नेता बनाम डाकू

neta-daku1

नेताजी जन्सम्पर्क पर निकले

सभास्थल से पहले ही

दस्युओं के हत्थे चढ गये

मुश्कें बांध दी गई

डाकू सरदार के सामने पेश किये गये

नेताजी बुरी तरह हांपे

सरदार की त्योरियां देख कांपे

डाकू सरदार बोला -

अरे डर मत यार

हम तुम एक

हमारे इरादे नेक

जनता की पैदाइश हैं

मुझे नोट दिये

तुझे वोट दिये

तुमको सत्ता

मुझको बंदूक

निशाने दोनों के अचूक

हम खुश अड्डे बदल कर

तुम खुश दल बदल कर

कोई फ़र्क नहीं

हम हैं पक्के फ़्रेंड

जनता को लूटने मे ट्रेंड

युं समझो कि सगे भैया

रास्ते अलग पर

दोनों का लक्ष्य है रुपैया

पुलिस हमेशा आगे पीछे

यानि तुम्हारे आगे

और मेरे पीछे

यहां अपनों के बीच आये हो

कुछ दिन मौज मस्ती करो

कल एक बैंक लूटने का इरादा है

फ़िर ये जगह छोडने का वादा है

आपसे नये अडडे का फ़ीता कटवाना है

उसके बाद आपको

घर भिजवाना है

(आभार सुश्री सीमा गुप्ता जी)

27 comments:

  Udan Tashtari

Tuesday, March 17, 2009 6:20:00 AM

ऐन चुनाव के समय-एक दिन पूरा उदघाटन के लिए..डाकू भाई, यह तो डकैती है. :)

बेहतरीन रचना.

  Arvind Mishra

Tuesday, March 17, 2009 7:28:00 AM

यह है सामयिक कविता -जोरदार ,शुक्रिया !

  makrand

Tuesday, March 17, 2009 9:30:00 AM

ताऊ छा गये आज तो. बिल्कुल सही कहा.

  दीपक "तिवारी साहब"

Tuesday, March 17, 2009 9:33:00 AM

अच्छा जनसम्पर्क करवाया नेताजी को.

और वैसे भी जहर को जहर ही मारता है.

सूंदर सटीक और सामयिक रचना.

  लवली कुमारी / Lovely kumari

Tuesday, March 17, 2009 9:47:00 AM

तल्ख हकीकत... क्या किया जा सकता है.

  नीरज गोस्वामी

Tuesday, March 17, 2009 10:25:00 AM

बहुत जोरदार कविता...आज का सच बयां करती हुई...सीमा जी व्यंग भी कितना बढ़िया लिखती हैं आज पता चला..वाह.
नीरज

  आलोक सिंह

Tuesday, March 17, 2009 10:44:00 AM

नये अडडे का फ़ीता कटवाना है,
उसके बाद आपको घर भिजवाना है
नेता जी फंस गए मुश्किल में आचार संघिता लागु हो गयी है
चुनाव आयोग जवाब मागने लगेगा , नेता को दबोचने लगेगा .
बहुत अच्छी रचना .

  महामंत्री - तस्लीम

Tuesday, March 17, 2009 1:13:00 PM

वाह, मजा आ गया।

  विनीता यशस्वी

Tuesday, March 17, 2009 1:20:00 PM

aaj ke mahol pr bilkul fit baithti hai ye kavita...

  Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"

Tuesday, March 17, 2009 1:47:00 PM

लो जी,कविता के बहाने आपने तो पूर्णत: सच्चाई ही लिख डाली.......बहुत बढिया.....

  अल्पना वर्मा

Tuesday, March 17, 2009 1:52:00 PM

आज आप की लिखी व्यंग्य भरी इस रचना के शीर्षक से लगा था कि आज ताऊ जी हास्य कविता लिखे होंगे.मगर यह तो एक कटाक्ष है.लगता है चुनावों के माहोल का असर है.

  डॉ .अनुराग

Tuesday, March 17, 2009 2:03:00 PM

बेहतरीन रचना.

  Shiv Kumar Mishra

Tuesday, March 17, 2009 3:38:00 PM

बहुत शानदार!

  seema gupta

Tuesday, March 17, 2009 3:55:00 PM

जनता को लूटने मे ट्रेंड युं समझो कि सगे भैया रास्ते अलग पर दोनों का लक्ष्य है रुपैया पुलिस हमेशा आगे पीछे यानि तुम्हारे आगे और मेरे पीछे यहां

" ha ha ha ha ha ha ha lgtaa hai tahu ji thgi ka trika smjha rhe hai ha ha ha vaise bhi thgi dketi me tau ji kaa koi saani nahi"

regards

  ज्ञानदत्त । GD Pandey

Tuesday, March 17, 2009 3:58:00 PM

मौसेरे भाइयों की कविता बहुत जमी। आगे भी इनके ज्वाइण्ट वेंचर के बारे में बताया जाये।

  दिगम्बर नासवा

Tuesday, March 17, 2009 5:47:00 PM

Taau
Raam Raam

Neta aur Dako, jordaar kavita hai.
Aap to jo bhi likhte hain chaa jaate hain.

  विक्रांत बेशर्मा

Tuesday, March 17, 2009 6:42:00 PM

बहुत ही ज़ोरदार व्यंग है !!!!!!!!

  प्रेम सागर सिंह (Prem Sagar Singh)

Tuesday, March 17, 2009 7:47:00 PM

बेहतरीन जुगलबन्दी के लिए आभार।

  poemsnpuja

Tuesday, March 17, 2009 9:23:00 PM

काश वो डाकू नेताओं को इलेक्शन भर पकड़ के रख लें...छोड़े ही न, मज़ा आ जायेगा.

  cmpershad

Tuesday, March 17, 2009 10:00:00 PM

सीमा गुप्ता जी की कविता और सीमा गुप्ता जी की हा...हा....हा!!!! बात हज़म नहीं हुई:) हाजमोला चाहिए- REGARDS.

  लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`

Tuesday, March 17, 2009 10:00:00 PM

राम राम
बहुत अच्छा लगा ताऊ जी/ सीमा जी
स्नेह,
- लावण्या

  योगेन्द्र मौदगिल

Tuesday, March 17, 2009 10:33:00 PM

JAI RAAM JI KI

  राज भाटिय़ा

Tuesday, March 17, 2009 10:33:00 PM

बिलकुल सच आज के नेता ´कल के मवाली ही तो थे, कोई चोर,कोई डाकू तो कोई जेबकतरा.... सीमा जी आप ने बिलकुल सच लिखा है, ओर बहुत सुंदर ढंग से .
धन्यवाद

  Malaya

Tuesday, March 17, 2009 11:45:00 PM

एक ने पहनी टोपी खादी
एक ने खोंसा चाकू
चोर-चोर मौसेरे भाई
एक नेता एक डाकू


भई! ये लोकतन्त्र है...

  अनुपम अग्रवाल

Wednesday, March 18, 2009 12:55:00 AM

आदरणीय ताउ जी
राम राम
यह आप कहाँ फंस गये थे
और इसमेँ कौन सा रोल निभा रहे थे ,यह ज़रा स्पष्ट नहीँ हो पा रहा है

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Wednesday, March 18, 2009 7:12:00 AM

वाह वाह!

  नरेश सिह राठौङ

Wednesday, March 18, 2009 10:48:00 PM

एक बात समझ नही पाये कि कविता किस्की सै । ताऊ कि सीमा जी कि या------ पर भाई आम खाणे सै कै पेड गिणने सै । मै नै तो मजै सै मतलब है ।

ताऊ उवाच :-:


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