परिचयनामा : प.श्री डी.के. शर्मा “वत्स

हम आज के परिचयनामा मे आपको मिलवा रहे हैं श्री प. डी. के. शर्मा वत्स से. आपसे हमारी मुलाकात हुई लुधियाना में जहां आजकल आप निवास करते हैं. जिनके ब्लाग धर्मयात्रा  और  ज्योतिष की सार्थकता से आप भलिभांति परिचित हैं. और जिन पर समय समय पर विषय से संबंधित जानकारी हम प्राप्त करते रहे हैं. हमने सवाल जवाब का सिलसिला शुरु किया.Picture 005
प. डी.के. शर्मा वत्स


ताऊ : पंडितजी, आप कहां के रहने वाले हैं?

वत्स जी : ताऊ मेरा जन्मस्थान तो जगाधरी, पैतृ्क स्थान गांव कलायत, जिला कैथल हरियाणा है. और कर्मस्थान लुधियाना (पंजाब) जहां आज आप मेरे साथ बैठे हैं.

ताऊ : आप करते क्या हैं?

वत्स जी : यूं तो अपनी होजियरी गारमैंट मैन्यूफैक्चरिंग एवं प्रिंटिंग की फैक्ट्री है, किन्तु उसे छोटे भाई की देखरेख में सौंप कर अपना जीवन सिर्फ ओर सिर्फ ज्योतिष विधा,आध्यात्म को समर्पित कर चुका हूं.


ताऊ : अच्छा भला होजियारी का धंधा छोडकर ज्योतिष विधा, आध्यात्म ? ये क्या बात हुई?

वत्स जी : क्यूं कि बचपन से ही आध्यात्म प्रेमी होने के कारण मेरा रूझान उन गोपनीय तथ्यों, उन रहस्यों को समझने में ही रहा है जो कि हमारे वेद,पुराण एवं शास्त्रों में भरे पडे हैं.

ताऊ : पंडितजी, हमने आपके छोटे भाई के बारे कुछ सुना है? क्या ये सही बात है?

वत्स जी : आप शायद उसके पुनर्जन्म वाली बात पूछना चाह रहे हैं?

ताऊ : जी हां. हमने सुना है कि यह घटना यहां काफ़ी चर्चित रही है?

वत्स जी : हां आपने ठीक ही सुना है शायद आप इस धटना पर विश्वास करें अथवा न करें किन्तु आज भी यहां लुधियाना में सैंकडों व्यक्ति मौजूद हैं जो कि इस घटना के प्रत्यक्ष गवाह रहे हैं.

ताऊ : जी पूरी बात बताये पंडितजी?

वत्स जी : ताऊ जी , मेरे जीवन में घटी जिस घटना का आप जिक्र कर हैं . वो कुछ इस तरह से है कि मेरे छोटे भाई और मेरी आयु में लगभग 9 वर्ष का अन्तर है. जब छोटे भाई का जन्म हुआ तो पैदा होने के लगभग सवा साल की आयु में उसने बोलना प्रारंभ कर दिया था.

ताऊ : क्या बात कह रहे हैं आप? सिर्फ़ सवा साल की उम्र मे बोलना? मां..बाबा..ऐसा ही कुछ बोलता होगा?

वत्स जी : नही ताऊ जी, वो पूरी तरह से बोलता था कि मेरा नाम गिरधारी लाल बांसल है, मेरी पत्नि का नाम ये है, मेरे तीन पुत्र हैं, दो विवाहित-एक कुंवारा इत्यादि इत्यादि.

ताऊ : क्या बात कह रहे हैं? क्या उस बात की कभी तस्दीक भी हुई?

वत्स जी : जी, यहां लुधियाना में शहर के बीचों बीच गुड मंडी नाम से एक अति प्राचीन बाजार है जो कि हमारे निवास से पैदल लगभग 5 मिनट की दूरी पर ही है....वहां उसने अपनी दुकान ,घर वगैरह होने तथा जीवन में घटित हुई तमाम बातें बताईं. जब लोगों को इस बारें में पता चला तो खुद उसके मुंह से सुनने के लिए हर रोज घर में भीड लगी रहती थी.

ताऊ : क्या अब भी उसको याद हैं ये बातें?

वत्स जी : 7 वर्ष की आयु तक तो उसे पूर्वजन्म की एक एक बात याद थी, उसके पश्चात वो स्मृ्तियां शनै शनै उसके मानसपटल से लुप्त होने लगीं.

ताऊ : क्या जि्स परिवार से उसने अपना होना बताया. उन लोगों का क्या कहना है इस बारे में?

