ताऊ की अकबरी साम्राज्य हड़पने की साजिश नाकाम !

ताऊ की उटपटांग हरकतों और फालतू की बकवास को देखते हुए एक नया साथी,  ताऊ तैं बुझण लाग गया  की ताऊ तुम ये भैंस क्यो साथ में लिए फिरते हो ? आख़िर इससे इतना प्रेम क्यूँ हैं ? ठीक है लट्ठ हाथ में रखते हो वहाँ तक तो ठीक है पर छोडो ये भैंस वैन्स को अब ! अब तुम शरीफ लोगो में बैठने लग गए हो ! तो शरीफों जैसी बात करो और शरीफों की तरह रहो ! और ये लट्ठ और भैंस की बातें करके तुम समाज का कुछ भला नही कर सकते ! कुछ ढंग का काम करो ! जिससे दुसरे का भी भला हो !

 

ताऊ को ये बात सुनकर बड़ी तकलीफ हुई !

 

ताऊ किम्मै छोह म्ह आकै  बोला - अरे बावलीबूच ! तेरे को ये कोई साधारण भैंस दिखै सै के ? तू  इब्बी नया सै , इस वास्ते तेरे को मालूम कोनी !  ये भैंस तो ताऊ को राजा भोज ने दी थी ! और इतने विद्वान् राजा द्बारा दी गई भैंस कोई कम विद्वान्  होगी  क्या ? ये बड़ी चमत्कारी भैंस सै ! लोक - परलोक का ऐसा  कोई काम नही जो ये नही कर सकती हो ?  आजकल ये राजा भोज द्वारा प्रदत चम्पाकली नाम की भैंस  चाँद पर ताऊ की जान बचाने में लगी हुई है !

 

वो बोला - ताऊ ग़लती होगई ! आप नाराज मत हो ! आप तो ये बताओ की अब आपका आगे का क्या प्रोग्राम है ? आप तो मर कर यमदूतो के साथ चले गए थे फ़िर यहाँ कैसे आप रोज पोस्ट लिख रहे हो ? उसने टान्ट  करते  हुए कहा !

 

ताऊ - अरे बावलीबूच जैसी बात ना करया कर ! ये सब उस चमत्कारी अनारकली की वजह से है !

 

वो  बोला - अब ये अनारकली  कौन है और कहाँ से आगई  ? अभी तो आप उसका नाम चम्पाकली बता रहे थे !

anarkali ताऊ : अरे बेकूफ , तन्नै इतना भी ना  बेरा के ? अरे यो अनारकली ताऊ की उस भैंस का नाम सै जो बादशाह अकबर ने ताऊ को दी थी ! मालूम वालूम कुछ सै कोनी ! और चला आया ताऊ को अक्ल देने ? अरे अक्ल देने का जिम्मा ताऊ का सै ! तेरे को ताऊ से अक्ल लेनी हो तो ले नही तो अपनी राधा को खिला ! और ताऊ नै अपने लट्ठ की तरफ़ देखा !

 

अब उस नए नए दोस्त ने माथा पीट लिया की इस उत ताऊ से कैसे पीछा छुड़वाए ?  फ़िर लट्ठ की तरफ़ देखते ताऊ की तरफ़ देखा ! और सोचने लगा की अगर मजाक में भी एक टिक गया खौपडिया पर तो मैं  जिंदा नही बचूंगा  ! 

 

वो समझ रहा था की ताऊ के पास एक ही भैंस होगी ! और वो गई हुई है चंद्र यात्रा पर ! सो कोई खतरा नही होगा !   अब यहाँ दूसरी भी विराज रही है ! अब कुछ उलटा सीधा बोले तो लट्ठ पास ही रक्खा था ! और लट्ठ की जरुरत ही नही ! ताऊ का इशारा पाते ही उसकी ये चमत्कारी भैंस पूंछ को सुदर्शन चक्र की तरह घुमा कर गला काट डाले ! गोबर वोबर करना तो बांये हाथ का खेल है ! 

 

अब वो ताऊ का नया दोस्त भी  कोई कम घाघ नही था ! उसने सोचा की ताऊ की अक्ल तो घुटने में होती है सो इसके घुटनों की प्रसंशा करके ही यहाँ से राजी खुशी निकल पाउँगा ! तो चापलूसी करते हुए बोला - ताऊ इस अनारकली वाला किस्सा भी सुनाओ ना ! आपकी अनारकली तो बिल्कुल हीरोईन की तरह सुंदर और खूबसूरत लगती है !

