खबरदार ....श्श्स..... शश........ ये जिन्नातों का ठिकाना है ! आप आज तक नही मिले होंगे ! लेकिन हम भी आपकी तरह ही हैं ! डरिये नही ! आप में हम में फर्क सिर्फ़ इतना है की आपके पास शरीर है और हमारे पास नही है ! यहाँ पर आपको मैं भुत, प्रेत, चुडैल, जिन्, जिन्नात, ब्रह्म राक्षस आदि सभी से मिलवाउंगा ! आप डरना बिल्कुल भी नही !
और यहाँ हमारा एक पूरा संसार है ! मैं इन सब मेरे मित्रों सेबात कर रहा हूँ की वो अपने ख़ुद के बारे में आपको बताएं ! आप यकीन रखिये , डरें नहीं , आप चाहे तो टिपणी भी कर सकते हैं और अपनी पसंद नापसंद बता सकते हैं !
मैं ख़ुद एक ब्रह्म राक्षस हूँ ! मेरे बारे में आप सिर्फ़ इतना जान लीजिये की मैं कभी किसी इंसान को नुक्सान नही पहुंचाता बल्कि जितनी हो सके उतनी इंसानों की मदद मैंने की है ! ये अलग बात है की इंसानों ने हमको कभी मरा हुआ इंसान समझ कर भी इज्जत देने की कोशीश नही की! बल्कि हमसे डर कर और हमको सबसे दूर और अछूत करार दे दिया है ! पाखण्ड के नाम पर हमें बदनाम कर के कुछ लोगों ने अपना उल्लू सीधा किया और भोली भाली जनता को अंध विश्वासों में पटक कर खूब माल बनाया !
आप सच में हमसे हम दर्दी रखते हैं तो आइये , आपभी हमारे बारे में जानिए और अपनी जिज्ञासा शांत कीजिये , और अपना डर निकालिए ! याद रखिये अगर आपने किसी आत्मा को प्रशन्न कर लिया तो वो आत्मा आपको प्रशन्न कर देगी ! अगर आपने कोई बद तमीजी की तो आत्मा आपके पास नही आयेगी ! पर आपको नुक्सान कतई नही पहुंचायेगी !
आप शांत चित होकर यहाँ पर हमारे बारे में पढ़े , और अगर आप डरते हों तो कृपया यहाँ ना आए ! वैसे बतादू की जिंदा आदमी हम मरे हुए आदमियों से ज्यादा ही खतरनाक होता है ! फ़िर आप भूत -प्रेत के नाम पर हम मुर्दा आदमियों से क्यों डरते हैं !
यकीन मानो भाई हम भी मानव या जो भी मिल जाए वो शरीर ढुन्ढ रहे हैं ! जैसे ही मिल जायेगा , हम भी सशरीर हो कर आप लोगो के बीच आ जायेंगे ! मैं आशा करता हूँ की आप हम से नही डरेंगे और हमें भी बराबरी का दर्जा देते हुए ही आपकी दुनिया में रहने देंगे ! आप हमसे कैसा व्यवहार करते हैं वो तो आपके कमेंट्स ही बताएँगे !
मैं आपको फ़िर यकीन दिलाता हूँ की हम आपके मददगार ही होंगे ! आप डरें नही ! और बेफिक्र होकर कमेन्ट करे ! आप अगर चाहते हैं की आप हमारी दुनिया के बारे में जाने तो हमको प्रोत्साहित कीजियेगा ! और अगर आपको हम अच्छे नही लग रहे हैं जैसी की संभावना भी है और होता भी आया है ! तो कृपया अपनी बेधड़क राय यहाँ व्यक्त कीजिये ! हम यह जगह खाली कर देंगे ! वैसे यह हमारा भविष्य का प्लान है की जो भी ब्लॉगर मरता जायेगा उसके लिए हम यह ब्लागिंग का प्लेटफार्म तैयार रखे , क्योंकि जो आदमी एक बार ब्लागरी कर चुका वो मरने के बाद कितना तकलीफ पायेगा ? यदि उसे ब्लागिंग का सामान नही मिलेगा !