वत्स जी : ताऊ जी , इस बात का अंदाजा तो आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि आज भी उसके पूर्वजन्म के परिवार के साथ हमारे बहुत ही घनिष्ठ संबंध है. ज्यादा क्या कहूं इस बारे में.

ताऊ : आपने इस घटना को किस तरह लिया?

वत्स जी : इस एक घटना नें मेरे मन पर कुछ ऎसा प्रभाव छोडा कि मैं घंटों अकेले बैठा यूं हि सोचता रहता कि आखिर मैं कौन हूं? ईश्वर क्या है? मेरे इसी जिज्ञासाभाव नें मुझे ज्योतिष शास्त्र जैसे गूढ विषय के अध्य्यन के लिए प्रेरित किया........तब से लेकर आज तक कुदरत के अबूझ रहस्यों को जानने का एक कीटतुल्य प्रयास कर रहा हूं.

ताऊ : आप इसमे कहां तक सफ़ल हुये हैं?

वत्स जी : इस अथाह समुद्र की थाह किसको लगी है? अगर ईश्वर की कृ्पा हुई तो शायद इस जीवन में कुछ जान पाऊं.

ताऊ : आपके शौक क्या हैं?

वत्स जी - जीवन में सिर्फ एक ही शौक पाला है-- पढना, पढना और सिर्फ पढना.

ताऊ : क्या अपना शौक पूरा कर पाते हैं?

वत्स जी  : कुछ हद तक. फ़िर भी अगर पारिवारिक उत्तरदायित्वों के बंधन से मुक्त होता तो शायद जीवन में एक ही इच्छा होती कि प्रकृ्ति की गोद में कोई ऎसा शांत स्थल हो, जहां आसपास कोई न हो. सिर्फ मैं हूं और पास में हों ढेर सारे ग्रंथ. कोई रोकने वाला न हो और न ही कोई टोकने वाला.

ताऊ : वैदिक साहित्य आपको कैसा लगता है?

वत्स जी : अपने अब तक के जीवन में मैनें यही अनुभव किया है कि ये वैदिक साहित्य ही है जो कि मुझे सम्पूर्णता में ईश्वर के समक्ष भक्त भाव से खडे होने का हौसला देता रहा हैं.

ताऊ : आपको सख्त ना पसंद क्या है?

वत्स जी : ऎसे व्यक्तियों से मैं सदैव दूर रहने का प्रयास करता हूं जो कि अपने अहं भाव में जीते हों और वो जो कि अपनी प्राप्तियों/उपलब्धियों को मैडल की भांति गले में लटकाए घूमते हैं.

ताऊ : जैसे?

वत्स जी : जैसे अक्सर देखने में आता है लोग अपना परिचय देते समय नाम से पहले अपने पद, शिक्षा या अन्य किसी उपलब्धी का ब्यौरा देने लगते हैं.
न हि कस्तूरी कामोद:शपथेन विभाव्यते अर्थात कस्तूरी मेरे हाथ में है.,यह शपथ लेकर तो नहीं कहा जाता क्योंकि उसकी सुगन्ध ही उसके गुणों का बखान कर देती है.फिर दुनिया के सामने ढोल पीटने की क्या आवश्यकता है कि मुझ में ये गुण है.

ताऊ : जी पंडितजी, ये तो आपकी सही बात है.

वत्स जी : हां ताऊ जी, अगर हम अपने गुणों के जरिए जीवन में कोई उपलब्धि हासिल करते हैं तो हमें ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए, न कि चीख चीख कर दुनिया को बतातें फिरें कि देखिए, मैं कितना विद्वान हूं. आपके पास ज्ञान है, तो वो तो आपके आचार,व्यवहार और कर्मों द्वारा स्वयं ही उजागर हो जाएगा.

ताऊ : आप को पसंद क्या है?

वत्स जी : ताऊ जी, यूं तो जीवन में बहुत सी चीजें पसंद है...मसलन यहां चिट्ठाजगत में हल्के फुल्के व्यंग्य तथा साहित्य लेखन वाले ब्लागस, पढने में इतिहास,ज्योतिष और दर्शन शास्त्र से संबंधित पुस्तकें.

ताऊ : खाने मे आपको क्या पसंद है?

वत्स जी : खाने में शुद्ध शाकाहारी भारतीय व्यंजन.

ताऊ : पसंदीदा भ्रमण स्थल जहां आप अक्सर जाना चाहते हों?

वत्स जी :  मंसूरी और हरिद्वार.

