"हनन" द मर्डर



                                                                   

                                                             "हनन" द मर्डर

   

   

    ए परिंदे उंची उडान भर
    ये समूचा आकाश तेरा है
    पर ध्यान रहे
    और परिंदों का भी हक उतना
    जितना ये नभ तेरा है
    उनका भी ख्याल रख
    मत कर हनन उन सीमाओ का
    जहां दूसरे के अधिकार मारे जाते हों
   जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
   हडका रहा हो
   क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?




    (आभार सुश्री सीमा गुप्ता)



41 comments:

  HEY PRABHU YEH TERA PATH

Wednesday, October 14, 2009 3:49:00 PM

उनमे से कोई बाज हो ?

  HEY PRABHU YEH TERA PATH

Wednesday, October 14, 2009 3:50:00 PM

उनमे से कोई बाज हो ?
सुन्दर बढीया जी,

  भानाराम जाट

Wednesday, October 14, 2009 3:59:00 PM

bahut savdhan karati kavita. dhanyavad.

  Udan Tashtari

Wednesday, October 14, 2009 4:50:00 PM

बहुत उम्दा संदेश देती रचना पसंद आई, सीमा जी को बधाई.

  Mishra Pankaj

Wednesday, October 14, 2009 5:02:00 PM

वाह ताऊ जी अज तो आपने एक  नया सन्देश दे दिया दुनिया वालो को ....
सुन्दर लगा बधाई हो सीमा जी आपको !!

  अभिषेक ओझा

Wednesday, October 14, 2009 5:24:00 PM

सही बात है जी, बाज ना भी हो गौरैया ही सही. लेकिन 'ये' परिंदे ख्याल कहाँ रखते हैं !

  राज भाटिय़ा

Wednesday, October 14, 2009 5:44:00 PM

बहुत सुंदर अप ने इस कविता मै हमे हमारे अधिकार की सीमा बताई है, आप की बात से सहमत हुं.
धन्यवाद
आप को ओर आप के परिवार को दीपावली की शुभ कामनायें

  दिगम्बर नासवा

Wednesday, October 14, 2009 5:47:00 PM

उनमे से कोई बाज हो ..... भई gazab ka सन्देश दिया hai दुनिया वालो को .... bahoot khoob likha hai ... kamaal ka ...

  डॉ टी एस दराल

Wednesday, October 14, 2009 5:57:00 PM

काश, परिंदे ये समझ पाते.
अच्छी संदेशात्मक रचना.

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

Wednesday, October 14, 2009 6:56:00 PM

जिन्हे तू
साधारण परिंदा
समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता?
उनमे से
कोई बाज हो ?

बहुत ही सुन्दर प्रतीक प्रयोग किये हैं
सीमा जी आपने!
धनतेरस, दीपावली और भइया-दूज पर
आप सभी को ढेरों शुभकामनाएँ!

  Pandit Kishore Ji

Wednesday, October 14, 2009 7:04:00 PM

waah kya kah diya aapne ....unme se koi baaz ho waah bahut khoob

  सैयद | Syed

Wednesday, October 14, 2009 7:36:00 PM

बहुत बढ़िया !!!

... और प्रस्तुतिकरण तो और भी जबरदस्त है.

  अल्पना वर्मा

Wednesday, October 14, 2009 7:46:00 PM

सही कहा ,किसी के भी द्वारा दूसरो के अधिकारों का हनन सही नहीं है.
कविता की सुन्दर प्रस्तुति.

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Wednesday, October 14, 2009 7:53:00 PM

यातायात के नियम का स्मरण पत्र।

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Wednesday, October 14, 2009 7:59:00 PM

बहुत सुन्दर!
यहाँ तो अक्सर देखते हैं कि जब लॉन में छोटी चिडियां अजीब सी आवाजें निकाल रही हों या कोव्वे कातर स्वर में पुकार रहे हों तो किसी शाख पर ज़रूर कोई बाज़ या शिकरा बैठा होगा.

  Ratan Singh Shekhawat

Wednesday, October 14, 2009 8:39:00 PM

जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?

यही बात लोग समझ ले तो कभी किसी तरह का विवाद ही ना हो |
बहुत बढ़िया रचना |
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ |

  पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

Wednesday, October 14, 2009 11:53:00 PM

सुन्दर सन्देश समेटे एक बढिया रचना....
आभार्!

  AlbelaKhatri.com

Thursday, October 15, 2009 12:32:00 AM

वाह ! क्या बात है..........

