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" चांद किसी को मिला है"


एक नन्ही लडकी
मासूम सी हसरत लिए
चांद को निहारा करती थी

दिन बा दिन चांद को पा लेने की
उसकी ख्वाइश बढ़ती गयी


पर क्या चांद किसी को मिला है?ref

एक रोज पोखर में
चांद चुपचाप कदम बढा
उस लडकी के सामने उतर आया

लडकी खुश हुई, मचली इठलाई
और चांद को पकडने के लिये
पानी मे हाथ डाला

पर क्या चांद किसी को मिला है?



(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)






परसों गुरुवार 18 जून को  मिलिये डा.  मनोज मिश्र से परिचयनामा मे

ताऊ से अंतरंग बातचीत

शाम 3 : 33 PM पर
 

49 comments:

  1. बहुत खुब..

    और मजाक में कहें तो
    अगर बेचारी फिजा़ को पता होता तो काहे झमके में पड़ती..:)

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  2. बहुत सुन्दर कविता है.................
    अरे हाँ याद आया अभी कल ही तो फिजा के घर पहुंचा है ...अच्छा नहा धो कर आया है.............

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  3. बढ़िया लगी कविता।

    शीर्षक से तो लगा आप मिडिया के दुलारे के बात कर रहे हैं। वो वाला तो फिज़ा को मिला है :)

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  4. चाँद की ख्वाहिश एक अनोखी ख्वाहिश है । युगों-युगों से यह खवाहिश भिन्न-भिन्न रूपों में अभिव्यक्त होती आयी है । कविता के लिये आभार ।

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  5. एक नेक सलाह : -

    आपको सलाह दी जाती है कि इस कविता को तुरंत हटालें वर्ना आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है.

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  6. ताऊ बहुत बढिया कविता है पर जरा नेक सलाह पर भी ध्यान दिया जाये.

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  7. @ Anonymous
    और चांद को पकडने के लिये
    पानी मे हाथ डाला
    पर क्या चांद किसी को मिला है?

    भाई मैने इसमे क्या गाली बक दी?
    अगर आप अपनी आई.डी. के साथ आकर कमेंट करेंगे और चांद के साथ आपकी रिश्तेदारी प्रूव कर देंगे तो मैं इसको हटा लूंगा और आप खाली पीली वैमनस्य बढाने का काम कर रहे हैं तो करते रहिये..मुझे इन गीदड भभकियों से डर नही लगता है.

    रामराम.

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  8. चलिए चांद पकड़ने के बहाने
    हाथ तो धुल गए

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  9. बहुत सुन्दर कविता...गर चाँद मिल जाता तो कविता कैसे बनती. चाँद न मिलकर ही अपनी महत्ता बरकरार रखे है.


    ------

    ताऊ, ये अनाम साहेब काफी विनोदी स्वभाव के लगते हैं.

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  10. सुन्दर कविता !!!

    Shirshak dekh hamne bhi samjha ki chaand fiza ki baten hain shayad.

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  11. जिसे देखो वही सलाहू का रोल अदा करने लगा है।
    हम भी सलाह दे दें - आप चांद और उसकी परछाई पर नहीं, गौरैया पर लिखें कविता।

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  12. सुन्दर कविता है.

    जैसा कि हिमांशु जी ने कहा चाँद को पाने की ख्वाहिश तो सदियों से है. मिले या न मिले, ख्वाहिश तो हमेशा ही रहेगी. राजा दशरथ भी अपने पुत्र को बर्तन के पानी में चाँद दिखाकर शांत करते थे. जब सूर्यवंशी का यह हाल था तो हम तो आम लोग हैं.

    बेनामी जी की टिप्पणी अशोभनीय है.

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  13. चाँद मिल जाता तो कविता कैसे बनती ...:)

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  14. -जो नहीं मिलता उसे ही पाने की चाहता होती है..यह मानव स्वभाव है...भगवान भी माँ से चाँद मांगते थे खेलने के लिए !

    [माननीय ज्ञानदत्त जी की सलाह को दोहराना उचित लगता है.शायद कोई बेनामी यह भी कह दे--कविता सामयिक है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी!
    आप की लिखी इस अच्छी सी कविता का देखिये अब कैसे कैसे पोस्ट मार्टम किया जाता है!]

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  15. चाँद बड़ा निष्ठूर है, फिजाओं में झलक दिखला कर निकल लेता है. :)

    कविता सुन्दर है.

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  16. वाह, बहुत बढ़िया!
    घुघूती बासूती

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  17. हम कहते हें

    "क्यों ख्वाहिश करते हें
    आपको उस चाँद की
    जो ख़ुद चौबीसों घंटे
    आपके चक्कर काटा करता है।
    आपकी रौशनी से दमकता है।
    करनी है तो कद्र कीजिये
    उस आग के गोले की
    जो ख़ुद जलता रहता है
    पर आपको जीवन देता है। '

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  18. ताऊ की जय हो. क्या सटीक और सामयिक कविता लिखी है. बहुत बधाई यह सुंदर और सामयिक कविता लिखने के लिये.

