ताऊ की शनीचरी पहेली - ४ का जवाब

माननिय भाईयों, बहणों और बेटियो सबनै ताऊ की तरफ़ तैं सोमवार सबेरे की रामराम.  आज आपका कार्यकारी दिवस है सो फ़टाफ़ट ये रिजल्ट देख कै काम धंधे पै लग ल्यो.

 

ताऊ पहेली-४ का सही जवाब है रानी रुपमती, मांडव, इस अंक मे कुल ३६ ब्लागर्स के ४९ कमेंट्स आये. जिसमे से १७ लोग विजेता रहे. नतीजे घोषित करने के पुर्व कुछ चित्र मांडव से.

 

roopmati2 विवरण के लिये हम सुश्री अल्पना वर्मा, सुश्री सीमा गुप्ता, श्री प्रकाश गोविन्द एवम दिलीप कवठेकर जी की टिपणीयां भी प्रकाशित कर रहे हैं. यह जगह मांडव गढ के नाम से प्रसिद्ध है और काफ़ी दूरी मे फ़ैली हुई है. अनेक स्मारक उस काल के हैं जहां आप एक दिन में तो ढंग से नही देख सकते. ज्यादातर स्मारक अब भग्नावस्था मे पहुंचने लगे हैं. (यह चित्र रानी रूपमती पेवेलियन का है जो बाजबहादुर के महल से लिया गया है.)

 

मांडव एरिया आज भी विकास से अछूता है, सो प्रदुषण वहां नही है, माहोल मे एक अजीब सी खामोशी तैरती है. निजी रुप से अनेको बार वहां गया हूं, बहुत शांत जगह है. मुझे वहां जाना अच्छा लगता है. चांदनी रात मे रुपमती के गुम्बज मे बैठकर चांद को निहारना एक अजीब एहसास देता है जिसको शब्दों मे अभिव्यक्त नही किया जा सकता. वहां रुक कर ही आप कुछ महसूस कर सकते हैं.

 

jahajmahalयह है जहाज महल. इसके सामने और पीछे तालाब हैं. इस महल की आकृति जहाज जैसी है. अब तो इतना पानी नही है पर किसी समय मे ये जरुर पानी मे तैरते जहाज का नजारा देता होगा.

 

यहां फ़िल्म रानी रुपमती, दिल दिया दर्द लिया ( दिलिपकुमार- वहीदा रहमान) और फ़िर शायद अन्तिम बार किनारा ( जितेन्द्र-हेमा मालिनी) फ़िल्म की शूटिन्ग हुई थी. किनारा की शूटिन्ग के दर्म्यान मुझे ३/४ दिन यहां रुकने का मौका मिला था तब से ही मैं इस जगह अक्सर अपने लघु अवकाश व्यतीत करने आता रहा हूं.

 

यहां जो सिढियां दिखाई दे रही हैं वो इतनी आसान नही है जितनी दिखाई दे रही हैं. फ़िल्म दिल दिया दर्द लिया मे एक सीन था. जिसमे वहीदा रहमान इन सिढीयों को भागते हुये एक सांस मे चढती है, वो एक अलग कहानी है पर अगर आपको याद हो तो लाजवाब सीन बन पडा था वो. अब भी किसी सीडी पर देखा जा सकता है.

 

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bajbahadur2 ये बांये बाजबहादुर का महल है. यह चित्र रानी रूपमती पेवेलियन से लिया गया है. यानि यह थोडी नीचाई पर स्थित है. और दाहिनें तरफ़ बाजबहादुर महल के बाहर लगा शिला-लेख.

 

आज के प्रथम विजेता :- Udan Tashtari said...

रानी रुपमति का महल, मांडु, मऊ, म.प्र.

घणी बधाई प्रथम स्थान के लिये. सर्वाधिक अंक प्रात किये १०१.

तालियां.....

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दुसरे स्थान पर १०० अंक के साथ :- नितिन व्यास said...

ये तो मन्ने माण्डू का रानी रुपमती का महल दिखे है

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तीसरे स्थान पर ९९ अंक के साथ :-Tarun said...

ताऊ ये लो हमारा उत्तर लॉक कर लो -
ये रानी रूपमती पवेलियन है, जो मालवा की एक गायिका थी। सुल्तान बाज बहादुर और रानी रूपमती में प्यार हो गया था फिर दोनों ने शादी कर ली थी। अहमद खान भी रानी के रूप में दीवाना था जब वो विलेन बनकर आया तो बाज बहादुर के हारने के बाद रानी ने जहर खा लिया था।

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 चौथे स्थान पर ९८ अंक के साथ :- P.N. Subramanian said...

मन्ने तो रानी रूपमती का महल, मांडू दिखे है. नहीं हो तो मन्ने खूंटे पे बाँध दो.

