल के सारे अखबार जो कि हमारे ही सेट किये हुये थे...उन्होने जबरदस्त कवरेज दिया और हमारी ख्याति गरीब का मसीहा के तौर पर चहुं और फ़ैल गई.......
shandaar
Happy Blogging
Friday, December 18, 2009 9:48:00 AM
ये ताऊ झंडू से राज़ उगलवाना कोई खालाजी का घर नहीं है....ये ताऊ घणा घिसा हुआ है..पहले तो मने ही टोपी पहना दी है...मुझे तो डर है कि ताऊ के चक्कर में मैं अपने ही सीक्रेट न उगलने लग जाऊं...वैसे ताऊ को जो थोड़ी थोड़ी देर बाद इंजेक्शन ठोक रहा हूं, उसके कई डब्बे मंगा लिए है मैने...ताऊ के बाद एक-एक ब्लॉगर भाई को बुला
कर लगाऊंगा...ऐसी ऐसी कहानियां निकलेंगी कि बॉलीवु़ड में फिर कोई कहने वाला नहीं मिलेगा कि अच्छी कहानियां नहीं मिलती...चलूं...ताऊ बदमासी दिखा रहा है...एक और इंजेक्शन ठोकूं...तभी तो पता चलेगा आगे झुनिया ताई
के साथ ताऊ झंडू के रोमांस के किस्से...
जय हिंद...
Friday, December 18, 2009 9:52:00 AM
तो ये रामप्यारी कौन से
Friday, December 18, 2009 10:16:00 AM
झुनिया हा हा हा हा हा हा हा हा , लकिन ताऊ जी बच के रहना शादी का राज तो खुल गया मगर साथ में एक निर्दोष की हत्या का राज भी खुल गया, अब अगर ये झुनिया भी खुशदीप जी के पास चली गयी अपने पूर्व जन्म का राज जानने और पता चल गया की वो इस जन्म ये ताऊ है तो हो गया काम फिर ह हा हा हा हा हा , अब ये की ताऊ जी के बाद रामप्यारी का नम्बर आना चईये जरुर कोई महान पंडित रही होगी पिछले जन्म में, सरे ग्रन्थ उपनिषद और ना जाने क्या क्या खोज लाती है रोज......मगर इस जनम में ये बिल्ली क्यों बनी ????? ये जरुर जानना है....हा हा हा हा
regards
Friday, December 18, 2009 11:30:00 AM
आज भी सभी सियार नेता बने बैठे हैं
बेहतरीन पोस्ट
प्रणाम
Friday, December 18, 2009 11:54:00 AM
bahut hi mazedar........agli kadi ka intzaar.
Friday, December 18, 2009 3:02:00 PM
हे हे, बढ़िया जोड़ी जमाई ताऊ ने :) शादी के बाद कनफ्लिक्ट नहीं हुआ?
Friday, December 18, 2009 4:12:00 PM
Friday, December 18, 2009 4:13:00 PM
Friday, December 18, 2009 6:04:00 PM
समाज में कुछ दुष्ट लोग ऎसे होते हैं जो कि "साले" जैसे गालीय शब्द का प्रयोग अपनी कुंठा मिटाने को करते हैं...और कुछ ऎसे भी होते हैं जिनका अपनी जिव्हा पर कोई नियन्त्रण नहीं होता ओर वो जाने अन्जाने में ऎसे शब्दों का उच्चारण कर बैठते हैं, जब कि उनकी ऎसी कोई मंशा नहीं होती।
अब इन लोगों को क्षमा करते हुए इन्हे वाणी पर नियन्त्रण रखना सिखाना चाहिए......किन्तु पहले प्रकार के मनुष्य तो निसंदेह "ताडन" एवं "प्रताडन" के अधिकारी हैं :)
Friday, December 18, 2009 7:44:00 PM
ताऊ, अगर ऐसे राज़ फाश होने लगेंगे तो कोई न कोई नेता इस "पिछले जन्म के कार्यक्रम" को "देशहित में" बंद कराने का मोर्चा ज़रूर लगाएगा.
Friday, December 18, 2009 7:56:00 PM
आपको नए साल (हिजरी 1431) की मुबारकबाद !!!
Friday, December 18, 2009 8:36:00 PM
wah tau lagya rah bus...
Friday, December 18, 2009 9:17:00 PM
ताऊ राम राम जी की भाई ताई को यह पोस्ट जरुर पढवाना, आप ने लिखा मजेदार है.
Friday, December 18, 2009 10:02:00 PM
हिन्दी में "बहुत बढ़िया!"
अंग्रेजी में "नाइस"
Saturday, December 19, 2009 6:19:00 AM
वर्तमान राजनीति पर करारा व्यंग्य लिख डाला । वाह मेरे ताऊ । ब्लोगिंग की शान है, ताऊ तो महान है ।
Saturday, December 19, 2009 6:50:00 AM
बातों ही बातों में क्या लपेटा है ...एक बहुत ही गंभीर सामाजिक समस्या को ...वाह ताऊ ...!!
Saturday, December 19, 2009 8:13:00 AM
वाह इन झंडुओं के झुंड की तो बात ही निराली है
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