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"और रामकटोरी उदास हो गई"

"और रामकटोरी उदास हो गई"




नौकरानी का कहना
मेमसाहिबा स्कूल खुलने वाले हैं

इस बार मुन्नू को भी स्कूल भेजना है
बेटी की फ़ीस भरनी है.
कुछ एडवांस मिल जाता तो
मेमसाहिबा का फ़रमाना
रामकटोरी तुझे शर्म भी नही आती?
अभी पिछला एडवांस बाकी चल रहा है
और तू नये की बात करती है?
काम करना हो कर
वर्ना मैं कोई दुसरी बाई रख लूंगी.

इसी बीच हल्की फ़ुहारों का शुरु होना
और साहब की फ़रमाईश

मौसम कितना सुहावना हो गया है?
गर्मा गर्म कचोडियां हो जायें
तो कुछ बात बने
मेमसाहिबा का चिल्लाना
रामकटोरी ओ रामकटोरी
अरे कहां मर गई?
देख मौसम कितना सुहाना होगया है?
जरा कचोडियां और भजिये तल ले
रामकटोरी का कचोडियां तलते हुये

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.


(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

परिचयनामा में 23 जुलाई गुरुवार को मिलिये : पारूल…चाँद पुखराज का से. शाम 3:33 PM पर

39 comments:

  1. सच कहा ताऊ जी, सब इन्सान के अपने हालातों पर निर्भर करता है। किसी के लिए ईद तो किसी के लिए रोजा भी हो सकता है।
    बहुत बढिया रचना!!!! आभार!

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  2. कहीं पर ईद, कहीं पर मातम
    हाय!! ये कैसा आया मौसम!!


    -वाकई, एक ही मौसम के स्थितियों से मायने बदल जाते हैं.

    सुन्दर रचना//

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  3. बहुत गहरी बात कहलवा दी राम कटोरी के बहाने ...क्या कहूँ ..

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  4. ज़िंदगी की हकीकत को बयान करती कविता.. आभार

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  5. बहुत सही कहा है..किसी के लिए जो अच्छा है वही किसी और के लिए बुरा..
    एक ही मौसम दो तरह की खबरें ले कर आता है और गरीब के लिए तो सारे मौसम एक से ही होते हैं.

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  6. इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
    जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
    क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?...
    यह मौसम भी बहुत बेईमान होता है किसी के लिए खुशी तो किसी के लिए गम का सौगात लाता है.

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  7. इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
    जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
    क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
    और रामकटोरी उदास हो गई.

    सुश्री सीमाजी गुप्ता!
    इन पक्तियो मे मुझे सामाजिक एवम आर्थिक पहलुओ मे मानवीय जीवन कि एक ऐसी व्यथा दिखाई दे रहे है जहॉ दर्द ही दर्द है। वास्तव मे हमे इन पक्तियो कि गहराई मे जाने की जरुरत है।

    आपकी शब्दावली अर्थ पुर्ण लगी जो समाज मे एक सन्देस देती है।

    आभार ताऊजी का भी !

    हे प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई टाईगर

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  8. बहुत सुंदर और संवेदनशील कविता।

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  9. उदास होने की बात है मगर दुनिया ऐसे ही तो चल रही है !

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  10. आम जिन्दगी के दुख-दर्द को
    शब्दों मे बड़े करीने से पिरोया है।

    आभार सुश्री सीमा गुप्ता जी आपका।

    ताऊ को धन्यवाद!

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  11. बहुत गहरी संवेदन्शील कहानी सीमाजी को बधाई

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  12. जीवन की यही कटु सच्चाई है!

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  13. जीवन की यही कटु सच्चाई है!

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  14. इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
    जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
    क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
    और रामकटोरी उदास हो गई.

    एक कटु सत्य को कहा आपने.

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  15. इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
    जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
    क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
    और रामकटोरी उदास हो गई.

    एक कटु सत्य को कहा आपने.

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  16. बहुत ही मार्मिक रचना.

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  17. बहुत ही मार्मिक रचना.

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  18. बडा जालिम होता है ये जिदंगी का मौसम। बहुत उम्दा भाव।

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  19. रचना पढकर मन उदास होगया. वाकई बहुत ही कडवी सच्चाई है ये.

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  20. रचना पढकर मन उदास होगया. वाकई बहुत ही कडवी सच्चाई है ये.

    ReplyDelete
  21. रचना पढकर मन उदास होगया. वाकई बहुत ही कडवी सच्चाई है ये.

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  22. ताऊ बहुत ही मार्मिक. बरसात का मजा आज कुछ नीरस सा लग रहा है.

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  23. रामकटोरी तुझे शर्म भी नही आती?
    अभी पिछला एडवांस बाकी चल रहा है
    और तू नये की बात करती है?
    काम करना हो कर
    वर्ना मैं कोई दुसरी बाई रख लूंगी.

    kya pata kitani ramkatoriyo ko ye shabd sunane padate honge? bahut marmik

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  24. रामकटोरी तुझे शर्म भी नही आती?
    अभी पिछला एडवांस बाकी चल रहा है
    और तू नये की बात करती है?
    काम करना हो कर
    वर्ना मैं कोई दुसरी बाई रख लूंगी.

    kya pata kitani ramkatoriyo ko ye shabd sunane padate honge? bahut marmik

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  25. सच much कितनी की raamkatoriyon की kahaani है यह............ lajawaab rachna है........ seema जी ने इसे अपने andaaz से रंग दिया है .........

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  26. कहां से घुमाकर कहां ले आये. वत्स जी और समीर जी के साथ बाकियों ने भी मेरे मन की बात कह दी.

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  27. इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
    जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
    क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
    और रामकटोरी उदास हो गई.

    achhi lines...

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  28. मौसम का असर कही कैसा तो कहीं कैसा

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  29. बहुत उम्दा रचना...

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  30. स्वीकृति से बड़ा सच । ईमानदार अभिव्यक्ति ।

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  31. बहुत भावपूर्ण.. यथार्थ..

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  32. इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
    जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
    क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
    और रामकटोरी उदास हो गई.
    .....लाचारी .......
    और क्या....
    बस...
    मीत

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  33. marmik,magar zindagi ka aham sach bhi,sab ke liye mausam suhana nahi hota.

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  34. मौसम किसी के लिए सुहाने तो कसीस के लिए , मुसीबत होते ही हैं | बहुत सुन्दर तरीके से बेबसी दरसाई है |

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  35. ओह, रामकटोरी ही नहीं, हम भी उदास हो गये। :(

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