 

ताऊ भड़क गया ! बोला - मन्नै बेरा सै ! तू मेरे को चने के पेड़ पै चढाण लाग रया सै ! चल निकल ले इब ! घणी बार होगई सै इब ! और इधर म्हारे धौरै घणा ही ज्ञान भरया पडया सै ! ताऊ नै बेरा सै की उसको  के करना सै और के नही करना सै ? इब थम लोग तय करोगे की ताऊ भैंस पाले या डकैती डाले और ताऊ नै अपना लट्ठ उठा लिया ! 

 

और वो बेचारा डर के मारे बोला - नही ताऊ आपसे अक्लमंद तो कोई दुनिया में है ही नही ! आपतो साक्षात बुद्धि के अवतार हैं कलयुग में !  पोने दो तो आप ही हो बल्कि पोने दो भी कम ही पडेगा,  आप तो एक सेर और चौदह छटांक हो ! बाकी पूरी दुनिया दो छटांक में है !

 

और ताऊ की अक्ल सही में घुटने में ही होती है ! उस आदमी की बातो में आगया ताऊ ! सही है ताऊ को अपने वश में करना हो तो बडाई करो ! झगडा करोगे तो आख़िर तक नही हार मानेगा ! और आपके पीछे लग लेगा !

 

ताऊ की अक्ल सिर्फ़ उसकी शरीर की  ताकत होती है !  बुद्धि से कोई लेना देना नही होता ! ताऊ की ताकत से बुद्धि ही जीत सकती है वरना बात और लात दोनों में ताऊ ही भारी पड़ेंगे ! आप अगर बुद्धि का इस्तेमाल कर सकते हो तो ताऊ से घर की गोबर बुहारी भी करवा लो और उल्टे पैसे भी लेलो !

 

अब ताऊ के उस घाघ दोस्त ने ताऊ को उचकाया तो ताऊ बताने लगा की उन दिनों बादशाह अकबर का राज था ! और वो दुष्ट बीरबल उसका मंत्री हुआ करता था ! अगर बीरबल नही होता तो मैं आज सिर्फ़ भैंस और लट्ठ के साथ  नही होता बल्कि पूरा अकबरी साम्राज्य ताऊ का होता ! ताऊ ने बड़ी पीडा पूर्वक बताया !

 

अब उस दोस्त के चौकने की बारी थी ! उसने कंधे उचका कर पूछा - ताऊ बताओ , की ये अकबरी साम्राज्य फ़िर आपका होने से कैसे रह गया ?

 

hanuman today ताऊ बोला - भाई सुन ! उस समय में ताऊ पहलवानी किया करै था ! और आगे पीछे भी कोई था नही ! कोई चिंता फ़िक्र नही ! जंगल के रास्ते में एक हनुमान मन्दिर था ! बस वही पडा रहता और दंड पेला करता था ! अकबरी राज का कोई भी पहलवान ऐसा नही था जो मुझे जीत सकता हो !

 

तब बादशाह अकबर ने खुश होकर ये अनारकली नाम की झौठडी मेरे को इनाम में  दे दी ! और इसका सीधा सम्बन्ध शाही खान दान से हैं ! इसी की बहनों और भतीजियों के दूध  ने आगे ओरंगजेब तक के सारे मुग़ल बादशाहों को पाल पोस कर बड़ा किया था !  और इसी अनारकली का दूध पी पी के मैं इतना ताकत वर हो गया की दुसरे राज्यों के पहलवानों को भी हराने  लग गया ! बस मैं और अनारकली तब से उसी मन्दिर पर रहते थे !

 

अब धीरे धीरे मेरे अन्दर इतना बल आगया की मैं अगर हाथी की पूंछ पकड़ कर खडा हो जाऊं तो हाथी आगे नही बढ़ सकता था ! बड़े २ सेठ साहूकारों को  भी मैं उनके हाथी घोडो की पूंछ पकड़ कर रोक लिया करता और मजाक उडाता था ! और एक दिन तो हद ही हो गई जब मैंने बादशाह अकबर का  सेनापति  जब  हाथी पर निकल रहा था तब उसके हाथी की पूंछ पकड़ कर खडा  हो गया  ! उसने बहुत हाथ पैर मारे ! पर हमारे सामने सब बेकार ! 

