ताऊ उवाच :-:


विजेट आपके ब्लॉग पर

कृपया कोई जानकार मेरी मदद करिए !

माननीय ब्लॉगर बंधुओं ,

मेरे ब्लॉग का "font & colours " शायद deactivated हो गया है !

मैं पिछले एक महीने से इसमे कोई बदलाव नही कर पा रहा हूँ !

मैं आपसे निवेदन करता हूँ की कोई जानकार मेरी मदद करिए !

धन्यवाद !

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25 comments:

  अनुराग

Wednesday, September 03, 2008 8:08:00 PM

पहली बात तो आप अपना टेम्पलेट बदल ले.....उसी से सारी समस्या हल हो जायेगी

  ताऊ रामपुरिया

Wednesday, September 03, 2008 8:30:00 PM

डाक्टर साहब धन्यवाद ! दो तीन टेमप्लेट बदल लिए ! मर्ज वैसा का वैसा ही है ! :)
कोई तगड़ा डोज बताइये !

  manvinder bhimber

Wednesday, September 03, 2008 8:40:00 PM

logo ki salah maane.....sab theek ho jaaega

  सतीश सक्सेना

Wednesday, September 03, 2008 8:49:00 PM

ताऊ !
1. go to layout at desh board
2.click font and colour
3.change colour as you wish
rgd

  रचना

Wednesday, September 03, 2008 8:53:00 PM

please go to
dashboard
layout
edit html
and below your will find
Revert to Classic Template
click that and hopefully it should solve the problem

  ताऊ रामपुरिया

Wednesday, September 03, 2008 10:05:00 PM

@ रचना जी सलाह देने के लिए धन्यवाद !
आपके बताये अनुसार भी कर के देख लिया !
टेम्पलेट बदल जाता है ! पर जैसे ही फॉण्ट &
कलर्स
पर जाते हैं ! विंडो ओपन होती है ! पर वहा कुछ करने नही देता ! और निचे स्टेटस
बार
पर एरर आन पेज लिखा आता है !
please और कोई उपाय हो तो बताइये !
धन्यवाद !

  योगेन्द्र मौदगिल

Wednesday, September 03, 2008 10:43:00 PM

ताऊ,
सबकी छोड़ कै मेरी मानियो..
1. अरविन्द मिश्रा जी के ब्लाग पर लवली जी मिलेंगी
उन्हें कम्प्यूटर का बहुत ग्यान है.
उनसे इमेल करके पूछ लो.
2. मेरा ब्लाग जब बिगड़ गया था तो मैंने इसका इलाज कविता वाचक्नवी जी से कराया था
मेरे ब्लाग पर साइडबार में सहयोग के अन्तर्गत मेरे अन्य ब्लागों को छोड़ जो नाम है वे सारे ब्लाग उन्हीं के हैं. उनसे पूछ लो.

शेष आपकी इच्छा..

एक इलाज और बी सै..
जरमनी वाला लट्ठ कम्प्यूटर पै सात बेर वार कै
घर के चौंतरे पै तेल का दीवा बाल कै धर दियै.
फेर मूंग की दाल मैं भीमसेनी काजल का छोंक लगा कै भोग लगा दियै. अर फेर ताई नै साथ लेकै साढ़े नौ परिक्रमा कर लियो.
मेरे हिसाब तै apneaap ठीक होजेगा.
इसतै फालतू मैं इलाज बताऊं बी कोनी.
सारी उतरजेगी....
उरै आसपास कोई तिवारी साहब भी कोनी रहता...

  दीपक "तिवारी साहब"

Wednesday, September 03, 2008 11:09:00 PM

बंधू मौदगिल साहब ! हम इस दुःख की घडी
में ताऊ के साथ हैं ! पर आप जानते हो की
तिवारी साहब तो ताऊ से ज्यादा पैदल हैं !
और हमारा आज का कोटा हो चुका है पर
आपके नाम से एक अभी और लगायेंगे !
ताऊ तो नाम का ताऊ है ! ताई के डर के मारे
ये भी हमारा साथ नही देता ! हमको अकेले ही
आज बैठना पड़ रहा है ! ताऊ का कटोरा आज भी
भर गया नोटों से ! हम आजकल ताऊ से आधी
रकम कटोरे की फीस के रूप में लेते हैं !
इस वक्त आपका समाचार आना बड़ा आनंदित कर
गया ! पन्डताइअन भी आज कल मायके गई है !
सो मौजा ही मौजा है भाई !

