कल शाम को सैम और बीनू फिरंगी बाहर से फ्रेश होकर आए तो दोनों बडे दार्शनिक की तरह चिंतन और बातों में लीन दिखे !
प्रदेश के चुनाव नतीजे कल दोपहर बाद घोषित हो गए थे ! अभी तक सांपनाथ पार्टी की सरकार थी और वापस सान्पनाथों की सरकार बनने के सारे रास्ते साफ़ हो चले थे ! उम्मीद के विपरीत ताऊ जो शुरुआत में ४ हजार वोटो से हार रहा था नागनाथ से , वो अब दस हजार वोटो से जीत चुका था !
बीनू फिरंगी - यार सैम ये तो गजब हो गया यार ! इस रामदयाल को शर्म भी नही आती ? फ़िर से ताऊ को वोट देकर जितवा दिया ? इतना लुट पीटकर भी ! ताऊ एक नंबर का मक्कार और डाकू , ठग लुटेरा ..उठाई गिरा ... और चुनाव जीत गया ...?
सैम - बस यार बीनू भाई ...तू नही समझेगा...ये तेरा अमेरिका नही है... वहाँ का मुझे नही मालुम ! पर हमारे यहाँ तो ताऊ ही चुनाव लड़ और जीत सकता है ! और कोई नही !
बीनू फिरंगी - कैसे ?
सैम - देखो , ताऊ पिछली सरकार में मंत्री था ?
बीनू बोला -- हाँ था !
सैम बोला - ताऊ ने इतनी लुट मचाई थी की उसका टिकट ही कट हो गया था ! पर फ़िर भी ताऊ ने अपनी सीट तो अपने पट्ठे को दिलवा दी और ख़ुद ने ग्रामीण क्षेत्र से टिकट जोगाड़ लिया !
बीनू फिरंगी - पर इतने मक्कार आदमी को टिकट मिला कैसे ?
सैम - क्योंकि वो ताऊ है !
बीनू फिरंगी - चलो ये भी मान लिया की टिकट का जोगाड़ ले दे के कर लिया होगा पर जीता कैसे ? और वो भी ग्रामीण से ?
सैम बोला - यार बीनू , तुम फिरंगी लोग दुसरे कामो में हमसे सालो आगे होगे पर चुनाव प्रबंधन में तुम लोग कहीं नही लगते ! अगर हमारा ताऊ तुम्हारे वहाँ खडा हो जाए तो सबकी जमानत जब्त करवा दे !
अब बीनू ने पूछा की मेरे यह नही समझ आया की जिस ग्रामीण से ताऊ ने चुनाव लड़ा था वो नागनाथो की परम्परागत सीट थी ! और ताऊ की पार्टी सांपनाथ पार्टी ने ताऊ को निपटाने के लिए ही टिकट दी थी पर ये उलटा खेल कैसे हुआ ?
सैम बोला - देख यार बीनू भाई ! तुमने मुझको परसों ही बड़ा भाई बनाया है सो तेरे को मैं बता देता हूँ ! पर किसी को कानो कान ख़बर नही होनी चाहिए ! नही तो मेरा दाना पानी यहाँ से खत्म हो जायेगा ! और अब मुझे ताऊ के साथ मजा आने लग गया है सो
मैं छोड़ कर जाने वाला नही हूँ !
बीनू फिरंगी बोला - यार सैम भाई , आप भी कैसी बातें करते हो ? हम फिरंगियों ने आज तक किसी को नही छोडा तो फ़िर मैं आपका साथ कैसे छोडूंगा ? आप तो बेखटके बताओ !
सैम - देख यार बीनू ! तू बताना मत ! वो तो मुझे इसलिए मालुम है की ताऊ समझता है की मैं इंसानों की भाषा बोल और समझ नही सकता सो मेरे सामने ही ये सब प्लानिंग कर लेता है !
वरना ये तो बहुत ही गोपनीय बात है ! और तू जानता है की मैं घाट घाट का पानी पीया हुआ हूँ ! और दुनिया की सारी भाषाए जानता हूँ !
बीनू फिरंगी ने सैम को चने के झाड़ पर चढाते हुए कहा - अरे सैम भाई ! आप तो भाषाओं के मामले में सरस्वती के अवतार हो ! मैंने आज तक आपके जितना विद्वान् कोई दूसरा नही देखा ! बीनू ने अपना चढाने का अमेरिकी पैंतरा फेंका !
अब सैम बोला - जब चुनाव की तैयारी शुरू हुई तब ताऊ ने अपने चुनाव क्षेत्र के सब पञ्च सरपंचो को बुलाया जो की ६० या ६५ के करीब थे ! सो इनके लिए इतनी ही महंगी गाडिया खरीदी गई और उन पर फाईनेंस भी उन लोगो के नाम से ही करवा दिया ७५ % का ! बाकी २५ % ख़ुद ने दे दिए !