 

उसने जाकर शिकायत करदी बादशाह सलामत से ! जिल्ल्लै इलाही   को भरोषा नही आया तो वो स्वयं देखने आगये ! अब हमारी तो आदत थी सो हमने उनके हाथी की भी  पूंछ पकड़ ली और हाथी बिचारा हवा में लटकता रह गया ! बादशाह सलामत तो मारे शर्म के जमीन में गड़ क्या गए बल्कि धंस ही गए !

 

akbar birbal अब बादशाह सलामत या कोई भी उधर से डर के मारे नही निकलता था ! और हमसे छुटकारा पाने के उपाय सब किया करते थे !

 

प्रत्यक्ष में जनता हमारे साथ थी सो जिल्ले इल्लाही सीधा हुक्म भी राज्य छोड़ने का नही दे पाये ! अब बीरबल से मंत्रणा करने लगे !

 

एक दिन बहुत  विचार के बाद बीरबल ने कहा की महाराज मैंने इस ताऊ का बहुत बारीकी से अध्ययन किया है ! इसकी सफलता है सिर्फ़ बेफिक्री ! जब तक ये बेफिक्र रहेगा इसको कोई नही हरा पायेगा ! और ऐसे ही बेफिक्र रहा तो ये आपका राज्य भी  जीम जायेगा !

 

और भाई ये सलाह अगर बीरबल नही देता तो उसका क्या बिगड़ जाता ? हमारे  साथ दुश्मनी निकाल ली उसने !

 

हमने बीरबल को कहा भी था की बीरबल तुमको यह बात हमें पहले बतानी चाहिए थी ! अरे हम तुम्हे उसमे से आधा राज्य दे देते ! ये बादशाह तुमको क्या ख़ाक देगा ? ज्यादा से ज्यादा २ या ५ सौ स्वर्ण मुद्राए ! बीरबल कुछ नही बोला !

 

इसी से लगता है की ताकतवर होने के साथ बुद्धिमान भी होना चाहिए ! नही तो बादशाहों की तरह एक बीरबल भी रख लो ! अगर हमने ये सोच लिया होता तो आज आप मुगलिया सल्तनत के इतिहास की बजाये ज्ञानदत्त जी द्वारा रिकमंड की हुई "ताऊलॉजिकल स्टडीज़"  पढ़ रहे होते ! और हमारी इस छोटी सी भूल की वजह से हमारी वर्तमान पीढी हमको आज तक ताने मारती है ! और हम ख़ुद जिल्लेइलाही की बजाये ताऊ बने घूम रहे हैं ! अगर हमने झूँठी ताकत के अंहकार में बुद्धि की अवहेलना ना की होती तो आज इतिहास ही कुछ और होता !

 

खैर आगे की कहानी सुनो !

 

बीरबल के ऐसा कहने पर घबराकर बादशाह बोले - की बीरबल उपाय बताओ !

 

बीरबल बोले - उपाय महँगा है !

 

बादशाह : हमारे राज्य से तो महँगा नही ?

 

बीरबल  - नही जहाँपनाह ! मेरे रहते आपके राज्य पर किसी की नजर नही पड़ सकती !बस आप तो खजाने का मुंह खोलकर रखिये ! बाक़ी सब मेरे ऊपर छोडिये ! आख़िर इन्ही लोगो की अक्ल और लालच  की बदौलत तो ये शहंशाह बन के टिके हुए थे ! और ताउओ को ठीकाने लगाने का काम भी इन्ही के जिम्मे था ! वरना जिल्ले इलाही तो हिंद के गली कूचे भी नही जानते थे !

 

elephant-tail-psd अब बीरबल मेरे पास आए और बोले - ताऊ बादशाह सलामत को ज्योतिषी ने बताया है की उनके राज्य पर खतरा है ! उपाय स्वरुप इस मन्दिर में दिया जलाना है !  यहाँ के पुजारी जी छुट्टी जा रहे हैं ! सो उनके आने तक यह काम तुम कर देना ! और बदले में एक सोने की मोहर तुमको रोज मिलेगी ! और दिया ठीक शाम और सुबह  ६ बजे जल जाना चाहिए ! समय का विशेष ध्यान रखना ! ठीक ६ बजे यानी ६ बजे !

