ताऊ के सैम और बीनू फ़िरंगी का ब्लाग

मुंतजिर अल जैदी ने जबसे ताऊ बुश को जूता मारा है वो तो पुरे इराक और अफ़गानिस्तान का हीरो बन गया है ! और इधर सैम बहादुर ने ताऊ का जीना हराम कर दिया है ! पता नही उसको आजकल क्या नशा हुआ है कि दिन भर अखबार पढता है और फ़िर ताऊ का  भेजा चाटता है ! और आप जानते हैं कि ताऊ के पास भेजे की वैसे ही काफ़ी कमी है !

 

अभी सुबह सुबह ही सैम बोला - ताऊ मेरा भी एक ब्लाग बना दो ! मै भी ब्लाग लिखूंगा !

 

ताऊ बोला - क्या पागल हो गया है ! तू अनपढ गंवार होकर कहां से सोच रहा है कि ब्लाग लिख लेगा ?

 

सैम - देखो ताऊ अब मुझे इतना भी पागल मत समझो !

 

ताऊ - क्या मतलब ?

 

सैम - देखो ताऊ बात ऐसी है कि मैं तो अक्ल से आपकी तरह पैदल हूं ! बोलो हां ..

 

ताऊ बीच मे ही बोला - अबे साले सैम के बच्चे ! तूने क्या, मुझे बीनू फ़िरंगी समझ रखा है ? जो हर बात मे बोलो हां ? साले दो खूसडे (जूते) दुंगा तेरे सर पे,  तो तेरी तबियत हरी हो जायेगी ! सीधी तरह बात कर , अगर मेरे से बात करनी है तो !

 

सैम खींसें निपोरते हुये बोला - ताऊ माफ़ करना ! मैं आपको वाकई बीनू फ़िरंगी समझ बैठा था ! बात ये है  कि मेरी बीनू फ़िरंगी से बात हो गई है आप तो बस एक बार मेरा ब्लाग बना दो !

 

वहां लिखने का काम मैं बीनू फ़िरंगी से करवा लूंगा और मेरे पास मटेरियल की कोई कमी नही है ! नाम मैने सोच लिया है " ताऊ के सैम और बीनू फ़िरंगी का ब्लाग "

वो क्या है ना कि आपके नाम से थोडा इनिशियल एडवांटेज मिल जायेगा ! 

 

ताऊ - अब ये मटेरियल तेरे पास कहां से आ गया ?

 

सैम - वो क्या है ना ताऊ ? मैं धर्मेन्द्र पा  जी और "अ"हटाकर जी के पास रहा हूं तो उनके किस्से ही बहुत हैं एक ब्लाग वर्षों तक चलाने के लिये ! फ़िर आज कल आपके पास भी कोई काम धन्धा नही है सो मैं दिन भर खाली बैठा अखबार पढता रहता हूं !

बस वो ही सब कुछ लिख दूंगा !

 

ताऊ ने पीछा छुडाने के लिये कह दिया कि अभी तो शुक्रवार को मैं ब्लाग नही लिखता उस दिन तू लिख लिया कर ! फ़िर अगर तू रेग्युलर रहा तो तेरा ब्लाग बना देंगे !

 

बीनू फ़िरंगी को आता देख कर सैम भौं भौं करते हुये बोला - अरे बीनू भाई जल्दी आओ ..जल्दी आओ.. अपना ब्लाग बन जायेगा ! और आज ही पोस्ट भी ठेलनी है जरा फ़टाफ़ट कुछ अच्छा सा लिखवा दो ! आज अपनी पहली पोस्ट ताऊ के ब्लाग पर !

 

बीनू फ़िरंगी - अरे यार ऐसे ही क्या फ़टाफ़ट लिखवा दो ? वो सब बाद मे सोचेंगे ! अभी तो मुझे तेरी अक्ल पर तरस आ रहा है ! वाकई तू भी सैम बिल्कुल देशी है !

 

अब सैम को तो यूं लगा कि जैसे उसको किसी ने अमजद खान साहब वाली २५ किलो की गाली दे दी हो ! इतनी देर मे ही बीनू फ़िरंगी बोल पडा - अरे छोड ये इलाग बिलाग लिखना .. अगर तूने "अ"हटाकर जी को खम्बा बनाने की जगह उनको जूते फ़ेंक कर मार आता तो आज वो जूते एक करोड के होते !