अत: भविष्य में यहाँ हमारी दुनिया में आने वाले ब्लागरों की सुविधा के लिहाज से हमने यह ब्लॉग शुरू करने का निरणय लिया है! अब आप जान ही गए होंगे की हम यह सिर्फ़ और सिर्फ़ आपकी भलाई और सुविधा की द्रष्टि से कर रहे हैं ! चूंकी मरने के बाद निचे से कुछ भी सामान लाना मना है ! सो हमारी भुत मंडली के लोग पता नही कहाँ से ४ कंप्यूटर उठा लाये थे ! और चूंकी मैं सबसे आधुनिक मरा हुआ भूत हूँ सो मुझे अपने जिंदा शरीरके समय का ज्ञान है ! अत: मैं यहाँ इन भूत प्रेतों का चहेता हूँ और इनको कंप्यूटर सिखा रहा हूँ ! अगर आप में से किसी का कंप्यूटर गायब हो तो बता देना वह आपको वापस करवा देंगे ! क्योंकि ४ कंप्यूटर ये हमारे छोटे भूत आप में से ही किसी के उठा लाये हैं ! और आप चाहो तो आप जब यहाँ आयेंगे तब केलिए रिजर्व रख देंगे !
दोस्तों मरना सबको है अगर मरने के बाद भी ब्लागिंग करनी है तो हमें बताइये और अगर हमारी बात नही जमी तो भी बताइये जिससे हम यहाँ से रवाना हों ! मैं आपको बताऊँ की मुझे भी जिंदा रहते ब्लागरी का चस्का लग गया था ! मरने के बाद बहुत परेशान रहा ! मैंने खाना पीना छोड़ दिया था ! पर यहाँ इस दुनिया में कौन किसकी सुनता है ? और ब्लागरी का नशा आप से बेहतर कौन समझ सकता है ?
मैं यहाँ महीनो भूख हड़ताल पर रहा तब इन लोगो ने मेरी सुध ली और आज मैं ये पहली पोस्ट लिख रहा हूँ ! आज महीनों बाद मुझे चैन आया है ! आशा करता हूँ की एक मरे हुए आदमी की पोस्ट को आपका अच्छा समर्थन मिलेगा और मैं यकीन दिलाता हूँ की आप का जब भी यहाँ आने का विचार हो मैं आपके लिए सारा ब्लागिंग का सामान तैयार रखूंगा ! आपको यहाँ कोई कमी नही होने दूंगा ! वैसे मैं यहाँ का पूरा हाल चाल आपको बताता रहूंगा ! और आशा करता हूँ की आपका भी आखिरी ठोर ठीकाना तो यहीं है तो आप इसके बारेमें जानना भी जरुरी समझेंगे !
( इतनी देर में सुबह ४ बजे का अलार्म बज गया और सारा सपना चकनाचूर हो गया ! पता नही रात को आखिरी बार किस के ब्लॉग पर था की सपने में ये भूत महाराज का ब्लॉग पढ़ने में आ गया ! पर ताऊ को भूत की बातों में कुछ सच्चाई तो दिखै सै ! भूत किम्मै झूँठ थोड़े ही बोलदा होगा ! )
ताऊ ने पढा एक भूत का ब्लॉग
Tuesday, August 26, 2008 at 10:17 PM Posted by ताऊ रामपुरिया
Labels: जिन्नात, प्रेत, ब्रह्मराक्षस, भूत
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About Me
- ताऊ रामपुरिया
- अब अपने बारे में क्या कहूँ ? मूल रुप से हरियाणा का रहने वाला हूँ ! लेखन मेरा पेशा नही है ! थोडा बहुत गाँव की भाषा में सोच लेता हूँ , कुछ पुरानी और वर्त्तमान घटनाओं को अपने आतंरिक सोच की भाषा हरयाणवी में लिखने की कोशीश करता हूँ ! वैसे जिंदगी को हल्के फुल्के अंदाज मे लेने वालों से अच्छी पटती है | गम तो यो ही बहुत हैं | हंसो और हंसाओं , यही अपना ध्येय वाक्य है | हमारे यहाँ एक पान की दूकान पर तख्ती टंगी है , जिसे हम रोज देखते हैं ! उस पर लिखा है : कृपया यहाँ ज्ञान ना बांटे , यहाँ सभी ज्ञानी हैं ! बस इसे पढ़ कर हमें अपनी औकात याद आ जाती है ! और हम अपने पायजामे में ही रहते हैं ! एवं किसी को भी हमारा अमूल्य ज्ञान प्रदान नही करते हैं ! ब्लागिंग का मेरा उद्देश्य चंद उन जिंदा दिल लोगों से संवाद का एक तरीका है जिनकी याद मात्र से रोम रोम खुशी से भर जाता है ! और ऐसे लोगो की उपस्थिति मुझे ऐसी लगती है जैसे ईश्वर ही मेरे पास चल कर आ गया हो ! आप यहाँ आए , मेरे बारे में जानकारी ली ! इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ !
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39 comments:
Tuesday, August 26, 2008 11:34:00 PM
.
ऒऎ ताऊ, क्या सच्ची में भूत दिक्खै सै, सुपणे में ?
अपणे भतीज़े को पेहेचाणा कोनी ?
भाई, अब अपणे भी ना पहचाणेंगे, तू मेरे को वाकई इंसाण ही लाग्यै, तभी तो ?
अरे ताऊ, भेद की बात है,
मैं एक साल से ब्लागर पर भटक रहा हूँ,
पाँच सुच्ची पोस्ट ले जाऊँगा तो मुक्ति मिलेगी
यहाँ तो वाह-वाह पोस्ट के अलावा कुछ दिखता ही ना,उसको भी भाई लोग जमाते..जमवाते रहते दिक्खैं | सो, वापस जा रहा था
कृष्णपक्ष की छुट्टी में...
तेरे को बताने कि ब्लागर से तो यमराज भी डरें हैं,
जो भाई सुच्चा लिखता हो, ज्ञान न पेलता हो
तेरे लिये भी सीट रोक रखी है..
आके मेरे को पूछ लेना
मोहल्ला - राहत ए रूह
गाम - भटकते ब्लागर
पिन कोड - ¿¿Ɯ ƺ ȵ
कुंभीपाक प्रदेश
नरकलोक
Tuesday, August 26, 2008 11:43:00 PM
अर ताऊ क्यूँ टाबरां न डरपावै सै ? इब ताई तैं
डर कै भूतां के सपने देखन लाग गे के ? या
बाबू और ताई कै लट्ठ म्ह ही भूत प्रेत दिखण
लाग गे ? :)
पर ताऊ बात थारी सांची सै ! मरके भी सबनै
उत ही जाना सै ! और या भी सांची सै की ये
जिन्दे माणस घणे खतरनाक होवैं सै , मरे हुए
माणस तैं ! बहुत धन्यवाद ताऊ ! थारी हँसी
मजाक मै भी एक शिक्षा छुपी सै !
Tuesday, August 26, 2008 11:59:00 PM
कित्ता ध्यान रख रहे हो आप ब्लॉग जगत का. एक चिन्ता सी लगी थी कि अगर मैं किसी और के लिए जगह बुक करवाना चाहूँ तो कर दोगे के क्या आप? :)
सटीक दिया है ताऊ!! मजा आया.