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  19. क्या बात है ताऊ? चांद और फ़िजा का खुमार आप पर भी चढ गया? पर कविता सुंदर है. बधाई.

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  20. सही बात है चांद किसी को भी नही मिला फ़िर फ़िजा को कहां से मिलेगा? चांद को पाने की ख्वाहिश ही बेमानी है.

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  21. बहुत खूब........
    सुन्दर कविता के लिए आपका तथा सुश्री सीमा गुप्ता जी का आभार।

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  22. एक खूबसूरत को उजागर कर दिया आपने शब्दों के माध्यम से....
    मीत

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  23. ताऊ जी अपने आशीष भतीजे की मदद से इसे पकडिये न कुछ ip अड्रेस वाले टूल से...
    मीत

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  24. ताऊ जी मेरी सलाह है कि बेनामी टिप्पणियों को जवाब देकर बेवजह उनकी अहमियत न बढायें !

    महोदय को मालूम नहीं कि सदियों से कवियों का चाँद पे कापीराईट है !

    इतनी भावमयी कविता की वाट लगाने की कोशिश की जा रही है !

    करे तो कोई कानूनी कार्यवाही ........
    रातों-रात यह ब्लॉग दुनिया भर में सुपर हिट हो जाएगा !

    आज की आवाज

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  25. वाह ताऊ छा गये आप तो. आपको तो आशुकवि की संज्ञा देनी चाहिये. अभी चांद नहा धोकर फ़िजा के पास पहुंचा ही था कि आपने उसकी कविता रचदी.

    शायद यह पहली कविता होगी चांद और फ़िजा पर. बधाई इस रिकार्ड बनाने पर. और फ़िजा की पोखर मे से चांद निकालते हुये तस्वीर भी बडी सुंदर लगाई है.

    बधाई.

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  26. सुंदर रचना. बेहद सुंदर भाव लिये हुये. बहुत सही कहा है चाहने पर भी चांद किसे मिल पायाहै? बधाई.

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  27. Taau.. aapne ek kahani shuru ki thi.. abhi tak usi ke intzar me hun..
    Vo sher vali.. :)

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  28. ताऊ जी।
    बाल मन ऐसा ही निश्छल होता है।
    सुन्दर कविता के लिए
    सीमा जी को बधाई।
    आपको धन्यवाद।

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  29. इतनी अच्छी रचना पर ये बेनामीजी ! उफ़ !

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  30. सुँदर कविता के साथ सुँदर चित्र है
    - लावण्या

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  31. एक शेर पढ़ा था कभी, अर्ज कर देता हूं-

    आएगा कदमबोसी को चांद ये मेरा जिम्मा
    आप अंगुश्तेहिनाई से ईशारा तो कीजिए

    चांद मिले या ना मिले, मिलने की उम्मीद का जिंदा रहना जरूरी है।

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  32. ......बहुत अच्छी कविता ताऊ जी !!

    (रिक्तस्थान मे कम्युनल या सेक्युलर आप अपनी मर्जी से लगा ले )

    वैसे चांद तो एक ख्वाब ही है और ख्वाब आंखो मे ही अच्छे लगते है....हकिकत मे नही !!

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  33. अच्छी रचना के लिए सुश्री सीमा जी को और प्रस्तुतिकरण के लिए आपको बधाई .

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  34. ताऊ आप की कविता तो बहुत प्यारी लगी , लेकिन यह बेनामी जनाब को क्या तकलीफ़ हो गई, शायद इनकी किसी दुखती रग पर रामप्यारी ने अपना प्यारा प्यारा पंजा मार दिया.
    राम राम जी की

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  35. सबसे मजेदार ये लगा "चलिए चांद पकड़ने के बहाने
    हाथ तो धुल गए"

    .... सुन्दर कविता.

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  36. कल चाँद को देखा उसके टी शर्ट पर 99 लिखा था....यानि कि अभी भी चाँद के एक पर्सेंट इधर-उधर लुढकने का चाँस है :)

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  37. चाँद भी क्या खूब है ....सूरज की गर्मी को समाहित कर कैसी शीतलता बिखेरता है ...चाँद को छूने की ख्वाहिश वाजिब है ...किसे नहीं होती ??

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  38. अरे वाह आप चाँद पर भी लिखते है

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  39. सुन्दर कविता............ इस रचना में गहरी सोच है....... भोली भली आशा भी है इसमें.......लाजवाब

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  40. ताऊ महाबाबा श्री जी 1000000000000000000000000000000000000000000000000008
    भाई कुंआरे पुसादकर जी बड़े परेशान है उनका जल्दी विवाह करवा दे .....रायपुर के आसपास ही शादी तै करवा दे हम सभी ब्लॉगर आभारी रहेगें

    बाबाजी आपकी जय हो कल्याण हो

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  41. पर क्या चांद किसी को मिला है?

    achchi kavitaa

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