 

सैम - यार बीनू ..वो कैसे ? आश्चर्य से सैम ने पूछा !

 

अरे मुंतजिर अल जैदी के जूते तो ताऊ बुश के सम्पर्क करते ही कुन्दन हो गये ! जैसे पारस पत्थर छूते ही सोना बना देता है वैसे ही ताऊ बुश को हवा मे देखते ही वो जूते ४८ करोड रुपये के हो गये !

 

हां यार बीनू भाई .. क्या करें ? गल्ती हो गई ! और क्या क्या मारा जा सकता है "अ:हटाकर सरीखे लोगो को ? मैं फ़िर से कोशिश करुंगा !

 

बीनू फ़िरंगी - अब क्या बताऊं सैम भाई ? तुम मेरे मजे मत लेना ! वो क्या हुआ कि हमारे वहां यानि मेरे मामा के यहां भी दो घट्नाएं ऐसी ही हुई हैं कि बोलने मे शर्म आती है !

 

सैम - अबे क्या बेवकुफ़ समझ रखा है मुझको ?  तेरे मामा कहां से पैदा हो गये अब ?

 

बीनू फ़िरंगी - अरे सैम भाई. किसी को बताना मत यार ! मेरे माता पिता ने "लव मेरिज"

की थी ! मेरे पिताजी अमेरिकन थे और मां अंग्रेज थी ! इसी लिये तुमने देखा होगा कि अमेरिकन और अंग्रेज बिल्कुल रिश्तेदारी सरीखी बाते करते हैं !

 

सैम - अच्छा अब समझ आगया कि ब्रिटेन वाले अमेरिकनो के पीछे  आंखे मूंद कर क्यों चलते हैं ? रिश्तेदारी का ख्याल तो रखना ही पडता है !

 

बीनू फ़िरंगी - अब तू कुछ भी समझ ले यार ! एक बार क्या हुआ कि इंगलैन्ड मे एक बार टोनी ब्लेयर के मुंह पर एक सिरफ़िरे इंसान ने केक ऊठाके दे मारा था ! और उनकी भी बहुत किरकिरी हुई थी !

 

सैम - अच्छा ..और क्या हुआ था ..जरा बता यार ! सैम अपने ब्लाग पोस्ट का मसाला जोगाडने की फ़िराक मे था !

 

बीनू फ़िरंगी - एक बार भाई हमारी मामीजी कोयला खदान के मजदूरों से मिलने चली गई थी ! तब क्या हुआ ? मालूम है ?

 

सैम - अबे तेरी मामी कोयला खदान मे गई होगी तो क्या हुआ होगा ? ये कोई पूछने की बात है ? वहां जाकर पांच सात पिल्ले दिये होंगे ! अभी पिछले सप्ताह  मानसिक हलचल  पर भी एक मामी ने पिल्ले दिये थे ! और वो बडे भी हो रहे हैं !

 

बीनू फ़िरंगी बुरा सा मुंह बनाके बोला - अरे यार सैम भाई , छोडो यार मैं जाता हूं ! तुम कोई भी बात पूरी सुनते नही हो और बीच मे ही शुरु हो जाते हो ! बीनू फ़िरंगी नाराज होके ऊठते हुये बोला !

 

सैम - अरे यार , चल माफ़ कर दे ! अब बीच मे नही बोलूगा ! विद्या-माता की कसम ! अब तू पूरी बात बता !

 

बीनू फ़िरंगी - अरे भाई , मेरी मामी जी तब वहां की आयरन लेडी प्रधान मन्त्री हुआ करती थी ! कोयला मजदूरो के असन्तोष को देखते हुये उनसे मिलने गई थी कि एक कोयला मजदूर ने उनको  कुतिया कहते हुये कोयला दे मारा !

 

सैम - अरे नही यार बीनू भाई ! तुम भी यार कसम से पक्के ज्ञानी हो ! तुम्हारी मामी है तो कुतिया ही होगी ना ? इसमे क्या गलत कह दिया ? और कुछ बताओ !

 

बीनू फ़िरंगी ने सैम की बात सुन कर बुरा सा मुंह बनाया और  यह कहते हुये चला गया कि आज उसका सेठ बालानी जी बाहर गया है और उसको घर की रखवाली करनी है !

