ताऊ उवाच :-:


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बादशाह अकबर के सवाल और ताऊ के जवाब !

पिछले भाग मे आप पढ चुके हैं कि नौकरी के लिये इंटर्व्यु दिलवाने ताऊ को लेकर राज भाटिया जी बादशाह अकबर के दरबार मे पहुंचे और ताऊ वहां की शानौशौकत देख कर अचंभित रह गया. अब आगे पढिये.


बादशाह सलामत तो एक दम ही मुगलेआजम वाले गेट अप मे सोफ़े पर पसरे हुये इंटर्व्यु ले रहे थे...ताऊ भी अपना नंबर आने पर डरता डरता ऊठा ..और भाटिया जी का हाथ पकडे पकडे जिल्ले-इलाही के सामने खडा हो कर आदाब बजाते हुये बोला - लामलाम... सलदाल....लामलाम...

( असल मे ताऊ बादशाह के दरबार मे पहले बार गया था सो घबरा गया और घबराहट मे रामराम को लामलाम बोल गया और ताऊ की शोले का असर उस पर अभी बाकी था सो बादशाह सलामत की जगह सरदार बोल गया और वो भी तुतला कर सलदाल..कह गया. )

बादशाह अकबर - हूं..ये कौन सी भाषा बोल रहे हो बरखुरदार तुम? और भाटिया जी की तरफ़ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा.

भाटिया जी ने आदाब
बजाते हुये कहा - जहांपनाह...ये आपकी पुरानी सल्तनत दिल्ली के पास रोहतक का रहने वाला है हुजुर...आपको वो सल्तनत छोडे मुद्दतें हुई..अब आप जर्मनी मे जन्म लेकर वो भाषा भूल चुके हैं....ये आपको आपकी पुरानी सल्तनत की याद दिलाते हुये वहीं की हरयाणवी भाषा में कह रहा था...जहांपनाह का पुराना रुतबा वापस कायम हो....

बादशाह अकबर - वाह ..वाह..हमे ऐसे ही आदमी की आवश्यकता है...पुराना रुतबा तो आज भी हमारे सपनों मे रह रह कर आता है...अब जर्मनी मे रहकर नौ रत्न रखना तो हम अफ़ोर्ड नही कर सकते पर एक रत्न तो रख ही सकते हैं. हमारा मन भी लगा रहेगा. हां तो तुम्हारा नाम क्या है?

ताऊ - हुजुर मुझे ताऊ कहते हैं.

बादशाह अकबर - अरे वाह ...ताऊ..वाह..मा बदौलत को नाम पसंद आया...हमे ऐसा ही नाम वाला आदमी चाहिये था...आज से तुम हमारी सेवा मे सरकारी मुलाजिम हुये.....

ताऊ मन लगाकर जहांपनाह की सेवा करने लगा.. अब बादशाह सलामत तो ठहरे बादशाह सलामत... जो भी उटपटांग सवाल मन मे उठता उसका जवाब मांगते...जवाब देने पर इनाम नही तो हर बात मे ताऊ को या तो फ़ांसी चढवा दूंगा या..देश निकाला दे दूंगा की धमकी मिलती..ताऊ भी इन सबका अभ्यस्त हो चुका था.

कुछ दिन बाद .........बादशाह सलामत सोफ़े पर पसरे पडे हैं...ताऊ आदाब अर्ज की मुद्रा मे खडा है... जींस की पैंट पहने दो आधुनिक सेविकायें चाय नाश्ते की ट्रे लिये आरही हैं.....

अकबर -- हां तो ताऊ, हमको कुछ दिन से यह विचार आरहा है कि इस दुनियां मे सर्वश्रेष्ठ क्या है? बताओगे? वर्ना हम तुम्हारा जर्मनी से बाहर युगांडा ट्रांसफ़र करवा देंगे...

अब ताऊ ने सोचा कि आज फ़ंस गये...ताऊ ने सोचने के लिये २४ घंटे की मोहलत मांगना उचित समझा...और बोला - हुजुर, दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज कल सुबह ही आपकी खिदमत मे पेश कर दी जायेगी....हुजुर. अब मुझे आज्ञा दिजिये...मैं वो चीज लेकर कल सुबह आऊंगा.