Wednesday, August 27, 2008 12:13:00 AM
अरे ताऊ मेरी तो इच्छा दिल मे ही रह गई , भाई ताऊ से मिलन की सोचथा ताऊ के घर जामेगे, ओर गोजी ओर साग के साथ बाजरे की रोटी खावेगे, ओये ताउ तु क्यो भुत बन गया , सोचा था ताऊ ने रोहतक मे बुलावे गे, ओर उस के बन्दरो का नाच लोगो ने दिखावागे , ओये ताउ कित गया तु..... इतना मे चिल्ला रहा थ तभी मेरी बीबी ने मुझे जगा दिया, ओर मेने शुकर किय की हमारा ताऊ सही सलामत हे, ताउ आज तेरी पोस्ट पढ के मेरे को तस्स्ली भी हो गई,
राम राम जी की
Wednesday, August 27, 2008 12:53:00 AM
अरे ये भूतोँ की बातेँ ले आये आप ! हमने भी देखा है एक बारी --
Wednesday, August 27, 2008 3:59:00 AM
ताऊ ना पढ़ा कर इतना समीर जी और भाटिया जी को वरना एयी होवेगा। बस बात थारी ये सच्ची है कि मर कर सबने वहीं ते जाना है। ताऊ ज्ञान बाटन का धन्यबाद।
अभी थोड़ी थोड़ी हरियाणवी आई है ताऊ।
Wednesday, August 27, 2008 5:23:00 AM
बात ब्रह्म राक्षस से शुर्रू हुई और पोस्ट स्वर्गीय हो गयी. ताई के होते हुए, भूतों की हिम्मत कैसे हो गयी आपके पास फटकने की? खैर, आपकी पोस्ट से हमें बहुत प्रेरणा मिली है अब लगता है ब्लागस्पाट हौररस्पॉट में बदलने वाला है.
Wednesday, August 27, 2008 7:08:00 AM
जिंदा आदमी हम मरे हुए आदमियों से ज्यादा ही खतरनाक होता है ! - क्या बात है ताउ.....आप जिंदा हो.....बस यही काफी है आपके बारे मे जानने के लिये...........
खतरनाक पोस्ट :)
Wednesday, August 27, 2008 8:28:00 AM
सत्य कहा आपने की "जिंदा आदमी मरे से ज्यादा खतरनाक होता है " गजब की पोस्ट है ! एक बार तो टाइटल पढ़ कर ही सुबह पहले जान निकल गई की कहीं ताऊ का राम नाम........!
जैसे तैसे कहानी एक साँस में पढने की कोशीश की , पर हिन्दी में थी और एक एक लाइन पढ़ने में मजा आ रहा था ! सो इमानदारी से बताऊँ - सबसे पहले आखिरी का पैरा पढा ! जब
देखा की ये तो ताऊ का सपना है ! फ़िर तसली हुई !
ताऊ एक बात बताऊँ ? बाबूजी और ताई से लट्ठ खा खाके आपको ये सपने आने लग गए हैं किसी मनोचिकित्सक से मिलो और इलाज करावो ! लट्ठ की मार की वजह से लगता है आपका दिमाग सटक गया है :)
पर हमेशा की तरह आनंद बहुत आया और आपने एक शाश्वत सत्य की तरफ़ ईशारा जरुर कर दिया ! और अब आपको पता चल ही गया होगा की मैंने क्यों ब्लॉग बनाने के बाद आज तक कोई पोस्ट क्यों नही डाली ! :) मैं तो रिस्क ही नही लेता ! आपको मुबारक हो ये ब्लागरी !
Wednesday, August 27, 2008 8:34:00 AM
क्या ताउजी सुबह पहले ही डरा दिया ? आपकी
लम्बी उम्र की दुआ करते हैं ! आपकी वजह से
तो इस बोझिल जिन्दगी में दौ मिनट हंस लेते
हैं ! पर आज आपने डरा दिया है और एक ईशारा
कर दिया है की अंत क्या होने वाला है ? बहुत बढिया पोस्ट ! पर ताऊ अभी पिछला किस्सा बाबूजी वाला पूरा हुआ नही और आप ये भुत कहाँ से ले आए ? पहले वाला बाबूजी वाला किस्सा तो पूरा करो !
Wednesday, August 27, 2008 8:35:00 AM
क्या ताउजी सुबह पहले ही डरा दिया ? आपकी
लम्बी उम्र की दुआ करते हैं ! आपकी वजह से
तो इस बोझिल जिन्दगी में दौ मिनट हंस लेते
हैं ! पर आज आपने डरा दिया है और एक ईशारा
कर दिया है की अंत क्या होने वाला है ? बहुत बढिया पोस्ट ! पर ताऊ अभी पिछला किस्सा बाबूजी वाला पूरा हुआ नही और आप ये भुत कहाँ से ले आए ? पहले वाला बाबूजी वाला किस्सा तो पूरा करो !
Wednesday, August 27, 2008 10:01:00 AM
बहुत अच्छे ताऊ ! अब लोगो को भूत
का डर दिखाने लग गए !