ताऊ : कैसे लोग पसंद हैं?

वत्स जी : ऎसे लोग जो कि सब को समान भाव से देखते हों, जिसकी नजर में न कोई छोटा हो और न बडा.

ताऊ : ऐसी बात जो आप पाठको से कहना चाहें.

वत्स जी : ताऊ जी, यहां सभी विद्वान एवं गुणी लोग मौजूद हैं इसलिए विद्वानों को ज्ञान देने जैसी गुस्ताखी तो मैं नहीं करूंगा.

ताऊ : फ़िर भी ,कोई आपके मन की बात?

वत्स जी हां एक बात जो कि मैं सब से कहना चाहूंगा कि हमें एक ऎसे समाज के निर्माण में भागीदार बनने का प्रयत्न करना चाहिए जहां लोगों के मन में अपनी संस्कृ्ति और परम्पराओं के प्रति बोध जागृ्त रहे. सभी अच्छे अध्येता बने, सभी अच्छे जिज्ञासु बनें तो कम से कम इस बात के लिए हम आश्वास्त हो सकेंगे कि हमारी आगे आने वाली पीढियां संस्कृ्तिचेतना और एक बौद्धिक समाज का हिस्सा बन सकेंगी

ताऊ : आपके कोई यादगार घटना? जो आप हमारे पाठकों से साझा करना चाहें

वत्स जी : ताऊ जी, अक्सर देखने में आता है कि जब समय बीत जाता है तो इन्सान अपने जीवन के सबसे बुरे अनुभव को भी किसी मजेदार किस्से की तरह सुनाने का प्रयत्न करता है

ताऊ : हां हमने आपके धुम्रपान वाले किस्से के बारे मे पता चला है. क्या था वो किस्सा?

वत्स जी : ताऊजी, आपतो हमेशा खोद खोद कर कुछ ना कुछ उगलवा ही लेते हैं? असल मे हुआ यों था कि स्कूल के अन्तिम दिनों का एक किस्सा था.

ताऊ : हां बताते जाईये.

वत्स जी : उन दिनों 12 वीं कक्षा में मेरी दोस्ती एक घणे ऊत्त ( बदमाश) लडके के साथ हो गई,हालांकि पढाई में हम दोनो ही अव्वल थे.

ताऊ : फ़िर वो लडका ऊत कैसे होगया?

वत्स जी : वो इसलिये कि उसको एक बुरी लत थी कि वो सिगरेट पीने का शौकीन था. अब जैसा कि अमूमन होता है,अगर आप गलत संगत करते हो तो उसका कुछ न कुछ प्रभाव तो आपके अपने जीवन पर भी पडना निश्चित है.और जिसकी आपको जीवन में कीमत भी चुकानी पड सकती है.

ताऊ : जी पंडितजी, बात तो आपकी सोलह आने सच है. फ़िर आगे क्या हुआ?

वत्स; जी : अब हुआ ये कि हर रोज उसे सिगरेट पीते हुए देखा करता था तो एक दिन मन में विचार आया कि एक बार देखा तो जाए कि आखिर इस सिगरेट में ऎसा क्या आनन्द है.

ताऊ : फ़िर

वत्स जी : और मुझे तो ये भी नहीं मालूम था कि सिगरेट में कश कैसे लगाया जाता है, इतना भी उसी मुए दोस्त ने समझाया कि सांस अन्दर को खींचनी चाहिए. दोस्त ने सिगरेट सुलगा कर पकडाई और मैने जैसे ही जोर से कश खींचा तो लगा कि जैसे आंखे और फेफडे अभी शरीर से बाहर निकलकर जमीन पर गिर पडेंगे.

ताऊ : अरे राम...राम..ये तो आपके साथ बहुत बुरा हुआ? आगे क्या हुआ?

वत्स जी : आगे ये हुआ कि खांस खांस कर बुरा हाल हो गया, चक्कर आने लगे.

ताऊ : फ़िर बाद मे क्या हुआ?

वत्स जी : फ़िर बाद में वही हुआ जिसको सुनने का आपको इंतजार है. स्कूल के बाद जब घर पहुंचा तो रात को पिता जी ने आते ही बिना कुछ पूछे ऎसी जोरदार पिटाई की, जिसे आज भी याद करता हूं तो रोंगटे खडे हो जाते है. किन्तु इस सवाल का जवाब मुझे कईं महीनों बाद मिल पाया...... कि आखिर उन्हे कैसे पता चला कि मैने स्कूल में सिगरेट पी है.
 

