"हनन" द मर्डर
ए परिंदे उंची उडान भर (आभार सुश्री सीमा गुप्ता) |
"हनन" द मर्डर
Wednesday, October 14, 2009 at 3:33 PM Posted by ताऊ रामपुरिया
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About Me
- ताऊ रामपुरिया
- अब अपने बारे में क्या कहूँ ? मूल रुप से हरियाणा का रहने वाला हूँ ! लेखन मेरा पेशा नही है ! थोडा बहुत गाँव की भाषा में सोच लेता हूँ , कुछ पुरानी और वर्त्तमान घटनाओं को अपने आतंरिक सोच की भाषा हरयाणवी में लिखने की कोशीश करता हूँ ! वैसे जिंदगी को हल्के फुल्के अंदाज मे लेने वालों से अच्छी पटती है | गम तो यो ही बहुत हैं | हंसो और हंसाओं , यही अपना ध्येय वाक्य है | हमारे यहाँ एक पान की दूकान पर तख्ती टंगी है , जिसे हम रोज देखते हैं ! उस पर लिखा है : कृपया यहाँ ज्ञान ना बांटे , यहाँ सभी ज्ञानी हैं ! बस इसे पढ़ कर हमें अपनी औकात याद आ जाती है ! और हम अपने पायजामे में ही रहते हैं ! एवं किसी को भी हमारा अमूल्य ज्ञान प्रदान नही करते हैं ! ब्लागिंग का मेरा उद्देश्य चंद उन जिंदा दिल लोगों से संवाद का एक तरीका है जिनकी याद मात्र से रोम रोम खुशी से भर जाता है ! और ऐसे लोगो की उपस्थिति मुझे ऐसी लगती है जैसे ईश्वर ही मेरे पास चल कर आ गया हो ! आप यहाँ आए , मेरे बारे में जानकारी ली ! इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ !
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41 comments:
Wednesday, October 14, 2009 3:49:00 PM
उनमे से कोई बाज हो ?
Wednesday, October 14, 2009 3:50:00 PM
उनमे से कोई बाज हो ?
सुन्दर बढीया जी,
Wednesday, October 14, 2009 3:59:00 PM
bahut savdhan karati kavita. dhanyavad.
Wednesday, October 14, 2009 4:50:00 PM
बहुत उम्दा संदेश देती रचना पसंद आई, सीमा जी को बधाई.
Wednesday, October 14, 2009 5:02:00 PM
वाह ताऊ जी अज तो आपने एक नया सन्देश दे दिया दुनिया वालो को ....
सुन्दर लगा बधाई हो सीमा जी आपको !!
Wednesday, October 14, 2009 5:24:00 PM
सही बात है जी, बाज ना भी हो गौरैया ही सही. लेकिन 'ये' परिंदे ख्याल कहाँ रखते हैं !
Wednesday, October 14, 2009 5:44:00 PM
बहुत सुंदर अप ने इस कविता मै हमे हमारे अधिकार की सीमा बताई है, आप की बात से सहमत हुं.
धन्यवाद
आप को ओर आप के परिवार को दीपावली की शुभ कामनायें
Wednesday, October 14, 2009 5:47:00 PM
उनमे से कोई बाज हो ..... भई gazab ka सन्देश दिया hai दुनिया वालो को .... bahoot khoob likha hai ... kamaal ka ...
Wednesday, October 14, 2009 5:57:00 PM
काश, परिंदे ये समझ पाते.
अच्छी संदेशात्मक रचना.
Wednesday, October 14, 2009 6:56:00 PM
जिन्हे तू
साधारण परिंदा
समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता?
उनमे से
कोई बाज हो ?
बहुत ही सुन्दर प्रतीक प्रयोग किये हैं
सीमा जी आपने!
धनतेरस, दीपावली और भइया-दूज पर
आप सभी को ढेरों शुभकामनाएँ!
Wednesday, October 14, 2009 7:04:00 PM
waah kya kah diya aapne ....unme se koi baaz ho waah bahut khoob
Wednesday, October 14, 2009 7:36:00 PM
बहुत बढ़िया !!!
... और प्रस्तुतिकरण तो और भी जबरदस्त है.
Wednesday, October 14, 2009 7:46:00 PM
सही कहा ,किसी के भी द्वारा दूसरो के अधिकारों का हनन सही नहीं है.
कविता की सुन्दर प्रस्तुति.
Wednesday, October 14, 2009 7:53:00 PM
यातायात के नियम का स्मरण पत्र।
Wednesday, October 14, 2009 7:59:00 PM
बहुत सुन्दर!
यहाँ तो अक्सर देखते हैं कि जब लॉन में छोटी चिडियां अजीब सी आवाजें निकाल रही हों या कोव्वे कातर स्वर में पुकार रहे हों तो किसी शाख पर ज़रूर कोई बाज़ या शिकरा बैठा होगा.
Wednesday, October 14, 2009 8:39:00 PM
जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?