अब बहुत सोच समझकर ताऊ ने आशीष खंडेलवाल जी से कहकर एक की-बोर्ड का इंतजाम करवाया और अगले दिन ताऊ वह कंप्युटर का की-बोर्ड लाल कपडे में लपेट कर बगल मे दबाये दबाये दरबार मे पेश हुआ और आदाब अर्ज बजाने के बाद उसे जहांपनाह को देते हुये बोला - हुजुर ये लिजिये दुनियां की सर्वश्रेष्ठ चीज.

बादशाह अकबर - ये क्या लाये हो ताऊ? क्या है इसमे ?

ताऊ - माई बाप...इसमे कंप्युटर का की-बोर्ड है हुजुर...

बादशाह सलामत की त्योरियां चढ गई और बुरी तरह से गुस्सा होकर अपनी पुरानी आदत अनुसार अकबरी तलवार खींचकर बोले - खामोश बद दिमाग ताऊ...हमसे मजाक करता है? तेरी हिम्मत कैसे हुई? मत भूल की हम अब भी बादशाह अकबर हैं. एक की-बोर्ड दुनियां की सर्वश्रेष्ठ वस्तु कैसे हो सकती है? अब आज अकबरी प्रकोप से तुझको कोई नही बचा सकता.

ताऊ बोला - गुस्ताखी माफ़ हो हुजुर..असल मे आजकल जीभ का काम की-बोर्ड से होने लगा है....जैसे जीभ से किसी के लिये अच्छा और मधुर बोलकर किसी का प्यार और प्रसंशा पाई जा सकती है हुजुर...वैसे ही आजकल ब्लागिंग मे इसी की-बोर्ड से सुंदर और मधुर लिखकर परम आनंद प्राप्त किया जा सकता है. यानि सबसे दोस्ती निभाई जा सकती है...सबकी आंखों का तारा बना जा सकता है अत: हे बादशाह श्रेष्ठ..आज के युग मे यह की-बोर्ड ही सर्वश्रेष्ठ है.

ताऊ के इस उत्तर पर बादशाह सलामत अति प्रशन्न हुये और बोले - ताऊ, तेरे उत्तर से हमारी तबियत गार्डन से भी बडा गार्डन हुई...मुगलिया सल्तनत का दौर होता तो आज हम तुमको दस बीस गांव की जागीर अता कर देते..पर फ़िल्हाल तुम ये १० हजार युरो की थैली स्वीकार करो. और अब हमको ये बताओ कि दुनियां मे सबसे निकृष्ट चीज क्या है?

ताऊ मन ही मन भुनभुनाते हुये बोला -- हुजुर निकृष्ट चीज भी कल सुबह आपकी पेशे खिदमत करुंगा. और ताऊ वहां से सोचते हुये निकल लेता है.

अगले दिन ताऊ फ़िर एक की-बोर्ड आशीष खंडेलवाल जी से मंगवा कर, लाल कपडे मे बांध कर बादशाह सलामत के पेशे खिदमत करता है और कहता है कि जहांपनाह यही है दुनियां की निकृष्ट चीज. फ़िर से की-बोर्ड देखकर बादशाह सलामत का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है.

अकबर बादशाह लाल पीले होते हुये चिल्लाए - दारोगा-ए-जिंदान....फ़ौरन से पेश्तर इस नामाकूल इंसान को ले जाकर अंधेरी कोठरी मे डाल दिया जाये. ये हमसे मजाक करने की जुर्रत कर रहा है? इस दो चव्वन्नी के ताऊ की हिम्मत तो देखो? अरे कल जिस चीज को सर्वश्रेष्ठ बता रहा था आज उसको ही निकृष्ट बता रहा है?

(ताऊ मन ही मन सोचता है कि राज भाटिया जी और समीर जी ने भी मुझसे क्या दुशमनी निकाली है? कैसे आदमी के पास नौकरी दिलवाई है? अगर इसका बस चले तो ये दिन मे तीन बार मुझे अनारकली की तरह दीवार मे चुनवादे?)

तभी बीच मे ही अपना हैट उतारते हुये महारानी जोधाबाई बोली - अय हुजुर..आप ये क्युं भूल जाते हैं कि ये हमारी दिल्ली वाली सल्तनत का समय नही है? ये जर्मनी है और यहां कोई किसी को काल कोठरियों मे नही डलवा सकता. आपको अपने बादशाह होने का शौक पूरा करना है तो तरीके से किया किजिये. पहले ताऊ की बात तो सुनिये पूरी तरह से....और ताऊ से मुखातिब होते हुये महारानी जोधा बाई बोली - हां तो ताऊ, बताओ कि ये की-बोर्ड कैसे दुनियां की निकृष्ट चीज है?