ताऊ : हमने सुना है आपके पैत्रिक गांव मे कोई नदी वगैरह प्रकट हुई है?

वत्स जी : ताऊ जी, मेरे गांव कलायत, जिला कैथल (हरियाणा). भगवान कपिलमुनी की तपस्थली. अभी पिछले तीन चार साल पहले अचानक यहां एक जलस्त्रोत्र प्रकट हुआ था, जो अभी भी मौजूद है.

ताऊ : हां हमने भी यह बात टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुनी थी. क्या यह सही बात थी.

वत्स जी : हां, ताऊ जी...तब समाचार पत्र/टीवी इत्यादि में भी इस बात को प्रचारित किया गया था कि 'सरस्वती नदी' प्रकट हुई है. किन्तु मालूम नहीं कि इस बात में कितनी सच्चाई है. वैसे भी समय समय पर यहां से खुदाई के जरिए पुरातात्विक महत्व की बहुत सी चीजें मिली हैं.

ताऊ : हमने सुना है कि एक शिवमंदिर भी वहां विद्यमान था?

वत्स जी : हां एक अति प्राचीन शिवमंदिर भी विद्यमान है, जिसकी भीतरी दीवारों पर किसी अंजान लिपी में चारों तरफ बहुत कुछ खुदा हुआ है.अब तो लगभग आधे से ज्यादा गांव को पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले लिया है.
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प. वत्स का घर


ताऊ : आपका संयुक्त परिवार है. कैसा लगता है आपको इसमें रहना?

वत्स जी : जी हां, हमारे यहां हमेशा से ही संयुक्त परिवार की परम्परा रही है. हम दोनो भाई माता-पिता सहित सपरिवार एक ही छत के नीचे रहते हैं. और इसमे बडा सुख है.

ताऊ : आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगे?

वत्स जी : ताऊ जी मेरा अपना मानना तो यह है कि भारत की युगों पुरानी इस पारिवारिक परम्परा का यह एक अटल सत्य है कि संयुक्त परिवार के सुख सदैव दीर्घकालीन होते हैं जिसका अनुभव कठिनाई व दु:ख की घडि़यों में किया जा सकता है। किन्तु आज के समाज की विडंबना यह है कि एकांकी जीवन की अवधारणा ने संयुक्त परिवार की इस व्यवस्था को पूरी तरह से छिन्न-भिन्न कर दिया है। घर के बडे बुजुर्गों के साथ रहने को लोग अपनी स्वच्छंदता का हनन मानने लगे हैं

ताऊ : आप कब से ब्लागिंग मे हैं?

वत्स जी : ब्लागिंग की दुनिया में आए मुझे बहुत अधिक समय नहीं हुआ है. आज से एक साल पहले तक मैं ब्लागिंग जैसी किसी चीज के बारे में पूरी तरह से अपरिचित था.

ताऊ : फ़िर आप ब्लागिंग मे आये कैसे?

वत्स जी : बस यूं ही नेट पर कुछ खोजते हुए अचानक किसी ब्लाग पर आना हुआ. कुछ दिन लगतार उसी ब्लाग को पढने के लिए आता रहा तो बस यूं ही धीरे धीरे इस माध्यम को समझने का प्रयास करने लगा और एक दिन अपना खुद का ब्लाग बना कर लिखना भी प्रारम्भ कर दिया. जैसे जैसे लोगों से सम्पर्क बढता गया, वैसे वैसे ही समझबूझ विकसित होने लगी. सच कहूं अब तो यहां आप सबके बीच आकर एक परिवार जैसी ही अनुभूति होने लगी है.

ताऊ : आप ब्लागिंग का भविष्य कैसा देखते हैं?

वत्स जी : पहले तो ये स्पष्ट कीजिए कि मुझे इस प्रश्न का उत्तर एक ब्लागर के नजरिए से देना है या कि ज्योतिषी के नजरिए से...(हंसते हुये..)

ताऊ : एक ब्लागर की हैसियत से इस बारे मे आपका जवाब जानना चाहेंगे.

वत्स जी : जी, इस बात से कोई इन्कार नहीं कर सकता कि आज ब्लागिंग एक स्वतंत्र विधा के रूप में विकसित हो रही है.और एक आम इन्सान का जुडाव इसका सबसे सशक्त पहलू है. देखा जाए तो हिन्दी ब्लागिंग एक प्रकार से अभिव्यक्ति के विभिन्न माध्यमों पर उपलब्ध और निरन्तर रची जा रही विधाओं के दस्तावेजीकरण का एक ऎसा प्रयास है, जो कि व्यक्तिगत होते हुए भी सामाजिक है.