यही बात लोग समझ ले तो कभी किसी तरह का विवाद ही ना हो |
बहुत बढ़िया रचना |
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ |
Wednesday, October 14, 2009 11:53:00 PM
सुन्दर सन्देश समेटे एक बढिया रचना....
आभार्!
Thursday, October 15, 2009 12:32:00 AM
वाह ! क्या बात है..........
आनन्द आ गया,,,,,,,,,,,,,
Thursday, October 15, 2009 8:29:00 AM
बाज, बिल्कुल सही कहा। संदेशप्रद शिक्षाप्रद कविता बस लोगों को समझना चाहिये।
Thursday, October 15, 2009 8:46:00 AM
ना जाने किस भेष में बाबा मिल जाए बाज रे !
जियो और जीने दो।
Thursday, October 15, 2009 8:53:00 AM
बहुत सही बात कहती रचना।
Thursday, October 15, 2009 8:54:00 AM
bahut badhiya kavita.
Thursday, October 15, 2009 9:01:00 AM
जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?
बहुत ही सुंदर प्रस्तुतिकरण के साथ गहन संदेश देती रचना.
Thursday, October 15, 2009 9:02:00 AM
जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो ?
बहुत ही सुंदर प्रस्तुतिकरण के साथ गहन संदेश देती रचना.
Thursday, October 15, 2009 9:02:00 AM
bahut badhiya upamae di hai.
Thursday, October 15, 2009 9:04:00 AM
बहुत गजब की सीख दी है और बात भी सही है.
आभार.
Thursday, October 15, 2009 9:10:00 AM
Amazing lines !!
Thursday, October 15, 2009 12:18:00 PM
बेहद सुंदर अभिव्यक्ति...
सीमा जी को धन्यवाद...
ओर सभी को मेरी ओर से धन तेरस की शुभकामनायें
मीत
Thursday, October 15, 2009 3:01:00 PM
बहुत उम्दा संदेश
वाह!!
Thursday, October 15, 2009 4:51:00 PM
जिन्हे तू साधारण परिंदा समझ कर
हडका रहा हो
क्या पता ? उनमे से कोई बाज हो
.
क्या जबरदस्त बात है!!!!
Thursday, October 15, 2009 5:06:00 PM
दीपावली पर्व की आपको एवं समस्त परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं वैभव लक्ष्मी आप सभी पर कृपा बरसाएं। लक्ष्मी माता अपना आर्शिवाद बरसाएं
Friday, October 16, 2009 2:47:00 AM
दीवाली हर रोज हो तभी मनेगी मौज
पर कैसे हर रोज हो इसका उद्गम खोज
आज का प्रश्न यही है
बही कह रही सही है
पर इस सबके बावजूद
थोड़े दीये और मिठाई सबकी हो
चाहे थोड़े मिलें पटाखे सबके हों
गलबहियों के साथ मिलें दिल भी प्यारे
अपने-अपने खील-बताशे सबके हों
---------शुभकामनाऒं सहित
---------मौदगिल परिवार
Friday, October 16, 2009 6:20:00 AM
साहित्य में बाज शोषक का प्रतीक है इसका एक पाठ यह भी हो सकता है कि आकाश बाज के लिये छोड़ दिया जाये । ऐसा तो खैर दुनिया मे हो ही रहा है ।
Friday, October 16, 2009 9:57:00 AM
झिलमिलाते दीपो की आभा से प्रकाशित , ये दीपावली आप सभी के घर में धन धान्य सुख समृद्धि और इश्वर के अनंत आर्शीवाद लेकर आये. इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए.."
regards
Friday, October 16, 2009 11:47:00 AM
सुंदर व्यंजनाएं।
दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
आप ब्लॉग जगत में निराला सा यश पाएं।
-------------------------
आइए हम पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।
Friday, October 16, 2009 5:56:00 PM
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!
Friday, October 16, 2009 6:28:00 PM
आप को दीपावली की शुभकामनाएं.
Friday, October 16, 2009 7:27:00 PM
सुन्दर संदेश देती्रचना के लिये बधाई । दीपावली की शुभकामनायें। स्सेमा जी ताऊ जी क्या अपके पीछे छुप कर बैठे हैं नज़र नहीं आ रहे। उन्हें भी दीपावली मुबारक्
Friday, October 16, 2009 8:04:00 PM
हड़कना-हड़काना तो भूत-वर्तमान-भविष्य है!
Saturday, October 17, 2009 7:38:00 AM
दिपावली की ढेर सारी शुभकामनायें...
आपके बधाई संदेश के चित्र में दो उल्लू दिख रहें हैं.
मंदी के इस दौर में लक्ष्मी जी को ओवरटाईम करना पडेगा. इसिलिये शायद दो दो उल्लू, दो शिफ़्ट में !!!
Thursday, January 14, 2010 3:04:00 PM
बहुत उम्दा संदेश देती रचना पसंद आई,
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