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ताऊ लद्दा - खद्दा और हिमांशु जी


ताउ लद्दा और ताउ खद्दा दोनु भुखे प्यासे रेवाडी मे घुम रहे थे ।
उन्होने वहां से हिमान्शु जी को फोन किया की ... आपका भटिन्डा यहां
से पास है कुछ मदद करवावो । भुखे प्यासे हैं ।
हिमान्शु जी : भई मैं तो उडीसा मै हूं ।
आप लोग एक काम करो , वहां रेवाडी मे कुछ काम धन्धा शुरु कर दो ।
(हिमान्शु जी ने पीछा छुडाने को कह दिया)
इब ताउ तो ठहरे ताउ ही... होगे शुरु..
दोनु ताउ भुखे प्यासे तो थे ।
रेलवे स्टेशन के बाहर खडे हो के चिल्लाण लाग गे..
एक कि दो ...एक कि दो ...ले लो !
किस्सी नै ज्यादा ध्यान नी दिया !
ताउ चिल्लाते ही रहे .. एक की दो !
ताउ गरमी से परेशान हो लिये..
मन ही मन हिमान्शु जी को गालियां देते रहे ।
एक की दो .. एक की दो.... !
इतनै मै गुल्ला सेठ वहां आ गया..
दोनु ताउ... एक की दो ..एक की दो .. लेलो.
गुल्ला सेठ-- भई.... क्या बेच रहे हो एक की दो ?
ताउ छोह खाके बोले - ... ड. . पर दो लात ? बोल लेगा ???????

1 comments:

  1. paramanand sharma from manglore :
    mazaa aa gayaa ....gullaa seth ko ek ki chaar dedo ...

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