एक गधे की दुःख भरी दास्ताँ



आप लोग न्युं मत समझना कि मैं आपको ऐसे ही कोइ कहानी सुना रह्या सूं ! भाई थम इब कोई बालक थोडे ही हो ! या कहानी सै बिल्कूल सांचीं, तो भाइ सुनो !


एक था गधा ! और भाइ वो था एक धोबी का गधा ! इब आप पूछोगे कि भाइ यो कुणसे जमाने की बात सै ? आज कल ना तो धोबी रहे और ना उनके पास गधे ! इब जो धोबी थे उन्होने लान्ड्री खोल ली और गधे की जगह स्कूटर ले लिये !

बिल्कूल भाई थारी बात भी कती सांची सै ! पर यार ये तो सोचो की सारे कूओं में ही भांग थोडे पडगी सै ? अरे भाई थोडे बहुत परम्परावादी धोबी भी सैं और उतने ही परम्परा वादी उनके गधे भी सैं ! और भाइ यकिन ना हो तो आजाना ताउ के धौरै (पास) ! आपको मिलवा देंगे , इस ज्ञानी धोबी और उसके गधे चन्दू से !

यो दोन्युं बडे मजे मे थे ! रोज सुबह धोबी अपने गधे पर कपडे लाद के और छोरियां के कालेज कै सामने से होता हुया कपडे धोनै जलेबी घाट जाया करता और वो जब तक अपने कपडे धोता तब तक चन्दू गधा नदी किनारे की हरी हरी घास खाया करता ! और फ़िर समय बचता तो ठन्ढी छांव मे लोट पोट हो लिया करता ! इतना सुथरा और गबरू गधा था की , आप पूछो ही मत !

कभी इसका मूड आजाया करता था तो नेकी राम की रागनी भी बडे उंचे सुर मे गा लिया करै था ! और भाइ बडा सुथरा गाया करै था !पर भाइ पता नही यो गधा कुण सी जात का था कि इतना सुन्दर और जवान होने के बावजूद भी इसने कभी किसी पराई गधी पर बुरी नजर नही डाली ! और ना ही कभी किसी गधी पर लाइन मारनै की सोची !

वहां पर दुसरे धोबियों और कुम्हारों की सुन्दर सुन्दर और जवान गधियां भी आया करै थी पर चन्दू ने कभी उनकी तरफ़ नजर उठा कर भी नही देखा ! हालांकि ये और बात है कि चन्दू को रिझाने के लिये उन गधियों ने बहुत सारी कोशिशें की जो सब बेकार गई ! यहां तक कि उन पुरातन पन्थी गधियों ने टाइट जीन्स और लांडी कुर्ती भी पहनना शुरू कर दिया
पर वो चन्दू का दिल नही जीत सकी !

और साहब आप ये समझ ल्यो कि चन्दू गधा लन्च करता हुवा यानि घास चरता हुवा इन गधियों के बीच मे चला जाता तो भी उन सुन्दर और जवान गधियों के मालिकों को कोई ऐतराज नही होता , बल्कि कोइ कोइ तो अपनी गधी का जिम्मा भी चन्दू गधे को दे देता कि कहीं कोइ दुसरा गधा उनकी जवान गधी को बहला फ़ुसला कर भगा ना ले जावै !
इतना शरीफ़ और लायक था चन्दू !

इधर कुछ दिनों तैं ग्यानी धोबी नै देख्या कि आज कल कालेज कै पास आकै गधा थोडा धीरे हो जाता था ! और कालेज कै सामनै आली दुकान पै आके तो एकदम रुक ही जाया करै था ! असल मै चंदू गधे को एक सुन्दर, जवान और चटक मटक सी कालेज की छोरी धोरै प्यार हो गया था !

इब गधा तो था ही सो चढ गया इस नव योवना कै चालै ! और आज कल बडा रोमान्टिक मूड मै रह्या करता और घर से गठरी लादनै के पहले बाल बनाके, दाढी कटिंग सब तरिके से करकै निकल्या करै था ! इब धीरे धीरे इन दोनुआं का इश्क परवान चढनै लग गया ! कभी छोरी इसके तरफ़ देखकै मुसकरा देवे, कभी बाल झटक कै अपनी अदा दिखावै
और कभी मुस्करा के गर्दन को बडी अदा से घुमा ले !

और चंदू गधा भी कभी आंख का कोना दबा कर और कभी कोइ प्रेमगीत गुन गुना कर जबाव देता था ! और साहब "हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने" इसी गाने को चन्दू गधा गुन गुनाया करै था !

