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आखिरी विदाई

आखिरी विदाई




sun-set12
शादी मंडप में वचन दिया था
दुख सुख मे साथ निभाने का
कभी ना बिछडने का जन्मों
साथ कदम बढाने का

आज मुडकर देखा तो पाया
जीवन की पगडंडियों को
एक दुसरे का हाथ थामे
हमने हर वादा निभाया

अब जिंदगी की सांझ की बेला मे
कैसे विचारों से मन घिर आया
शादी मंडप मे खाई कसमें
लगता है एक सपना थी

वक्त दे रहा दस्तक
आओ तुम्हारे हाथों से
अपना हाथ छुडाकर
अब आखिरी विदाई लेलूं

(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

50 comments:

  1. Nice Poem taau !!
    Really A very strong though!

    Thanks,
    Pankaj

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  2. जिन्दगी की साझँ की बेला मे आखिरी विदाई किसी के साथ संगदिली होती है । वह लम्हाँ हाथ छोड कर नही हाथ पकड्ने का होता है।

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  3. वक्त दे रहा दस्तक
    आओ तुम्हारे हाथों से


    अपना हाथ छुडाकर
    अब आखिरी विदाई लेलूं
    बहुत भावुक अभिव्यक्त

    regards

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  4. लगता है ताई की लाठियों की धमक कम हो गयी या सर फिर गया ताऊ का या मैं कविता समझ नहीं पाया
    ये तीनों ही स्थितिया ठीक नहीं

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  5. सीमाजी बहुत भावमय अभिव्यक्ति है
    ये ताऊ जि कल तो हँसने हसाने की बातें कर रहे थे आज रुलाने पर आमदा हैं राम राम् इतनी भारी पोस्ट

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  6. अरे मै तो समझ कि ताई ने आज ईतने लठ्ठ मार दिये कि....

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  7. अरे ताऊजी ऐसी गम भरी बाते ना करो जी, अभी तो आपका साथ हुआ है अब इतनी जल्दी भी क्या है साथ छुडाने की?

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  8. अरे ताऊजी ऐसी गम भरी बाते ना करो जी, अभी तो आपका साथ हुआ है अब इतनी जल्दी भी क्या है साथ छुडाने की?

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  9. अरे ताऊजी ऐसी गम भरी बाते ना करो जी, अभी तो आपका साथ हुआ है अब इतनी जल्दी भी क्या है साथ छुडाने की?

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  10. बहुत गहन और मार्मिक अभिव्यक्ति

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  11. सशक्त अभिव्यक्ति.

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  12. सशक्त अभिव्यक्ति

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  13. बहुत गहन भाव अभिव्यक्त किये हैं. शुभकामनाएं.

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  14. अपना हाथ छुडाकर
    अब आखिरी विदाई लेलूं

    bahut hi marmik hai taau aaj to.

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  15. अपना हाथ छुडाकर
    अब आखिरी विदाई लेलूं

    bahut hi marmik hai taau aaj to.

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  16. ताऊ कभी हंसाता है कभी रुलाता है. आखिर ये क्या करता है? पर आपकी आज की बात तो सच्ची है. ये दिन तो आना ही है.

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  17. ताऊ कभी हंसाता है कभी रुलाता है. आखिर ये क्या करता है? पर आपकी आज की बात तो सच्ची है. ये दिन तो आना ही है.

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  18. इतनी भावुकता क्यों ताऊ जी ?

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  19. इतनी जल्‍दी क्‍या है

    हाथ छुड़ाने की

    मुंह मोड़ने की

    नाता तोड़ने की।

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  20. आज जाने की जिद न करो...
    (पंक्तियाँ मेरी नहीं है - बता दिया ताकि सनद रहे)

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  21. वक्त दे रहा दस्तक
    आओ तुम्हारे हाथों से
    अपना हाथ छुडाकर
    अब आखिरी विदाई ले लूं ।।

    बहुत ही गहन अभिव्यक्ति......

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  22. कविता सहज ही भावना की अभिव्यक्ति बन गयी है । अच्छी लगी यह रचना ।

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  23. भरी दुपहरी में साँज का नजारा दिखा कर डरा रहे हो!

    भावपूर्ण कविता.