ताऊ : अभी इस समय आप हिंदी ब्लागिंग को कहां देखते हैं?

वत्स जी : जी, अभी वैसे तो हिन्दी ब्लागिंग अपने शैशव काल में ही है,किन्तु कोई सुदीर्घ पूर्ववर्ती परम्परा न होने के कारण इसके भविष्य का भी कोई स्पष्ट आंकलन नहीं किया जा सकता. वैज्ञानिक उन्नति के इस युग में,जहां नित नए आविष्कार हो रहे हैं, वहां ब्लागिंग के भविष्य के बारे में कुछ कहना शायद किसी के लिए भी संभव नहीं होगा.

ताऊ : ऐसा क्यों?

वत्स जी : हो सकता है कि आगे चलकर यही माध्यम किसी सामाजिक क्रान्ती का सूत्रधार बन जाए अथवा आगे चलकर कोई अन्य नवीन माध्यम इसका स्थान ले ले.

ताऊ : आप ब्लागिंग मे अपने लेखन किस दिशा मे पाते हैं?

वत्स जी : ताऊ जी, मैंने जब भी अपने भीतर झांकने की कौशिश की है तो मुझे कहीं भी लेखक जैसा कुछ दिखाई ही नहीं दिया. इसीलिए न तो इस विषय में कभी कोई दिशा तय की है और न ही अपने लिए किन्ही मापदंडों का निर्धारण ही कर पाया हूं.

ताऊ : फ़िर आप अपने लेखन को कैसे व्यवस्थित करते हैं?

वत्स जी : बस थोडा बहुत अपने मन के विचार इस ब्लाग के माध्यम से आप लोगों के सम्मुख रख देता हूं. यूं भी मैं लिखने में अपने आपको असहज अनुभव करता हूं.,मेरा तो ये मानना है कि विचारों तथा भावों को जितनी सहजता से बोल कर व्यक्त किया जा सकता है, उतनी आसानी से लिख कर नहीं.

ताऊ : इसका मतलब आप ब्लाग लेखन को प्रभावी नही पाते?

वत्स जी : नही ताऊ जी. यह बात नही है. बल्कि ब्लाग लेखन कहीं न कहीं मेरी विचारशीलता को व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में सहायक ही हुआ है.

ताऊ : आप राजनिती मे भी शौक रखते हैं?

वत्स जी : ना ताऊ जी ना... बिल्कुल नही...घर-परिवार, समाज, देश और ये ब्लागजगत, हर जगह पूरी तरह से राजनीति से दूर रहने वाला इन्सान हूं, क्योंकि अभी तक तो मैं अपनी अन्तरात्मा के मार्गदर्शन पर ही जीवन जीता आया हूं. हो सकता है कि कभी मेरा अन्तर्मन मुझे भ्रमित कर दे तो शायद राजनीति में रूचि जागृ्त हो जाए.किन्तु ऎसा होना मुझे तो इस जीवन में सम्भव नहीं लगता.

ताऊ : आपके बच्चों के बारे मे बताईये.

वत्स जी : ताऊ जी ये तीन बेटे हैं. ये है बडा बेटा - दुष्यन्त आयु 12 वर्ष, जो मुझे कंप्युटर का पाठ पढाता है. और ये मंझला - पुष्कर - आयु 8 वर्ष और सबसे छोटा बेटा - मालव आयु 5 वर्ष है.



वत्स जी, सुमन जी (पत्नि)और पुत्र दुष्यंत, पुष्कर और मालव



ताऊ : आपकी जीवन संगिनी के बारे मे क्या कहना चाहेंगे?

वत्स जी : धर्मपत्नि का नाम - सुमन शर्मा. इस विषय में कभी कभी तो मुझे अपने भाग्य पर गर्व होने लगता है. जिसके माध्यम से मुझे इतनी गुणी, सुलक्षणा पत्नि की प्राप्ति हुई. कम शब्दों में कहूं तो पत्नि, मां और बहू तीनों रुपों में पूरी तरह से स्त्री धर्म का पालन करती हुई एक सम्पूर्ण नारी.

ताऊ : ऐसी कोई बात जो आप सभी से कहना चाह्ते हों?

वत्स जी : ताऊ जी, बहुत दिनों से मेरे मन में एक विचार पनप रहा है. आप देखिए ब्लागिंग एक ऎसा मंच बन चुका है जहां समाज के हर वर्ग से भिन्न भिन्न प्रतिभाओं के धनी लोग निकलकर सामने आ रहे हैं, मसलन डाक्टर, इन्जीनियर, वकील, पत्रकार, कलाकार, साहित्यकार इत्यादि.