ताऊ - महारानी साहिबा की जय हो..आपका इकबाल बुलंद हो महारानी साहिबा...आपको जल्दी ही शहजादे सलीम की प्राप्ति हो....( महारानी जोधा ने जैसे ही शहजादे सलीम की प्राप्ति की दुआ सुनी तो जोधा बाई ने अपने गले का हार उतार कर ताऊ की तरफ़ बढा दिया)

ताऊ सर झुका कर हार लपकते हुये बोला - हुजुर..जहांपनाह, आजकल ब्लागिंग हो रही है जमकर..और यही वो चीज है की-बोर्ड.. जिससे चाहे जिसके खिलाफ़ जहर उगला जाता है.... और आदमी इस की-बोर्ड से जहर उगलकर...और मोटी मोटी गालियां देकर ... सबकी नफ़रत का पात्र बन जाता है... और कभी कभी ...आई. पी. एडरेस पकड मे आने पर बहुत ही तबियत से जूते भी खाता है.... और कई बार गलती से सांप के बिल मे भी हाथ डाल देता है. यानि ये समझ लिजिये हुजुर...कि इसी सत्यानाशी की-बोर्ड की वजह से अच्छा भला आदमी अपनी दुर्गति करवा लेता है. बहुत गंदी चीज है ये की बोर्ड जहांपनाह....

अत: हुजुर इससे बढकर आज की दुनियां मे कोई दूसरी निकृष्ट चीज हो ही नही सकती. और अगर आपको यकीन ना हो तो हिंदी ब्लागजगत मे दरियाफ़्त करवा लिजिये हुजुर....आजकल तो चारों तरफ़ यही मंजर है....कोई सरेआम किसी को गालियां देरहा है ..तो कोई बेनामी के नाम से शौक पूरा कर रहा है....चारों तरफ़ माहोल खराब है हुजुर....

ताऊ की बात सुनते सुनते ही बादशाह सलामत का गुस्सा आसमान पर चढ गया और चिल्ला कर बोले - दारोगा-ए-जिंदान... इन बेनामियों को पकडकर हमारे सामने पेश किया जाये....

दारोगा साहब आदाब बजाते हुये डर के मारे बोले - जो हुक्म ..मेरे आका...फ़ौरन से पेश्तर हुक्म की तामिली करवाता हूं और दारोगा साहब बेनामियों को हथकडी लगाने चल पडे...और ताऊ को फ़िर से दस हजार यूरो की थली इनाम मे देकर बादशाह सलामत ने अगला सवाल पूछा....... (क्रमश:)




इब खूंटे पै पढो :-


भिखारी ताऊ और प्रेमी-प्रेमिका



एक बार ताऊ सडक पर बैठा भीख मांग रहा था. थोडी देर मे वहां से एक जोडा (प्रेमी-प्रेमिका) स्कूटर पर निकला.


उनको देखकर ताऊ ने बडी जोर की हांक लगाई...दे देSSS ..दे देSSS बाबाSS..अल्लाह के नाम पर दे दे...तेरा जोडा बना रहे...और अपना कटोरा उनके आगे कर दिया.


उस आदमी ने तरस खाकर ५ रुपये का सिक्का कटोरे मे डाला.


अब ताऊ बोला -- दे दे बाबा दे दे..पचास रुपये  का नोट  दे दे....आज तो…


वो आदमी बोला - बाबा...पचास का क्या करेगा?


ताऊ बोला - दे दे बाबा..दे दे आज तो ताऊ बर्गर खायेगा....बाबा दे दे..

वो आदमी बोला - पर बर्गर तो पच्चीस रुपये मे आता है?


ताऊ - आज तो साथ मे मैं अपनी गर्ल फ़्रेंड को भी खिलाऊंगा..


वो आदमी बोला - कमाल है..भिखारियों की भी गर्ल फ़्रेंड होती हैं?


ताऊ - अरे बावली बूच...गर्ल फ़्रेंड तो पहले से ही थी.... भिखारी तो उसने बाद मे मुझे बना दिया....जैसे अब तू बनेगा.