और ताऊ ने कहा - देखो भाईयो , अब अगर तुम चुनाव जितवा दोगे तो गाडी की बाक़ी किश्ते मैं चुकवा दूंगा ! और नही जितवाया तो अपनी अपनी ख़ुद भर लेना ! सो सारे लोग जो ताऊ की खिलाफत में थे वो सब जुट गए ८ लाख की गाडी पुरी डकारने में !
बीनू फिरंगी - चुनाव खर्च की सीमा .....?
अब और खुलासा करते हुए सैम ने बताया - हर कार्यकर्ता को मुंह मांगी रकम दी गई ! चुनाव आयोग क्या खर्चे का हिसाब मांगेगा ? अब पुरे क्षेत्र के मंदिरों में भंडारे चल रहे हैं ! कहीं भजन संध्या चल रही है ! कहीं ताऊ ख़ुद भजन सुना रहे हैं ! ये किस के दम पर ? ये सारे ताऊ के दम पर ही चल रहे हैं! सब कार्यकर्ता वहाँ पर ही आनंद करते हैं ! और मंदिरों से तो चुनाव आयोग खर्च का हिसाब मांगने से रहा !
बीनू फिरंगी - वाह यार सैम ! ताऊ तो बड़ा शातिर दिमाग है ! मैंने सुना है ताऊ बड़ा गरीबी में हुआ करता था !
सैम - भई बीनू, अब ये देखले.. की ताई तो एक छोटी सी पान की दूकान चला कर घर चलाया करती थी ! बच्चे सरकारी स्कुलो में पढ़ते थे ! और पिछले पांच साल से ताऊ मंत्री बने तबसे उनके बच्चे अमेरिका और इंग्लैंड में पढ़ते हैं !
खपरैल का एक टूटा फूटा घर था ! अब पता नही कितने अनगिनत बंगले और कोठियां हैं ! और अंट संट बैंक बैलेंस हैं स्विस बैंको में !
अब बीनू फिरंगी बोला - यार सैम भाई , कल बड़ी गाने की आवाजे आ रही थी तुम्हारे घर से ?
सैम - यार अब हर बात मुझे ही बतानी पड़ेगी क्या ? ताऊ ने आज जीतने के बाद टी.वी. वालो को नही बताया था की मुझे मालुम था की मैं चुनाव जीता हुआ ही हूँ और कल के बाद मुझे जनता की सेवा से समय नही मिलेगा अपने लिए ! सो मैंने दिन भर पियानो बजाया कल छुट्टी मनाते हुए ! अब रामदयाल की सेवा शुरू करनी है !
बीनू -- यार पियानो तो बहुत महंगा बाजा आता है लाखो का ? ताऊ कहाँ से ले आया ?
सैम - अब ये छोडो बीनू भाई ! बस समझ जाया करो ! जिस आदमी पर स्विस बैंको में पैसा रखने का शक किया जाता हो वो पियानो तो जरुर रखता और बजाता होगा ! अब रामदयाल की तरह पेटी हारमोनियम बजाने आले तो स्विस बैंको में खाता खुलवाने से रहे ! ये तो ताऊ जैसे लोग हैं दुनिया में , नही तो स्विस बैंको में ताले पड़ जाए !
बीनू ने आश्चर्य से पूछा - सैम भाई , फ़िर तो आपके ताऊ की अबकी बार मंत्रिमंडल में और भी बड़ी हैसियत हो जायेगी !
सैम - अब ये भी कोई बताने वाली बात है ? पहले ताऊ सांपनाथ पार्टी में अजगर की हैसियत रखता था ! पर अबकी बार ताऊ ने नागनाथो से परम्परागत सीट छुड़वाकर अपनी पार्टी में अपने लीये एनाकोंडा ( नीतिनिर्धारक करने की हैसियत वाला मंत्री ) वाला स्थान बना लिया है !
और यार बीनू बात मेरे पेट में पच नही रही है तेरे को बताये बिना ! इसलिए तेरे को विद्यामाता की सौगंध है की किसी को बताना मत वरना मेरी बेईज्जती की इज्जत खराब हो जायेगी !
बीनू फिरंगी बोला - अरे नही यार सैम .. चल तू कहता है तो मैं विद्यामाता की कसम खाता हूँ ! तू बेफिक्र होके बता !
अब सैम बोला - बीनू भाई ! देखना मेरी इज्जत रख लेना ! बात ये है की आज ही ताऊ को मैंने ताई से बात करते सुना था की अबकी बार इस मुख्यमंत्री की खटिया खडी करनी है जिससे मैं ही मुख्यमंत्री बन जाऊ !