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 पांचवे स्थान पर ९७ अंक के साथ  रंजन said... रुपमती का पवेलियन है मांडू में... बाज बहादुर के किले में एक जगह है... राम राम

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छठे स्थान पर ९६ अंक के साथ शुभम आर्य said... ताऊ आज तो मुझे देर हो गई फिर भी जवाब ले ही लो । मांडू का किला ही है जिसमे रानी रूपमती महल का दृश्य है |

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सातवें स्थान पर हैं  ९५ अंक के साथ :-  Vidhu said... रानी रूपमती के लिए बाज बहादुर द्वारा बनवाया गया मांडू मैं [मध्यप्रदेश]बनवाया गया जहाज महल ...कहतें हैं जहाँ से रूपमती ऊपर खड़ी होकर नर्मदा के दर्शन करती थी ....

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आठवें स्थान पर ९४ अंक के साथ हैं :-  अल्पना वर्मा said... यह चित्र रानी रूपमती के पवेलियन[या कहिये महल] का है.जो मांडू [मध्य प्रदेश] में है. बाज बहादुर के महल के सामने बना है--क्यूँ??इस का विवरण अगले कमेन्ट में.

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नौवें स्थान पर ९३ अंक  के साथ  हैं :-  Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ताऊ! यो तो मांडू मे रानी रूपमती का महल देखे है.

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दसवें स्थान पर ९२ अंक के साथ :- seema gupta said...

ये मध्य प्रदेश मांडू स्थित रानी रूपमती महल ( गुम्बजदार इमारत )है जो रानी रूपमती और बाज़ बहादुर की प्रेम कहानी का गवाह है. आरंभ में इसका निर्माण सेना की चौकी के लिए किया गया था .बाज़ बहादुर महल के दक्षिण की ओर ऊँची पहाडी के शिखर पर स्थित है. कहा जाता है की बाज़ बहादुर शिकार करते समय एक हिन्दु लड़की रूपमती पर आकर्षित हो गये और उनका प्यार इस कदर परवान चढा की सुलतान रूपमती को मांडू ले आए इस शर्त पर की रूपमती को ऐसी जगह रखा जाएगा जहाँ से वो उनका महल और नर्मदा नदी को देख सके ,रूपमती को यहाँ रखा गया था और ये जगह रानी रूपमती महल के नाम से प्रसिद्ध हो गयी. .

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 ग्यारहवें  स्थान पर ९१ अंक के साथ  प्रकाश गोविन्द said...

सही जवाब : मांडू (मध्य प्रदेश) स्थित रानी रूपमती पवेलियन

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 बारहवें पर अंक ९० पर :  वरुण जायसवाल ताऊ जी यह तो धार जिले के मांडू का रानी रूपमती महल ही है |

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तेरहवें पर अंक ८९ पर :-  प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर मेरा पहला जवाब कैंसल कर दिया जाय!! मैं भी तरुण जी के पीछे !!
यह रानी रूप मति के महल के पवेलिओन का हिस्सा है

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 चौदहवें पर अंक ८८ के साथ : विवेक सिंह रानी रूपमती महल माँडू .

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पंदरहवें पर अंक ८७ के साथ :- मयंक मध्य प्रदेश के मांडू में रानी रुपमती का महल जिसे जहाज महल के नाम से भी जाना जाता है
रानी रुपमती और बाज बहादुर की प्रेमकथा देश की सबसे मशहूर कहानियों में से है

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सोलहवें पर अंक ८६ के साथ हैं इन्दोरी भाई दिलीप कवठेकर

माण्डव (धार) के किले में स्थित सबसे ऊंचा स्थान रानी रूपमती का महल, जहां से मालवा का पठार खत्म होता है. य़हां से नर्मदा नदी के भी दर्शन कभी कभी हो जाते है.

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अब सतरहवें पर आगये हैं ८५ अंक के साथ  दीपक "तिवारी साहब"

ताऊ, ये भाभी जी यानि रुपमती का महल ही समझिये. यहीं से भाभी जी नर्मदा मैया के दर्शन किया करती थी और इससे ठीक नीचे भाई साहब यानि बाजबहादुर दादा का निवास यानि महल है.


दोनो अपने अपने ठीयों से एक दुसरे को देखा करते थे और वहीं से भाभीजी अपना सुमधुर गायन भाई साहब को सुनाया करती थी.


और यही रुपमती पर आकर एक्दम से मालवा का पठार खत्म होता है. और निमाड की सीमाएं लग जाती हैं. यहां पर एक रात को हम दोस्त लोग काफ़ी देर तक रुके रहे थे, गाने की आवाज तो नही पर बहती हवा के साथ साथ एक अजीब सी संगीत ध्वनि जरुर सुनाई देती है और माहोल मे काफ़ी मादकता रहती है पर साथ मे वहां इतनी देर रात लूटपाट का डर भी सताता है सो रात को १ बजे वापस होटल आकर सो गये.