आप न्युं समझ ल्यो की इब से पहले भी इस हसींन जवान कन्या ने कई गधों को अपने इश्क के जाल मैं उलझाया था और इबकै बारी आगी सै इस चिकनै और कर्म जले चन्दू गधे की जो इतनी सुन्दर और सुशील गधियों को छोडकर इस सर्राटा आफ़त के लपेटे मे आ लिया !

इब धीरे धीरे बात यहां तक आ गई कि दोन्युं डेटिंग भी करनै लग गये ! धोबी जब तक कपडे धोता तब तक चन्दू गधा फ़ुर्र हो लेता और वो जवान छोरी भी तडी मारके कालेज से गायब ! कभी माल मै जाकै सिनेमा तो कभी काफ़ी शाप
पर ! और साहब ये समझ लो कि चन्दू तो २४ घन्टे इसी परी के ख्वाबों और ख्यालों में डूबा रहने लग गया ! उस इश्क के अन्धे को ये भी नही दिखाई दिया कि उन दोनु को खुले आम लप्पे झप्पे करते देख कै दुसरे गधे भी उस कन्या पर डोरे डालनै लग गये हैं !

कुछ समय बाद चन्दू को लगा की वो कन्या उससे कुछ ढंग से बात नही करती थी ! और उससे कूछ उखडी उखडी सी
रहण लाग री थी ! इब चन्दू ठहरा सीधा बांका नौजवान और उपर से गधा , सो वो क्या जाने इन अजाबों के चाल्हे !
और इस सीधे सादे गधे को क्या मालूम था कि वो बला तो अपना टाइम पास कर रही थी ! वर्ना तो उसके सामने क्या चन्दू और क्या चन्दू की ओकात ! अपनी जात से बाहर जाकै प्यार करने के यो ही अन्जाम हुया करै सैं ! गधा होकै आदम जाद तैं प्यार करनै चला था !...... गधा कहीं का....... ! हमनै तो सुण राख्या था कि गधे ही
दुल्लत्ती मारया करै सैं पर भाई इस बला नै तो चन्दू गधे को वो दुल्लत्ती मारी कि यो चन्दू ओंधे मूंह कुलांट खा गया !

वाह रे चन्दू गधे की किस्मत ! असल में हुया यो की इब उस छोरी का दिल चन्दू से ऊब गया था और वो एक सेठ के गधे से फ़ंस गई थी ! ये सेठ का गधा भी क्या गधा ? बल्कि गधे के नाम पर कलंक ! पर चुंकि सेठ का गधा था तो था ! आप और हम इसमे क्या कर लेंगे ? इसिलिये तो कहते हैं "जिसका सेठ मेहरवान उसका गधा पहलवान" ! बिल्कुळ मोटा काला भुसन्ड और दो जवान बच्चों का बाप !
पर आया जाया करै था मर्सडीज कार मे और घने दिनों तैं डोरे फ़ेंक राखे थे इस छोरी पै ! इब कहां ज्ञानी धोबी का गधा चन्दू और कहां सेठ किरोडीमल का गधा ? चन्दू पैदल छाप और ये मर्सडिज बेन्ज मै चलने वाला गधा ! सो छोरी को तो फ़सना ही था ! फ़ंस ली !

क्यों की फ़ंसना और फ़साना ही तो उसके प्रिय शगल थे ! और इसकै नखरै उठानै मैं इस मोटे गधे ने कोइ कमी भी नही
छोड राखी थी ! चन्दू की तो इस सेठ के गधे के सामने ओकात हि क्या ?

इब चन्दु सडक के बीचों बीच गाता जावै था
" वो तेरे प्यार का गम इक बहाना था सनम"
ताऊ उधर तैं निकल रह्या था ! गधे नै यो गाना गाते सुन के बोल्या --
अबे सुसरी के ! बेवकूफ़ गधे के बच्चे ! इब क्युं देवदास बण रह्या सै ? तेरे को पहले सोचना चाहिये था कि इन बलाओं से तेरे जैसे साधारण गधे को इश्क नही करना चाहिये ! इनसे तो कोई बडे सेठ का गधा ही इश्क कर सकै सै ! फ़िर वो भले ही दो जवान बच्चों का बाप हो ! या काला मोटा और उम्रदराज हो ? आखिर धन माया ही तो सब कुछ है इस जमाने में ! अरे उल्लू के पठ्ठे... ये कोइ लैला मजनूं वाला जमाना नही सै ! अबे गधेराम ये इक्कसवीं सदी है ! इसमे तो धन माया के पीछे भाइ भाइ , बाप बेटे यहां तक की मियां बीबी भी एक दुसरे की कब्र खोद देवैं सै ! तु भले कितना ही सुथरा और शरीफ़ गधा हो ! है तो तू आखिर धोबी का ही गधा !

