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होशियार.....लाल बत्ती वापस लौट रही है...



रमलू की गुमटी पर चाय सुडकते हुये हम अखबार बांचे जा रहे थे. आज का सबसे गर्म मुद्दा लालबत्ती ही अखबार में छाया हुआ था. जिधर देखो लालबत्ती पर हाहाकार मचा हुआ है. कहीं मेमसाहब गमजे में हैं तो कई मंत्री सरकारी अधिकारी अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. क्या इसी दिन के लिये IAS….IPS की दिमागतोडू पढाई की थी? अब सारी उम्र खास के बजाये आम आदमी बनकर रहना पडेगा……इन्हीं सब खबरों से अखबार का पन्ना भरा पडा था और हम इन्हीं खबरों को बांचे जा रहे थे कि इतनी देर में “संटू भिया कबाडी” आ पहुंचे…. आते ही उन्होंने कडक कम मीठी ज्यादा वाली चाय का आर्डर दे मारा और हमारे पास ही सट लिये.


भिया ने हमारी तरफ़ देखते हुये बातचीत की शुरूआत करते हुये कहा – ताऊ में तो कल का तुमारे पास ही आने का सोच रिया था पर कसम झंडू ाबा की…टेम ही नी लगा. हमने पूछा – भिया ऐसा कौनसा जरूरी काम आ लगा था जो ह सरीखे के फ़ालतू आदमी के पास तुमको आना पड रहा था. संटू भिया बोले – देखो ताऊ, मजाक की बात नी है, भौत अंदर की बात हैगी सिर्फ़ तुमारे को बता रिया हूं और ताऊ पीलान ऐसा है कि तुमारी और मेरी दोनों की जिनगी बन जायेगी, तुम भी क्या याद करोगे.

अब हमारी उत्सुकता जागी कि भिया के पास ऐसा कौनसा प्लान आगया जो इस तरह की बहकी बहकी बातें कर रहे हैं. जिंदगी तो पप्पू की नही बनी जो इत्ती बडी पार्टी का सर्वेसर्वा बनकर भी वहीं का वही भी नही रहा. और यहां हमारे पल्ले तो पैदायशी तौर पर कुछ है ही नही. तभी संटू भिया बोले – देख ताऊ, अंदर की खबर हैगी कि लालबत्ती वापस आयेगी भौत जल्दी ही…..

हमने बात बीच में काटते हुये कहा – यार भिया, तुम भी ना, आज शाम शाम को ही गटक आये क्या? अरे लोग सुबह सुबह ऊंची नीची देते हैं और तुम शाम को देने लगे?
संटू भिया थोडे झुंझलाते हुये बोले – यार ताऊ, तुमायी कसम…तुममे ना ये एक भौत बडी कमजोरी हैगी कि सामने वाले की पूरी बात तो सुनते नहीं हो और बात को पल्ले सिरे से पेले ही ले उडते हो. तुम जरा पूरी बात तो सुनो हमायी. हमने कहा ठीक है सुनाईये.

संटू भिया बोले – बात ये है कि आजकल हमायी कबाडे की दुकान में भौत ज्यादा उतारी हुई लालबत्तियां इकठ्ठी हो गई हैं. शुरू शुरू में तो हमने एक रूपये में एक के हिसाब से खरीदी थी और अब हालत ये है कि लोग मुफ़्त में हमारे गोदाम पे पटक पटक के जा रिये हैं. हमारे दिमाग में एक आईडिया आया है और इस आईडिये को तुम अंजाम तक पहुंचा सकते हो और हम कसम झंडू बाबा की, तुमको एक चवन्नी का पार्टनर बना लेंगे इस लालबत्ती वाले पीरोजेक्ट में…
हम भिया का मुंह देखे जारहे थे और वो बोले जा रहे थे…..
ताऊ सरकारी कामकाज ऐसे हैंगे कि आज बंद कल चालू…..जैसे रोड के बीच आज डिवाईडर बना दिया फ़िर तीन महिने बाद तोड दिया….चौराहे को कभी रोटरी बना दिया फ़िर उसे तोड कर फ़ौवारे फ़िट कर दिये. हमारा मतलब ये हैगा कि इसी बनाने तोडने के काम से ठेकेदारों, अफ़सरों और नेताओं की रोजी रोटी चलती हैगी. अब तुम ठहरे नेता आदमी…तो हमारे साथ इस लालबत्ती के काम में साझेदारी कर लो.

हम भिया की बाते सुन सुन कर पक चुके थे, हमने कहा – संटू भिया आप घर जावो और हमें भी जाने दो….आज आपका चित ठिकाने पर नही है.

