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क्या यही नारी है

क्या यही नारी है?


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हर रूप मे जीती है नारी
कभी पिता , कभी पति,
भाई और संतान के लिए
रूप धर माँ बेटी

बहन और पत्नी का
नही जान पाती

कभी अपनी निजता

गुम हो जाती है रिश्तो में
और खो जाते है स्वपन उसके
भूल जाती है पहचान अपनी 
रिश्तों की इस अंधी दौड में
रात के सूनेपन में
पुकारती है उसकी निजता
उसे कोमलता से
और वो अश्रु पुर्वक
विदा कर देती है
अपनी पहचान को
अगली रात तक
क्या यही नारी है
जिसने
मुझे जन्म दिया है?


(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

35 comments:

  1. रचना करती, पाठ-पढ़ाती,

    आदि-शक्ति ही नारी है।

    फिर भी अबला बनी हुई हो,

    क्या ऐसी लाचारी है।।

    प्रश्न-चिह्न हैं बहुत,

    इन्हें अब शीघ्र हटाना होगा।

    खोये हुए निज अस्तित्वों को,

    भूतल पर लाना होगा।।

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  2. इसी लिए तो उसे जगत जननी कहा गया .वह केवल सृजन है ,केवल सृजन . ...

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  3. अच्छी कविता -नारी की खुद अपनी पहचान -अपना होने का अहसास ही इस आपाधापी में खो सा जाता है ! नारी मन की समझ की कविता -बहुआयामी होते ताऊ !

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  4. त्याग का दूसरा नाम ही नारी है।
    जिंदगी के हर मोड़ पर, हर उम्र में कुछ ना कुछ त्यागना ही उसकी नियती है। यहां तक की विवाह के पश्चात कभी-कभी अपनी पहचान, अपने नाम, को भी बदलना पड़ता है। एवज में जो मिलता है वह जगजाहिर है !

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  5. कवि राज ताऊ की जय हो!

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  6. हमेशा की तरह एक बेहतरीन रचना. आभार.

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  7. हर रूप मे जीती है नारी
    कभी पिता , कभी पति,
    भाई और संतान के लिए
    रूप धर माँ बेटी
    बहन और पत्नी का

    " ताऊ जी बेहद भावनात्मक अभिव्यक्ति.....नारी ही है जो एक साथ इतने रूप धर अपने कर्तव्य निभा सकती है....हर शब्द में जाने नारी के कितने रूप उभर आये हैं.. आभार"

    Regards

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  8. हाँ नारी ऐसी ही होती है। सुन्दर प्रस्तुति।

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  9. This comment has been removed by the author.

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  10. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति........आभार

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  11. वाह ताऊ जी छा गये,एक्दम सच्ची कविता।ऐ मां तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी?

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  12. आपकी तो ये अदा भी निराली है.. कमाल और सिर्फ़ कमाल

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  13. बहुत सुन्दर भाव पूर्ण अभिव्यक्ति .

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  14. बेहद ही सुंदर शब्‍दों में नारी की पहचान बताई है ताऊ जी बहुत अच्‍छी लगी कविता

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  15. बहुत ही अच्छा लिखा है ..बहुत पसंद आई यह शुक्रिया

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  16. बहुत सुन्दर रचना.. राम राम

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  17. bahut hi achha likha hai aapne to nari shakti ko samjha hai bahut badiya ........... know about C.g. & raipur log on -www.helloraipur.com

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  18. बहुत खूब.. दिल को छू जाने वाली कविता..

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  19. आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया बहुत अच्छा लगा आकर...
    मीत

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  20. नारी तो रूप है शक्ति का, प्रेम का, विशवास का
    नारी के बिना ये जग जूठा है.......

    बहूत सुन्दर रचना

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  21. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति........राम राम

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  22. ताऊ, घनै भूत दिख रहे हैं थारे बिलोग पे

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  23. बहुत ही सुंदर लगी ताऊ आप की यह कविता,
    धन्यवाद

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  24. ताऊ को सलाम एक सुंदर अभिव्यक्ति के लिये वो भी इतने सधे-सजे शब्दों में...

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  25. बहुत खूब..सुंदर भाव वाली सुंदर रचना। सीमा जी और ताउ का आभार।

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  26. kyaa yae kavita seema gupta ji kii haen ?? aabhar daekh kar aesa hi laagaa . phir ek commentmae seema gupta ji kaa naam bhi deekha . to kyaa kavita p c rampuriya ji ki haen . clear kardaetey duvidha ko maeri samjh ki

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  27. बाप रे ताऊजी, कब से आपकी और राज भाटिया जी की पोस्ट पर टीप करने को तरस गए हम। पता नहीं क्यूँ आप दोनों की साइट ही ब्ला॓क कर देता था हमारा एन्टीवायरस। बड़ी मुश्किल से अब माना। बहुत ही ख़ूब कविता लिखी है ताऊ साहब आपने। वास्तव में दिल को छू लिया जी। आपका बहुत बहुत आभार और सीमाजी को भी हमारा आभार प्रेषित करें।

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  28. बेहद भावनात्मक अभिव्यक्ति......आभार

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  29. bahut hi achchee kavita likhi hai Taau ji aap ne.

    'निजता गुम हो जाती है रिश्तो में
    और खो जाते है स्वपन उसके
    भूल जाती है पहचान अपनी
    रिश्तों की इस अंधी दौड में रात के सूनेपन में पुकारती है उसकी निजता ...

    Sshkat abhivyakti.
    badhaayee.

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