 

ये कौनसा मुश्किल काम था ! मैं उस सोने की  मोहर  की फिराक मे ये काम करने लगा और बीरबल रोज मुझे एक सोने की मोहर देने लगे !

 

धीरे २ मैं इसके बंधन में हो गया ! कभी मैं चौंक कर जल्दी उठ जाता दिया जलाने के चक्कर में ! कभी बाहर से शाम को जल्दी लौटता शाम के ६ बजे के चक्कर में ! मेरी बेफिक्री जाती रही ! अनमना सा रहने लगा ! एक गुलामी सी हो गई समय की !

 

काफी समय हो गया ! मैं काफी अस्त व्यस्त हो चुका था ! वो मस्ती जा चुकी थी ! एक दिन बीरबल के साथ बादशाह सलामत भी आए ! और मुझे नियमानुसार सोने की मोहर दी !

 

जहाँ पहले मुझे सिर्फ़ पहलवानी के सपने आते थे अब सोने की मोहर के आने लग गए ! पहले मैं अबलाओं की बला से बचा हुआ   था ! अब उन अबलाओं के माता - पिता   भी उनको मेरे गले बाँधने की फिराक में रहने लगे ! क्योंकि उनको ख़बर लग चुकी थी की मैं रोज एक सोने की मोहर कमाता हूँ ! रोज अपनी सुंदर २ कन्याओं विवाह प्रस्ताव लेकर पधारने लगे ! 

 

और बीरबल बोले - सुनो ताऊ , अब  जहाँपनाह का राज बच गया है ! कल से तुम दिया मत जलाना ! अब उसकी जरुरत नही रही ! और बादशाह बोले - ताऊ तुम हमारे हाथी की पूंछ पकड़ कर रोक के दिखाओ ! अगर रोक पाये तो सारा राज्य तुम्हारा ! हमने कोशीश की ! पर बेकार ! नही रुका हाथी तो ! बल्की हमें कागज़ के पूतले की तरह घसीट ले गया ! हमारी बड़ी जग हसाई हुई ! पर क्या कर  सकते हैं ? किसी भी तरह का बंधन या चिंता  आदमी को दीमक की तरह खा  जाती है !

 

 

इब खूंटे पर पढो :-

 

एक बार ताऊ अपने पड़ोसी के बच्चे के साथ बाजार चला गया !  वहाँ रास्ते में एक मोटे पेट का अनजान  आदमी दिख गया !

पड़ोसी के बच्चे ने पूछा - ताऊ ये कौन है ? ताऊ ख़ुद बावलीबूच ! क्या जवाब दे ?
बार २  बच्चे के जिद्द करने पर सोचकर  ताऊ बोला - बेटे , ये है उद्योगपति !

 

थोड़ी देर बाद एक  पूरे समय की गर्भवती बीरबानी ( औरत ) देख कर उस बच्चे ने फ़िर वही सवाल दोहराया  !

अब ताऊ क्या जवाब दे ?  अब ताऊ उसको जितना ही टालने की कोशीश करता वो उतना ही ज्यादा पूछने लगा ! ताऊ ने सोचा की ये आज पिटवा कर ही छोडेगा ! 

 

आख़िर थक हार कर ताऊ बोला - बेटे ये पति उद्योग है !

28 comments:

  Arvind Mishra

Monday, November 17, 2008 6:18:00 AM

ऐसयीच चलता रहा ताऊ तो तुम ब्लॉग जगत रूपी निजाम को तो जरुरै हथिया लोगे !! जुग जुग जियो !

  Gyan Dutt Pandey

Monday, November 17, 2008 6:36:00 AM

किसी को निन्यानबे के फेर में लगा दो - अच्छा से अच्छा नकारा हो जाता है। ताऊ भी ऐसे ही हुआ!

  विवेक सिंह

Monday, November 17, 2008 7:30:00 AM

ताऊ बडा खेद हुआ सुनकर साम्राज्य मिलते मिलते रह गया . कोई बात नहीं . बेफिक्री के आगे साम्राज्य की क्या औकात ?

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Monday, November 17, 2008 7:32:00 AM

बड़ी ऊंची सलाह दे डाली ताऊ ने आज तो! शुक्रिया!

  Ratan Singh Shekhawat

Monday, November 17, 2008 7:46:00 AM

किसी भी तरह का बंधन या चिंता आदमी को दीमक की तरह खा जाती है !