अब मुझे पूरे १०१ अंक दे देना, बेईमानी नही करना, वर्ना भाई साहब को बता दूंगा कि ताऊ भाभी जी के नाम पर टिपणियां बटोर रहा है. फ़िर देखना भाई साहब तुमको इतने कोडॆ लगवाएंगे कि तबियत हरी हो जायेगी और सारी टीपणियां भी शाही खजाने में जमा करा ली जायेंगी. :)

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निम्न भाइ बहणों ने भी इस पहेली अंक-४  मे किसी न किसी रुप मे टिपणी करके सहभागिता करके हमारा उत्साह वर्धन किया.  आप सबका सादर हार्दिक आभार.

अजित वडनेरकर , SMART INDIAN - स्मार्ट इंडियन , ARVIND MISHRA , RATAN SINGH SHEKHAWAT , अनूप शुक्ल , दिनेशराय द्विवेदी DINESHRAI DWIVEDI , अशोक पाण्डेय , जितेन्द़ भगत , कुश , सुशील कुमार छौक्कर , GYAN DUTT PANDEY , संजय बेंगाणी , गौतम राजरिशी , दिगम्बर नासवा , मोहन वशिष्‍ठ , राज भाटिय़ा , BRIJMOHANSHRIVASTAVA , और भाई नरेश सिह राठौङ ,

 

आईये अब कुछ विषय पर रोशनी डालती हुई टिपणियां :-

 


अल्पना वर्मा said... January 10, 2009 1:20 PM

१६ वीं शताब्दी में रानी रूपमती के मंडप को एक सेना का अवलोकन पोस्ट के रूप में बनाया गया था.
रूपमती और बाज़ बहादुर की प्रेम कहानी सुनिए-
बेहद सुंदर रूपमती एक कवियत्री थीं और गाती भी बहुत अच्छा थी, राजा बाज बहादुर कविताओं और संगीत का शोकिन था..और एक दिन शिकार करते समय जंगल में रूपमती [गडरिये ] की आवाज़ पर फ़िदा हो गया.
उस ने प्रेम प्रस्ताव रखा तो रूपमती ने विनती की कि उस का मंडप ऐसी जगह बनवाया जाए जहाँ से वह अपने प्रेमी के महल को [या प्रेमी को?]देखती रह सके!. बाज बहादुर ने तुंरत हामी भर दी. इस प्रकार Mandu में रानी रूपमती का मंडप और रीवा कुंड बनाया गया था.
'मुस्लिम रजा और हिंदू रूपमती 'दोनों की शादी में हिंदू और मुस्लिम दोनों रीतियों का पालन हुआ था.'
रीवा कुंड' जो आज एक पवित्र स्थान माना जाता है -बाज बहादुर ने रानी रूपमती के पानी का इंतजाम करने को बनवाया था. बाज बहादुर मांडू के अंतिम स्वतंत्र शासक थे.
अधम खान ने मांडू पर हमला कर दिया और बाज़ बहादुर मदद लेने चित्तोड़गढ़ भाग गया.अधम खान रूपमती की सुन्दरता देख कर उस का दीवाना हो गया लेकिन
रूपमती ने ज़हर खा कर खुदकुशी कर ली--और एक प्रेम कहानी का अंत हो गया.
सुनते हैं रूपमती , के परिवार के सदस्य आज भी 'इंदौर में रह रहे हैं.

 

दुसरी टिपणी :-January 11, 2009 2:48 AM पर

 

--एक और रोचक जानकारी-रानी रूपमती की २६ कविताओं का फारसी में [१५९९]और अंग्रेजी में [१९२६में]अनुवाद हुआ था.
-१९५७ में बनी हिन्दी फ़िल्म 'रानी रूपमती'भी इसी कहानी पर आधारित है[??]
---सुबह समय अभाव के कारण खूँटा और बाकि सारी पोस्ट अभी पढ़ी..बहुत बढ़िया लिखी है..ताऊ बचपन में कितनी मार खाते रहे हैं!
-वैसे अब उड़न तश्तरी तेज़ी से विजय चक्र में तब्दील होने वाली है.
-टंकण त्रुटी के कारण मैं ने पिछले २ कमेन्ट हटा दिए हैं.सुधार के बाद यह हैं-
बाज़ बहादुर का राज्य-1555 to १५६२ तक ही चला था.रूपमती हिंदू राजपूत परिवार में जन्मी थीं और एक गड़रिया थी.
जय राम जी की!

 

 

@ अल्पना जी : इतनी जानकारी के लिये आपका आभार .  असल मे ऐसी जानकारी देकर आप आयोजकों का जानकारी देने का बोझ कम कर देती हैं. अगर आपके पास वो पोईट्री भी हो तो अवश्य पाठकों को बताने की कृपा करें.