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44 comments:

  Mishra Pankaj

Wednesday, October 21, 2009 3:42:00 PM

जिल्ले-इलाही लाम लाम लमस्कार हमाली तलफ से भी

  दिगम्बर नासवा

Wednesday, October 21, 2009 3:51:00 PM

अच्छा किया आपका खूंटा पढ़ लिया ... इब गर्ल फ्रेंड नहीं बनानी ......... कम से कम २५ रूपये में तो कम चल जाएगा ......

  Bhairav

Wednesday, October 21, 2009 4:15:00 PM

ताऊ श्रेष्ठ और निकृष्ट चीज के बारे में जानकर तसल्ली हुई और सतर्क होगये. और गर्लफ़्रेण्ड के बारे मे भी अच्छी शिक्षा ले ली. ऐसी गलती मैं तो नही करुंगा .

  भानाराम जाट

Wednesday, October 21, 2009 4:16:00 PM

आज तो जबरदस्त पोस्ट और उससे भी सवाया खूंटा गाड दिया ताऊ। जय हो ताऊ महाराज की।
बस ऐसा ही कामकाज चालू रहे।

  Science Bloggers Association

Wednesday, October 21, 2009 4:38:00 PM

सवाल जवाब जोरदार हैं।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

  अभिषेक ओझा

Wednesday, October 21, 2009 4:58:00 PM

इस बादशाह सलामत की तरफ से इस पोस्ट पर दस हजार असर्फियाँ दी जायेंगी. जगह है ताऊ का खूंटा. इब खूंटे पै मिलते हैं अगली बार फिर. :) अगर तब तक गर्ल फ्रेंड बन गयी तो फिर तो हो गया काम !

  Murari Pareek

Wednesday, October 21, 2009 5:00:00 PM

वाह अकबर का ज़माना अधुनिकिया दिया पर बेनामियों कब हाजिर करेंगे ! इस की बोर्ड को उंचा और निचा दोनों कर दिया लगता है, अबकी बार जिल्ले इलाही कुछ और पूछेंगे ?? भाई आशीष जी के बोर्ड का इन्तजाम भरपूर रखियो ताउजी आधा इनाम आपको पकड़ते रहेंगे !! वैसे भी ताऊ की हालत में अभी सुधार आ रहा है पर वापस ये गर्ल फ्रेंड का चक्कर बुर्गेर खिलाने का फंदा वापस कंगाल कर देगा!!! भई बहुत बढिया ताउजी मजा आ गया !!

  राज भाटिय़ा

Wednesday, October 21, 2009 5:43:00 PM

ताऊ अब कल बेनामी ओर नर ओर नारियो की
लिस्ट भी यहां छाप दो... कसम से मजा आ जायेगा, मै ५० नही सॊ रुपये दुंगा साथ मै प्रेमिका के बच्चो को भी बर्गर खिलाना:)

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

Wednesday, October 21, 2009 6:35:00 PM

जगताऊ जी।
ये नये-नये आइडिया आपके दिमाग में
कहाँ से आते हैं?
बुड़ापे में ये हाल है तो जवानी में तो
उड़ती चिड़िया जरूर पकड़ते होगे।
तुम अकबर के रत्नों के टोडरमल जरूर रहे होंगे।
तभी तो तुमने अकबर को तलाश कर लिया।
बहुत बधाई!
अगली कड़ी का इन्तजार है।

  समयचक्र

Wednesday, October 21, 2009 6:39:00 PM

हा हा हा हा हा आनंद आ गया ताउजी बहुत सुन्दर ...

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

Wednesday, October 21, 2009 8:08:00 PM

ताऊ सुना है कि बादशाह अकबर सभी धर्मों का बहुत सम्मान किया करता था ओर उसने अपने दरबार में सभी धर्मों से संबंधित लोगों को स्थान दिया हुआ था । अगर उसके दरबार में राजपुरोहित की जगह खाली हो तो म्हारा ख्याल जरूर रख लियो :)

  mehek

Wednesday, October 21, 2009 8:16:00 PM

ha ha key board ka zamana hai:)waah,khunte pe bhi mazedar raha.

