ताऊ ने सेठ के बर्तन ठगी करके जो लंबा हाथ मारा था ! उससे खूब जोरदार दीपावली मनाई ! और बहुत ज्ञान की बातें करता रहा ! पर फोकट का ज्ञान कब तक चलता ? दीपावली के इतने मंहगे खर्चे के बाद बचना क्या था ? और लुट का माल आदमी बहुत बेरहमी से खर्च करता है ! सो ताऊ ने भी सारे ठगी के पिस्से रस्ते लगा दिए ! और आगया रोड पर नया शिकार तलाश करने के लिए !
ताऊ द्वारा बार बार धंधे बदलने के बावजूद पहली बार सफलता मिली सेठ जी के बर्तनों वाली ठगी के मामले में ! आप नु समझ
ल्यो की सेठ जी की सारी बर्तनों की दूकान को ही ठिकानै लगा दिया ताऊ नै ! और फ़िर बाकायदा पंचायत नै भी ताऊ को बरी करकै सेठ पै जुर्माणा मांड दिया सो ताऊ की तो हिम्मत और बढ़ गी ! और बची खुची कसर पुरी कर दी डा. अरविन्द मिश्रा जी नै ! एक तो करेला और वो भी नीम चढ़ा ! ताऊ तो न्यू ही बिगडा हुवा था और मिश्रा जी नै सलाह दे डाली की " धंधा -जमाये रहो इसी को अब !" तो ताऊ मित्र होने के नाते डा. अरविन्द मिश्रा जी की सलाह को मानने के लिए बाध्य हो गया ! आख़िर मित्र ही तो सही सलाह देते हैं !
तो ताऊ ने सोची की पिछली बार तो सेठ को तगडा चूना लगाया था ! और साहूकार भी अपन ही बन गए थे ! ये सेठ एक बार और फंस जाए तो मजा ही आजाये ! एक बार फ़िर इसी पर हाथ आजमाते हैं ! अगर दांव बैठ गया तो सारी जिन्दगी बैठ कर खाएँगे ! और ताऊ की हिम्मत मिश्राजी ने भी काफी बढ़ा दी थी ! ताऊ इब २४ घंटे नई २ स्कीम सोचने में लगा रहता था ! उसको पहली बार किसी धंधे में इतना तगडा मुनाफा हुआ था !
ताऊ नै सेठ के साथ जो किया उसको सेठ किसी को बता भी नही पाता था ! और वो हमेशा ताऊ से दो हाथ दूर ही रहता था ! और सेठ जी ने तो सेठानी को भी नही बताया था की इस ताऊ के बच्चे ने इस तरह की लुन्गाडा गर्दी करी थी सेठ के साथ ! क्योंकि उसमे भी सेठ जी की ही इज्जत ख़राब होवे थी ! कुछ दिनों बाद ऐसी भगवान् की मर्जी हुई की बीमारी की वजह से सेठ जी की १२/१३ साल की कन्या रामकोरी भगवान को प्यारी हो गई ! बड़ी दुखद ख़बर थी ! सारे ही गाम के माणस दुःख प्रगट करण खातर सेठ जी के यहाँ पहुंचे तब ताऊ को भी मौका मिल गया ! और आप जाणो की दुःख के मौके पै तो दुश्मन को भी मना नही किया जावै ! सो ताऊ भी वहाँ जाकै अफसोस परगट करण लाग ग्या !
इब सेठ तो ताऊ को आछी तरियां जानै था पर बेचारी सेठाणी को ताऊ के गुण पता नही थे ! और ताऊ तो वहाँ ऐसे अफसोस परगट करण लाग रया था जाणु उसकी ख़ुद की ही छोरी मर गी होवै ! खैर सेठ भी बहुत गम म्ह था और सेठाणी का तो रो रो कै बुरा हाल था ! एक ही लड़की थी उनकी वो ! खैर साहब इब सारे अपने २ घर चले गए ! सेठाणी नै ये जरुर समझ लिया की यो ताऊ घणा ही शरीफ माणस सै क्यूँकी सबतैं घणा अफसोस परगट ताऊ नै ही करया था ! यानी ताऊ सेठाणी जी की नजर म्ह भला आदमी बन गया था ! और यो ही ताऊ चाहवै था ! ताऊ को अपनी स्कीम सफल होती दिखाई देण लाग री थी !