 

 


 प्रकाश गोविन्द said... January 10, 2009 7:29 PM

जवाब तो मैंने पहले ही दे दिया है ! अब मेरे पास टाईम है तो विस्तृत वर्णन भी
कर दूँ !
रीवा कुंड , बाज बहादुर पेलेस और रानी रूपमती पेवेलियन आस-पास ही स्थित हैं,
ऐतिहासिक तौर पर इनका आपस में गहरा सम्बन्ध है !
१६०० वीं शताब्दी में बाज बहादुर जो की मांडू के आख़िरी स्वतंत्र शासक थे ! एक बार राजा बाज बहादुर शिकार के लिए घूम रहे थे तो उनकी मुलाक़ात धरमपुरी के राजा की बेटी रूपमती से हुयी जो कि विवाहित थीं, लेकिन अपने पति से अलग होकर अपने पिता के साथ रहने लगी थी ! राजा बाज बहादुर ने जब रानी रूपमती के सौंदर्य को देखा तो मोहित हो गए ! रूपमती को संगीत से बेहद लगाव था और वो स्वयं भी गायन में अत्यन्त निपुण थीं !
बाज बहादुर ने जब रूपमती से मांडू चलने का आग्रह किया तो रूपमती ने विनती की कि उनके लिए मांडू में ऐसी जगह बनवा दी जाए जहाँ से वो अपने प्रियतम का राज-किला और नर्मदा के दीदार सहजता से कर सकें ! बाज बहादुर ने रूपमती की ईच्छा को सहर्ष स्वीकार कर रूपमती महल और इस पवेलियन (मंडप) का निर्माण कराया !
बाज बहादुर का अपना किला था जहाँ से अपना राज्य काज देखता था ! इस पेवेलियन से रानी रूपमती बाज बहादुर का किला देख पाती थी और दूसरा फायदा यह था की वहां से नर्मदा नदी को खाडी में बहते हुए देख सकती थी ! गौर तलब है कि रूपमती के मन में नर्मदा नदी के प्रति अगाध श्रद्धा थी ! नर्मदा की पूजा अर्चना किए बिना रानी रूपमती अन्न भी नही खाती थी !
मुग़ल सल्तनत का सम्राट अकबर चाहता था कि मांडू का राज्य उसके अधीन आ जाए, इसके लिए उसने अधम खान को जिम्मेदारी सौंपी ! अधम खान ने अच्छी-खासी मुग़ल सेना को लेकर मांडू पर चढाई कर दी !
बाज बहादुर को आभास हो गया था कि पराजय निश्चित है , इसलिए मदद के लिए चितौडगढ़ रवाना हो गया !
इधर अधम खान ने आसानी से मांडू किले पर कब्जा कर लिया ! अधम खान ने रानी रूपमती की सुन्दरता के बारे में काफी सुन रखा था ! उसने जब पहली बार रूपमती को अपने सामने देखा तो ठगा सा , अपलक निहारता ही रह गया !
अधम खान रूपमती को हासिल कर पाता, इससे पहले ही रूपमती ने जहर खाकर अपनी जान दे दी !
सैकडों साल बीत गए लेकिन मांडू की हवाओं में, लोक कलाओं में, लोक संगीत में आज भी बाज बहादुर और रूपमती की प्रेम कहानी विद्यमान है !

 

 

 


 दिलीप कवठेकर said... January 11, 2009 2:09 AM पर

 

रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी मशहूर है, और इनके संगीत प्रेम के कई किस्से मशहूर है. ऊपर जो बुर्ज दिख रहे है,यहां रानी रूपमती , राजा बाज़ बहादुर को गाना सुनाती थी.
इतनी सांय सांय हवा होने के बावजूद भी इस बुर्ज़ में बैठ कर गाने का लुत्फ़ किसी ने नही उठाया हो तो व्यर्थ है.
वैसे बाज़ बहादुर का अलग महल भी है इसी महल के छोटी पहाडी के आरंभ में , जहां अधिकतर गानों की मेहफ़िलें सजती थी. यहीं रेवा कुण्ड भी है, जहां कहते है कि रानी की नीलकंठेश्वर महादेव की पूजा के लिये स्वयम मां नर्मदा का जल आता था.
फ़िल्म भी बनी थी यहां, जिसमें निरुपा राय नें रानी का अभिनय किया था, और इसके गीत (खासकर मुकेश का) काफ़ी मशहूर हुए. यहां दिल दिया दर्द लिया और किनारा का भी फ़िल्मांकन हुआ था.
वैसे मेरा इस पहेली में इस बार पहला ही अवसर है, और शायद मेरे अंक नही गिने जायेंगे, क्योकि हमारे शहर इंदौर के करीब ये एक मात्र बढिया ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है. अभी अभी उडन तश्तरी को भी आमंत्रण दिया था हमने यहा पधारने का.

 

 

कुछ मौज मस्ती की टिपणियां :-

 


 Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...इस रूपमती इमारत मैं तो कोई बाज़ सा उड़ता दीखे है!चश्मे के बिना तो मन्ने यो मांडू का जहाज़-महल सा दीखे है!