और ये सुन कर चन्दू , चुपचाप, हारे जुआरी जैसा कपडे की गठरी लादे जलेबी घाट की और बढ लिया !

29 comments:

  Arvind sharma jaipur

July 4, 2008 1:54 AM

ताऊ आज तो थमने सिल्ला लोढ़ी ही बजा दिए ! भाई ताऊ चाल्हा सा काट दिया आज तो ! इस गधे की कहानी तो हम समझ गए ! थारा इशारा किधर सै ! गजब ताऊ गजब ! जीते रहो ! और लिखते रहो ! हमने उम्मीद नही करी थी की इस को आप इतने सुंदर ढंग से बता दोगे !
you are really geneous mudgal saheb !!!

  Ashish grewaal

July 4, 2008 2:13 AM

taau aaj to aapane chhore ka kabadaa hi kar diya ! par mere ko bachana , aapke haath jodataa hoon ! aur us chhori ko to usaka bapu bahut marega !
par taau ye sab usake baap ki vajah se huwaa tha !

  Dr. chohan Indore

July 4, 2008 2:18 AM

mudgal uncle ye kya kar Dala ? chhora badnam ho jayegaa ! aapane to usako aadami se dhobi ka gadhaa hi bana dalaa ! par wo saalaa hai hi is kabil ! ab aage us chhori ka bhi pura kissa likh hi dalo ..
jay ho taau aapaki..par mujhe bachanaa jaraa...

  chhajaram

July 4, 2008 2:23 AM

ताऊ आपका इशारा कहीं करीना ..... सैफ की तरफ़ तो नही ?
अगर ये है तो आपने गजब पकडा | मान गए आपको ! कहानी आपने उन पर फिट बैठा दी ! और भी हैं एक दो ! पर बहुत बढिया लगी ! चंदू गधा .. पर गधी को नाम क्यूँ नही दिया ?

  milind nigudkar Indore

July 4, 2008 2:33 AM

ये गधा है नसीरुद्दीन का...... और गधी है ...... आप सब जानते हो !
पर आपने ऐसा कमाल का लिख डाला है .. गजब कर दिया !
"रज्जब तैं गज्जब किया"
सत्य घटना का ऐसा सजीव चित्रण पढ़ने लायक है !
धन्यवाद

  kartik

July 4, 2008 12:27 PM

वाह भाइ साहब ! आपके इस गधे ने तो रेकार्ड ही बना दिये ! और
वो छोरी भी गधी ही दिखती है ! फंसी भी तो किस से !
पर आपकी कहानी मे दम है ! वाकई मजा आ गया !
इसके आगे भी कुछ हुवा होगा ? वो भी लिखे !

  Anonymous

July 4, 2008 12:30 PM

vipin reddy from hydrabad
I think ..shaahid..karina..saif ..
am I right ?
very good story . thanks

  pallavi trivedi

July 4, 2008 6:26 PM

mazedar kahani...

  डा० अमर कुमार

July 4, 2008 11:05 PM

सही जा रहे हो, ताऊ !

  Smart Indian

July 5, 2008 1:56 AM

बधाई आपके इतने सच्चे-सुंदर लेख पर. हरयाणवी भाषा ने आनंद को दूना कर दिया. बेचारे गधे की मायूसी भी काफी जानी पहचानी दीखे है.

इब आड़े कोई ना हांडता यो गधा.

  madhupriya

July 5, 2008 2:49 PM

ताउ कहूँ तो अच्छा ही रहवैगा ! पर यो तो दो तरफ इशारे मार रहे हो ! इसमे थारा गधा तो विवेक या शाहिद दोनो मे से एक है !
और इसको चाहे जहाँ फिट कर लो !
पर आपने आज कल की हकीकत लिख डाली है !
उपर उपर तो हंसी सी आती है पर अंदर आपने गहरी
चोट मार दी है ! इसीलिये तो आप ताउ हो !
इसपे आगे भी लिखें तो आज कल के गधो को थोडी अक्ल आयेगी ! !
शुभकामनाएँ !

  indrani

July 5, 2008 3:01 PM

केम छो ताउ ? सारू ! मजा मा ?
आपका गधा कुछ ज्यादा ही सीधा नही है ?
आज कल तो " तु नही और सही"
आपके गधो को भी अब स्मार्ट बना लो , नही तो ये ही होगा !
मैं तो यूँ ही आपके ब्लाग पर पहुंची थी और हरयानवी मे लिखा देख कर पढने लग गई ! फिर देखा की ये तो मेरे एक परिचित की भी कहानी है ! प्लीज आप लिखते रहे !
हरयानवी मे आपका गधा पुराण पढ कर हंसी भी आती है !
इसका अगला पार्ट भी लिख ही डालो !
आपकी शैली बहुत ही जोरदार है !