एक दिन ताऊ को ख़बर लगी की सेठ बाहर गया है सो ताऊ मौका देखकै सेठ जी के घर पहुन्चग्या और वहाँ जाकै झूँठ मूंठ का रोण लाग ग्या ! सेठाणी जी के पूछने पर ताऊ ने बताया की पिछले हफ्ते ही वो स्वर्ग गया था अपनी मरी हुई माँ से मिलने ! सो वहाँ आपकी लड़की रामकोरी भी मिली थी ! रामकोरी का नाम सुनते ही सेठाणी जी की आँखे नम हो गई ! और उसने ताऊ से उसके हाल पूछे ! इब ताऊ तो इस मौके की तलाश में ही था ! ताऊ ने बोलना शुरू किया -
सेठाणी जी और तो सब ठीक सै पर आपकी लड़की घणी उदास थी ! सेठाणी जी को बड़ा दुःख हुआ और कारण पूछा ! तब ताऊ बोला - बात ये है की मैंने उससे उदासी का कारण पूछा था ! मुझे मालुम था आप भी मुझसे ये ही पूछोगी ! तब आपकी बेटी रामकोरी ने बताया की ताऊ यहाँ और तो सब ठीक सै ! पर यहाँ जब भी कोई ब्याह शादी होवै तो मेरे पास कोई भी गहणा जेवर नही सै पहनने के लिए ! दूसरी लड़कियां तो जेवरों में लदी रहती हैं ! और यही मेरी उदासी का कारण सै ! जब आप अगली बार आवो तो मेरी माँ से मेरे लिए गहने वाला डिब्बा लेते आना ! उसमे से मैं अपनी पसंद के छाँट कर बाक़ी के वापस भिजवा दूंगी !
सो आज मैं मेरी माँ से मिलने स्वर्ग जा रहा हूँ आपको कुछ सामान भेजना हो, या समाचार कहना हो रामकोरी को, तो बतादो ! इसी लिए मैं इधर से होता हुआ अब सीधा स्वर्ग जा रहा हूँ ! इब इतना सुनते ही सेठाणी जी तो रुआंसी हो गई रामकोरी को याद करके और उठकर अन्दर गई ! तिजोरी में से जेवर का डिब्बा निकाला और लाकर ताऊ के हाथ म्ह दे दिया और बोली - ये डिब्बा रामकोरी को दे देना और उसको कहना की ये कम पड़ते हों तो आपके द्वारा समाचार भेज देगी मैं नए डिजाईन के और गहने बनवा कर भेज दूंगी ! इब ताऊ तो जल्दी से जेवर का डिब्बा लेकै रवाना हो लिया !
