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आजादी के पर्व पर ताऊ की राम राम

भाईयो और बहणों , आप सबनै १५ अगस्त की घणी बधाई और शुभकामनाए !
और भाई इस बार म्हारा स्वतन्त्रता दिवस इक्कठ्ठी ३ दिन की छुट्टी ले कै आया सै !
सो आप मे तैं कुछ लोगां नै यो बेरा सै कि ताऊ कै पास एक बान्दर (बन्दर)
रहया करता था ! और भाई यो कुछ दिन पहले किम्मै छोह (गुस्सा) हो कै कहीं
काला मुंह करण चल्या गया था ! आज यो इसकै मदारी कै साथ घणे दिनों बाद
ताऊ कै पास आया ! आज ही गुरुवार को सप्ताहान्त हो गया ! और यो सारी
ऊठापटक मन्डली आज ताऊ कै पास आ लगी ! और भाई जैसी कि आप लोगों
को पता अब तक चल हि चुका है ! ताऊ की मन्डली मै एक भी भला आदमी ना सै !
सारे ही बन्दर, और बन्दर ही क्या बल्कि असली बडी पूंछ के लन्गूर ! और कुछ उनके
मदारी जी हां असली मदारी और जादूगर , जी हां जो मदारीयों की ऐसी तैसी करे
वो जादूगर ! और यदि थोडे बहुत अण कामां तैं बच गे तो वो हो लिये सैं पक्के ताऊ !
ताऊ कै साथ साथ अण सबनै मिल कै आजादी की धमाल शुरु कर दी !

धीरे धीरे कोई तीस बतीस बन्दर मदारी इक्कठ्ठे हो गये ! और भाई ताऊ भी अणमै
मिल कै बालक ही हो लिया ! और भी मित्र इक्कठ्ठे हो लिये ! ये किस्सा १४ अगस्त
शाम का है ! और भई खास बात ये कि आज थारी ताई का मिजाज बहुत बढिया सै !
वो भी अण बालकां नै नाश्ता पाणी करवा रही सै बहुत खुशी खुशी तैं !
और भाई अण बालकां नै बहुत जिद्द करी के ताऊ थारै किस्से सुनावो ! पर थम
जानों ही हो के ताई नै ताऊ के जो हाल करे थे ! सो ताऊ की हिम्मत ही नही
पड रही थी की कुछ सुणाए ! बालक बडी विनती सी कर रे थे ! पर ताऊ ना माना !

इतनै मै ताई नै सुण लिया और वो आछे भले मूड मे थी , पर पता नही क्यूं
चिल्लावण लाग गी -- अर तन्नै ये बालक आछे ना लागैं के ? क्युं इतरावै सै ?
सुणा क्यों नही देता अपनै किस्से रागनी ?
या उठाऊं भाटिया जी का दिलाया हुवा
जर्मनी का लठ्ठ ?
भई इतना सुणते ही ताऊ तो सतर्क होकै बैठ लिया और सोच्या
कि सारै बलागरियों मै तो इसनै पहले ही इज्जत खराब करा राखी सै और इब अण
बालकां मै और छीछालेदर करवा वैगी ! सो ताऊ नै चुप चाप रहण मै ही भलाई
समझी !

इब ताऊ बोल्या- भई बात ऊण दिनां की सै जब हम स्कूल मै पढया करै थे !
मास्टर किशन लाल हमनै पढाया करै था ! भई बडा कडक मास्टर था वो ! एक दिन
इसा हुया की एक कुम्हार अपनी गधी नै लेकै जा रहा था ! साथ मै उस गधी का
छोटा सा बच्चा भी था ! रास्ता स्कूल के बीच से था ! वहीं पर स्कूल के सामनै
ही पुलिस थाणा भी हुया करै था ! इब वो गधी का छोटा बच्चा उछलता कुदता इधर
उधर हो गया ! और कुम्हार आकै किशन मास्टर जी तैं पुछण लाग्या-- अक मास्टर
मेरी गधी का बच्चा इत आया था के ? थम मेरे को देदो !
मास्टर नै वो सुन्दर सा गधी का
बच्चा छुपा लिया था और साफ़ नाट गया ! मास्टर बोल्या- ओ भाई मन्नै ना बेरा तेरी
गधी के बच्चे का !
कुम्हार बोल्या-- अर मास्टर मेरा गधा का बच्चा सै तो इसी स्कूल मैं ! पर ठिक सै तु
ही रख ले उसनै और जरा पढा लिखा दिये आछी तरियां उसनै !
मास्टर बोल्या - ठिक सै भाई ! इब तो तू लिकल ले ! और कुम्हार वहां तै चला
गया ! और कुछ समय बाद वापस स्कूल मै आया और किशन मास्टर तैं पूछी के
मास्टर मेरा गधा कहां है ?
इब बेरा ना मास्टर नै के सुझी कि मास्टर नै बाहर थानै की तरफ़ इशारा करकै
कहा- भई देख तेरे गधे को मैने खुब पढा लिखा दिया सै और वो इब आदमी
बण गया सै ! और वो देख थानै मै सामने जो थानैदार बैठया दिखै सै ना , वो ही
तेरा गधा सै ! इब पढ लिख कै थानैदार बण गया सै !
कुम्हार घणा खुश हुवा और किशन मास्टर को धन्यवाद देता हुवा थाने मे जाकै थाणैदार
को गले से लगा लिया ! और उसको प्यार करते हुये बोल्या-- अरे मेरा छोटा सा गधे
का बच्चा तू कितना बडा हो गया रे... और तू तो पढ लिख कै थाणैदार भी बण गया !
मेरा नाम रोशन कर दिया तूने ! चल मेरे प्यारे गधे के बच्चे चल ! अपने घर चलते हैं ।
तेरी मां भी तेरे को बहुत याद करया करै सै !