January 10, 2009 6:10 AM

मेरा पहला जवाब कैंसल कर दिया जाय. मगर है अभी भी मांडू ही. इस इमारत का नाम है बाज़ बहादुर का महल ..January 10, 2009 6:12 AM

 

मित्र पितस्बर्गिया, इसको कहते हैं : सही को गलत करना . :)

 

 Arvind Mishra said...हारी ! लेडीज फर्स्ट प्लीज !

 

सर जी, ये लखनवी अंदाज ५ वीं मेरिट से आपको ११ वीं ले आया. :)

 

Ratan Singh Shekhawat said...

ताऊ या पहेली भी म्हारे लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर ! हम तो हमेशा की तरह सोमवार का इंतजार का परिणाम देख अपना ज्ञानवर्धन करेंगे ! और जीतने वालों को आज ही एडवांस में हार्दिक बधाई क्योकि आज या कल जोधपुर जाना पड़ सकता है वहां पता नही इन्टरनेट पर जाना हो या नही इसलिए ये बधाई वाला शुभ कार्य आज ही !

काला अक्षर भैंस बराबर क्युं जी? हमारी चंपाकली और अनारकली तो बिल्कुल मेम की तरह गोरी हैं. :) अब मुहावरा बदलना पडेगा. :)

 

 अशोक पाण्डेय said...

खूंटे पर आज बाबुजी की बातें सुनकर मिजान बन गया। ताऊ , आप तो बड़ा गड़बड़ कर रहे हो...ये पहेली वहेली के चक्‍कर में बाबुजी की कुछ खबर ही नहीं दे रहे। वो शहर में हैं, गांव में हैं, कुछ पता नहीं चल रहा। ब्‍लॉगिंग कर रहे हैं या छोड़ दी..हमें यह भी नहीं पता :)


रही बात पहेली की तो आप नकल की कोई चांस ही नहीं छोड़ रहे..बड़ी देर से ताक में था कि कोई हिंट मिले..लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। हमारे जैसे नीचे से टॉप आनेवालों के लिए ग्रेस मार्क्‍स का कोई प्रावधान नहीं है क्‍या :)

 

भाई , बाबूजी की क्युं याद दिलाते हैं आप? वो तो हमको युं ही चाहे जब बात बेबात "इनिशियल एडवांटेज" देते रहते हैं. :)

 

विवेक सिंह said...अभी भारत-भ्रमण पर जाऊँगा . शाम को लौटकर कहीं ऐसा नमूना दिखा तो बताऊँगा :)

 

कुछ ज्यादा ही भारत भ्रमण हो गया. ९९ की जगह ८८ अंक और एक रैंक नीचे खिसक गये जी. कोई बात नही , आप आ तो गये समय से लौटकर. :)

 

 कुश said... सबकी पोस्ट उपर से पढ़ना शुरू करते है.. आपकी नीचे से.. खूँटा बढ़िया रहा.. बाकी पहेलिया तो बचपन से ही नही बूझी कभी.. इनिशियल एडवांटेज जो नही मिला था..

 

ताऊ का सब काम उल्टा सीधा ही है, इनिशियल एडवांटेज चाहिये तो आपके बाबूजी से हमारी बात करवाईये. हम उनको सब समझा देंगे कि कैसे देना है.  :) हमारे बाबूजी अब भी देते ही रहते हैं. :)

 

 गौतम राजरिशी said... न...मुझे तो फिर से नहीं मालूम......ये एक और मेरिट-लिस्ट बननी चाहिये "नहीं मालूम" वालों के लिये

 

भाई इब लगता है फ़ौजी भाईयों के लिये कुछ डिस्काऊंट स्कीम शुरु करने पर विचार करना पडेगा. :) , निर्णायक गणों तक आपकी बात पहुंचा दी जायेगी. आपका आईडिया ताऊ के विचारों से मेल खाता है. :)

मोहन वशिष्‍ठ said...

ताऊ राम राम
कैसे हैं पडोसी
सब ठीक तो हैं ना
हां तो सुना है कि आपने पहेली पूछी है कोई तो जबाव मेरा भी लिख ल्‍यो
जो भी विजेता हो उससे पहले मेरा नाम जोड देना क्‍योंकि जो सही जवाब हे वही मेरा भी और एक्‍सट्रा में तीन चार जवाब भी दे रहा हूं
मांडू का हिंडोलामहल।
खूंटा अच्‍छा है

 

एक्स्ट्रा जवाब कहां हैं जी ?

 

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

पूरी नक़ल टीप दी!!
अब कुछ न बचा टीपने को!!
लगता है कि ताऊ बिगाड़ के ही मानेगा!!

 

बडी खुशी हुई कि आप ताऊ की सीख मानने लगे हो. इसके लिये ही तो ये दुकान खोली गई है. लगता है इस ताऊ युनिवर्सिटी से पहली  डाक्टरेट आप ही करोगे. :)

 

राज भाटिय़ा said...