  Ratan Singh Shekhawat

Wednesday, October 21, 2009 8:53:00 PM

आजकल ब्लागिंग हो रही है जमकर..और यही वो चीज है की-बोर्ड.. जिससे चाहे जिसके खिलाफ़ जहर उगला जाता है.... और आदमी इस की-बोर्ड से जहर उगलकर...और मोटी मोटी गालियां देकर ... सबकी नफ़रत का पात्र बन जाता है... और कभी कभी ...आई. पी. एडरेस पकड मे आने पर बहुत ही तबियत से जूते भी खाता है..

ताऊ श्री ! अवांछित तत्वों पर जोर का जूता मारा है आज !

खूंटे पर तो हंसी ही नहीं रुक रही |

  Shefali Pande

Wednesday, October 21, 2009 9:39:00 PM

वाह मज़ा आ गया .... हम भी बेनामियों को हथकडी लगे हुए देखना चाहते हैं ...

  दीपक "तिवारी साहब"

Wednesday, October 21, 2009 10:45:00 PM

वो आदमी बोला - कमाल है..भिखारियों की भी गर्ल फ़्रेंड होती हैं?

ताऊ - अरे बावली बूच...गर्ल फ़्रेंड तो पहले से ही थी.... भिखारी तो उसने बाद मे मुझे बना दिया....जैसे अब तू बनेगा.

वाह ताऊ आज तो बहुत जोरदार खूंटा...हंस हंस कर बुरा हाल है.:)

  दीपक "तिवारी साहब"

Wednesday, October 21, 2009 10:45:00 PM

वो आदमी बोला - कमाल है..भिखारियों की भी गर्ल फ़्रेंड होती हैं?

ताऊ - अरे बावली बूच...गर्ल फ़्रेंड तो पहले से ही थी.... भिखारी तो उसने बाद मे मुझे बना दिया....जैसे अब तू बनेगा.

वाह ताऊ आज तो बहुत जोरदार खूंटा...हंस हंस कर बुरा हाल है.:)

  makrand

Wednesday, October 21, 2009 10:46:00 PM

bahut behatrin taauji

  sonu

Wednesday, October 21, 2009 10:47:00 PM

लाजवाब पोस्ट आज तो मजा आगया बीरबल साहब.:)

  MANOJ KUMAR

Wednesday, October 21, 2009 11:22:00 PM

मन लट्टू हो गया।

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Wednesday, October 21, 2009 11:32:00 PM

बादशाह और जोधाबाई भी आ गए चक्कर में ताऊ और ब्लागिंग के।

  काजल कुमार Kajal Kumar

Wednesday, October 21, 2009 11:51:00 PM

"अरे बावली बूच...गर्ल फ़्रेंड तो पहले से ही थी.... भिखारी तो उसने बाद मे मुझे बना दिया....जैसे अब तू बनेगा"
ही हा हा हा हा हा

  अल्पना वर्मा

Thursday, October 22, 2009 12:06:00 AM

बहुत ही रोचक प्रस्तुति...
अंत में भिखारी वाला प्रसंग भी मज़ेदार है...

  सैयद | Syed

Thursday, October 22, 2009 12:44:00 AM

अरे वाह !! ये तो नयी फिल्म शुरू हो गए... मजेदार ...

  आलोक

Thursday, October 22, 2009 3:57:00 AM

भिखारी तो उसने बाद मे मुझे बना दिया
मस्ते है!

  वाणी गीत

Thursday, October 22, 2009 4:20:00 AM

आधुनिक अकबर को ताऊ ही ढंग सा जवाब दे सके है ...
पर ताऊ ...ये क्या....गर्ल फ्रेंड भिखारी बना देती है ...आगे ये भी जोडो ...अगर घर में पत्नी होते हुए भी गर्ल फ्रेंड बनाई तो ...!!

  Udan Tashtari

Thursday, October 22, 2009 5:13:00 AM

बहुत चटक जबाबी है ताऊ..श्रेष्ट और निकृष्ट...दोनों एक साथ एक ही में..सही है..दिया हाथ में आया है...चाहो तो घर रोशन कर लो और चाहो तो आग लगा दो.



खूंटे से मस्त रहा!!

  seema gupta

Thursday, October 22, 2009 9:15:00 AM

हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा अरे बावली बूच...गर्ल फ़्रेंड तो पहले से ही थी.... भिखारी तो उसने बाद मे मुझे बना दिया....जैसे अब तू बनेगा. हा हा हा हा हा हा हा हा बेहद रोचक और मजेदार...
regards

  खुशदीप सहगल

Thursday, October 22, 2009 9:51:00 AM

दारोगा-ए-जिदान को किन-किन के नामों की फेहरिस्त सौंपनी है, ताऊ ये भतीजा इस काम में मदद करे क्या आपकी...