आनन्द आ गया,,,,,,,,,,,,,

  Vivek Rastogi

Thursday, October 15, 2009 8:29:00 AM

बाज, बिल्कुल सही कहा। संदेशप्रद शिक्षाप्रद कविता बस लोगों को समझना चाहिये।

  Gagan Sharma, Kuchh Alag sa

Thursday, October 15, 2009 8:46:00 AM

ना जाने किस भेष में बाबा मिल जाए बाज रे !
जियो और जीने दो।

  sonujanam

Thursday, October 15, 2009 8:53:00 AM

बहुत सही बात कहती रचना।

  bhairavnath1

Thursday, October 15, 2009 8:54:00 AM

bahut badhiya kavita.

  दीपक "तिवारी साहब"

Thursday, October 15, 2009 9:01:00 AM

जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?


बहुत ही सुंदर प्रस्तुतिकरण के साथ गहन संदेश देती रचना.

  दीपक "तिवारी साहब"

Thursday, October 15, 2009 9:02:00 AM

जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?


बहुत ही सुंदर प्रस्तुतिकरण के साथ गहन संदेश देती रचना.

  kamalmukesh

Thursday, October 15, 2009 9:02:00 AM

bahut badhiya upamae di hai.

  makrand

Thursday, October 15, 2009 9:04:00 AM

बहुत गजब की सीख दी है और बात भी सही है.
आभार.

  M.A.Sharma "सेहर"

Thursday, October 15, 2009 9:10:00 AM

Amazing lines !!

  मीत

Thursday, October 15, 2009 12:18:00 PM

बेहद सुंदर अभिव्यक्ति...
सीमा जी को धन्यवाद...
ओर सभी को मेरी ओर से धन तेरस की शुभकामनायें
मीत

  अनिल कान्त :

Thursday, October 15, 2009 3:01:00 PM

बहुत उम्दा संदेश
वाह!!

  नीरज जाट जी

Thursday, October 15, 2009 4:51:00 PM

जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो
.
क्या जबरदस्त बात है!!!!

  मोहन वशिष्‍ठ 9988097449

Thursday, October 15, 2009 5:06:00 PM

दीपावली पर्व की आपको एवं समस्‍त परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं वैभव लक्ष्‍मी आप सभी पर कृपा बरसाएं। लक्ष्‍मी माता अपना आर्शिवाद बरसाएं

  योगेन्द्र मौदगिल

Friday, October 16, 2009 2:47:00 AM

दीवाली हर रोज हो तभी मनेगी मौज
पर कैसे हर रोज हो इसका उद्गम खोज
आज का प्रश्न यही है
बही कह रही सही है

पर इस सबके बावजूद

थोड़े दीये और मिठाई सबकी हो
चाहे थोड़े मिलें पटाखे सबके हों
गलबहियों के साथ मिलें दिल भी प्यारे
अपने-अपने खील-बताशे सबके हों
---------शुभकामनाऒं सहित
---------मौदगिल परिवार

  शरद कोकास

Friday, October 16, 2009 6:20:00 AM

साहित्य में बाज शोषक का प्रतीक है इसका एक पाठ यह भी हो सकता है कि आकाश बाज के लिये छोड़ दिया जाये । ऐसा तो खैर दुनिया मे हो ही रहा है ।

  seema gupta

Friday, October 16, 2009 9:57:00 AM

झिलमिलाते दीपो की आभा से प्रकाशित , ये दीपावली आप सभी के घर में धन धान्य सुख समृद्धि और इश्वर के अनंत आर्शीवाद लेकर आये. इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए.."
regards

  ज़ाकिर अली ‘रजनीश’

Friday, October 16, 2009 11:47:00 AM

सुंदर व्यंजनाएं।
दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
आप ब्लॉग जगत में निराला सा यश पाएं।

-------------------------
आइए हम पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Friday, October 16, 2009 5:56:00 PM

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!

  Suresh Gupta

Friday, October 16, 2009 6:28:00 PM

आप को दीपावली की शुभकामनाएं.

  Nirmla Kapila

Friday, October 16, 2009 7:27:00 PM

सुन्दर संदेश देती्रचना के लिये बधाई । दीपावली की शुभकामनायें। स्सेमा जी ताऊ जी क्या अपके पीछे छुप कर बैठे हैं नज़र नहीं आ रहे। उन्हें भी दीपावली मुबारक्

  ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey

Friday, October 16, 2009 8:04:00 PM

हड़कना-हड़काना तो भूत-वर्तमान-भविष्य है!

  दिलीप कवठेकर

Saturday, October 17, 2009 7:38:00 AM

दिपावली की ढेर सारी शुभकामनायें...

आपके बधाई संदेश के चित्र में दो उल्लू दिख रहें हैं.

मंदी के इस दौर में लक्ष्मी जी को ओवरटाईम करना पडेगा. इसिलिये शायद दो दो उल्लू, दो शिफ़्ट में !!!

  संजय भास्कर

Thursday, January 14, 2010 3:04:00 PM

बहुत उम्दा संदेश देती रचना पसंद आई,

ताऊ उवाच :-:


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