अरे ताऊ इतनी आसन पहेली क्यो पुछे शे... अब जल्दी से पहला ना० मेरा कर दे, कोई हेरा फ़ेरी नही... यह महल तो हमारे ताऊ की खानदानी भेंस चंपा कली का की दादी की दादी की परदादी के लिये ताऊ के दादा के दादा के दादा के दादा के दादा के दादा के ने सन ११०९ मे एक गांव मै बनबाया था,

 

अब वो गांव सांडू या मांडु कुछ ऎसे ही नाम से जाना जाता है, इस महल मे बहुत से कमरे है एक कमरे मै भेंस जी की कटरी बंधा करती थी, दुसरे मै भेंस जी का बिटेऊ ठहरा करता था,इस प्रकार सभी कमरो मे इस भेंस जी का परिवार बहुत सुख से रह रहा था, बस एक ही कमरा खाली था, वहा से टिकट ले कर इन सब कमरो को देखना पडता था, ताऊ भी यहा कई साल पहले गया, ओर पुरानी फ़ोटू लेकर, इब हम से सवाल करन लाग रहिया है.

यह जबाब बिलकुल सही है१००% अब फ़टा फ़ट हमारा नाम सब से ऊपर या सब से नीचे कही भी लिख देना.
धन्यवाद

 

आप तो फ़टाफ़ट कब्जा दिलवाओ जी. जिससे चंपाकली भी चांद से उतर कर आजाये और यहीं रहने लगे. :)

 

Udan Tashtari said...

ताऊ
सब लोग जबाब के साथ कुछ न कुछ और जानकारी भी ठेल रहे हैं तो हम काहे पीछे रहें:
यहाँ का पिन कोड है: 454010
Latitude 22 21 N
Longitude 75 26 E
कुछ एक्स्ट्रा पाइंट मिलेंगे क्या?? :)

 

गुरुजी किसी को बताना मत, आज आपको पहले नम्बर पर जितवा दिया और कुल रैंकिन्ग मे आपको १८६ पोईंट्स के साथ १५ वें नम्बर कर कर दिया. आपतो बस रेग्युलर जैसा भी हो जवाब देते रहिये. आपका जो भी जवाब आयेगा उसीको सही कर दूंगा. चाहे गलत भी हो तो  :)

 

और अब अंत मे एक खास खबर, माननिय ज्ञानदतजी पांडेय की एक टिपणि पढी थी कि उन्हे काव्य/शायरी समझ नही आती पर आजकल उन्होने भी शायरी शुरु करदी है. ये हम नही कह रहे हैं. उनकी नीचे वाली टिपणि पढ लिजिये और खुद ही समझ लिजिये.

 

 Gyan Dutt Pandey said... January 10, 2009 11:44 AM

इतने सारे लोग इनीशियल एडवाण्टेज ले गये।

हम ताकते रहे गुजरता कारवां देख!

 

वाह वाह बहुत खूब कहा आपने. लाजवाब.

 

अच्छा जी इब अगले शनिवार को फ़िर आपसे रुबरु होंगे इस पहेली की अगली कडी मे. हम कोशीश कर रहे हैं कि अब तक के सभी प्रतिभागियों की एक लिस्ट की पोस्ट लिख कर उसका लिंक ब्लाग के दाहिने पहेली सूचना पटल पर दे दिया जाये, जिससे सभी अपने अंक आदि सीधे देख सके.

 

कृपया भाग लेते रहे. अब  मनोरंजक रुप से मेरिट मे उल्ट फ़ेर हो सकती है.

 

 

 

 

 

 

 

24 comments:

  Arvind Mishra

Monday, January 12, 2009 6:06:00 AM

विजेताओं को आभार -इतनी बढियां जानकारी उपलब्ध कराने की शुक्रिया -हाँ हम तो लेडीज फर्स्ट के चक्कर में ही रह गए !
कोई बात नहीं ताऊ तीन में तो नही पर तेरह में तो अब भी हैं -जमाये रहो खूंटा !

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Monday, January 12, 2009 6:22:00 AM

घनी निराशा हुई आज तो मन्नै. हमने सोचा था की मांडू तक पहुँचने के भी ५०% नंबर तो मिल ही जानगे. आगे महल अगर बाई मिस्टेक ग़लत भी हो गया तो क्या. मगर आड़े थे सब गड़बड़ हो लिया!

  विनय

Monday, January 12, 2009 6:32:00 AM

विजताओं को बधाई

---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम

  Udan Tashtari

Monday, January 12, 2009 6:36:00 AM

वाह ताऊ!! क्या एडजस्टमेन्ट किया है- एक नम्बर पर ला दिया. बहुत आभार.

बाकी लोगों को भी जीत जाने की बहुत बधाई.

  प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर

Monday, January 12, 2009 7:11:00 AM

जीतने वालों को बधाई!!