जय हिंद...

  संजय बेंगाणी

Thursday, October 22, 2009 11:52:00 AM

सही है जी की-बोर्ड से बूरा कुछ भी नहीं.

  विनीता यशस्वी

Thursday, October 22, 2009 1:24:00 PM

Lajwaab post...aur khunt to behtreen hai...

  neelima sukhija arora

Thursday, October 22, 2009 1:56:00 PM

बहुत बढिया मजेदार :-)

  वन्दना

Thursday, October 22, 2009 4:07:00 PM

wah wah.....padhkar mazaa aa gaya........dono hi kisse mazedar hain.

  मीत

Thursday, October 22, 2009 5:43:00 PM

लगता है जोधा बाई तो ताऊ आपकी फेन हो गई है...
हा.. हा.,. हा..
मजा आ गया...
बढ़िया पोस्ट लिखी है/...
मीत

  सुशील कुमार छौक्कर

Thursday, October 22, 2009 6:36:00 PM

ये ताऊ वाकई कमाल के है। हँसी रुकती नही।

  Dr. Jitendra Bagria

Thursday, October 22, 2009 8:24:00 PM

wah wah taau ji....
aapko diwali ki ghani ghani ram ram :)
akbar se jara bachke rahiyega kahin sachmuch diwar mein na lagwa de... love u !!

  Babli

Friday, October 23, 2009 8:06:00 AM

इस शानदार , जानदार और ज़बरदस्त पोस्ट के लिए बधाइयाँ!

  योगेन्द्र मौदगिल

Friday, October 23, 2009 3:07:00 PM

साच्ची बात तै खूंटा गाड़ राख्या... साधुवाद....

  लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`

Friday, October 23, 2009 8:11:00 PM

;-) ताऊ जी , आपके जाल घर पर आते ही
चेहरे पे , मुस्कराहट खिल जाती है
- लावण्या

  अविनाश वाचस्पति

Friday, October 23, 2009 9:33:00 PM

की बोर्ड की ऐसी जैसी

तैसी वैसी कर दी कैसी कैसी

अब इस की बोर्ड का राग का

खटकारा कौन चटकाएगा।

कीबोर्ड की मनभावन कथा

बेनामियों के नाम

नामधारियों के परवान

भी घोषित कर दिए जाते

तो कितने ही फूले न समाते।

  अविनाश वाचस्पति

Friday, October 23, 2009 9:35:00 PM

कीबोर्ड की ऐसी जैसी

तैसी वैसी कर दी कैसी कैसी

बेनामियों के कर देते नाम जाहिर

नामधारियों के परवान हाजिर।


कीबोर्ड कथा खटरागी रही।

  Devendra

Saturday, October 24, 2009 7:25:00 AM

सवाल जवाब के माध्यम से आपने हास्य-व्यंग्य की पुरानी शैली को जीवंत किया है।
हमारी कामना है कि यह सिलसिला यूँ ही चलता रहे और पाठकों को रोचक सामग्री पढ़ने को मिलती रहे।
चुटकुला सुना हुआ है। प्रयास करें कि नए चुटकुले पढ़ने को मिलें।

  Devendra

Saturday, October 24, 2009 7:26:00 AM

सवाल जवाब के माध्यम से आपने हास्य-व्यंग्य की पुरानी शैली को जीवंत किया है।
हमारी कामना है कि यह सिलसिला यूँ ही चलता रहे और पाठकों को रोचक सामग्री पढ़ने को मिलती रहे।
चुटकुला सुना हुआ है। प्रयास करें कि नए चुटकुले पढ़ने को मिलें।

  M.A.Sharma "सेहर"

Saturday, October 24, 2009 8:29:00 AM

haha.....
:))))
Kahna kya hai ..bas :))))

  Harkirat Haqeer

Sunday, October 25, 2009 1:16:00 PM

वाह...वाह...ताऊ ये गर्ल फ्रैंड का नुस्खा तो पहली बार पता चला .....काश हम भी बन पाते कभी .....!!

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