ताऊ : जी, बिल्कुल विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहां पर हैं.

वत्स जी : परंतु मुझे ऐसा लगता है कि यहां आकर हम लोग कुछ सार्थक करने की अपेक्षा वाह्! वाह्! बहुत खूब, हास-परिहास या फिर एक दूसरे की टांग खींचने में ही समय व्यतीत कर देते हैं.

ताऊ : हां कुछ हद तक तो ऐसा हो सकता है. पर आप क्या कहना चाहते हैं?

वत्स जी : मेरा सोचना ऐसा है कि हम इस मनोरंजन के साथ साथ अगर चाहें तो इस माध्यम के जरिए देश/समाज की दशा और दिशा दोनों बदल सकते हैं.

ताऊ : किस तरह से?

वत्स जी : वो इस तरह से कि बहुत दिनों से मेरे मन में एक विचार पनप रहा है कि कितना अच्छा हो अगर ब्लागजगत को एक विशाल ग्रुप या संस्था का रूप प्रदान कर दिया जाए. जिसका प्रत्येक सदस्य अपनी सामर्थ्य अनुसार उसमे कुछ योगदान करे, चाहे धन से अथवा अपनेज्ञान से, जिसका उपयोग जनकल्याण हेतु जैसे गरीबों की सेवा, शिक्षा, चिकित्सा इत्यादि या अन्य किन्ही लोकहितार्थ कार्यों में किया जाए.

ताऊ : आपका आईडिया तो अच्छा है.

वत्स जी : ये सिर्फ मेरा एक निजी विचारमात्र है, इसी को और आगे विस्तार भी दिया जा सकता है . कोई भी अनुभवी वरिष्ठ ब्लागर जिनसे सभी नए पुराने ब्लागर भली भांति परिचित है, कोई भी इस विचार को मूर्तरूप दे सकता है.

ताऊ : आप ताऊ पहेली को किस रुप मे देखते हैं?

वत्स जी : ताऊ जी, मैने कभी भी इसे एक पहेली के रूप में नहीं लिया. मेरे दृ्ष्टिकोण में इसके माध्यम से पाठकों को अपने देश और उसकी संस्कृ्तिक स्थलों से परिचित होने का एक बढिया अवसर उपलब्ध हो रहा है.

ताऊ : ताऊ साप्ताहिक पत्रिका के बारे मे क्या कहना चाहेंगे?

वत्स जी : ताऊ साप्ताहिक पत्रिका क्या है! ये तो अपने आप में एक तरह से ज्ञान का पिटारा है. संस्कृ्ति, इतिहास,कला,राजनीति, विज्ञान इत्यादि सभी विषयों का सम्मिश्रण, वो भी पूरी तरह से रोचकता बनाए रखे हुए.

ताऊ : . अक्सर पूछा जाता है कि ताऊ कौन? आप क्या कहेंगे?

वत्स जी : आज यहां इस चिट्ठाजगत में ताऊ एक प्रतीक बन चुका है, जिस प्रकार हम सब के भीतर एक बच्चा छिपा रहता है, उसी प्रकार कहीं न कहीं ये ताऊ भी हम सब के अन्दर ही है. हो सकता है कि वो कभी आपके माध्यम से प्रकट हो रहा या कभी मेरे माध्यम से.

तो इस प्रकार यह साक्षात्कार पूरा हुआ और आपको कैसा लगा वत्स जी से मिलना? अवश्य बताईयेगा

Comments

  1. साक्षात्कार पढ़ने पर एक शंका ने जन्म लिया है। क्या आध्यात्म और ज्योतिष का कोई संबंध हो सकता है?

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  2. वत्स जी से यह बातचीत प्रभावी और दिलचस्प है । वत्स जी की ब्लॉगिंग को लेकर चिंता और उसके बारे में दिये गये विचार बहुमूल्य हैं । आभार ।

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  3. पंडित जी के बारे में विस्तृत जानकारी मिली।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  4. पंडित जी !!

    से मिल कर अच्छा लगा .....परिवार के रूप में मिलना हमेशा अच्छा होता है . बच्चों को स्नेह सहित !!



    हिंदी चिट्ठाकारों का आर्थिक सर्वेक्षण में अपना सहयोग दें

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  5. पंडित जी से सपरिवार मिलाने के लिए बहुत धन्यवाद ताऊ !