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  24. ह्रदय स्पर्शी रचना .............. अनंत प्यार को समर्पित कविता दिल के बहुत ही करीब से गुज़र जाती है ..........

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  25. "वक्त दे रहा दस्तक
    आओ तुम्हारे हाथों से
    अपना हाथ छुडाकर
    अब आखिरी विदाई लेलूं"

    कविता पढ़कर मन भावुक
    हो उठा।
    भाव-प्रणव कविता के लिए,
    बहुत-बहुत बधाई।

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  26. बहुत गहरे भाव हैं. अंदर तक छू गई यह रचना.

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  27. मन अवसाद से भर आया। वि‍रह-मि‍लन, कस्‍में-वादे, यौवन-वृद्वावस्‍था सब मानो वि‍दाई के क्षण में वि‍लुप्‍त होने लगते हैं, बस सच्‍चे स्‍नेह के क्षण ही स्‍मृति‍ में रह जाती है।

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  28. बात बहुत मार्मिक है, लेकिन सीमा जी से क्षमा याचना सहित इतना कहना चाहता हूँ कि इतने अच्छे विषय पर कविता बहुत सपाट हो गई है। सीमा जी इस पर कुछ और श्रम करें तो यह कालजयी रचना हो सकती है।

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  29. मिलन के साथ बिछोह भी सिक्के के दूसरे पहलू की तरह साथ ही रहता है.
    जब भी मिलन का अहसास गहराता है जुदाई का उतना ही डर लगता है..
    जीवन की सांझ में यह भाव और भी अधिक मुखर होते हैं..भावप्रधान रचना.

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  30. अरे ताऊ क्या हुआ सब कुछ ठीक तो कहीं रामप्यारी रूठ के तो नहीं चली गई .

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  31. अवसाद की सशक्त अभिव्यक्ति...

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  32. बहुत ही भावुक अभिव्यक्ति |

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  33. वक्त दे रहा दस्तक
    आओ तुम्हारे हाथों से
    अपना हाथ छुडाकर
    अब आखिरी विदाई लेलूं

    आभार सुश्री सीमा गुप्ताजी का दर्द से भरी बात के लिए। मार्मिक- हृदयस्पर्स।
    ......................
    अरे भाई ! ताऊजी कहा गायब हो गए आज मुम्बई टाईगर ने कुछ तो छाप डाला है ताऊ के नाम!

    नमस्कार!

    मुम्बई टाईगर

    हे प्रभु यह तेरापन्थ

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  34. एग्रीगेटर में लगा,कि माइकल जैकसन की विदाई पर पोस्ट होगी. बहरहाल, एक और सुंदर कविता पढ़ने के क्षणों के लिए आभार.

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  35. "न जाओ सैय्या छुडा के बैय्याँ, कसम तुम्हारी, मै रो पडूँगी" .यह अचानक हमारे दिमाग में आ गया था इस लिए लिख दिया. सुन्दर रचना. बड़ी पीडा दायक.

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  36. अरे ताऊ, क्यूँ रुलाना चाहते हैं आप ??

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  37. ताऊ का मस्त मौला स्वाभाव ही तो बहुत लोगो को प्रेरणा देता है ...ऐसी भावुकता तो रुला देती है !!

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  38. संवेदनशील अभिव्यक्ति ताऊ जी !!!

    आपके ब्लॉग में आने पर हमेशा ऐक मुसकुराहट साथ हो लेती है ..
    आज इतनी भावुकता :(


    राम राम !!

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  39. बहुत मार्मिक है ये...
    सीमा जी बहुत दर्द भर दिया आपने अपनी रचना में...
    और इसमें एहसास भी नजर आता है जिस अहसास से होकर हर इंसान गुजरता है...
    मीत

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  40. पसंद आई आपकी यह रचना शुक्रिया

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  41. Bahut sundar rachana..really its awesome...

    Regards..
    DevSangeet

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  42. हिन्दू धर्म और पुनर्जन्म के सिद्धान्त में आस्था रहे तो यह अवसाद नहीं घेरेगा!

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  43. sir

    apki poem ne to aankhen nam kar di ... itni gahri abhivyakti itne saral shabdo me kah di aap ne ..

    Aabhar

    Vijay

    Pls read my new poem : man ki khidki
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/07/window-of-my-heart.html

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