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अरे छोरे, सीधी तरिया बता - तेरा बापू कित गया सै ?

namkiin ka thela मक्के के भुट्टे का सीजन खत्म हो गया ! सो ताऊ ने आज कल चोरी डकैती छोड़ कर नमकीन, चना मूंगफली  बेचने का ठेला लगा लिया ! ताऊ ने अपने जीवन में हद दर्जे की कोशीश की शराफत से रहने की , पर नही रह पाया !  अब आप जानते ही हो की ताऊ को धंधा करने की कुछ अक्ल तो है नही ! सो जब तक उधार मिला यह धंधा चला !

और इसी समय भाई योगीन्द्र मोदगिल और भाटिया साहब ने ताऊ को जगाधरी पव्वे का शौकीन बना दिया ! अब कुछ दिन बाद ताऊ का ठेला भी बिक गया और ताऊ फ़िर रोड का रोड पर आगया ! पर इस दौरान ताऊ को  इन दोनों दोस्तों ने पव्वे का चस्का बुरी तरह लगा दिया था !

 

कुछ दिन तो शरमा शरमी में दोस्ती के नाते ताऊ को  दोनों दोस्तों ने अपने साथ ही रोज  पिलवाई  ! पर दोस्ती की भी सीमा होती है ! ताऊ के दोनों अजीज मित्र भी किनारा  कर गए ! और ताऊ को पव्वा चाहिए रोज ! जब ताऊ ने योगीन्द्र मौदगिल जी को ज्यादा परेशान करना शुरू किया तो अपना पीछा छुडाने के लिए कवि महाराज ने ताऊ को ऐसी सलाह दे डाली की बिचारे पुजारी जी का जीना हराम हो गया ! कवि महाराज की  उन पुजारी जी से पुरानी  दुश्मनी थी !  सो  ताऊ को ये सलाह   दे कर उनका जीना हराम कर दिया ! इधर ताऊ से छुटकारा और उधर पुजारी जी से हिसाब बराबर ! 

 

कवि जी के सिखाये मुताबिक ताऊ मन्दिर पहुँच गया और ताऊ को आते देखा वैसे ही पुजारी जी  डर के मारे शिवजी की बड़ी सी मूर्ति के पीछे छुप गए  !  वहाँ पहुँच के ताऊ बोला - अरे ओ शिवजी महाराज, मन्नै पव्वै के पिस्से चाहिए तेरे धोरै ! नही तो तेरे को दो लट्ठ मारूंगा और तेरी मूर्ति तोड़ दूंगा ! ये सुन कर बिचारे पुजारी जी घबराए और मूर्ति के पीछे से हाथ बढ़ा कर पव्वे के रुपये ताऊ को पकडा दिए ! ताऊ तो खुश की शिवजी ने पव्वे के रुपये दे दिए ! उधर कवि महाराज खुश की एक तीर से दो शिकार ! ताऊ से भी पीछा छूटा और पुजारी जी से भी बदला निकल रहा है !

 

अब ताऊ का ये रोज का काम हो गया ! उधर बेचारे पुजारी जी परेशान ! कहाँ से रोज पव्वे के रुपये देवे ? खैर साहब , एक दिन पुजारी जी ने शिवजी की मूर्ति  की जगह गणेश जी की मूर्ति रख दी ! और सोचा की ताऊ रुपये तो शिव जी से मांगता है ! गणेश जी से तो माँगने से रहा ! तो अब ताऊ से पीछा छुट जायेगा ! पर ताऊ से पीछा छुडाना इतना आसान काम थोड़ी ही सै ? वो काम भी कोई कवि महाराज जैसा हरयाणवी ही कर सके सै !

 

अब ताऊ जैसे ही मन्दिर में आया और सामने गणेश जी को देखा तो उसका माथा ठनक  गया ! और सोचण लाग गया की यो शिव जी कित चल्या गया ?  और थोड़ी देर तो देखता और सोचता रहा ! फ़िर गणेश जी के कान उमेठता हुआ बोला - क्यो रे छोरे ? घणी देर हो गी सै तेरे बापू का इंतजार करते करते मन्नै , सीधी तरिया बता - तेरा बापू कित गया सै ? उसतैं मन्नै पव्वै के पिस्से चाहिए ! वो नही सै तो इब तू निकाल ! मैं इब और ज्यादा इन्तजार नही कर सकदा ! मेरा टेम हो लिया सै खीन्चण का !

23 comments:

  1. अद्वितीय एवं आँखें खोल देने वाली पोस्ट !
    जितनी तारीफ़ करें, कम ही होगी..
    ताऊ जैसा कोई नहीं !

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  2. बेचारे भगवान को भी नहीं बक्शा ताऊ ने !
    आपको व आपके परिवार को दीपावली पर हार्दिक शुभ कामनाएं ।
    घुघूती बासूती

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  3. वाह भाई ताऊ, इस गणेश जी के भी कान मोड दिये, लगता है गणेश जी का एक दन्त भी आप ने ही तोडा है, चलो अच्छा अब यह तो बताओ पेसे मिले की नही पोवे के.
    घनन मजा आ गया.
    राम राम जी की.
    दिपावली की शुभकामनाये भी ताऊ तेने ओर तेरे बाल् बच्चो ने

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  4. सुंदर । आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

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  5. रे ताऊ, ये क्या दुर्दशा कर ली कवि महाराज और भाटिया जी संगत करके. पहले ही मना किया था तब नहीं माना अब मंदिर के चक्कर काट. पिता जी तो आ जायेंगे गणेश जी के मगर तेरा कब तक काम चलेगा ऐसे.

