"और रामकटोरी उदास हो गई"

"और रामकटोरी उदास हो गई"




नौकरानी का कहना
मेमसाहिबा स्कूल खुलने वाले हैं

इस बार मुन्नू को भी स्कूल भेजना है
बेटी की फ़ीस भरनी है.
कुछ एडवांस मिल जाता तो
मेमसाहिबा का फ़रमाना
रामकटोरी तुझे शर्म भी नही आती?
अभी पिछला एडवांस बाकी चल रहा है
और तू नये की बात करती है?
काम करना हो कर
वर्ना मैं कोई दुसरी बाई रख लूंगी.

इसी बीच हल्की फ़ुहारों का शुरु होना
और साहब की फ़रमाईश

मौसम कितना सुहावना हो गया है?
गर्मा गर्म कचोडियां हो जायें
तो कुछ बात बने
मेमसाहिबा का चिल्लाना
रामकटोरी ओ रामकटोरी
अरे कहां मर गई?
देख मौसम कितना सुहाना होगया है?
जरा कचोडियां और भजिये तल ले
रामकटोरी का कचोडियां तलते हुये

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.


(आभार सुश्री सीमा गुप्ता)

परिचयनामा में 23 जुलाई गुरुवार को मिलिये : पारूल…चाँद पुखराज का से. शाम 3:33 PM पर

39 comments:

  Pankaj Mishra

Tuesday, July 21, 2009 3:36:00 PM

Very Nice taau!!!

  Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"

Tuesday, July 21, 2009 4:55:00 PM

सच कहा ताऊ जी, सब इन्सान के अपने हालातों पर निर्भर करता है। किसी के लिए ईद तो किसी के लिए रोजा भी हो सकता है।
बहुत बढिया रचना!!!! आभार!

  Udan Tashtari

Tuesday, July 21, 2009 5:15:00 PM

कहीं पर ईद, कहीं पर मातम
हाय!! ये कैसा आया मौसम!!


-वाकई, एक ही मौसम के स्थितियों से मायने बदल जाते हैं.

सुन्दर रचना//

  अजय कुमार झा

Tuesday, July 21, 2009 5:19:00 PM

बहुत गहरी बात कहलवा दी राम कटोरी के बहाने ...क्या कहूँ ..

  आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal)

Tuesday, July 21, 2009 5:28:00 PM

ज़िंदगी की हकीकत को बयान करती कविता.. आभार

  अल्पना वर्मा

Tuesday, July 21, 2009 5:29:00 PM

बहुत सही कहा है..किसी के लिए जो अच्छा है वही किसी और के लिए बुरा..
एक ही मौसम दो तरह की खबरें ले कर आता है और गरीब के लिए तो सारे मौसम एक से ही होते हैं.

  डॉ. मनोज मिश्र

Tuesday, July 21, 2009 5:53:00 PM

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?...
यह मौसम भी बहुत बेईमान होता है किसी के लिए खुशी तो किसी के लिए गम का सौगात लाता है.

  SELECTION & COLLECTION SELECTION & COLLECTION

Tuesday, July 21, 2009 5:55:00 PM

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.

सुश्री सीमाजी गुप्ता!
इन पक्तियो मे मुझे सामाजिक एवम आर्थिक पहलुओ मे मानवीय जीवन कि एक ऐसी व्यथा दिखाई दे रहे है जहॉ दर्द ही दर्द है। वास्तव मे हमे इन पक्तियो कि गहराई मे जाने की जरुरत है।

आपकी शब्दावली अर्थ पुर्ण लगी जो समाज मे एक सन्देस देती है।

आभार ताऊजी का भी !

हे प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई टाईगर

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Tuesday, July 21, 2009 6:02:00 PM

बहुत सुंदर और संवेदनशील कविता।

  Arvind Mishra

Tuesday, July 21, 2009 6:10:00 PM

उदास होने की बात है मगर दुनिया ऐसे ही तो चल रही है !

  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

Tuesday, July 21, 2009 6:11:00 PM

आम जिन्दगी के दुख-दर्द को
शब्दों मे बड़े करीने से पिरोया है।

आभार सुश्री सीमा गुप्ता जी आपका।

ताऊ को धन्यवाद!

  Nirmla Kapila

Tuesday, July 21, 2009 6:30:00 PM

बहुत गहरी संवेदन्शील कहानी सीमाजी को बधाई

  makrand

Tuesday, July 21, 2009 6:47:00 PM

जीवन की यही कटु सच्चाई है!

  makrand

Tuesday, July 21, 2009 6:47:00 PM

जीवन की यही कटु सच्चाई है!

  sonu

Tuesday, July 21, 2009 6:48:00 PM

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.