 

सो कल आने का वादा करके वो चला गया और सैम बहादुर अपने ब्लाग पोस्ट की कहानी ढुंढने मे जुट गये !

 

 

 

  इब खूंटे पै पढो :-


  ताऊ थानेदार की पोस्ट से रिटायर हो गया ! और वापस हरयाणा चला गया ! 
  आप जानते ही हैं   कि ताऊ खाली नही   बैठ सकै था ! किसी ने ताऊ को सलाह
  दे दी कि ताऊ जूतो की दुकान खोल लो,   आज कल जूते बेचने मे बहुत कमाई है !

  सो ताऊ के पास गुडगांव मे एक दुकान थी पहले की ली हुई ! ताऊ ने उसमे जूते
  बेचने की दुकान खोल ली !

  एक दिन सीमा गुप्ता जी उधर से जा रही थी कि ताऊ को पहचान कर वो जूते
  खरीदने दूकान मे आ गई ! और थोडा आश्चर्य से बोली - ताऊ आप तो थानेदार थे ?
  फ़िर ये जूतों की दुकान कैसे खोल ली ?

  इब ताऊ बोल्या - सीमा जी , म्हारा तो यो पुराना धंधा  सै जूतों का !

  सीमा जी - वो कैसे  ?  जरा साफ़ साफ़ समझाओ ताऊ ? 

  ताऊ - जी, पहले जब हम थानेदार थे तब लोगो को जूते मार मार कर रोजी रोटी  
  कमाया करते थे ! और अब लोगो को जूते बेच बेच कर रोजी रोटी कमाते हैं !
  

31 comments:

  रंजन

Friday, December 19, 2008 5:14:00 AM

ताऊ, बना दो बेचारे का ब्लोग..

  Udan Tashtari

Friday, December 19, 2008 5:41:00 AM

सैम की गेस्ट पोस्ट का इन्तजार लग गया है.

खूंटें पर -जूते से तो ताऊ के बहुत गहरे ताल्लुक निकले. :)

  Gyan Dutt Pandey

Friday, December 19, 2008 5:57:00 AM

बड़ी जूतमपैजारीय पोस्ट है! :-)

  Arvind Mishra

Friday, December 19, 2008 6:46:00 AM

ताऊ इस समय जूतामय हो चुके ब्लागजगत को आपने भी जूते प्रदान किए ,साधुवाद ! लेकिन जिन ताऊ को मैं जानता हूँ वे तो थानेदारी से सेवानिवृत्ति के बाद जूतियों की दुकान चलाते है -शेष जीवन वे सुदर्शनाओं के सानिध्य में बिताना चाहते हैं ! अब सीमा जी उधर भले ही निकल गयीं हों उन्हें आना इस ताऊ के पास ही था जूती लेने ....शायद वे आयें भी ! मगर ये माजरा क्या है ? विज्ञान कथाओं की समानांतर दुनिया की तरह दो दो ताऊ -मेरी बुद्धि चकरा रही है !

  mahashakti

Friday, December 19, 2008 7:20:00 AM

अच्‍छा लिखा है भाई साहब, किसी ने हिम्‍मत तो दिखाई जूता मारने की, नही तो भारतीय प्रधानमंत्री बुस के चरण धुल रहे है।

महाशक्ति

  विवेक सिंह

Friday, December 19, 2008 7:24:00 AM

आज लगता है मेरी जिज्ञासा शांत हो जाएगी . ताऊ कृपया समझाएं कि खीसें निपोरना क्या होता है . प्लीज !

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Friday, December 19, 2008 7:26:00 AM

बीनू और सैम की वार्ता में बहुत मज़ा आता है. अगली बार इंदौर आना हुआ तो उनसे ज़रूर मिलना पडेगा, इसी बहाने आपके भी दर्शन हो जायेंगे ;) क्या बात है, आज तो पोस्ट पर भी जूते छाये हैं और खूंटे पर भी टंगे हैं?

