क्षणिकाएं

pyar-mohabbat     प्यार  मोहब्ब्त

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    आर्ट
    विवाह के बाद
    कामर्स
    और बच्चों के बाद

    हिस्ट्री....
    समझ ना आए ऐसी है
    मिस्ट्री....


                "यादें"yade2

               उनकी याद 
               खामोशी को नही बहलाती
               उनकी याद
               जुदाई को नही सहलाती 
               उनकी याद

               भीड़ को बस तन्हा कर जाती हैं.

              bichhoh

                                    "बिछोह"

                                वो जब रुबरु थे
                                बात तक करने का
                                होश नही रहा
                                जब बिछुड गये
                                तो
                                नींद मे भी बुदबुदाया करते हैं

                                   ( रचना सुधार हेतु आभार : सुश्री सीमा गुप्ता जी )

Comments

  1. प्यार मौहब्बत :)

    यादें ;)

    बिछोह :(

    -तीनों क्लासिक पीस...सीमा जी को बधाई इन उम्दा रचनाओं के लिए..आपको तो खैर आभार क्या कहें..वो तो हमेशा हईये है. :)

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  2. बहुत खूब ताऊ - आपका यह कायाकल्प हमें बहुत पसंद आया! आपको बधाई, और सीमा जी को भी धन्यवाद!

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  3. उनकी याद

    भीड़ को बस तन्हा कर जाती हैं.
    वाह क्या कह डाला है ! दो प्रतिभाओं की अच्छी जुगलबंदी चल रही है -आमीन !

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  4. ताऊ.. क्षणीकायें तो जोरदार है.. पर ये सिर कटा हिन्दुस्तान का नक्क्षा क्यों लगा?

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  5. वाह,वाह! शानदार! हम तो कहते हैं और चाहते भी हैं कि सीमाजी भी कापी जांचते-जांचते आपके आज के लिखने के अंदाज से कुछ प्रभावित हो जायें। आज के सभी चित्र भी सटीक हैं। पहली वाली क्षड़िका तो गजबै है जी!

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  6. उनकी याद खामोशी को नही बहलाती , उनकी याद भीड़ को बस तन्हा कर जाती हैं."
    'यादे हमेशा ऐसे ही अपना आस्तित्व जतलाया करती हैं...."

    Regards

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  7. उनकी याद खामोशी को नही बहलाती , उनकी याद भीड़ को बस तन्हा कर जाती हैं."
    'यादे हमेशा ऐसे ही अपना आस्तित्व जतलाया करती हैं...."

    Regards

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  8. .पन्ना खोल कर पढ़ना शुरू किया, सोचा ताऊ और कविता फिर याद आया नहीं यह तो सविता है, सीमा जी कि. आभार.

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  9. वाहवा... ताऊ.. बहुत ही शानदार ढंग से प्रस्तुत किया आपने सीमा जी की क्षणिकाऒं को..
    सीमा जी को इन क्षणिकाऒं के लिये और आपको इस अद्भुत प्रस्तुति के लिये बधाइयों का माउंटएवरेस्ट..

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  10. उनकी याद
    खामोशी को नही बहलाती
    उनकी याद
    जुदाई को नही सहलाती
    उनकी याद

    भीड़ को बस तन्हा कर जाती हैं.

    waah....sabhi rachnaye bahut sunder hai.

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  11. तीनो ही बहुत बेहतरीन लगी ...सीमा जी ने बहुत अच्छा लिखा है

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  12. तस्वीर का चयन भी उम्दा है ....रचनाओं की तरह ...खासतौर से पहली ओर तीसरी.....

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  13. ताऊ ji कविता की इस विधा मैं भी आप लिखने लगे!वाह! यह तो बहुत खूब हैं!

    सीमा जी के चित्र चयन तो शानदार है ही.
    बहुत अच्छी लगी सभी क्षणिकाएं.

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  14. ( प्यार मोहब्ब्त}-
    यह ताऊ मिस्ट्री..है।

    (यादें)
    ताऊ! यह तुम्हारे उम्र दराज होने के सकेत है

    ("बिछोह")
    ताऊ! शास्त्रीजी कि बच्च्पन से ही निद मे बुदबुदाने की आदत है

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  15. सुश्री सीमा गुप्ता जी आपकी बढिया कविताओ के लिये मै आपका अभिनन्दन करता हु। समिरलाला जी कि टीप्प्णी पढने पर ज्ञात हुआ कि आप को तो भुल ही गया। मुझे कन्फियुज करने मे ताऊ का हाथ ही है। क्षमा! अभार आपका और मेरे कलरफुल ताऊजी का।

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  16. बहुत प्यारी क्षणिकाएँ, पढवाने का शुक्रिया।

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  17. ताऊ,
    बहुत खूब लिखा हैं कि उनकी याद खामोशी को नहीं बहलाती, उनकी याद भीड़ में तनहा कर जाती हैं,
    और एक बात अगली पहेली नम्बर - ७ का इन्तजार कर रहा हूँ, शायद अगली बार कुछ बेहतर करूँ,
    वैसे कृपया मेरे प्राप्तांक बताएँगे, पीछे से प्रथम तो जरुर हूँ,
    बन्दे का आत्मविश्वास देखिये,

    दिलीप कुमार गौड़
    गांधीधाम,

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  18. लगता है गहरी वेदना से लिखी हैं तीनो ताऊ............
    पर कमाल का लिखा है

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  19. @ श्री दिलिप गौड, आपकी इन्क्वायरी के लिये धन्यवाद.

    हमारे रिकार्ड के हिसाब से शनीचरी पहेली - ६ मे भाग लेने से
    आपको एक अंक प्राप्त हुआ है जो आपके अकाऊंट मे जमा होने के बाद
    अभी तक का कुल जमा स्कोर अभी तक १ हुआ है.

    भाग लेते रहिये.

    रामराम

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  20. वाह जी वाह तीनों ही बहुत मजेदार बहुत अच्‍छी हैं धन्‍यवाद

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  21. ताऊ जी कविगीरी की बधाई !

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  22. तीनों ही गजब की क्षणीकायें हैं और फोटो भी सुन्दर।

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  23. ग़ज़ब रे भाई ताऊ...ग़ज़ब...बधाई तन्ने और सीमा जी ने...
    नीरज

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  24. वाह कवि‍ता भी अच्‍छी और प्रस्‍तुति‍ भी।

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  25. ताऊ बहुत सुंदर लगी आप की क्षणिकाएं ओर सारे चित्र भी... धन्यवाद

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  26. ताऊ को ऐंड़ी बजा कर एक कड़क सैल्युट...

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  27. सुन्‍दर चयन। किन्‍तु इसमें -'ताऊ टच' या फिर 'ताऊ इफेक्‍ट' होता तो सोने पे सुहागा होता।

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  28. ताऊ जी को राम राम
    बहुत बढ़िया हें

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