एक कटु सत्य को कहा आपने.

  sonu

Tuesday, July 21, 2009 6:48:00 PM

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.

एक कटु सत्य को कहा आपने.

  sonia

Tuesday, July 21, 2009 6:49:00 PM

बहुत ही मार्मिक रचना.

  sonia

Tuesday, July 21, 2009 6:49:00 PM

बहुत ही मार्मिक रचना.

  सुशील कुमार छौक्कर

Tuesday, July 21, 2009 6:50:00 PM

बडा जालिम होता है ये जिदंगी का मौसम। बहुत उम्दा भाव।

  Bhairav

Tuesday, July 21, 2009 6:50:00 PM

shayad jivan aisa hi hai.

  Bhairav

Tuesday, July 21, 2009 6:50:00 PM

shayad jivan aisa hi hai.

  लालों के लाल....इंदौरीलाल

Tuesday, July 21, 2009 6:52:00 PM

रचना पढकर मन उदास होगया. वाकई बहुत ही कडवी सच्चाई है ये.

  लालों के लाल....इंदौरीलाल

Tuesday, July 21, 2009 6:52:00 PM

रचना पढकर मन उदास होगया. वाकई बहुत ही कडवी सच्चाई है ये.

  लालों के लाल....इंदौरीलाल

Tuesday, July 21, 2009 6:52:00 PM

रचना पढकर मन उदास होगया. वाकई बहुत ही कडवी सच्चाई है ये.

  दीपक "तिवारी साहब"

Tuesday, July 21, 2009 6:54:00 PM

ताऊ बहुत ही मार्मिक. बरसात का मजा आज कुछ नीरस सा लग रहा है.

  madhu

Tuesday, July 21, 2009 6:57:00 PM

रामकटोरी तुझे शर्म भी नही आती?
अभी पिछला एडवांस बाकी चल रहा है
और तू नये की बात करती है?
काम करना हो कर
वर्ना मैं कोई दुसरी बाई रख लूंगी.

kya pata kitani ramkatoriyo ko ye shabd sunane padate honge? bahut marmik

  madhu

Tuesday, July 21, 2009 6:57:00 PM

रामकटोरी तुझे शर्म भी नही आती?
अभी पिछला एडवांस बाकी चल रहा है
और तू नये की बात करती है?
काम करना हो कर
वर्ना मैं कोई दुसरी बाई रख लूंगी.

kya pata kitani ramkatoriyo ko ye shabd sunane padate honge? bahut marmik

  दिगम्बर नासवा

Tuesday, July 21, 2009 7:50:00 PM

सच much कितनी की raamkatoriyon की kahaani है यह............ lajawaab rachna है........ seema जी ने इसे अपने andaaz से रंग दिया है .........

  भारतीय नागरिक - Indian Citizen

Tuesday, July 21, 2009 8:10:00 PM

कहां से घुमाकर कहां ले आये. वत्स जी और समीर जी के साथ बाकियों ने भी मेरे मन की बात कह दी.

  विनीता यशस्वी

Tuesday, July 21, 2009 10:42:00 PM

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.

achhi lines...

  अनिल कान्त :

Tuesday, July 21, 2009 11:19:00 PM

मौसम का असर कही कैसा तो कहीं कैसा

  सैयद | Syed

Tuesday, July 21, 2009 11:56:00 PM

बहुत उम्दा रचना...

  हिमांशु । Himanshu

Wednesday, July 22, 2009 9:10:00 AM

स्वीकृति से बड़ा सच । ईमानदार अभिव्यक्ति ।

  रंजन

Wednesday, July 22, 2009 9:53:00 AM

बहुत भावपूर्ण.. यथार्थ..

  मीत

Wednesday, July 22, 2009 11:23:00 AM

इतना सुहावना मौसम क्युं आता है?
जिसमे बच्चों की फ़ीस भरनी पडती है?
क्या ये वाकई सुहावना मौसम है?
और रामकटोरी उदास हो गई.
.....लाचारी .......
और क्या....
बस...
मीत

  mehek

Wednesday, July 22, 2009 1:32:00 PM

marmik,magar zindagi ka aham sach bhi,sab ke liye mausam suhana nahi hota.

  Murari Pareek

Wednesday, July 22, 2009 2:46:00 PM

मौसम किसी के लिए सुहाने तो कसीस के लिए , मुसीबत होते ही हैं | बहुत सुन्दर तरीके से बेबसी दरसाई है |

  ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey

Wednesday, July 22, 2009 4:48:00 PM

ओह, रामकटोरी ही नहीं, हम भी उदास हो गये। :(

ताऊ उवाच :-:


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