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Friday, December 19, 2008 8:02:00 AM

चलिए आप को इनिशियल एडवांटेज याद रहा सेमं औ बीनू फिरंगी के लिए ही।

  PD

Friday, December 19, 2008 9:26:00 AM

हां ताऊ.. बेचारों को इनिशियल एडवांटेज मिलना ही चाहिये.. बना भी दो बिलोग बेचारों का..
वैसे फिर से कह रहा हूं, आपका खूंटा तो हर बार जबदस्त होता है.. :)

  seema gupta

Friday, December 19, 2008 9:27:00 AM

" हा हा हा हा ताऊ जी कल की जूतों की कमाई का आधा हिस्सा कहाँ हैं , अपने वादा किया था ???? और हाँ अब तो जूतों की दूकान चल ही निकली है तो दुकान का किराया भी जरा टाइम से दे देना , वो दुकान का मालिक हमारी आपसे जान पहचान को जान गया है न , सो कह रहा था...की आपने अभी तक किराया नही दिया है...."

Regards

  मुसाफिर जाट

Friday, December 19, 2008 10:08:00 AM

ताऊ रामराम,
सुना है तुमने जूतों की दुकान खोल ली है. दो तीन जोड़ी मेरे लिए भी भिजवा दो इधर. भारतीय पोस्ट से भिजवाना. अगले साल तक तो आ जायेंगे, इस बार के लिए तो हैं.

  विनय

Friday, December 19, 2008 10:23:00 AM

बहुत बढ़िया ताऊ!

  कुश

Friday, December 19, 2008 10:26:00 AM

तो ताऊ आप भी खूसडे के मोह से बच नही पाए..

  रंजना [रंजू भाटिया]

Friday, December 19, 2008 10:33:00 AM

बढ़िया जूता पोस्ट ....

  makrand

Friday, December 19, 2008 10:43:00 AM

ताऊ आपका सैम कुछ ज्यादा ही तेज नही हो गया है ? बहुत शानदार बाते करते हैं दोनो के दोनो !
सैम और बीनू फ़िरंगी वाकई जोरदार व्यन्ग की रचना है !

और खूण्टा तो मस्त चकाचक है ! पर खूंटे का मतलब तो समझाओ ?

  दीपक "तिवारी साहब"

Friday, December 19, 2008 10:48:00 AM

अरे भाई , मेरी मामी जी तब वहां की आयरन लेडी प्रधान मन्त्री हुआ करती थी ! कोयला मजदूरो के असन्तोष को देखते हुये उनसे मिलने गई थी कि एक कोयला मजदूर ने उनको कुतिया कहते हुये कोयला दे मारा !

ताऊ बात तो यह सही है पर मार्गरेट थैचर आपके बीनू फ़िरंगी की मामीजी हैं यह पहली बार ही मालूम पडा ! आपके पास तो कुत्ते भी इन्टरनेशन्ल रसूख वाले हैं ? :)

बहुत बढिया ! दोनो की बाते मजेदार हैं !

  rukka

Friday, December 19, 2008 10:58:00 AM

ताऊ - जी, पहले जब हम थानेदार थे तब लोगो को जूते मार मार कर रोजी रोटी कमाया करते थे !

और अब लोगो को जूते बेच बेच कर रोजी रोटी कमाते हैं !


लगता है ताऊ थानेदारी मे भी जूते मार मार कर ही वसूली करता रहा और रिटायर होने के बाद भी जूतो से दोस्ती नही छूटी तो दुकान ही खोल कर बैठ गया ! :) बहुत शानदार !

आप पोस्ट ना लिख कर खाली खूंटा ही लिखते रहो तो भी काफ़ी है ! ये तो गजब का आईटम हो गया आपका खूंटा ! खूंटे पर बांध लिया आपने तो ! धन्यवाद !

  Bhairav

Friday, December 19, 2008 11:01:00 AM

ताऊ आपका सैम और बीनू तो बहुत बिगडे हुये हैं ! लो बोलो अब आयरन लेडी को मामीजी बताकर उनकी जात बिगाड रहे हैं और खुद का प्रोफ़ाईल बढा रहे हैं !:)

बहुत गजब !

  डॉ .अनुराग

Friday, December 19, 2008 2:13:00 PM

बुरी ख़बर है ताऊ के अमेरिका ने वो जूते जला दिए है.....ओर इराक में हंगामा हो रहा है......कुछ ख़बर माफ़ी की भी सुनने में आ रही है....