और दुसरे अब तो सैम के नाम का भी स्वीस बैंक में अकाउंट खुलवाना पडेगा ! अरे बीनू भाई , ज़रा सोचो ..मेरे नाम का स्विस बैंक अकाउंट .. कितना रोमांचित हो रहा हूँ मैं ? ताऊ मेरा कितना ख्याल रखता है ?




33 comments:
Tuesday, December 09, 2008 6:31:00 AM
"दुनिया की सारी भाषाए जानता हूँ !"
वाह रे सैम !
काश तू मेरे पास होता .
मैं भी न जाने कितनी प्रविष्टियाँ लिखने को प्रवृत्त होता .
पोस्ट के लिए धन्यवाद .
Tuesday, December 09, 2008 7:26:00 AM
वाह ताऊ ! क्या सटीक और शानदार व्यंग्य लिखा है | आजकल की राजनीती ऐसी ही हो गई है इसी तरह के लोग चुनाव जीत सकतें है शरीफ आदमी तो चुनाव लड़ ही नही सकता है |
Tuesday, December 09, 2008 7:34:00 AM
भाई रामपुरिया जी, आपने तो घनी राज की बात बता दी बीनू और सैम के बहाने से. ताऊ का राज तो पक्का ही समझो. मगर एक ख़ास बात रह गयी - आपने अभी तक यह भी न बताया कि गधे की पीठ पर रखी पोटली में क्या है?
Tuesday, December 09, 2008 7:52:00 AM
main to is taau ko pahchan gaya. indore-mhow local train ka koi naya passenger lagta hai.
Tuesday, December 09, 2008 9:12:00 AM
ताउ के बारे में इतना सब हमें नहीं मालूम था. इतना ही मालूम था कि एक खराब चीज़ है. अब बेचारा मुख्या मंत्री ताउ के कारगुजारियों के लिए सिर धुनेगा. मज़ा आ गया. आभार.
Tuesday, December 09, 2008 9:19:00 AM
ताऊ !
मज़ा आगया आज की पोस्ट पढ़कर, लगा वाकई में तुम चुनाव जीत गए हो ! हुन मौन्जा ही मौन्जा ! आज के हालात में, तुम्हारे से अच्छा शायद ही कोई मंत्री होगा, सोशल कांटेक्ट मेरे बहुत पैसे वालों से हैं सो काम कराने वालों की लायन लगा दूँगा ! हो सके तो मुझे अपना ओ एस डी बना लेना !
Tuesday, December 09, 2008 9:29:00 AM
"ताऊ जी मुबारकां.... यहाँ भी अपना सिक्का जमा ही लिया पहले चाँद, अब भूमंडल हा हा हा और सैम की तो चांदी ही चांदी....दिमाग हो तो ताऊ जी जैसा हो वरना ना हो "
regards
Tuesday, December 09, 2008 9:47:00 AM
ताऊ रामराम,
ताऊ क्यूं अपने मन की बात सैम के थ्रू बता रहा है. (तुझ जैसे) नेता ही तो देश का बंटाधार किये हुए हैं. चुनाव जीतते ही खुद कू मुख्यमंत्री से बी उप्परले मानने लगते हैं.
Tuesday, December 09, 2008 9:49:00 AM
abki baar bada haath maara hai taau. aap sach me kitne thoughtful ho sam ka bhi khata khulva rahe ho swiss bank me. menka gandhi aa ke aapko special award dengi.
chunav jeetne ki badhai. kya sahi likha hai,maza aa gaya.
Tuesday, December 09, 2008 10:22:00 AM
ताऊ को अनुभवी विभागीय सचिव चाहिये? मेरा ई-मेल उन्हें दे दें।
Tuesday, December 09, 2008 10:28:00 AM
ताऊ का यह फारमूला आम हो चुका है।
अगली बार काम न आएगा।
Tuesday, December 09, 2008 10:32:00 AM
हमने तो फार्मूले नोट कर लिये है, काम आएंगे.
Tuesday, December 09, 2008 12:01:00 PM
इस ताऊ को तो मेरे पास भेज दो जी। आज तो कमाल ही कर दिया।
Tuesday, December 09, 2008 1:28:00 PM
बहुत करारा मारा...
Tuesday, December 09, 2008 1:29:00 PM
bahut sahi
Tuesday, December 09, 2008 2:06:00 PM
wah tauji wah maza aa gaya. aap ke dwara netao ki matti paleet hote dekhna mai annad aa jata hai
Tuesday, December 09, 2008 2:19:00 PM
हम भी सोच रहे डाक्टरी छोड़ के ....आपकी छत्रछाया में आ जाए ......