बहुत सारगर्भित और शिक्षाप्रद कहानी |

  जितेन्द़ भगत

Monday, November 17, 2008 8:23:00 AM

आज तो मजेदार कथा रही अकबर की और खूँटी पर तो चुटकुला भी चोखा था।

  अल्पना वर्मा

Monday, November 17, 2008 9:48:00 AM

बल्की हमें कागज़ के पूतले की तरह घसीट ले गया ! --soch ke hi bahut hansi aayee....behad rochak lekh hai----


[अगर बीरबल नही होता तो मैं आज सिर्फ़ भैंस और लट्ठ के साथ नही होता बल्कि पूरा अकबरी साम्राज्य ताऊ का होता !--bahut badiya!:D

-aap ka blog to bada rang-biranga hai---aur saath hi rochak bhi--'Tau 'ke charchey har jagah hain aaj kal--]

  musafir jat

Monday, November 17, 2008 10:08:00 AM

ताऊ, सारी राड की जड़ सै थारी या भैंस। भोज की चम्पाकली से भी तो गुजारा कर सकता था। अनारकली कू लेना जरूरी था ही नी। साफ़ सुद्दी बात बताऊँ, इभी चम्पाकली कू चलती कर दे। ना तो या फेर कोई औट्ठाम कर देगी.

  Anil Pusadkar

Monday, November 17, 2008 10:22:00 AM

वाह ताऊ वाह्। आम के आम गुठलियों के दाम्।किस्सा का किस्सा और सीख की सीख्। गज़ब का है ये ताऊलोजिकल इश्टाईल्।

  Jimmy

Monday, November 17, 2008 11:02:00 AM

taau se koi kochnaa aasan hove ke

lol keep ot up good post



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  Shastri

Monday, November 17, 2008 11:06:00 AM

ताऊ जी को कोचिन से शास्त्री का नमस्कार!!

कई दिनों से आपके ठीये पर आने की सोच रहा था, लेकिन अचानक जब अनूप शुक्ल ने आज की चिट्ठाचर्चा में याद दिलाया कि शायद मुझे आपकी मदल की जरूरत होगी, तो सोचा कि फुर्ती से आपके चौपाल में पहुँच कर आपका हुक्का भर दूँ.

सस्नेह -- शास्त्री

पुनश्च: आज पहली बार आपके चिट्ठे पर मिले हैं, अब मिलते रहेंगे!

  poemsnpuja

Monday, November 17, 2008 12:25:00 PM

आज तो कहानी में संदेश कमाल का दिया ताऊ. वाकई चिंता किसी को भी दीमक की तरह खा जाती है. पर हमें तो ये सोच के बड़ा मज़ा आ रहा था की अगर अकबरनामा की जगह ताउनामा होता...कम से कम इतिहास पढ़ना इतना बोरिंग तो नहीं होता. ताऊ के किस्से तो मजेदार ही होते.

  seema gupta

Monday, November 17, 2008 12:38:00 PM

अगर बीरबल नही होता तो मैं आज सिर्फ़ भैंस और लट्ठ के साथ नही होता बल्कि पूरा अकबरी साम्राज्य ताऊ का होता ! ताऊ ने बड़ी पीडा पूर्वक बताया !
" birbal tau jee ko chuna lga kya..., birbal jub khechdee bnaa rhaa thaa, tub try kerna tha aapko, pukaa akbaree samrajy aapka hee hottaa ha ha ha ha ..."

Regards

  Zakir Ali 'Rajneesh'

Monday, November 17, 2008 1:19:00 PM

सही सलाह दी है।
वैसे खूंटे वाला किस्सा ज्यादा जोरदार है। बधाई।

  makrand

Monday, November 17, 2008 2:11:00 PM

बीरबल तुमको यह बात हमें पहले बतानी चाहिए थी ! अरे हम तुम्हे उसमे से आधा राज्य दे देते ! ये बादशाह तुमको क्या ख़ाक देगा ? ज्यादा से ज्यादा २ या ५ सौ स्वर्ण मुद्राए !

असल में बीरबल को आपसे ज्यादा बादशाहत के गुण जिल्ले-इलाही में लगे होंगे ! इसलिए आपको नही बताया होगा ! और भी बीरबल का पेट भी इतना बड़ा नही रहा होगा की वो आधे राज्य की इच्छा करता ! हाँ आपकी ये बात सही है की राज आपका रहता तो बच्चो को इतिहास जैसा विषय भी ताउलाजिकल स्टडीज की वजह से नीरस की बजाय सरस लगता ! बहुत गजब की रही ये पोस्ट ! कल्पना ही मजेदार है , अकबरनामा विरुद्ध ताऊनामा ! :)

  अभिषेक ओझा

Monday, November 17, 2008 6:29:00 PM

ताऊ ने बीरबल से बदला नहीं लिया? ऐसा कैसे?