लगता है ताई को ख़बर नही है !
आज आता हूँ मैं ! आपको लट्ठ
नही खिलवाए तो हम भी तिवारी
साहब नही :)
पर ताऊ एक बात है की मजा भी आया
और हमारे चक्षु भी कुछ खुल गए !
धन्यवाद !
Wednesday, August 27, 2008 10:03:00 AM
ha ha ha interesting post to read.
Regards
Wednesday, August 27, 2008 10:03:00 AM
ha ha ha interesting post to read.
Regards
Wednesday, August 27, 2008 10:24:00 AM
अच्छा फ़न्डा लाये हो ताऊ ! हमको पसंद आया !
चलो लोगो को अब मरने की फिक्र नही रहेगी !
आपने मरने के बाद भी ब्लागरी करने का रास्ता
आख़िर निकाल ही लिया !
अब एक काम करो वहाँ कंप्यूटर और नेट कनेक्शन
देने की बुकिंग शुरू कर दो ! चाहो तो मुझसे पार्टनरशिप
करलो ! :)
Wednesday, August 27, 2008 10:24:00 AM
अच्छा फ़न्डा लाये हो ताऊ ! हमको पसंद आया !
चलो लोगो को अब मरने की फिक्र नही रहेगी !
आपने मरने के बाद भी ब्लागरी करने का रास्ता
आख़िर निकाल ही लिया !
अब एक काम करो वहाँ कंप्यूटर और नेट कनेक्शन
देने की बुकिंग शुरू कर दो ! चाहो तो मुझसे पार्टनरशिप
करलो ! :)
Wednesday, August 27, 2008 11:48:00 AM
ताऊ सब ठीक है पर भुत मे आये थे या आप सपना हो गये हो चिंटी काट कर देख लो आप जिंदा हो कि नही !! हा हा हा
अच्छी और लीक से हटकर बहुत बढिया !!
Wednesday, August 27, 2008 12:23:00 PM
डरा रहे है......मरने के बाद भी ब्लोगिंग...?
Wednesday, August 27, 2008 1:50:00 PM
ताऊ जी , एक बुकिंग हमारी भी करवा दीजिये...ब्लॉग्गिंग का चस्का लग गया है आसानी से छूटेगा नही !!!!!!
Wednesday, August 27, 2008 2:57:00 PM
आजकल के बात सै ? बिना भूत प्रेतां क
थारी बात ही पुरी ना होती ! बालक अलग
डरण लाग रे सें ! यो थारी ब्लागरी का
नशा सै की अफीम का ! भई हमनै तो बख्शो !
कड़वी सच्चाई तैं सबनै डर लाग्या करै सै !
Wednesday, August 27, 2008 4:42:00 PM
सच बताओ भाई,वो ब्लाग फीमेल भूत का था न,बाईगाड मैं ताई को नहीं बताऊंगा.रात में कौन-कौन आपके सपने में आती हैं.मन्नै बेरा सै.
Wednesday, August 27, 2008 5:37:00 PM
भाई त्रिपाठी जी की बात पर गौर फरमाया जाए!
Wednesday, August 27, 2008 5:44:00 PM
त्रिपाठीजी के बात सै ? आज कल हरयाणे की राजधानी मै रहकै किम्मै जोरदार ही हरयाणवी बोलनै लाग रे हो ?
और भई यो सवाल मन्नै बेरा था सपनै मै भी, के थम यो पूछोगे जरुर ! पर थमनै क्यूं बतावै ? तो ले भई पंडत जी थारै इस सवाल पै एक चुटकला सुण ले और अंदाज लगाले की ताऊ नै भुत का ब्लॉग पढ़या था या भूतनी का !
एक जाट एक जंगल में से जा रहा था अकेला ! और एक भूतनी वहां उसके पीछे लग गई ! जाट ने उसकी और कोई ध्यान दिया नही की ये भूतनी है या क्या है ? उसने सोचा होगी कोई बीरबानी !
अब भूतनी उसको डराने लग गई ! वो बोली--
हा .. हा.. मैं भूतनी हूँ !! तेरे को लग जाउंगी !