बिगाड़ने के लिए भी ताऊ को घनी राम राम !!!!!

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Monday, January 12, 2009 8:58:00 AM

ताऊ,मांडू देखा नहीं कभी। बस चित्र देख कर समझे तो मांडू है। अब वहाँ के विभिन्न महलों के फर्क कोशिश कर के समझ न पाए।
आप की इस पहेली से अपना ज्ञान बढ़ रहा है यही क्या कम है ? पर ज्ञान भी तभी बढ़ता है जब पहेली को जीतने की कोशिश की जाए।

  seema gupta

Monday, January 12, 2009 9:34:00 AM

सभी विजेताओं को बधाई , इस पहेली के जरिया रानी रूपमती के महल के बारे में विस्तरत जानकारी मिली उसके लिए सभी का शुक्रिया -

regards

  अल्पना वर्मा

Monday, January 12, 2009 10:19:00 AM

सभी विजेताओं को बधाई.नतीजा तैयार करने में ताऊ जी आप बहुत परिश्रम करते हैं.आप का गणित बहुत मजबूत है.puri post ek magazine ki tarah hai.
इतना हिसाब किताब रखना आसान काम नहीं है.
-मुझे आप की पहेली के कारण ही मांडू के इस प्रसंग के बारे में इतना जानने का अवसर मिला.
-मध्य प्रदेश में इतनी सुंदर जगह घूमने की हैं .बडे दुःख की बात है विदेशों में ताज महल -दिल्ली,राजस्थान ,उत्तर भारत के पर्वतीय क्षत्र और मुम्बई-गोवा से जयादा भारत को नहीं जानते हैं. वहां का पर्यटन विभाग क्यों प्रचार नहीं करता?
-प्रयाप्त प्रचार होगा तो ही पर्यटकों की रूचि जागेगी .
-अब मैं भी मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों के बारे में पढ़ रही हूँ.जो सच में बहुत ही रुचिकर है.
--क्या आप जानते हैं हारने के बाद बाज़ बहादुर का क्या हुआ?
**बाज़ बहादुर हार के बाद ,'बादशाह अकबर के दरबार में एक प्रतिष्टित संगीतकार बना रहा.तानसेन के बाद उसी का नाम आता था.
-रानी रूपमती की '२६ कविताओं' को फारसी में सन् १५९९ में अहमद उल उमर तुर्कमान ने अपनी किताब 'रूपमती की कहानी 'में शामिल किया था.जिस की मूळ प्रति की एक प्रति कई हाथों से गुजरती हुई..'भोपाल के जमादार इनायत अली के पास पहुँची जो इसे आगरा ले गए.और इसी का अंग्रेजी अनुवाद १९२६ में एल.ऍम.क्रंप [L.M.Crump] ने किया.
इस में १२ दोहे १० कवितायें और ३ सवैया हैं .यह किताब बडे बुक स्टोर में मोजूद है.अगर मेरे हाथ रूपमती की कोई कविता लगती है तो मैं जरुर उसे पोस्ट करुँगी.भारत में यह किताब आसानी से मिल जायेगी.
टाइटल of the book--The Lady of the Lotus: Rupmati, Queen of Mandu: A Strange Tale of Faithfulness[OXFORD UNIVERSITY PRESS
LONDON: HUMPHREY MILFORD ]
cost indian Rs-150[??]and US$145
****कितना कुछ हमारे ही देश भारत के इतिहास के पन्नो में दफ़न है हमें मालूम ही नहीं!****
धन्यवाद.

  ताऊ रामपुरिया

Monday, January 12, 2009 11:13:00 AM

@अल्पनाजी, बुक के बारे मे दी गई जानकारी के लिये आपका आभार. इस सप्ताहांत मे इस बुक को ढुंढते हैं. जरुर मिलेगी, मिलेगी क्युं नही?

फ़िर इसको भी सबके सामने लाते हैं.

होंसला-अफ़्जाई के लिये धन्यवाद.

  संजय बेंगाणी

Monday, January 12, 2009 11:33:00 AM

शानदार जानकारी मिली. आभार.

  डॉ .अनुराग

Monday, January 12, 2009 11:47:00 AM

इत्ते विजेता !रे ताऊ इनाम के कोई जिक्र नही......इब के खूंटा भी नही देखा .हम तो उसे ही गाड़ने आये थे ...ताई कहेगी की सारा खजाना इनाम पे लुटवा दिया ताऊ ने ..

  Shastri

Monday, January 12, 2009 11:58:00 AM

प्रिय ताऊजी,

कई बार चिट्ठाकार जाने अनजाने कुछ ऐसा कर देते हैं जिसका असर बहुत दूरगामी होता है.

आप जो शनिचरी पहेलियां दे रहे हैं इस कारण न केवल जनता आपके चिट्ठे पर टूट रही है (जो एक अच्छी बात है) बल्कि आप उससे सहस्त्र गुना अधिक महत्वपूर्ण एक कार्य कर रहे है.
वह कार्य है भारत के एतिहासिक स्थानों के प्रति लोगों को जागृत करना.

