एक बार ताऊ घसीटा का ताई रामकोरी से घण्णा ठाडा झगडा
हो गया । इब मन्नै यो तो नी बेरा पाटया, के झगडा का कारण के था ?
पर हम जब उनके घर पहुंचे तो बात चीत नु होण लाग़ री थी ।
ताई-- तन्नै शरम नी आन्दी ? तू उत क्युं कर गया था ?
ताऊ-- मैं कित भी जावो , तन्नै के करणा सै ? तू तेरा काम कर ।
ताई-- अर तू पी पी के, मोटा सान्ड, कद्दू बरगा होता जारया सै ।
क्युं म्हारी जान का दुश्मन हो रया सै तू ?
ताऊ-- और तू तोरई, गिलकी बरगी हो रही सै ? किस काम की सै तू ?
अरे हम अगर कद्दू भी होरहे सैं तॊ शादी ब्याह मैं सब्जी
बणाण के काम तो आते हैं , पर तू तो उस काम की भी नही सै ।
असल मे ताऊ कूछ विजय माल्या साब वाली खींच खांच के
आया था । और ताई को यो नशा वशा करणा कती पसन्द ना था ।
और ताऊ था कूछ नशॆ मे बहका हुवा ।
इब ताऊ की बात सुणके ताई को घणा छोह (गुस्सा) आग्या, और
उसके सिर पे गोबर की परात थी सो वो ठाके ताऊ के उपर
दे मारी । और साब, इब ताऊ तो ठहरा ताऊ । और फ़िर म्हारे
सामने ताऊ की बेईज्जती हो गयी और वो भी ताई से ।
सो ताऊ नै भी घणा छोह खाके ताई के रैपटे (चांटे) धर दीये !
और दोनुं गुथ्थम गुथ्था हो के लड लिये ।
इब आप जाणते ही हो के यहां तक का किस्सा तो आपके हमारे
यानी सबके साथ रोज रोज होता ही रहता है । किसी के साथ कम
और किसी के साथ ज्यादा । यानी कभी मर्द पिट जाता है और
कभी औरत पिट जाती है ।
पर ताऊ के साथ आगे जो हुया उसकी उमीद ताऊ को नही थी ।
इब आप तो जाणते ही हो के म्हारे देश मैं औरतों को घणे
अधिकार मिल गये सैं । इब कोई बिल्कूल ही मूरख या पागल औरत हो तो
भले ही पिट ले । नही तो औरतों को इतने अधिकार सरकार
ने दे दिये हैं कि आज कल तो मर्द ओरतों से खोफ़ खाने लगे हैं ।
और भाई म्हारी तो सबनै यो ही सलाह है की ताऊ घसीटा आले
काम ना करीयो । नही तो आज के समय मे बडी मुश्किल हो
जायेगी । अब समझ लो कि पुराने जमाने चले गये । जब आप
ओरतों पर चाहे जैसे जुल्म करते थे । भाई लोगो सुधर जावो,
नही तो तुम्हारा हाल भी ताऊ घसीटा जैसा पुलिस आले कर देंगे,
फिर मत कहना की हमको पहले क्यूं नही चेताया ?
बख्त रहते ही सुधर जावो, इसी मे भल्ली सै । इब आगे सुणो,
कि ताऊ को पुलिस वालों नै किस तरह बन्दर बनाया ?
