Powered by Blogger.

ताई, सात बच्चे और सात ताऊ

 

यह बालदिवस की सत्य घटना है ! यह परिवार इतनी  आर्थिक तंगी से गुजर रहा था की खाना तो दूर , घर में चाय का सामान भी नही था !    नाम  बदल गए हैं ! पता नही क्यों ? मैं तय नही कर पा रहा हूँ की गाँव की चौपाल पर बैठे लोगो ने उसे क्यों नही बचाया ? आप ही तय करे ! 

 

एक दिन एक ताई का, अपने पति  ताऊ से
चाय बनाने के सवाल पर, झगडा हो गया
घर में ना चाय , ना दूध और ना शक्कर
बस इसी बात पर  दोनों में होगई टक्कर !



water-well 



ताई   जाकर        गाँव के    पटेल के     कुए की    मुंडेर पर,
आत्मोसर्ग करने पाँव लटका कर  कूदने के लिए बैठ गई
गाँव की चौपाल पर         बैठे     सात ताउओ ने भी देखा
बचाने कोई नही गया,        करते रहे अपना लेखा जोखा  !



बिजली   गुल थी ,   ट्यूशन पढ़कर,   टॉर्च की रोशनी      में लौटते सात बच्चे
ताई को         पैर लटकाए देख, ठिठके,       माजरा     समझने में निकले अच्छे
सातों ने आहिस्ता से, ताई को बातो में लगा कर,  मुंडेर से पीछे खींच लिया
बात जब ताई के समझ आई  तो जान देने निकली ताई ने माथा पीट लिया !



गाँव के     ताउओ से पूछा गया,     तुम देख कर भी क्यों अनजान रहे ?
सातो ताऊ बोले - ताकि कुए में धकेलने का इल्जाम हम पर ना लगे !
बच्चो को तो बालदिवस पर   स्कूल कमेटी से  सम्मानित होना ही था
अगर बच्चों की जगह सातो ताऊ होते तो ..........................................?

27 comments:

  1. अगर बच्चों की जगह सातो ताऊ होते तो....?
    --------
    तो क्या, आलस के मारे न ताऊगण धकेलते, न बचाते! अन्तत: चुपचाप ताई को घर पांव दबा लौटना पड़ता।
    चाय मरने के लिये पर्याप्त कारण नहीं है! :)

    ReplyDelete
  2. ताऊजी,बच्चे तो स्कूल में सम्मानित हो गए। सातों ताऊ स्कूल जाते नहीं थे। उन्हें तो सातों ताई ही सम्मानित करतीं। अगलों का ऐसा सम्मान होता, अक फेर कदी अपनी वाली भी कुवें में कुद्दन जात्ती, तो उसे भी ना रोकते।

    ReplyDelete
  3. अगर कुएँ को ब्लॉग जगत माने तो ताई को वापस आना ही था..

    ReplyDelete
  4. सम्मानित करने का काम बचपन तक ही सीमित रहना चाहिए. आगे चलकर सातों ताऊ सरीखे ताई को बचाते तो एक ही ध्येय रहता....सम्मानित होना.

    कविता और कविता में दिखी कहानी बहुत खूब रही.

    ReplyDelete
  5. क्या ताऊ चाय के नाम पर आत्महत्या ? ताई कन्ने दिमाग नई हे लगता है !!

    ReplyDelete
  6. सातो ताऊ बोले - ताकि कुए में धकेलने का इल्जाम हम पर ना लगे !
    बच्चो को तो बालदिवस पर स्कूल कमेटी से सम्मानित होना ही था
    अगर बच्चों की जगह सातो ताऊ होते तो ..........................................?
    " ek baar post ka sirshk dekh kr to chaunk hee gyee, kee ye kya mazra hai..... lakin jub pdha tb smej aaya sara bavaal chaiay (tea) ne mchjaya hua jai...ab agar vo sath(7) tauu taee ko bchaa laite to humare in tau jee ko kaun puchta ha ha ha isliye vo saton ke sath aslee tauu jee ka intjaar krty hee reh gye..."

    regards

    ReplyDelete
  7. अरे जिस ने कुदना होता है वो नखरे नही करती, झट से कुद पडती, उन सात ताऊयो मे मै भी था, इब ताउ के सामने इन नारियो के नखरे ना चले , ताउ तो खुद पकड के लटका दे, की बोल इब देगी धमकी, बोल ससुरी के छोडु......ओर लठ्ठ दो बजा दे.अब उखाड लो जो उखाडना हो ताऊ का

    ReplyDelete
  8. रै ताऊ सबतै पहलां तो मेरी राम राम सै। ईब थारी कविता के बारे में कहूं सूं भाई मकै ध्‍यान ला के सुनिये एक तो काम यो छोरों ने घणा कसूत्‍ता कर दिया मक चोखा कर दिया अर भाई इब थम भी ताई नै जाके समझा देयो कि रे ताई यो जान देण में कुछ कोन्‍नी धरिया ईब टैम कट ग्‍या ईब तां ताऊ नई ताई बी कोनी ला सकदा तो टैम ते ही चाय बना के दे दिया करे अर घर पे कुछ कोनी था तो ये पडोसी किस खातर होवें सैं वा एक कहावत कोनी सुनी कि एक ताई का मन हलवा खान नू करे सै पर वहां भी जमायै दाने के फांके पडे थे तो ताऊ यूं बोल्‍यी

    होता अगर आटा गुड घर में लेती तेल उधार पर क्‍या करें ओडे तो कण्‍डे वी कोन्‍नी

    ReplyDelete
  9. ताऊओ ने ताई को इसलिए नही बचाया, की ताई का पति अगर ताई को बचाने वाले ताउओ के खिलाफ, ताई से पुलिस को यह बयान दिलवा देता की ये मुझे कुंए में धकेल रहे थे तब क्या होता ? और वो कड़की में भी थे तो उन ताउओ को हमेशा ब्लेकमेल करते ! हमारी समझ से तो यह कारण प्रमुख दिखाई दे रहा है ! अखबार में भी हमने ऐसा ही पढा था !