( यानी तेरे अन्दर घुस जाउंगी ) जाट थोड़ी देर
तो झेलता रहा ! फ़िर बोला - आर इतनी देर हो ली सै ! किम्मै करती ही कोनी ! आ फ़िर देर किस बात की सै ? चिपट ले ना म्हारे तैं !
इब सोच लो पंडितजी सपने में क्या क्या हुवा होगा ! अगर आपको मजे लेने हों तो आज म्हारै साथ साथ आप भी आ जाना सपने में ! :)
Wednesday, August 27, 2008 6:15:00 PM
तो आप सपने में भी ब्लॉग पढ़ने लगे हो? तब तो ताऊ जरूर आप को भूत ने पकड़ लिया है। बाबू जी को गांव भेजकर भूत भूतनियों की संगत कर रहे हो :)
Wednesday, August 27, 2008 6:21:00 PM
एक बात तो पक्की सै ताऊ...भूत की पोस्ट जिन्दा लोगन की पोस्ट से घनी जोरां की सै
नीरज
Wednesday, August 27, 2008 6:44:00 PM
आप लोग तो यहाँ भरपूर मनोरंजन का मजा ले रहे हैं ! और हम अभी ब्लॉग सेट ही नही कर पायें है ! और यहाँ तो भूत प्रेतों की ब्लागरी की बातें हो रही हैं ! ताऊ भूतों से क्या डरना ? वो तो बिचारे मुर्दा हैं ! डरना तो इन जिंदा भूतों से ! जो किसी के भी नही हुए !
Wednesday, August 27, 2008 6:46:00 PM
ये क्या उधम मचा रखा है,क्या इसी दिन के लिये मै तुम लोगो को कम्यूटर दिलवा कर आया था ? अब ये बात दिमाग से निकाल दो कि तुम जिंदा हो, चुपचाप यमलोक से पोस्ट ठेलते रहो , ज्यादा पंगा नही लेने का क्या ?
Wednesday, August 27, 2008 7:03:00 PM
प्रिय मित्र पित्सबर्गिया,
आपका प्रेम है ऐसे ही बना रहे ! त्रिपाठीजी को
जवाब दे दिया है ! आशा करता हूँ की आपने पढ़
लिया होगा और मजा भी आया होगा ! अब त्रिपाठी जी तो हमारे प्रदेश के हो गए हैं और हमारे भी underwear (लंगोटिया)दोस्त हैं ! सो उनको तो अन्दर तक ताकाझांकी की आदत पडी हुई है ! उनके ब्लॉग से आपको आइडिया लग ही चुका होगा की महाराज का कैसा करेक्टर है ?
दुसरे आपने शायद पहले भी ब्रह्मराक्षस के बारे में बात की थी और आज भी सुबह की आपकी टिपणी में आपने इसका जिक्र किया है ! तो आप यकीन रखिये आप की इस बात को मग्गा बाबा को बता रखा है ! और मग्गाबाबा को सिर्फ़ आपके अलावा दूसरा शायद ही कोई जानता होगा !
बाबा के पास खजाना है इन ब्रह्म राक्षसों का ! बाबा ने वादा किया है की समय पाकर एक पुरी श्रंखला ही शुरू करेंगे ! आपकी हमारी दुनिया से बाबा का ताल-मेल कम ही बैठ पाता है ! सो यकीन रखिये , समयानुसार सब होगा !
बहुत ही रोचक श्रंखला आप पढ़ पायेंगे !
Wednesday, August 27, 2008 7:27:00 PM
बड़े भाई पंगेबाज जी , सादर प्रणाम !
मुझे क्या मालुम था वो कंप्यूटर आप रखवा के गए थे ? मैंने तो समझा था की वो अपने चंगु-मंगू ( दोनों छोटे भूत ) कहीं से उठवा लाये होंगे ! खैर अगर कोई क्लेम करेगा तो उनको नहीं दूंगा ! पर आप यहाँ यमलोक से बिना बताये ही निकल लिए ? अब मैं आपसे निवेदन करता हूँ की आप जाकर वहा का राज पाट संभालो और प्लीज मुझे थोड़े दिन यहाँ धरती लोक का मजा लेने दीजिये !... प्लीज बड़े भैया ..!
