"सावली सांझ"

 
sanwali saanjh1jpg
 
तुम्हारे होंठों का तिलsanwali2jpg
जैसे सावली साँझ का
चमकता एक तारा

श्यामल सा रंग सांझ का
तुम्हारे केशो से चुरा लाई सारा
भीनी भीनी मंद हवा की खुशबु
सजाये तेरी यादों से हर नज़ारा
सांवली सांझ की तन्हाई मे
बिखरा जैसे अस्तित्व सिर्फ़ तुम्हारा



(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

Comments

  1. बहुत सुन्दर. सीमा जी को बधाई और आपका आभार.

    ReplyDelete
  2. क्या बात है ताऊ। घणे रोमान्टिक सीन खैंच दिये।

    ReplyDelete
  3. क्या सुंदर लघु काव्य है. आभार.

    ReplyDelete
  4. भीनी भीनी मंद हवा की खुशबु
    सजाये तेरी यादों से हर नज़ारा
    सांवली सांझ की तन्हाई मे
    बिखरा जैसे अस्तित्व सिर्फ़ तुम्हारा
    " खुबसुरत ख्यालों से सजे कुछ एहसास..."
    Regards

    ReplyDelete
  5. " खुबसुरत ख्यालों से सजे कुछ एहसास..."

    Regards

    ReplyDelete
  6. तिल की तारे से तुलना आज पहली बार देखी, थोड़ा अलग थी लेकिन फिर भी अच्छी लगी

    ReplyDelete
  7. अब समझ आई ताऊ कल ग्रहण क्यों था? चांद आपने अपने ब्लोग पर बुला रखा है.. :)

    बहुत उम्मंदा!!

    ReplyDelete
  8. "सांवली सांझ की तन्हाई मे
    बिखरा जैसे अस्तित्व सिर्फ़ तुम्हारा"
    बहुत सुन्दर. सीमा जी को आभार और आपको बधाई.

    ReplyDelete
  9. सुन्‍दर कविता। सीमा जी को और आपको भी बधाई।

    ReplyDelete
  10. ताऊ जी आप का ब्लॉग बहुत ही सुंदर हो गया है...लगता है किसी विशेषज्ञ की मदद ली है आपने...वाह.
    नीरज

    ReplyDelete
  11. क्या बात है जी.. छा रहे हो आप तो..

    ReplyDelete
  12. बहुत सुन्दर. सीमा जी को बधाई और आपका आभार.

    ReplyDelete
  13. बधाई हो इतनी सुंदर रचना के लिए, सीमा जी को भी बधाई खूबसूरत निखार के लिए

    ReplyDelete
  14. तुम्हारे होंठों का तिल
    जैसे सावली साँझ का

    बड़ी रोमांटीक शुरूआत थी जी....


    सुन्दर.

    ReplyDelete
  15. खूबसूरत भाव...सुंदर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  16. नमस्कार ताउजी !
    आज कल तो थम घणा रोमांटिक होण लाग रहया सो! के बात से ताऊ! जरा मन्ने भी तो बता दो!
    बात आ से के ३ महीने बाद थारे इस भतीजे की शादी होण आळी हैं तो जरा एक दो नुस्का तो इण भतीजे ने भी बता दो, भतीजो थारो अहसानमंद रहवेला!
    सस्नेह!
    दिलीप गौड़, गांधीधाम

    ReplyDelete
  17. सुंदर भाव लिए हुए रचना। शुक्रिया आप दोनों का।

    ReplyDelete
  18. बड़ी सुंदर तुलना की है ताऊ जी आपने. सीमा जी की भी दाद देता हूँ.

    ReplyDelete
  19. laajvaab seemaji ko bdhai aur aapko bhi jo itni sunder rachna padhvaai

    ReplyDelete
  20. सजी को बधाई और आपका आभार।

    ReplyDelete
  21. यह रचना प्रस्तुति का स्टाइल अनूठा है।

    ReplyDelete
  22. बहुत बहुत बधाई सीमा जी को लिखने की ओर आप को यहां तक इस कविता को पहुचाने की.
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  23. बहुत घणी भाव वाली कविता है -दो महारथियों का हुनर और काव्य हुस्न निखरा हुआ है यहाँ जो !

    ReplyDelete

Post a Comment