  Anonymous

July 5, 2008 3:06 PM

kyaa yaar taau ? aap kar kyaa rahe ho ? ham sidhe saadhe ladako ko tau aapane chandu gadha kah dalaa.
aur in sarratta aafat ladkiyo ko
ek baar bhi gadhi nahi bolaa.
ye tau bahut na insafi hai .
agali kadi me inko uchit samman
avasya de .
dhanyavaad
aapake chandu gadhe ka dost...

  kamal

July 5, 2008 3:39 PM

ताउ थमन्नै तो चाल्हे हि रौप राखे सै ! यो चंदू गधा रोहतक का सै या रेवाडी का ? या और आगे थारे गाम का |
और गधियो को भी आपने जींस और लांडी कुरती पहनवा दी !
यो चार टांग की जींस कित मिलैगी ? हमनै भी बताओ !
और थानै मैं एक सीडी भेजुंगा " थारी लांडी कुरती , दिखै गात उघाडो"
बहुत मस्त सी.डी. सै हरयानवी भाषा मैं !
आप तो देते रहो मिला मिला के हरयानवी मे !
शुभकामनाएँ |
कमल गाजियाबाद से

  P. C. Rampuria

July 5, 2008 4:09 PM

अरे भाइ कमल ,
तु इतने दिन कडे था मेरे यार ? ताउ थमनै बहुत याद करै सै |
और भाई तै यो चार टांग आली जींस कै बारे मैं क्यु कर पुछण लाग रया सै ? तन्नै पहननी सै के ? या तु भी बण गया गधा |
भई हम तो तन्नै इबी तक आदमी समझण लागरे थे, हमनै तो आज बेरा पाट्या सै कि तु भी शामिल हो गया सै |
इब या पबलिक पुछण लागरी सै कि यो चंदू कुण सै ? तो तन्नै म्हारा काम आसान कर दिया | भाइ तेरा नाम पता बता देंगे कि भाइ यो रह्या चंदु गधा, जो गाजीयाबाद मै रहवै सै |
और भाइ तेरा ई-मेल तो है ही ! ताउ की मदद करने के लिये धन्यवाद !
और भाइ तेरे पते का पता भी भेज देना ! तेरी चार टांग वाली जीन्स तेरे को ताउ भिजवा देगा | और तूने भी चंदू की तरियो कोई ढुंढ राखी हो तो उसके लिये भी भिजवा देंगे !
और भाइ तु अपने आप प्रकट हो गया ! ये तेरी महानता है नही तो आज कल चंदू कुण बनना चाहवै सै ?
चंदू तेरे को ताउ का आशिर्वाद |

  jagdish tripathi

July 5, 2008 7:41 PM

बापू क्या जोरदार हुक किया है.सीधे सिक्स.बापू,इसलिए क्योंकि आप रामपुर के हो और अपन कुशभवन पुर के.लेकिन बापू आप मेरी तरह उल्लू ही रहना.गधा मत बनना.जगदीश त्रिपाठी

  जगदीश त्रिपाठी

July 5, 2008 7:43 PM

बापू क्या जोरदार हुक किया है.सीधे सिक्स.बापू,इसलिए क्योंकि आप रामपुर के हो और अपन कुशभवन पुर के.लेकिन बापू आप मेरी तरह उल्लू ही रहना.गधा मत बनना.जगदीश त्रिपाठी

  जगदीश त्रिपाठी

July 5, 2008 7:47 PM

बापू क्या जोरदार हुक किया है.सीधे सिक्स.बापू,इसलिए क्योंकि आप रामपुर के हो और अपन कुशभवन पुर के.लेकिन बापू आप मेरी तरह उल्लू ही रहना.गधा मत बनना.जगदीश त्रिपाठी

  जगदीश त्रिपाठी

July 5, 2008 7:50 PM

बापू क्या जोरदार हुक किया है.सीधे सिक्स.बापू,इसलिए क्योंकि आप रामपुर के हो और अपन कुशभवन पुर के.लेकिन बापू आप मेरी तरह उल्लू ही रहना.गधा मत बनना.जगदीश त्रिपाठी

  Smart Indian

July 5, 2008 8:00 PM

कर्फ्यू की सुन के घणा दुखः हुआ भाई जी.
कर्फ्यू खुलते ही समय के हिसाब से छप्पन दुकान या सर्राफा बाज़ार (या जौहरी बाज़ार?) हो आईये और एक दो एक्स्ट्रा गुलाब जामुन हमारे नाम से भी खा लीजिये. यहाँ पर वह इन्दोरी स्वाद न मिलता. और न ही हरयाने की रबडी (बिहार वाली नहीं) और डोडा मिठाई मिलती कहीं.