  डॉ .अनुराग

Monday, November 17, 2008 7:21:00 PM

सब मोह माया है ताऊ !कुश की तरह कुछ नेकी करो..........साम्राज्य तो आते जाते रहते है........वैसे कोई भैंसा ढूँढा है कोई अपनी भैंस के लिए ?अगली पोस्ट में नीचे इश्तेहार डाल दो..... जब अमिताभ को मिल सकता है फ़िर आप को क्यों नही ?

  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

Monday, November 17, 2008 8:54:00 PM

तो क्या हुआ जितना बादशाह और बीरबल जिन्दा हैं उस से कम ताऊ भी नहीं।

  Pt. D.K.Sharma "Vatsa"

Monday, November 17, 2008 9:04:00 PM

रे ताऊ ! घणी माड़ी होगई. चाल कोई बात नी, हौंसला रक्खे करैं. ताऊआं के भागा मैं राजपाट कोन्या होए करदे. जिब भाग मैं लिख्या ही डांगर हांकना है ते कोई के कर सकै है

  राज भाटिय़ा

Monday, November 17, 2008 10:11:00 PM

अरे ताऊ तु तो आज भी बादशाह है क्यो चिंता करना लाग रहा है, पेसे या राज से कोई बडा नही बनता, गर ऎसा नही लिखुगा तो भाई तेरे लठ्ठ से ....
धन्यवाद

  अनुपम अग्रवाल

Tuesday, November 18, 2008 12:37:00 AM

लेकिन बीरबल की बात नहीं मानी कि कल से इस मन्दिर [ब्लॉग ]पर दीया मत जलाना.
बल्कि एक कदम आगे बढ़ कर खूंटा और गाड़ रहे हैं .
अरे लोग तो ऐसे ही पसंद करते रहेंगे ताकि आप ऐसे ही लिखते रहें .
इन को तो अच्छा ही लग रहा है .क्योंकि अगर आप साम्राज्य चला रहे होते तो ब्लॉग पर कौन लिखता

  नीरज गोस्वामी

Tuesday, November 18, 2008 1:01:00 AM

ताऊ..सच्ची कहूँ ...थारा जवाब नहीं....बेजोड़ है भाई तू...और थारी बातां...
नीरज

  मा पलायनम !

Tuesday, November 18, 2008 7:20:00 AM

ताऊ जी मैं आ गिया हूँ चिंता नक्को .आप तो सदाबहार बादशाह हो .वैसे खूंटे वाला किस्सा मज़ेदार है .

  लवली कुमारी / Lovely kumari

Tuesday, November 18, 2008 2:43:00 PM

आपका ब्लॉग पढ़ कर कुछ कुछ हरियाणवी समझने लगे हैं .

  योगेन्द्र मौदगिल

Tuesday, November 18, 2008 6:19:00 PM

ताऊ महाराज मैं और भाटिया साब वाया तिवारी साब आपको हिमालय की गुफा की जड़ तक जाने का न्योता दे रहे हैं पर वहा भैंस पर चढ़ कर जाना मना है तिवारी साब भैंस पर चढ़ सकते हैं
मेरे ख्याल से अनुराग जी भी इसका अनुमोदन करेंगें

  दीपक

Tuesday, November 18, 2008 9:46:00 PM

ताऊ अच्छी बात कही आपने अब हमारी भी खुंटै पे पढो !!

स्कुल मे शिक्षक नैतिकता का पाठ पढा रहे थे।बोले:यदि मै किसी लडके को देखु कि वह गधे को मार रहा है और मै उसे गधे को मारने से रोकु तो मेरी इस नेकी को क्या कहा जायेगा ?

एक विद्यार्थी ने जवाब दिया -भाईचारा

  दिलीप कवठेकर

Tuesday, November 18, 2008 11:51:00 PM

भूतनी को पहचान लिया ताऊ, इब के?

  मदारी

Thursday, May 21, 2009 9:23:00 PM

superb!

ताऊ उवाच :-:


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