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अंधेरी रात की दरखास्त '

 
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ईश्वर की अदालत मे
अंधेरी रात की दरखास्त
माई बाप न्याय कीजिये
इस लफ़ंगें सूरज का प्रकाश

आवारा दीवाना हुआraat2jpg
मेरा पीछा कर परेशान
मुझे है करता ....
शर्म हया से मुह छुपा
भागना मुझे है पड़ता ...
एक अबला की सुन पुकार
अदालत की  तुरंत हरकत

नियत पेशी पर
प्रकाश हाजिर हुआ
पर रात  गैर हाजिर

अदालत मे  प्रकाश  का बयान
मै क्या जानु कौन है कैसी
वो सुंदर सलोनी अंधेरी रात
देखी ना तस्वीर अभी तक
हुई ना कोई प्यार की भी बात
युगों से अदालत की यही बस एक आसraat1jpg
हाजिर हो जाए दोनों एक साथ
परमात्मा की परेशानी  कोई समझ ना पाया

उसकी अदालत मे, इतना संगीन मुकदमा
आज तक दुसरा कभी ना  आया
कौन किसका पीछा कर रहा है
ये राज सुलझ ना पाया
आखिर मे परमात्मा भी पछताया
क्या सोच कर उसने
दिन  ओर रात को बनाया  ?


(इस रचना के दुरूस्तीकरण के लिये सुश्री सीमा गुप्ता का हार्दिक आभार!)

38 comments:

  1. ताऊ आधी रात को आप की सुंदर सी कविता पढी, मजा आ गया, आप का ओर सीमा जी का धन्यवाद, अभी आप की इस कविता को शायद ६ मिन्ट ही हुये है.

    शुभ दिन

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  2. परमात्मा ने क्या क्या सोअ कर क्या क्या बनाया कौन जाने मगर रचना उम्दा प्रस्तुत कर गये. सीमा जी को बधाई और आपका आभार.

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  3. वाह ताऊ वाह! गज़ब किस्सा सुनाया - आनंद हमको आया! कविता बहुत पसंद आयी. बाय द वे, अब जब आप कवि बन ही गए हैं तो आपकी आतंरिक सोच की भाषा में भी एकाधा रागणी वगैरह हो जाए तो कैसा रहे?

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  4. पहले सोचा - ताऊ ने कविता लिखी. खुश हो गया.
    बाद में देखा -आभार सुश्री सीमा गुप्ताजी. समझ गया, संतुष्ट हुआ.
    सन्तुष्टि दो बातों की थी - एक यह कविता आपने नहीं लिखी. दूसरी सीमा गुप्ता जी की कलम ने इतनी खूबसूरत कविता लिखी.
    आप दोनों का आभार.

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  5. हर प्रकाश स्रोत अंधेरे को नहीं देखने को अभिशप्त है।

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  6. मै भी सोचूं के ताऊ कवि कब बनो. अदालत का बार बार जिक्र देखा तो लगा द्विवेदी जी का टीपो है. दस्तखत सीमा जी का देखा तो मामला समझा में आयो.सीमा जी दा जवाब नहीं.आभार.

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  7. वाह ताऊ, लाजवाब लिखा आपने तो. वाकई प्रकाश और अंधेरे की तो कभी मुलाकात ही नही होती. तो यह मुकदमा तो कभी निपटेगा ही नही.

    आपके भाव लाजवाब हैं और सु. सीमाजी ने इस रचना को पुर्णता की और बखूबी पहुंचाया है.

    बढिया है जी. आप दोनो का आभार.

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  8. @अल्पना वर्मा जी,

    पता नही मेरा इ-मेल आई. डी. आपको क्युं नही मिला? आपकी भेजी हुई लिंक मुझे टिपणी मे मिल गई है. वो दोनो टिपणियां मं पब्लिश नही कर रहा हूं.

    आप कृपया अपना ई-मेल आई-डी यहां छोड दिजिये, यहां कमेन्ट मोडरेशन लगा है, मैं उसे पब्लिश नही करुंगा.

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  9. बहुत सुन्दर कविता है,

    आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

    ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

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  10. ताऊ.. आपका खूंटा कहाँ गया??

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  11. आखिर मे परमात्मा भी पछताया
    क्या सोच कर उसने
    दिन ओर रात को बनाया ?
    " ताऊ जी ने तो बहुत कोशिश की थी इस राज को सुलझाने की , की परमात्मा ने दिन और रात क्युं बनाये मगर जब परमात्मा ख़ुद ही नही समझ पाया आज तक तो ये राज अनसुलझा ही रह गया...." मगर एक राज की बात हमारे पास है जो आप सभी से हम यहाँ बांटना चाहते हैं ...वो राज ये है की... मुल रूप से भाव कल्पना और शब्द सब ही ताऊ जी के हैं...हमने तो सिर्फ़ कापी जाँच कर हस्ताक्षर कर दिए हैं"

    regards

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  12. अँधेरे के बिना प्रकाश का क्या मोल?