और ताई रामकोरी आज के जमाने को समझने वाली ओरत थी ।
वो ना तो खोटी बात खुद करती थी और ना ही किसी की गलत बात
बर्दाश्त करती थी । सो ताई नै सोच ली के आज ताऊ की
दारू उतार के ही रहेगी । क्योंकि ताऊ का यो रोज का धन्धा
हो रहा था । और मार पीट भी किम्मै ज्यादा सी ही करने लग गया था ।
सो ताई वहां से सीधी भाज ली, गाम के थाने में ।
और जाके ताऊ की रपट लिखा दी ।
थाणे से ३/४ पुलिस आले आके ताऊ नै ठा लेगे , और
लोक-अप मैं बंद कर दिया । थोडी देर बाद ताऊ से पूछताछ शुरू
हुई । और ताऊ नै ओंधा पटक के खूब डंडे मारे । ताऊ का नशा तो
पहले ही उतर चुका था , इब पुलिस की मार खा के चिल्लाण
लाग ग्या .. अजी साब जी .. छोड दो .. आगे तैं नही मारूंगा ।
और साब , जितना ही वो चिल्लावै, पुलिसिये उसको और
ज्यादा जोर तैं बजावैं । क्योंकि ताऊ नै ओरत पर हाथ उठाया था ।
और आज कल इसकी सजा घण्णी ज्यादा सै ।
इब उसने ठोक ठाक के सिपाही थक लिये, तो एक तरफ़ बैठ गये ।
ताऊ पडा पडा आं उं, आं ऊं करे जावै था ।
थोडी देर मे थानेदार आया और उसको ताऊ का किस्सा मालुम
पडा तो थानेदार को भी गुस्सा आ गया , और थानेदार बोला--
इसके गले मे टायर डालो , इसकी खबर तो इब मैं लेता हूं ।
और थानेदार नै डन्डा हवा मैं लहरा के ४/५ फ़ोड दिये , ताऊ
के उपर और पूछ्या -- क्यों और मारेगा.. अपनी लुगाई को ?
ताऊ बोल्या -- जी इब मनै आप छोड दो.. इब मै मारना तो
दूर , इसकी तरफ़ आंख भी नहीं ऊठाऊंगा .....।
थानेदार ने फ़िर ३/४ थप्पड धर के पूछा-- तू ने क्या समझ के
इस को पीटा था ? और फ़िर २/४ डंडे धर दिये ।
ताऊ रोता रोता बोल्या-- अजी.. थानेदार साब इब माफ़ भी कर दो । मैने तो
इसको अपनी घरवाली समझ के ही पीट दिया था , पर मनै के
बेरा था की यो सरकारी सै ? और थम सारे इसके भाई लगते हो ?
यो बेरा होता तो मैं इस थारी बहण पर, क्या अपने हाड कुटवाने
के लिये हाथ उठाता ? "भुल्या ताऊ भेड खाई, आगे खावै रामदुहाई ।
भूल्या ताऊ भेड खाई....
Friday, June 20, 2008 at 4:17 PM Posted by ताऊ रामपुरिया
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About Me
- ताऊ रामपुरिया
- अब अपने बारे में क्या कहूँ ? मूल रुप से हरियाणा का रहने वाला हूँ ! लेखन मेरा पेशा नही है ! थोडा बहुत गाँव की भाषा में सोच लेता हूँ , कुछ पुरानी और वर्तमान घटनाओं को अपने आतंरिक सोच की भाषा हरयाणवी में लिखने की कोशीश करता हूँ ! वैसे जिंदगी को हल्के फुल्के अंदाज मे लेने वालों से अच्छी पटती है | गम तो यो ही बहुत हैं | हंसो और हंसाओं , यही अपना ध्येय वाक्य है | हमारे यहाँ एक पान की दूकान पर तख्ती टंगी है , जिसे हम रोज देखते हैं ! उस पर लिखा है : कृपया यहाँ ज्ञान ना बांटे , यहाँ सभी ज्ञानी हैं ! बस इसे पढ़ कर हमें अपनी औकात याद आ जाती है ! और हम अपने पायजामे में ही रहते हैं ! एवं किसी को भी हमारा अमूल्य ज्ञान प्रदान नही करते हैं ! ब्लागिंग का मेरा उद्देश्य चंद उन जिंदा दिल लोगों से संवाद का एक तरीका है जिनकी याद मात्र से रोम रोम खुशी से भर जाता है ! और ऐसे लोगो की उपस्थिति मुझे ऐसी लगती है जैसे ईश्वर ही मेरे पास चल कर आ गया हो ! आप यहाँ आए , मेरे बारे में जानकारी ली ! इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ !
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2 comments:
Saturday, June 21, 2008 11:44:00 PM
हाँ जी टेस्ट सही रहा. हो गया कमेंट चालू..राम राम ताऊ और बंदर सा!!
Thursday, May 21, 2009 9:05:00 PM
superb!
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