  Anonymous

Wednesday, September 03, 2008 11:12:00 PM

if you are using internet explorer then please first clear all cache and for this you need to go on the tools at the top of the page
clear all cache , all history and temeporary files of the internet then re doit and i am sure you will be able to do it
also
if you have firefox then please open your site in firefox and do the changes i think you willl not face any problmes there
in internet explorer cache and temporary internet files creat a big problem
hope it helps
rachna

  दीपक "तिवारी साहब"

Wednesday, September 03, 2008 11:33:00 PM

ताऊ एक काम कर ! जो तेरे पास बोलने वाली भैंस है ना ! उसका एक कटोरा गोबर ले के तेरे लेपटोप पर लीप दे ! और सुखाने के लिए रख दे ! बस सुखाते ही सारी समस्या हल हो जायेगी !:) और तिवारी जी को साथ रखोगे तो ये ही होगा ! तिवारी जी ख़ुद कहते हैं की उनमे छुट भलाई सब गुण है ! तो अब भुगतो तिवारी साहब को ! ये सब उनका ही किया धरा है ! :)

  राज भाटिय़ा

Thursday, September 04, 2008 12:06:00 AM

ताऊ मेरे साथ भी एक बार ऎसा हुआ था, एक दो दिनो बाद भेसं देवी के आशिर्वाद से अपने आप ठीक हो गया था. अब तो दो ही रास्ते हे, पहला पता नही, दुसरा मुझे आता नही,
पर ताउकई बार अनाडी आदमी का भी दिमाग काम मे आ जाता हे, देखो कही आप ने कही HTML code वाला ही बटन ना दवा के भुल गये हो,जेसे कभी समान तो हमारे हाथ मे ही होता हे ओर उसे ढ्ढ्ते घर के सारे लोग हे ओर पीट जाता हे जो हाथ मे आ जाये,
ताऊ सब से पहले new post पर जा कर तो देख कही आप HTML दवा कर भुल गये हो???
पर एक बात तो हे ताई खुश होगी , कि यह नाश पिटा खराब हो जाये तो ताऊ फ़िर से हमारा हो जाये गा,
धन्यवाद, घबराओ नही इस का इलाज जल्द ही ढुढते हे.

  राज भाटिय़ा

Thursday, September 04, 2008 12:09:00 AM

ताऊ ,योगेन्द्र मौदगिल ओर दीपक "तिवारी साहब जी" की बात मे भी दम हे

  ताऊ रामपुरिया

Thursday, September 04, 2008 12:18:00 AM

धन्यवाद भाटिया साहब ! यह भी करके देख लिया ! इब देखो कोई समझदार ही किम्मै इलाज बतावैगा ! अनाडी पनै के सारे करतब कर चुका ! इब तो सोते हैं ! कल देखेंगे ! तिवारी महाराज यहाँ बैठे बैठे जान खा रहे थे ! अभी उठ कर गए है ! उनकी पन्डताइन आज कल मायके गई है ! सो कुछ ज्यादा ही आजाद घूम रहे हैं ! क्या करे ? :)

  Tarun

Thursday, September 04, 2008 1:53:00 AM

कही ऐसा तो नही Pop out करके ताऊ किसी और को out करने के चक्कर में भूल गये हों और वो छोटी विंडो खुली रह गयी हो, अगर ऐसा किया होगा तो show pallete करके लिंक दिखना चाहिये। उसे क्लिक कर देखें।

ऊपर बताये उपाय काम नही करे तो ताऊ एक काम करें, Font & Color पर जाकर उसका एक स्क्रीन shot अपने ब्लोग पर दिखा दें, उससे case समझने में मदद मिलेगी कि हड्डी वास्तव में कहाँ टूटी है और क्या ईलाज संभव हैं।

साथ ही ये भी देखें - रचना वाला उपाय करने में जो नीचे Error आता है, उस Error पर डबल क्लिक करके देखें। वो बतायेगा क्या Error है।

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Thursday, September 04, 2008 6:37:00 AM

ताऊ,
मेरी नज़र में ब्लॉगर की सारी ऑप्शन्स जावास्क्रिप्ट का इस्तेमाल करती हैं. अगर किसी तरह से आपने या आपके किसी सिकुरिटी प्रोग्राम ने आपके ब्राउजर में जावास्क्रिप्ट/एक्टिव-स्क्रिप्ट को दिसबले किया है तब भी ऐसा हो सकता है. अगर आप इन्टरनेट एक्स्प्लोरर वापरते हैं तो ऐसे करिए:
tools -> internet options -> security टैब -> custom level बटन ->
एक लिस्ट जैसी दीखेगी. स्क्रॉल करते जाइये जब तक की आपको scripting और उसके अन्दर
active scripting की आप्शन न मिले.
अगर disable चुना गया है तो enable को चुन लें और ओके करते हुए बाहर आ जाएँ, ब्राउजर बंद करके फ़िर खोलें और अल्लाह के करम से सब ठीक होगा. (I have IE 7 - other versions may have slight difference in sequence)

दूसरा alternative हल यह हो सकता है की इन्टरनेट एक्स्प्लोरर को मारें गोली. नया क्रोम डाउनलोड करें और उसमें ही ब्लॉग लिखा करें: http://www.google.com/chrome


Third (best) option: शुभ कामनाएं! मुझे अपना फ़ोन नम्बर ईमेल करें तो मैं फोन पर सहायता कर सकता हूँ. फोन पर ही आपके चरण पखार लेंगे!