ताऊ कै जानै कै थोड़ी देर बाद ही सेठ जी घर आ गए ! उनके आते ही सेठाणी जी ने रोते २ रामकोरी का हाल सुणाया और हाल सुणते ही सेठ जी के तो होश ऊडगे ! अरे सत्यानाशी ताऊ ! तू मेरे ही पीछे क्यूँ पड्या सै ? मन्नै ही तेरा के बिगाड़ राख्या सै ? और सेठ जी तुंरत अपनी घोडी लेकर उस पर बैठ कर ताऊ का पीछा करण लाग गे ! थोड़ी दूर आगे जाने पर ताऊ भागता दिखाई दे गया और सेठ जी नै घोडी और तेज दौडा दी ! ताऊ नै मुड कर देख्या की इब सेठ पकड़ लेगा तो वो वहीं पर एक पेड़ पर चढ़ कर बैठ गया ! इतनी देर म्ह सेठ आगया ! सेठ जी आते ही नाराज होके बोले - ताऊ तूने सेठाणी को तो बेवकूफ बना दिया पर मैं तुझे छोड़ने वाला नही हूँ ! ला जेवर मुझे दे दे ! इब ताऊ बोला - देखो सेठ फालतू बात तो करणा नही ! मैंने ना तो चोरी की है और ना ही डकैती डाली है ! सेठाणी नै राजी मर्जी से गहने दिए हैं ! तेरे को नही भेजने अपनी लड़की के पास तो ऊपर आके लेले ! मैं तो थक गया हूँ यहीं पेड़ पर आराम करूंगा ! अब सेठ क्या करता ! घोडी को पेड़ से बाँध कै कैसे जैसे पेड़ पर चढण लाग ग्या ! और जैसे ही ऊपर पहुंचा ताऊ पेड़ पर से कूद गया ! और सेठ की घोडी पै बैठ के भाग लिया !
इब सेठ नै सोची की यो ताऊ तो घणा ही लफंगा उत सै ! अब गहने तो ये ले गया सो ले ही गया और अब तो घोडी भी ले उड़ा ! अगर किसी को बताएँगे तो अपनी भी बदनामी होगी और सेठाणी की भी बदनामी होगी की कैसी बेवकूफ औरत सै ? और इससे तो अच्छा है की कुछ पुण्य ही कमा लिया जाए ! सो वो जोर से बोला - अरे ताऊ , रामकोरी को कहणा की गहने तो उसकी माँ ने भेजे है और ये घोडी उसके घूमने के लिए मैंने भेजी है !




21 comments:
Saturday, November 01, 2008 12:47:00 AM
ताऊ यार, आज इस घटना पर व्यक्तव्य देने का मन नहीं है, कल अपने गृहमंत्रालय से एक प्रेसनोट जारी करवा दूँगा
Saturday, November 01, 2008 1:16:00 AM
ताऊ नहीं सुधरने वाला... किसी दिन बुरा फंसेगा भाई !
Saturday, November 01, 2008 1:59:00 AM
रे ताऊ तो घण ऊत शे भाई,लेकिन मजा आ गया सेठ ने भी कोन से मेहनत से कमाये थे, चल ताऊ अब ऎश कर, वेसे खाना तो मिलेगा बना बनाया चाहे बाहर खा चाहे अन्दर जा के खाईयो....
राम राम जी की
Saturday, November 01, 2008 7:09:00 AM
लगता है आजकल ताऊ ठगी में एक्सपर्ट हो लिया है लेकिन ताऊ सौ सुनार की एक लुहार की जिस दिन सेठ के धक्के चढ़ गए वो सारी ठगी वसूल लेगा |
Saturday, November 01, 2008 8:52:00 AM
ताऊ इस जमाने में घोड़ी वाला सेठ कहाँ? किस प्रदेश में मिल गया?
वैसे धंधा बुरा नहीं है बस रेगुलर न हो कर कैजुअल है।
Saturday, November 01, 2008 9:11:00 AM
यह किस्सा तो गज़ब का है.
Saturday, November 01, 2008 10:16:00 AM
बस; ऐसे सेठ-सेठानी और ऐसे ताऊ हो जायें दुनियां में तो समाजवाद फटाक से आ जायेगा! :D
Saturday, November 01, 2008 11:52:00 AM
सेठाणी नै ये जरुर समझ लिया की यो ताऊ घणा ही शरीफ माणस सै क्यूँकी सबतैं घणा अफसोस परगट ताऊ नै ही करया था ! यानी ताऊ सेठाणी जी की नजर म्ह भला आदमी बन गया था
अरे ताऊ , रामकोरी को कहणा की गहने तो उसकी माँ ने भेजे है और ये घोडी उसके घूमने के लिए मैंने भेजी है !