मेरी नजर में यह एक बहुत महान कार्य है एवं कई बार मैं चिट्ठाकारों से निवेदन करता रहता हूँ कि वे ऐसा कुछ करें जिससे कि हिन्दुस्तान की प्राचीन धरोहर के बारे में लोगों को पता चले.

इस शुभ कार्य को जारी रखें !!

सस्नेह -- शास्त्री

पुनश्च: टिप्पणी मैं ने भी की थी. मेरा नाम कहां गोल कर दिया !!

  Gyan Dutt Pandey

Monday, January 12, 2009 12:05:00 PM

पोस्ट में इतने लोगों का जमावड़ा, केवल ताऊ के बस की बात है!

  बवाल

Monday, January 12, 2009 12:43:00 PM

वाह वाह ताऊजी, पहेली की पहेली हुई और ज्ञान का ज्ञान मिला.

  Zakir Ali 'Rajneesh' (S.B.A.I.)

Monday, January 12, 2009 1:18:00 PM

सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई।

  अजित वडनेरकर

Monday, January 12, 2009 1:28:00 PM

धन्यवाद...दिलचस्प पहेली और सूचनाओं के लिए...
अधम खां सही नहीं है, वह अदहम खां है। अलबत्ता काम अधम जैसे ही थे :)

  शुभम आर्य

Monday, January 12, 2009 2:11:00 PM

ताऊ राम राम,
आप की पहेलियों के मध्यम से भारत को जानने का सौभाग्य मिल रहा है |
पिछली पहेलियों में तो आपने महाराष्ट्र ,उडीसा और मध्यप्रदेश की सैर करवा दी |
आशा है अगली पहेलियों में और प्रदेश भी देखने को मिलेंगे |
इंतज़ार रहेगा अगली पहेलियों का |

  अशोक पाण्डेय

Monday, January 12, 2009 4:33:00 PM

ताऊ व अन्‍य सभी मित्रों को अभी तो राम-राम। दुबारा आकर बढि़या से पढ़ना पड़ेगा..आज बड़ी दिलचस्‍प जानकारी लग रही है।
तब तक विजेताओं को बधाई और इसी तरह शानदार प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं।

  Amit

Monday, January 12, 2009 5:28:00 PM

taaoo main to miss kar gaya..main chutti mana raha tha..

koi nahi agli pehali ka intezaar rahega...

  अभिषेक ओझा

Monday, January 12, 2009 6:46:00 PM

हम तो वीकएंड पे सोते ही रह गए :-)

  दिलीप कवठेकर

Monday, January 12, 2009 9:48:00 PM

ताऊ, आपका धन्यवाद कि आपने हमें इस पहेली में शरीक किया. वैसे, उडन तश्तरी बुरा ना मानें, अंकों का हिसाब जो भी हो, असली विजेता तो सुश्री अल्पना जी रहीं ,जिनने वाकई इतना कष्ट उठाया और हमें इतनी बढिया जानकारी तब भी दी, और आज भी.

क्या ही बढिया हो कि रानी रूपमती की कविताओं की किताब कहीं मिल जाये, और अल्पना जी उसे अपनी आवाज़ में पढ कर सुनायें, या अधिक अच्छा हो कि गा कर सुनायें, क्योंकि वे एक अच्छी गायिका भी है.

ताऊ, आप वहिदा की बात बताते बताते रुक क्यों गये? आपसे कर बद्ध इल्तेज़ा है, कि ज़रूर लिखें ये संस्मरण...

  गौतम राजरिशी

Monday, January 12, 2009 11:33:00 PM

रोचक प्रस्तुती रही ताऊ...अब तो हर शनिचरी पहेली का इंतजार है.....एक-न-एक जवाब तो आता ही होयेगा मुझे.एक कश्मीर घाटी का तो लगाओ...
और ये किनारा की शूटिंग में आप जो थे,तो एक पोस्ट तो लिखिये उन अनुभवों पर

  राज भाटिय़ा

Tuesday, January 13, 2009 12:41:00 AM

ताऊ सब से पहली टिपण्णी तो मेरी थी? कहां गई, भाई जरा अपना बोरी बिस्तर ध्यान से देखॊ, अभी थोडी हिम्मत आई तो सब से पहले आप की साईट खोली ओर ..... अरे बाबा यह क्या बात हरा भी दिया ओर टिपण्णी भी ढकार गये, चलो सभी विजेताओ को मेरी तरफ़ से बहुत बहुत बधाई
राम राम जी की

  मोहन वशिष्‍ठ

Tuesday, January 13, 2009 1:47:00 PM

ताऊ राम राम कैसे हैं आपके पडोसी राम राम बोलना ताई को
सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई

ताऊ उवाच :-:


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