    अब आपकी भैंस कहाँ है ? क्या चाँद पर ही यमराज के झौठे के साथ घर बसा लिया है या वापस भी आ रही है ? उसको जल्दी बुलवाईये उसके बिना आपका ब्लॉग भी सूना पडा है ! :)

    ReplyDelete
  10. ताऊ बच्चे न हों तो बुढ़ापा काटे न कटे।

    ReplyDelete
  11. वाह ताऊ ये पोस्ट तो कमाल की है. और वो भी बाल दिवस के मौके पर. वैसे वाकई ताई को बचाना एक मुश्किल काम था...और बाकी लोगों से पीटने का भय भी था इसमें. मुझे अपने एक भइया के साथ घटी घटना याद आ गई, हमारे गाओं में एक बहुत बड़ा कुआँ था जिससे सब लोग पीने का पानी भरते थे, एक दिन एक लड़की कुएं में गिर गई, हल्ला मचा...भइया पास में ही थे, और बहुत अच्छे तैराक थे. तो कुएं में कूद के उसको बहार निकले. उसके बाद शाबाशी तो क्या मिलेगी अच्छा खासा हल्ला हो गया दोनों के नाम को लेकर. इसलिए किसी को बचाना बड़ा जोखिम का काम है. सातों ताऊ समझदार थे :D

    ReplyDelete
  12. क्योंकि वे सात ताऊ देशी संस्कृति के ठेकेदार थे. अब चाय ठहरी अंग्रेजों की ड्रिंक - उसके झगडे से किसी को न बचाते वो. हाँ किसी देसी ड्रिंक - देसी दारू वगैरा - की बात होत तो देखना था कैसे दोड़ते हुए आते वे सातों अकाल के पीछे लट्ठ लिए हुए.

    ReplyDelete
  13. ताऊओं ने कभी किसी को आत्महत्या करते नही देखा होगा...जब इतना दुर्लभ द्रश्य फ्री में देखने को मिल रहा है तो ताऊ क्यों बचाते...

    ReplyDelete
  14. बालमन पर आखिर ताई क्यों ना रिझे भला,बच्चे मन के सच्चे/अब रही ताऊओं की बात तो क्या मजाल वो ताई के पास भी फ़टके?नही तो वो सबके सब अब तक कुयें से झांकते नजर ना आते/वो जानते थे कि चाय की कड्की अब तक ताई के दिमाग मे खौल रही है/

    ReplyDelete
  15. कुश जी से सहमती जताते हुये....

    चाय भी वजहों में वजह हुई भई

    ReplyDelete
  16. कवि‍त्‍वमय पोस्‍ट, मजेदार।

    ReplyDelete
  17. क्या कहा जाए ?
    घुघूती बासूती

    ReplyDelete
  18. दरअसल ताउ ने पूरी जवानी ऐसी ही धमकियों के बीच निकाल दी। सो उसे मालूम था....

    ReplyDelete
  19. तभी कहूं आजकल सारे इनाम ताऊ के बच्चे कैसे ले जा रहे हैं :-)

    ReplyDelete
  20. ये बच्चे ही है जिनको ताक कर ताई का बुढापा गुजर लेगा वरना तो ताऊ को चिलम लगाने से फुर्सत कहाँ.

    ReplyDelete
  21. 7 Tau milker bhee becharee Taai ko Chai pilane ke bare mei poochne bhee nahee gaye .....
    I thought all the TAUS r Gentlemen :)

    ReplyDelete
  22. कई दिनों बाद लौट कर अपने कुछ पसंदीदा चुनिन्दा बुकमार्क ब्लागों की सैर कर रहा हूँ -आपने मेरा इंतज़ार नही किया और पोस्ट लिखते भये -ये तो नही हुयी दोस्तों वाली बात ! और चिडियों पर आपकी नजर ज्यादा है इनदिनों यह जानते हुए कि दूर है उनका ठिकाना ....क्या भूतिनी वाला चित्र केवल अपने माजी (अतीत )की किसी याद के लिए है ?

    ReplyDelete
  23. अरे ताऊ जी
    अगर सातों ताऊ बचा लेते तो आप ये सवाल कैसे पूछते ?
    और फ़िर बच्चे कैसे इस पोस्ट में आते ?
    और फ़िर'' ये बाल दिवस की सत्य घटना है ''से शुरुआत कैसे होती
    waise ab log tipiyaa chuke hain .
    aap is kahanee ko aage badha sakte hain

    ReplyDelete
  24. श्री लाल यादवSunday, September 27, 2009 5:58:00 PM

    लाजवाब जी.

    ReplyDelete