  Smart Indian - स्मार्ट इंडियन

Thursday, September 04, 2008 7:03:00 AM

Please ignore my earlier advice about Google Chrome. I tested it and did not find very useful.

  फ़न्डेबाज

Thursday, September 04, 2008 7:54:00 AM

ताऊ नु कर ! ताई के हाथ से जर्मन लट्ठ ले और
राज भाटिया जी के नाम की एक माला का जप
कर ! उसके बाद तेरे कंप्यूटर पर वो लट्ठ घुमा
कर उस पर ३ लट्ठ मार दे ! अगर कोई भी समस्या रह जाए तो मेरे को बताना ! ये इतना बड़ा उपाय बता दिया है ! इस उपाय के बाद ना रहेगा बांस और ना बजेगी बाँसुरी ! कैसी रही ? जवाब जरुर देना !

  Udan Tashtari

Thursday, September 04, 2008 8:13:00 AM

५ दिन की लास वेगस और ग्रेन्ड केनियन की यात्रा के बाद आज ब्लॉगजगत में लौटा हूँ. कल से नियमिल लेखन पठन का प्रयास करुँगा. सादर अभिवादन.

  ताऊ रामपुरिया

Thursday, September 04, 2008 9:31:00 AM

भाई तरुण जी एवं मित्र पित्सबर्गिया जी
आपके पर्चे के अनुसार भी दवा दारू करवा
के देखता हूँ ! मरीज को कितना फायदा होता है ? यह बताता हूँ !
इसमे एक और समस्या भी रहती है की नई पोस्ट के समय अक्षर बोल्ड
और कलर करने में भी एच.टी.एम्.एल एरर लिखता है ! मुझे पोस्ट लिखने में आधा घंटा और पब्लिश करने में
तीन घंटे लगते हैं ! और अब सोच रहा हू की लिखना छोड़ कर आप लोगो का लिखा पढ़ता रहूं और टिपणी सुख का मजा लेता रहूँ ! पिछले एक महीने से इसमे बहुत समय बरबाद हो रहा है ! मैं वापस आपको सम्पर्क करता हूँ आप दोनों का धन्यवाद !

  seema gupta

Thursday, September 04, 2008 12:35:00 PM

Sir, pls ek baar or try kejeyega, ye link diya hai isko open krke Mozilla firefox software download kejeye, or fir usme apna gmail account or blog open kejey. yhan pr blog open krke aap font and colour change kr sekteyn hain. pls dont ignore it, it will work i am sure abt it. or ager ho jaye to pls muje btayega.
LInk:
http://www.download.com/mozilla-firefox/?tag=mncol&cdlPid=10865521

regards

  विक्रांत बेशर्मा

Thursday, September 04, 2008 7:08:00 PM

ताऊ जी , आप अपना नम्बर ईमेल करिए ,मैं कोशिश करूँगा की आपका एक्स्प्लोरर फिर से ठीक हो जाए
.

  poemsnpuja

Thursday, September 04, 2008 8:09:00 PM

colour aur font me kya rakha hai...baat to aapki kahani aur kahne ke andaj me hai.
goli maariye font ko aur ek acchi si post daaliye,ham bhi aapki kahani miss kar rahe hain

  डा. अमर कुमार

Thursday, September 04, 2008 8:13:00 PM

.

ऒऎ ताऊ, ये ताऊगिरी छोड़,
तूने माहौल तो घणा अच्छा बना लिया...
शायद साबत करणा चाहवे कि देख बिना सूत कपास के भी कमेन्ट मिला करते । ते भाई ताऊ , तैने कामयाबी मिल गयी । इब सिद्धा हो भी जा, और एक फड़फड़ाती पोस्ट लिख लै ।
बाबू से बोल दे एकाध लट्ठ मार देवें, तेरे को.. दमाग खुल जावेगी ।
तू पक्का लट्ठखोर लाग्यै मेरे को ..

  अशोक पाण्डेय

Thursday, September 04, 2008 8:41:00 PM

ताऊ, क्‍या कह रहे हो आप.. आप लिखना छोड़ देंगे तो सारा मजा ही किरकिरा हो जाएगा..

मुझे लगता है कि एचटीएमएल में ही कुछ कर के यह गडबडी दूर की जा सकती है.. आप लवली कुमारी से ही कुछ परामर्श लीजिए, एचटीएमएल वे अच्‍छा पढाती हैं..

सच कहते हैं भाई आप को परेशानी में देखकर हमें बहुत दुख हो रहा है.. आप लवली से संपर्क कीजिए, जरूर कुछ सामधान निकल आएगा.. उनका लिंक आपको हमारे ब्‍लॉग पर भी मिल जाएगा।

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