" ha ha ha ha ha ha hahahah, lggta hai desh kee arthik situation prr bat krtey krtey or naseeht daite daite tau jee arthik mandee ko jhel nahe paye or fir se thgee pr hee aa gyee.....ab in gehno se kyee din tk kaam chul jayega or vo ghodee age daka dalne mey kaam ayege hai na..."
Regards
Saturday, November 01, 2008 12:32:00 PM
ये ताऊ तो बडा चालबाज निकला। भइये, आप होशियार रहना, वर्ना आप भी लपेटे में आ जाओगे।
Saturday, November 01, 2008 12:55:00 PM
ताऊ आप सेठ और सेठानी को ठग लो कोई बात नही ! पर अब हम ब्लागरो को ठगने के पीछे क्यूँ पड़े हो ? आप अपने ब्लॉग के दाहिनी तरफ़ पेड़ पर भूतनी का डांस दिखा रहे हो ! एक घंटा हो गया देखते देखते ! कुछ भी नही दिख रहा ! आपका क्या इरादा है ? हम तो उल्लू बन कर पेड़ की तरफ़ देखते रहे और आप हमारी जेब खाली कर दो ! ये कोई नई टेक्निक है क्या ठगी की ! अब कम से कम घर ( ब्लॉग पर ) बुला कर तो हमको मत लूटो !
लगता है आप, भाटिया जी, भूत नाथ जी और योगीन्द्र मोदगिल जी ने एक ठगी का गिरोह बना रखा है ? :) और लगता है आर्थिक मंदी के शिकार सबसे ज्यादा आप लोग ही हुए हो ?
Saturday, November 01, 2008 1:04:00 PM
हम नही सुधरेगे !
Saturday, November 01, 2008 1:29:00 PM
ब्लॉगर भाइओ सावधान अब ताऊ की नजर ब्लॉगर भाइयो पर है . ताऊ जी आपसे इसी उम्मीद नही थी आप तो ब्लागरो के ताऊ है.
Saturday, November 01, 2008 3:10:00 PM
ताऊ, आज तो मैंने आपकी ठग-गाथा हरियाणवी टोन में अपने परिवार में बॉचकर सुनाई, लोग हॅस-हॅसकर पागल हो गए। आपकी पिछली ठगी का किस्सा भी सुनाया। सब आपके किस्सागोई के कायल हो गए।
Saturday, November 01, 2008 5:27:00 PM
ताऊ, किसी दिन बुरा फसोगे ये दोस्तों की सलाह मानते मानते. :)
अब अगला नम्बर किसको ठगने का इरादा है???
Sunday, November 02, 2008 12:30:00 AM
दीवाली के बाद इस तरह खुलेआम परचार के बाद ठगे गये तो हम ताऊ न हो जायेंगे...अब थोड़ा सोचे ताऊ.... कर भला तो हो भला.
Sunday, November 02, 2008 1:07:00 PM
डा. अरविन्द मिश्रा जी नै सलाह दे डाली की " धंधा -जमाये रहो इसी को अब !" तो ताऊ क्यों सलाह को मानने के लिए बाध्य हो गया ! तो फिर जमाये रहो धंधे को ताऊ जी .
Sunday, November 02, 2008 1:11:00 PM
डा. अरविन्द मिश्रा जी नै सलाह दे डाली की " धंधा -जमाये रहो इसी को अब !" तो ताऊ क्यों सलाह को मानने के लिए बाध्य हो गया ! तो फिर जमाये रहो धंधे को ताऊ जी .
Sunday, November 02, 2008 1:39:00 PM
ये बड़ा शाणा है अपना ताऊ भी !
Sunday, November 02, 2008 4:25:00 PM
आज के ताऊ !!!!!!!
क्या पाऊं , क्या खाऊं?
Sunday, November 02, 2008 5:00:00 PM
ये ताऊ नही सुधरने वाला।
Sunday, November 02, 2008 5:43:00 PM
ताऊ जी राम राम
ये क्या कर रहे हो आप।
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