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  6. बहुत सुंदर साक्षात्कार .

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  7. बहुत अच्छा परिचय करवाया. ताऊ आप यह बहुत नेक काम कर रहे हो. सभी ब्लागर्स से परिचय होने से उनके साथ एक अपनापन बढ जाता है.

    प.वत्स जी और आपको धन्यवाद.

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  8. बेहतरीन साक्षात्कार!! पुनर्जन्म की कथा सुन न जाने कितनी किताबों में पढ़ी कहानियाँ याद हो आई. ताऊ भी खूब खोज कर लाता है.

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  9. Blogger दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    श्रीमान मेरा ऐसा मानना है कि कहीं भी इस इंटर्व्यु मे यह दावा नही किया गया है कि ज्योतिष और आध्यातम का कोई संबंध है या हो सकता है. आपने किस बिना पर यह शंका जाहिर की है?

    और वैसे मेरा निजी मानना है कि इन दोनो का चोली दामन का साथ है. पर य निजी राय हो सकती है.

    कृपया पूरी बात को समझे बिना कुछ भी कमेंट नही करना चाहिये.

    सुंदर अति सुंदर इंटर्व्यु. हमको बहुत पसंद आया.

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  10. Blogger दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

    श्रीमान मेरा ऐसा मानना है कि कहीं भी इस इंटर्व्यु मे यह दावा नही किया गया है कि ज्योतिष और आध्यातम का कोई संबंध है या हो सकता है. आपने किस बिना पर यह शंका जाहिर की है?

    और वैसे मेरा निजी मानना है कि इन दोनो का चोली दामन का साथ है. पर य निजी राय हो सकती है.

    कृपया पूरी बात को समझे बिना कुछ भी कमेंट नही करना चाहिये.

    सुंदर अति सुंदर इंटर्व्यु. हमको बहुत पसंद आया.

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  11. bahut maja aaya pandit ji ke bare me janakar

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  12. पंडित जी से मिलकर बहुत अच्छा लगा |

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  13. अच्छा लगा वत्स जी से मिल कर...

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  14. आनँद आ गया ताऊजी आज तो
    वत्स जी की धीर गँभीर बातेँ सुनकर और श्रीमती जी से मिलकर भी -- Good effort -
    - लावण्या

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  15. .एक और कर्मठ व्यक्तित्व से परिचय कराने का आभार.

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  16. कई रोचक और रोमांचक बातें भी पता लगीं इस साक्षात्‍कार से। दिनेशराय द्विवेदी जी का सवाल महत्‍वपूर्ण है।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  17. वाह ताऊ वाह !
    घणा ए आच्छा लाग्या पंडित जी तै बात करकै । कई दिनां पहल्यां जिस दिन तै पन्डित जी मेरे ब्लाग पै आये थे उसे दिन तै इनके बारे मै जाणन की इच्छा थी जो आपनै पूरी कर दी ।
    साधुवाद अर राम-राम ।

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  18. ताऊ आप बहुत विलक्षण गुणों वाले लोगों से हमारा परिचय करवा कर बहुत पुन्य का काम कर रहे हैं...वत्स जी के परिपक्व विचार पढ़ कर बहुत ख़ुशी हुई...इश्वर उन्हें और उनके परिवार को सदा सुखी रख्खे...
    नीरज

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  19. परिचय कराने का आभार.

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  20. Pandit ji se mil ke achha to laga hi par sath hi kafi nai jankariya bhi mil gayi...

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  21. पंडित जी !!

    से मिल कर अच्छा लगा .

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  22. वत्स जी तो बड़े शरीफ मानस हैं - ताऊ की तरह।

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  23. राम राम ताऊ............पंडित जी से आपकी बातचीत बहूत प्रभावी और दिलचस्प है, वत्स जी के विचार स्पष्ट और चिंतनीय हैं बहुत ही अच्छा साक्षात कार है आपका ..........धीरे धीरे हम ब्लागर्स परिवार में पर्सनल सम्बन्ध बना रहे हैं इस बहाने से.........

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  24. वत्स जी के बारे में पढकर अच्छा लगा। आप इतने बेहतरीन तरीके से परिचय कराते है कि हर पहलू निखर कर बाहर आ जाता है। शुक्रिया।

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  25. प.श्री डी.के. शर्मा “वत्स" जि से मिल कर अच्छा लगा.
    धन्यवाद

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  26. bahut badhiya raha ye parichay. dhanyavad.