Tuesday, December 09, 2008 2:44:00 PM
बहुत शानदार!
अब तो ताऊ जी दस साल बाद विरजीनिया का चुनाव लादेनेगे और जीतेंगे भी. तब तक पुराने अनाकोंडा बन जायेंगे. ताऊ के लिए कुछ भी कठिन नहीं रहा अब.
Tuesday, December 09, 2008 3:01:00 PM
वाह ताऊ ! वाह !
Tuesday, December 09, 2008 3:17:00 PM
और यार बीनू बात मेरे पेट में पच नही रही है तेरे को बताये बिना ! इसलिए तेरे को विद्यामाता की सौगंध है की किसी को बताना मत वरना मेरी बेईज्जती की इज्जत खराब हो जायेगी !
हा हा हा .........जबरदस्त सटीक करारा व्यंग्य.
ताऊ की जय हो.
Tuesday, December 09, 2008 3:20:00 PM
बहुत खूब वो मीठा वीठा कहाँ है ताऊ जी
Tuesday, December 09, 2008 3:21:00 PM
अब मुझे ताऊ के साथ मजा आने लग गया है सो
मैं छोड़ कर जाने वाला नही हूँ !
-हमारी हालत भी सैम सी ही समझो. हम भी कहीं नहीं जाने वाले. बस, एक ठो स्विस बैंक अकाउन्ट हमारा भी खुलवाये दो ताऊ!!
-गजब कलई खोली है महाराज!!!
Tuesday, December 09, 2008 3:36:00 PM
स्विस बैंक में अकाउंट खोल्वाना हो तो कहो अपने प्राइवेट बैंकिंग डिपार्टमेन्ट में कुछ कोंटेक्ट जुगाडा जाय :-)
अमेरिका ने स्विस बैंकों पर कड़े रेगुलेसन लगाए हैं... पर हमारे यहाँ सब नेता ताऊ ही हैं कौन डिमांड करेगा !
Tuesday, December 09, 2008 4:52:00 PM
अब रामदयाल की तरह पेटी हारमोनियम बजाने आले तो स्विस बैंको में खाता खुलवाने से रहे ! ये तो ताऊ जैसे लोग हैं दुनिया में , नही तो स्विस बैंको में ताले पड़ जाए !
ताऊ! ईब कै तो जमीं लट्ठ गाड दिया.
Tuesday, December 09, 2008 5:03:00 PM
ताऊ, बच के रहना - अब तो कुते भी वफादार नहीं रहे। कन्फीडेशियल चिज़े लीक कर रहे हैं। खबरदार कर रहा हूं , बाद में यह न कहना कि बताया नहीं था:)
Tuesday, December 09, 2008 6:19:00 PM
ताऊ दो-चार मँतर मुझे भी दे देना,सोच रहा हूँ ब्लोगिँग की दूकान बँद कर चुनाव लड लूँ.
Tuesday, December 09, 2008 7:09:00 PM
ताऊ हो तो ऐसा! चाहे एक ही हो!
Tuesday, December 09, 2008 8:57:00 PM
विद्यामाता की कसम :)
kafi kuch yaad aa gaya
Tuesday, December 09, 2008 10:52:00 PM
चुनाव जीतने के बाद अब जल्द ही ताऊ चूना लगाने वाले हैं, तैयार रहें....फितरत जो न कराये :)
अच्छी पोस्ट।
Tuesday, December 09, 2008 11:27:00 PM
अरे ताऊ इस जनता को अकल कब आयेगी??? विद्यामाता की कसम इस जनता पर अब गुस्सा आता है साढे चार साल रोते है, गालिया निकालते है , भुखे पेट सोते है, लेकि एक शाराब की बोतल. मंदिर के कीर्तन, ओर चार दिन की चांदनी देख कर भूल जाते है कि यही वो नेता है जिस ने तुम्हे अंधेरी राते दिखाई है, तुम्हे ळुटा है....
अब भगवान भी थक गया इन बेब्कुफ़ो की मदद कर के,
धन्यवाद, इस आंख खोलने वाले लेख के लिये
Wednesday, December 10, 2008 12:07:00 AM
अच्छा लिखा है ताऊ मगर क्या ये सचमुच मे सही है !! ताऊ और ऐसा ?
वैसे बगल की फ़ोटो एकदम खास है !! बोले तो झकास !! एक बात और अपने सैम को भुलकर भी नेता ना कहना नही तो ऐसा नाराज होगा कि जीना हराम कर देगा !!
Wednesday, December 10, 2008 1:00:00 AM
अचछा व्यंग्य है भाई साहब
prakashbadal.blogspot.com
Wednesday, December 10, 2008 2:52:00 AM
taau ek post apan ne bhee daal dee
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