अब साहब कुम्हार की ये हरकत देख कै तो थाणैदार का गुस्सा सातवैं आसमान
पर पहुन्च गया ! और उसनै कुम्हार को नीचे पटक कै पांच सात लात जमा दी !
इब कुम्हार बोल्या- अरे मेरे गधे का बच्चा ! तु आदमी भले ही बण गया हो पर तेरी
लात (दुल्लत्ती) मारण की आदत इब्बी तक ना गई !


प्यारे साथियो , आजादी के इस पर्व पर आप सभी हमेशा हंसते खिलखिलाते रहें..
आपका मित्र समुदाय एवम समस्त परिवार बहुत आनन्द मे रहे ! आपको ताऊ की
तरफ़ से हार्दिक शुभकामनाएं !

15 comments:

  1. स्वतंत्रता दिवस की आपको बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

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  2. गधे की दुल्लती मारने की आदत इत्ती आसानी से नहीं जाने की. नस्ली गधा है आखिर वो भी पढ़ा लिखा. :)

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  3. थमनें भी घणी बधाई होवे भाईजी

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  4. आप को आज़ादी की शुभकामनाएं ...

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  5. स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाऐं ओर बहुत बधाई आप सब को
    भाई राम पुरिया क्यु मेने बदनाम करन लग रहे हो, वो जर्मन वाला लठ्ठ तो मेने अभी भेजा ही नही, बस अब तो कल ही भेज दुगां,
    मजा आ गया आप का लेख पढ कर, बेसे चोकी मे तो होते ही गधे हे,धन्यवाद

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  6. शुभकामनाएं पूरे देश और दुनिया को
    उनको भी इनको भी आपको भी दोस्तों

    स्वतन्त्रता दिवस मुबारक हो

    Gadhe ki kahani bahut achhi lagi
    kya baat hai tau.........

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  7. Taau jee aapko bhi swatantrata divas hi shubh kamnaayen.aapka aashirwaad bana rahe sada

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  8. खूब कहीं ताउजी, इतना तो बताओ कि गधे का बच्चा वापस गया कि नहीं?? अभी तक थाने पर ही बैठा है??
    आपको भी स्वतंत्रता दिवस कि हार्दिक शुभकामनाएं..

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  9. ताऊ स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई !

    हमको एक बात समझ नही आई की आपका
    और भाटिया जी का चक्कर क्या है ? आप दोनों
    दोस्त हैं या दुश्मन ! या फ़िर दोनों हरयाणवी
    लालों के लाल (ताऊ बंशीलाल, ताऊ
    भजनलाल और ताऊ देवीलाल ) की तरह मिली जुली कुश्ती कर रहे हो ?
    भाई तुम हरायानावियों से तो भगवान बचाए ! :)

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  10. वंदे मातरम् !

    कल आपके यहाँ बहुत मजा आया ! और ताई ने जो दाल बाफले खिलाये वो खाकर इतनी नींद आयी की अब उठा हूँ ! अभी आपकी पोस्ट पढी !

    भाटिया जी कह रहे हैं की उन्होंने ताई को लट्ठ नही दिलाया था और ताई के हाथ में कल जो लट्ठ था ! उस पर साफ़ साफ़ लिखा था "मेड
    इन जर्मनी" |
    सवाल ये है की लट्ठ कहाँ से आया ?
    आपका कोई और दुश्मन तो नही हो गया ? आपके पुराने बन्दर पर शक है मुझे तो ! :)

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  11. अरे यार तभी मैं कहूं मुझे और अनुराग को थाने जाने से क्यों रोका था तैने, खैर, ब्लागरो सुण लो थाने कभी नहीं जाणा...पता नही कौन सी नस्ल का हो थाणेदार :)

    भाई रामपुरिया ...थाणेदार के बारे में पहले ही चेतावनी देने का घणा, मोटा धन्यवाद और साथ ही स्वतंत्रता दिवस की तन्ने भी घणी बधाई।

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  12. ये तो अच्छा हुआ कि अपने बच्चे को लेने उसकी मां थाने पर नही पहुँची .नही तो फिर पूरा बवालै हो जाता .
    आजादी की ६२वी सालगिरह की शुभकामनाएं !

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  13. ओ भाई मन्नै ना बेरा तेरी
    गधी के बच्चे का !
    मजा आ गया ये किस्सा पढ़ कर तो | धन्यवाद

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  14. इतना अच्छा मत लिखा करो.मैं जल भुन जा रहा हूं.
    भाई इधर महीने भर से कुछ जीवन काफी अस्त-व्यस्त रहा.दरअसल पुराने संस्थान दैनिक जागरण,दिल्ली को विदा बोल कर नए संस्थान दैनिक भास्कर,चंडीगढ़ में प्रवेश की प्रक्रिया चल रही थी.सो दिल्ली से चंडीगढ़ आना पड़ा.इसलिए आप के लिखे को पढ़ने से वंचित रहा.अब सारे चिट्ठों को पढ कर प्रतिक्रिया व्यक्त करने का क्रम फिर से प्रांरभ हो रहा है।

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