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  27. ताऊजी बहुत ही उम्दा रहा यह साक्षात्कार. यह तो ऐसा ही है कि आप सबको आपस मे मिलवा रहे हो?

    बहुत बधाई आपको और पंडितजी को और उनके परिवार के बारे मे जानना अति सुखद रहा. खासकर उनके छोटे भाई के बारे मे जानकर आश्चर्य भी हुआ कि यह सत्य मे होता है.

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  28. ताऊजी बहुत ही उम्दा रहा यह साक्षात्कार. यह तो ऐसा ही है कि आप सबको आपस मे मिलवा रहे हो?

    बहुत बधाई आपको और पंडितजी को और उनके परिवार के बारे मे जानना अति सुखद रहा. खासकर उनके छोटे भाई के बारे मे जानकर आश्चर्य भी हुआ कि यह सत्य मे होता है.

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  29. एक और बढ़िया साक्षात्कार ! और एक और भलेमानस से मुलाकात ! बढ़िया !

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  30. बातचीत अच्छी लगी !

    साक्षात्कार के बहाने ब्लॉगर परिवार के
    एक और सदस्य के बारे में जानने को मिला !
    ताऊ जी आपका आभार !

    "मिले सुर मेरा तुम्हारा
    तो सुर बने हमारा"

    यहाँ कितनी वेराईटी देखने को मिलती है !
    हर गुण-धर्म के व्यक्तित्व यहाँ मिलते हैं !

    भानाराम जाट जी मैं यह जाने को बेहद उत्सुक हूँ कि ज्योतिष और अध्यात्म का चोली दामन का साथ संबंध किस तरह से है ?

    अच्छा हुआ आपने योग को छोड़ दिया !

    आज की आवाज

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  31. एक कहावत है "जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि" कवि की जगह "ताऊ" होना चाहिये।

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  32. पंडित जी से सपरिवार मिलाने के लिए बहुत धन्यवाद

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  33. श्री प. डी. के. शर्मा “वत्स"
    का इण्टरव्यू अच्छा रहा और यह प्रेरणादायक भी है।

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  34. वत्स जी से मिल कर बहुत अच्छा लगा. आभार.

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  35. उनके ब्लॉग के माध्यम से पंडित जी से पुराना परिचय है.आज उनके व्यक्तित्व का परिचय हुआ.

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  36. ब्लॉग जगत के एक और प्रभावशाली व्यक्तित्व से परिचय हुआ.पंडित जी के विचार जाने.उनके परिवार से मिलना भी अच्छा लगा.
    करीने से व्यवस्थित यह साक्षात्कार पसंद आया.
    -आभार सहित.

    [देर से आ पाने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ.]

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  37. आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    पंडित जी के बारे में जानकारी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! बेहद पसंद आया!

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  38. पंडित जी से सपरिवार मिलकर बहुत अच्‍छा लगा .. इसके लिए आपको धन्‍यवाद।

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  39. वत्स जी : वो इस तरह से कि बहुत दिनों से मेरे मन में एक विचार पनप रहा है कि कितना अच्छा हो अगर ब्लागजगत को एक विशाल ग्रुप या संस्था का रूप प्रदान कर दिया जाए. जिसका प्रत्येक सदस्य अपनी सामर्थ्य अनुसार उसमे कुछ योगदान करे, चाहे धन से अथवा अपनेज्ञान से, जिसका उपयोग जनकल्याण हेतु जैसे गरीबों की सेवा, शिक्षा, चिकित्सा इत्यादि या अन्य किन्ही लोकहितार्थ कार्यों में किया जाए

    vats ji ke is vichaar ka mai samman karti hoon ,aur agar koi is disha me aage kadam badhaata hai to uski yathasambhab madad karne ke liye bhi taiyar hoon ,ek sangathit aur niyojit tareeke se bahut kuch kiya jaa sakta hai ,apne desh ke liye.

    fursat to hume bhi thi desh ke liye ,
    magarjab pet bhar gaya to neend aa gayi

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  40. ताऊ तै हमें
    सबतै मिलवाते हैं
    ताऊ तै हमें
    जरूर कोई
    ज्‍योतिषी ही मिलवाएगा।

    मिलना मिलाना
    जानने पहचानने का
    सबसे अच्‍छा खजाना।

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  41. वत्स जी से मुलाकात दिलचस्प रही

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  42. पंडित जी से बात चीत बहुत ही रोचक रही .कई नयी बाते जानी उनके बारे में ..उनके परिवार के बारे में .धन्यवाद

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  43. वत्स जी से यह बातचीत प्रभावी और दिलचस्प है ।

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