शुभमस्तु!

  P. C. Rampuria

July 5, 2008 8:09 PM

पंडीत त्रिपाठी जी , पाय लागू ! बडे दिनो बाद आपके दिदार हो रहे हैं ! अब पता नही
आपकी संगत मे क्या क्या बनना पडेगा ! शुरु मे ही आपने एक सीधे साधे हरयानवी को भडासी बणाया, फिर उल्लू बणाया , फिर गधा बणाया और अब सीधे ताउ से बापु ! अरे यार पंडितजी आप इतनी जल्दी जल्दी मेरा सेक्स परिवर्तन
क्यु कर रहे हो ?
भाइ कुछ भी एक जूण मैं रहण दो यार !
इतनी जल्दी जल्दी मे घाव भी नही सुखता !

  P. C. Rampuria

July 5, 2008 8:30 PM

धन्यवाद सर जी ,
आज तो शाम चार से छ्: बजे तक कर्फ्यु मैं छूट मिली है सो गुलाब जामुन तो कोनी मिल्या , अलबत्ता दुध और हरी सब्जियों
का जोगाड बैठ्ग्या सै !
जब भी सर्राफे मैं या छप्पण दुकान
खुलेगी तो आपके नाम से भी पांच सात डकार लेंगे ! थम चिंता ही मत करो !

  madhupriya

July 5, 2008 8:43 PM

ताउ आज तो के बात सै ? बडे फटा फट जबाव देरे हो ! और फोन भी थारे जल्दी 2 ठा रहे हो !
यानि कर्फ्यु का पुरा आनंद ले रहे हो !

इब ये स्मार्ट इंडियन जी की गुलाब जामुन की सलाह मानकर मैं तो चली गुलाब जामून या गुलाम जामून खाने ! मेरे तो मुँह से लार सी टपक री सै !
और हाँ .. एक सलाह और .. आपके चंदू गधे को भी दो चार गुलाब जामुन जरुर खिला देना ! बेचारे का दिल टुटा हुवा सै ?
ताउ वो अपनै यहाँ कह्या करै सै ना कि " गधे गुलाब जामुन खावै सै ! तो थारे चंदू बिचारे नै के जुल्म कर राख्या सै !
उसनै भी खिलवावो !

  rukka

July 6, 2008 3:05 PM

ताउ थमनै रुक्केमार का राम राम ! अपण तो हरयाणा कै मोटी अकल के माणस सै !
इस चंदू गधे कै दो तो बजाओ कान कै तलै ! इसनै बुझो कि यो चुप चाप क्यु कर
बैठ ग्या सै ? उस सर्राटा आफत की आफत क्यु नही करी इसनै ! अरे हम के मर थोडे
ही गये थे ! म्हारी साथ भी एक आफत नै इस्सा ही करया था ! चंदू का दर्द हम समझ सकै सै !
चंदु तु .. इस गधी को लात मार और मजे मे जी ! और आगे से ख्याल रखणा इन
बलाओ कै चाल्हे मत चढणा !

  hari

July 6, 2008 3:15 PM

हम तो स्मार्ट इंडियन साहब के यहा से गुलाब जामुन खा कर आ रहे है !
और आपका पता भी वही से मिला ! आपने इतना जोरदार मसाला लिखा है की पढ कर मजा आ गया ! क्या बात है ? चंदू गधा.. और सर्राट्टा आफत्..
शुक्रिया , मेहरवानी

  Deepak Purbia

July 6, 2008 4:31 PM

vakyi aachi hai

  Deepak Purbia

July 6, 2008 4:32 PM

vakyi acchi hai

  kamal

July 6, 2008 5:37 PM

इब हमनै कोई यो बतावैगा की ये गुलाब जामुण कित सै आगये आड़े ?

और चलो , कोई ना , गुलाब जामुण तो गधे के लिये आ भी ज्या !
पर यो गुलाम जामुन के हो सै और कड़े तै आगये ?
गुलाम जामुन ? गुलाम जामुन ? कुण सी मिठाई सै यो ?

  Dr. Jitendra Bagria

October 15, 2009 11:43 AM

waaaah tau.....
aaj to majje hi de diye !!
sahi kaha !!

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