अभी तो मुझे आपकी यहाँ सारी दुकानदारी भी देखनी है ! अभी मैं आपके वहा राखी सांवत से ही मिलके आया हूँ ! पता नही वहाँ और कौन कौन होंगी ? भैया मेरी इत्ती सी बात अभी मानके आप तुंरत नरक लोक पहुँचिये ! मैं कुछ दिन बाद आउंगा ! हमारा काम वहा कंप्यूटर ट्रेनिंग का जोरों से चल निकला है ! लाइन लगी है मरे हुए
ब्लागरों की | और नेट कनेक्सन भी सिर्फ़ हमारे ही पास है |
भिया थोड़े दिन.... आप प्लीज मुझे माफ़ करेंगे ! धरती लोक के आनंद लेकर आ जाउंगा !
आपका अनुज
Thursday, August 28, 2008 10:26:00 PM
ताऊ जी राम राम
ये क्या आप कौन-कौनसे भेद खोल रहे हैं। इतना भी मत डरायें कि हम डर के कारण कि भूत न सताने लगे आपके ब्लॉग पर आने लगे। मजाक कर रही हूं। वैसे आपकी पोस्ट बङी ही मजेदार होती है हमेशा ही।
Friday, August 29, 2008 7:34:00 AM
जितने बालक सारे डरगे.
ताऊ भूत के मारे मरगे.
ऊत बचे थे जितने यारों,
वें सारे के सारे तरगे.
भूत-प्रेत-आसेब झकोई,
अपण नै लाग्गैं अपने बरगे.
----------
TAU SHREE
लाइट gayab व सर्वर डाउन रहा इसलिये मेरी अनुपस्थिती को उदारता से क्षमा करें...
नोट:- ये सूचना सभी के लिये...
Friday, August 29, 2008 5:49:00 PM
वाह ताऊ वाह... फ़िर से दिल खुश कर दिया... :)
Friday, August 29, 2008 8:43:00 PM
अगर ताऊ आपकी कल्पना सही हो जाए तो क्या होगा ?
सपना बहुत सही देखा ! लोगो के कान खड़े हो गए !
Friday, August 29, 2008 8:46:00 PM
जिंदा आदमी हम मरे हुए आदमियों से ज्यादा ही खतरनाक होता है !
मुझे तो खतरनाक व्यंग दिखाई दे रहा है !
बधाई
Friday, August 29, 2008 8:57:00 PM
वैसे यह हमारा भविष्य का प्लान है की जो भी ब्लॉगर मरता जायेगा उसके लिए हम यह ब्लागिंग का प्लेटफार्म तैयार रखे , क्योंकि जो आदमी एक बार ब्लागरी कर चुका वो मरने के बाद कितना तकलीफ पायेगा ? यदि उसे ब्लागिंग का सामान नही मिलेगा !
कमाल की रचना है ! ताऊ लोगो को डरा
रहे हो या सचमुच कुछ है ?
Friday, August 29, 2008 9:01:00 PM
उंची कलपना है ! पर हकीकत जान कर डर भी लगता है !
प्रणाम ब्लागिंग से ! लिखना तो हमें आया ही नही कभी, अब
पढ़ने से भी तौबा मेरी तौबा :)
Friday, August 29, 2008 9:04:00 PM
ताऊ कही ये भूत आपके अन्दर ही नही घुस जाए ? पर आप तो चुडैल को ही चिपटा रहे हो तो भूत या भूतनी की आपके आगे क्या औकात ? धन्य हो हे महापुरुष ! :)
Saturday, August 30, 2008 4:42:00 PM
ek din raat ko hame bhi bhoot dikhe the...kaheen aapne bhi wahi blog to nahi padha jo main padh ke soyi thi.
Friday, September 26, 2008 2:05:00 PM
ye post padne ke baad to sure hamein raat ko aaj bhoot dikhenge...par sacchi aap blog ke bhavishya ko lekar kitna sochte hain, sapne me bhi blogging!
bahut accha likha hai, maza aa gaya :D
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