    खैर, टैम रहते ठीक हो ले नी तो ताई भी ढ़ूंढ़ ही रही है तेने वो ही भाटिया जी वाला जर्मन लट्ठ लेके.

    दीपावली भी आ ली है...

    आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

    समीर लाल
    http://udantashtari.blogspot.com/

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  6. लगता है अभी पुजारी जी ताई के पास शिकायत लेकर नहीं पहुंचे हैं. चलिए वे जब आयेंगे तब हेलमेट पहन लेना. अभी तो दीवाली की शुभकामनाएं स्वीकार करें - ईश्वर सब शुभ करे और आपको समृद्धि दे!

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  7. अच्छा विनोद है।
    दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  8. ताऊ गावं के बाहर एक बाबा की धुनी थी बाबा गावं के लड़कों को चिलम पिलाया करता था,उनमे एक लड़के का जीवा था जो रोज बाबा की गांजे वाली चिलम का मजा लिए करे था और उसकी चिलम पीने आदत भी पड़ गई थी | एक दिन जेसे ही जीवा बाबा के पास गांजे वाली चिलम पीने गया बाबा की कुटिया अंदर से बंद थी सो जीवा ने बाबा को आवाज लगायी ,
    बाबा ने अन्दर से पूछा कौन ,जबाब मिला बाबा जीवो
    बाबा बोला , बेटा अब घर में घोटो और घर पर ही पीवो |
    लगता है कवि महाराज व भाटिया ने भी आपके साथ यही किया | लेकिन यह तो अच्छा किया कि तरकीब तो बता दी |

    दिवाली की शुभकामनाये |

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  9. सीधी तरिया बता - तेरा बापू कित गया सै ? उसतैं मन्नै पव्वै के पिस्से चाहिए ! वो नही सै तो इब तू निकाल ! मैं इब और ज्यादा इन्तजार नही कर सकदा ! मेरा टेम हो लिया सै खीन्चण का !
    ha ha ha ha ha ha ... humne to socha tha taujee gnaesh jee se khenge...." chotu papa (shanker jee) se kehna tau aaya tha... "

    Regards

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  10. अरे भाई दिवाली के दिन ऐसा गजब मत करियेगा... बेचारे हर जगह पूजे जाते हैं, वैसे ही बड़ा व्यस्त शेड्यूल होता है उस दिन का... कम से कम उस दिन तो छोड़ देना :-)

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  11. भगवान के साथ जो इस तरह संवाद कर सके, वह या तो सुपर लण्ठ होगा या सुपर संत। ताऊ सुपर संत प्रतीत होता है।
    ताउयै नम:!

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  12. भैंस की दूध छोड़कर ये क्या पीण लाग गए ताऊ।
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  13. ताऊ को वास्तव में कोई जवाब नहीं है भई।
    दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  14. अरे वाह ताऊ जी को ये क्या हुआ। बहुत खूब।
    फ़िर गणेश जी के कान उमेठता हुआ बोला - क्यो रे छोरे ? घणी देर हो गी सै तेरे बापू का इंतजार करते करते मन्नै , सीधी तरिया बता - तेरा बापू कित गया सै ? उसतैं मन्नै पव्वै के पिस्से चाहिए ! वो नही सै तो इब तू निकाल ! मैं इब और ज्यादा इन्तजार नही कर सकदा ! मेरा टेम हो लिया सै खीन्चण का !

    दीपावली की ढ़ेरो शुभकामनाएं।

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  15. ताऊ !
    दीपावली की शुभकामनाएं स्वीकार करें !

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  16. वाह वाह ताऊ जी, क्या बात है !

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  17. आपको तथा आपके परिवार को दीपोत्सव की ढ़ेरों शुभकामनाएं। सब जने सुखी, स्वस्थ, प्रसन्न रहें। यही मंगलकामना है।

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  18. आज कुछ नही ताऊ ....आज आपको व् परिवार के सभी सदस्यों को दीपावली की शुभकामनाये

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  19. ****** परिजनों व सभी इष्ट-मित्रों समेत आपको प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्‍मी से प्रार्थना होनी चाहिए कि हिन्‍दी पर भी कुछ कृपा करें.. इसकी गुलामी दूर हो.. यह स्‍वाधीन बने, सश‍क्‍त बने.. तब शायद हिन्‍दी चिट्ठे भी आय का माध्‍यम बन सकें.. :) ******

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  20. आपको भी दीपावली पर हार्दिक शुभ कामनाएँ।
    यह दीपावली आप के परिवार के लिए सर्वांग समृद्धि लाए। - शम्भु चौधरी

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  21. बहुत खूब। बहुत अच्छा लगा। ये मौदगिल जी मेरे को भी कई बार पव्वा पिला चुके हैं। पर दिक्कत यह है कि हमारे पास हरियाणवी लट्ठ नहीं है। सो हम भगवान शंकर एंड संस से वसूली भी नहीं कर सकते।

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