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  13. क्या बात है ताऊ...भई वाह!अद्‍भुत रचना...

    "मै क्या जानु कौन है कैसी
    वो सुंदर सलोनी अंधेरी रात
    देखी ना तस्वीर अभी तक
    हुई ना कोई प्यार की भी बात "

    हट कर के बिम्ब...

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  14. समझ नहीं आ रहा सीमा जी ने कविता लिखी है या कविता संशोधित की हैं??
    जहाँ तक समझ kahti है..यह ताऊ जी की लिखी है.
    कविता में ...अंधेरे और उजाले का झगडा है...अब यही तो होता है न!
    विरोधी गुटों में झगडा!
    मज़ाक से हट कर--

    -कविता में भाव अच्छे हैं.कविता भी अच्छी बन पड़ी है...

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  15. वाह अच्छा लगा पढकर। बधाई और शुक्रिया। आप दोनो का।

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  16. mast taaoo....maza aa gaya padh kar......

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  17. वाह ताऊ जी वाह, बात से बेहतर भाव लगे, आभार सीमा जी का भी, पर असल में ये कृति है किसकी?

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  18. सूरज और रात की ओरिजिनल कविता !

    झगडे में कनफ्यूज हो गए परमपिता !

    कॉपी जँचवाने का अच्छा है कायदा !

    सीमा जी का प्रचार आपका फायदा !

    धाँसू कविता ! स्वाहा !

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  19. भाव भी अच्छे और हस्ताक्षर भी :)

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  20. भाव भी अच्छे और हस्ताक्षर भी :)

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  21. प्रकाश और अन्धकार का शाश्वत द्वन्द्व!

    अपने अपने हिस्से की बधाई दोनों को।

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  22. ताउ राम राम तनिसा हमरि नगरी मे भी आयी

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  23. कविता बहुत खूब लिखी है ।
    घुघूती बासूती

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  24. कौन किसका पीछा कर रहा है
    ये राज सुलझ ना पाया

    -
    वाह, यह तो कुछ वैसा है कि कातिल मेरा आगे है और मैं पीछा कर रहा हूं!

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  25. फिलोसोफिकल कविता लगी मुझे तो. ताऊ और सीमाजी को धन्यवाद.
    असली ताऊ का पता चला क्या? :-)

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  26. बड़ी सुन्दर कविता लिखी ताऊ साहब आपने. क्या कहना शब्द, शब्द बात करता हुआ राज़ की.
    आदरणीय सीमा जी का बहुत बहुत आभार जो का॓पी की अलंकृत जाँच की.
    आपका शुभचिंतक.

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  27. वो सुंदर सलोनी अंधेरी रात
    देखी ना तस्वीर अभी तक

    सुंदर लिखा है सीमा जी ने

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  28. पढ़ना शुरू किया तो समझ नही आया कि आज ताऊ को क्या हो गया????
    हस्ताक्षर देखा तो समझ आया.......यह तो कविता है और वो भी गंभीर.......
    बढ़िया है.सीमा जी को बधाई और आपका आभार.

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  29. ईश्वर की उलझन को बढ़िया से समझाया ताऊ जी आपने.

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  30. ताऊ राम राम
    इतनी संवेदन-शील रचना है, इतना सच लिखा है, कोई शब्द नहीं हैं इसकी तारीफ़ के लिए...........बस एक बेहतरीन कविता, सुंदर lekhan

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  31. कविता किसी ने भी लिखी हो लेकिन बेहद चमत्कारिक रचना है. ऐसी रचनायें बार बार पढ़ने को मिलें- यही कामना है.

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  32. किसकी तारीफ़ करूँ ?आपकी या सीमा जी की ?

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  33. सीमा जी की ये कवि‍ता उनकी शैली में एक और आयाम जोड़ती है, उनको शुक्रि‍या और इस आयाम से रूबरू कराने के लि‍ए ताऊ जी को भी शुक्रि‍या।

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  34. कौन किसका पीछा कर रहा है

    ये राज सुलझ ना पाया
    आखिर मे परमात्मा भी पछताया
    क्या सोच कर उसने
    दिन ओर रात को बनाया ?

    Bahut achhi kavita Tauji

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  35. कौन किसका पीछा कर रहा है

    ये राज सुलझ ना पाया
    आखिर मे परमात्मा भी पछताया
    क्या सोच कर उसने
    दिन ओर रात को बनाया ?

    Bahut Achhi Kavita tauji

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  36. शानदार है। दिन-रात एक दूसरे के पीछे लगे रहें हमेशा।

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