  विनीता यशस्वी

Friday, December 19, 2008 2:20:00 PM

ताउजी,

सैम के लिये ब्लॉग तो बनना ही चाहिये

वैसे इस बार आपने बुश साब पे जूते अच्छे मारे

  रंजना

Friday, December 19, 2008 4:41:00 PM

हा हा हा ! लाजवाब !

" विद्या माता की कसम " दिल को छू गई....आनंद आ गया.
और खूंटे की तो क्या कहूँ..........वाह वाह वाह

  गौतम राजरिशी

Friday, December 19, 2008 8:44:00 PM

अतिथी आलेख-सैम का इंतजार है

और ताऊ इन खूंटों का एक संग्रह जल्दी निकाल लो आप,सहस्त्रों एडिशन में जायेगी

  योगेन्द्र मौदगिल

Friday, December 19, 2008 9:10:00 PM

हे ताऊ,
जूतों की दुकान के आगे..
गुजरी सीमा जी..
क्या बात है..!!!!!!
अच्छा.........
जब सैंडिल की खोलोगे तो...
क्या तिवारी साब गुजरेंगें या भाटिया जी जरमनी से पैदल आएंगें...?
चलो खैर......
vo अपने वत्स जी is बखत जगाधरी नं- वन के साथ कहां हैं ?
तलब मेरे को उठरी....
पर ढूंढ रहा है भूतनाथ...

जै राम जी की.........................

  विष्णु बैरागी

Friday, December 19, 2008 9:21:00 PM

सैम का ब्‍लाग बना ही दीजिए ताकि एक और जीव-जगत के मन की बातें उजागर हो सकें और मालूम हो सके कि कौन से वाले बेहतर लिखते हैं ।
खूंटा जोरदार रहा ।

  ताऊ रामपुरिया

Friday, December 19, 2008 9:26:00 PM

@ योगिन्द्र मोदगिलजी , ताऊ की जूतो की दुकान मे सैन्डल, चप्पल, देशी विदेशी सब तरह के जूते चप्पल मिलते हैं ! ये ताऊ की इन्टरनेशनल दुकान है ! :) आपको भी लेना हो तो आ जाईये ! अभी ईयर एन्ड और क्रिश्मश की ३० % डिस्काऊन्ट भी चल रहा है और एक पर दो फ़्री भी मिल रही है !

  अल्पना वर्मा

Friday, December 19, 2008 10:12:00 PM

सैम आप से भी ज्यादा चतुर है यह तो पता चल गया.
लेकिन ये क्या?फिरंगी को नाराज़ कर दिया!..अब वो नाराज़ हो गया तो उस का ब्लॉग कौन लिखेगा.
आप उस का ब्लॉग बनवा ही दो.

-खूंटे पता चला..जूते मुफ्त कहाँ मिलेंगे -[ताऊ जी की दुकान जो ठहरी !

  Ratan Singh Shekhawat

Friday, December 19, 2008 10:50:00 PM

ताऊ मजा तो आजकल खूंटे पर ही आता है

  लवली कुमारी / Lovely kumari

Friday, December 19, 2008 10:53:00 PM

आपका खूंटा जबदस्त है..बाकि लौट कर टिप्पणी करती हूँ ...अभी पुरी पोस्ट पढ़ी नही है मैने.

  राज भाटिय़ा

Saturday, December 20, 2008 1:33:00 AM

अरे ताऊ अब जुते चाहे बेच असली जुता तो अपना रंग दिखा गया. अगर जुतो की दुकान ही बनानी है तो दुकान पर पहले लिखो जुता सही निशाने पर लगने की गारांटी, फ़िर देखो आप के जुते केसे बिकते है, ओर जुतो मै पत्थर लगा कर बेचो, साथ मै लिखो जुता नेता को मारने जुते की कीमत लाखो मे हो जायेगी.
राम राम

  अनूप शुक्ल

Saturday, December 20, 2008 7:53:00 AM

ताऊ को इस अफ़वाह के खिलाफ़ आवाज उठानी चाहिये कि उसके पास अक्कल नहीं है।

  लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`

Saturday, December 20, 2008 10:54:00 AM

अरे ताऊजी ये नया बिज़नेस शुरु किया और अमेँ इत्ते लेट खबर मिली !:)
- लावण्या

ताऊ उवाच :-:


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