संटू भिया बोले – देख ताऊ, हमने तुमारा वो ईवीएम वाला काम करवाया था ना? सारी ईवीएम ऐसी सेट करके दी थी कि तुम चुनाव जीत गये थे. हमारे इस एहसान के बदले ही साझेदारी कल्लो हमसे इस पीरोजेक्ट में……बस माल हमारा और काम तुमारा. अब कोई ऐसा चक्कर चलावो कि सरकार वापस लालबत्ती लगाने की घोषणा कर दे और हमारे पास जो स्टाक में बत्तियां इकठ्ठी हो गई हैं उन्हें हम सप्लाई करके लाखों करोडों के वारे न्यारे कर लें और ईमानदारी से चवन्नी  मुनाफ़ा तुमारा….देखो मना मत करना, हमको मालूम है कि तुम भौत ही ऊंची चीज हो…बस चक्कर चलादो कुछ… हमें ये पक्का पता चला है कि सारे अफ़सर, मेमसाहब..नेता मिनिस्टर लालबत्ती उतरने से बहुत दुखी हैंगे और इसे वापस लगवाने के लिये एडी चोटी का जोर लगा रिये हैंगे....

हम वहां से सन्नाटी खाये हुये आदमी की तरह उठकर चल दिये.

लाल बत्ती और वीवीआईपी पर उसके प्रभाव



अभी जुम्मे जुम्मे चार दिन की ही तो बात है जब हम  शाम को आफ़िस से घर लौटे तो देखा कि पडौस वाले गुप्ता जी का घर दिपावली जैसी रोशनी से नहाया हुआ था. गुप्ता जी के यहां ना तो कोई शादी ब्याह लायक था और ना ही किसी नये मेहमान आने की उनकी उम्र थी सो जल्दी से अपने घर में घुसे और पप्पू की अम्मा को आवाज लगाई कि ये माजरा क्या है?

पप्पू की मां जो शायद हमारे आने का ही इंतजार कर रही थी, हमारे कुछ पूछ्ने से पहले ही आतंकवादियों के बम की तरह फ़ट पडी. गुर्राते हुये बोली – तुमसे तो आज तक कुछ नहीं हो सका और एक ये देखो गुप्ताजी वीवीआईपी होगये…उनको लाल बत्ती मिल गई…..ताना सा मारते हुये बोली - तुम तो बस इस खटारा स्कूटर पर ही घुमाते रहना मुझको. हमने कहा पप्पू की अम्मा, कुछ शांति से बतावो तो बात समझ में आये.


हमारी बात सुनते ही वो नार्थ कोरिया वाले मोटू तानाशाह “किम जोन उंग” की तरह फ़टते हुये बोली – कुछ तो शर्म करो, सारा दिन इधर से उधर नेतागिरी करते फ़िरते हो, आज तक तुम कुछ भी नही बन पाये और एक ये देखो गुप्ता जी को आज सीएम ने खाद निगम का अध्यक्ष बना दिया और उनको लाल बत्ती देकर वीवीआईपी भी बना दिया. गुप्ताईन ऐसे बन ठनकर मेम साहिब की तरह इतराते हुये लाल बत्ती की गाडी में बैठकर गई है जैसे पैदा ही लाल बत्ती में हुई हो….

हमने कहा – भागवान अब चुप भी हो जा….जीत उनकी पार्टी की होगई तो वो वीवीआईपी  होगये….. कल हमारी पार्टी जीत जायेगी तो तुम लालबत्ती वाली वीवीआईपी हो जावोगी. पप्पू की अम्मा हमें ऐसे देख रही थी कि हमे उनके इरादे ठीक नही लगे. हमारी हालत ऐसी हो रही थी जैसे राह चलते लालबत्ती की गाडी को पीछे या सामने से आते देखकर आमजनों में दहशत फ़ैल जाती है. सब रास्ता देने लगते हैं तो हमने सोचा कि अब पप्पू की अम्मा के सामने से हट जाने में ही भलाई है वर्ना जो हाल लालबत्ती वाले जनता का करते हैं वही हाल ये हमारा करेगी.


हम अपना खटारा स्कूटर उठाकर घर से बाहर निकले ही थे कि सामने से फ़राटे से लालबत्ती तेजी से आकर रूकी, हमे लगा कि कहीं हमारे ऊपर ही ना ढ जाय सो हडबडी में अपने स्कूटर को जल्दबाजी में एक तरफ़ झुकाकर हम भी झुक गये. तभी कार से गुप्ता जी उतरते हुये दिखे सो हमने भी सौजन्यता वश उन्हें अध्यक्ष बनने की बधाई दी तभी भाभी जी यानि गुप्ताईन जी पल्लू संभालते हुये कार से बाहर निकली. हमारी तो आंखे चौंधिया गई उनको देखकर….हमने जल्दबाजी में उन्हें भी नमस्ते किया…बदले में अभी तक के पहले, जो अधेड दिखती थी और अभी बिल्कुल “भाभीजी घर पर हैं” वाली "अनीता भाभी" की तरह वैल ड्रेस्ड दिख रही, गुप्ताईन जी ने भी हमें बडे नाजोअदा से नमस्ते… नमस्ते….भाईसाहब कहा और अंदर जाने के लिये पलट ली.

बस साहब उस दिन से हमारी तकलीफ़ तो किससे कहें पर पप्पू की अम्मा ने अपनी तकलीफ़ें बता बता कर हमारा कचूमर निकाल डाला. घर में खाना पीना सब ऐसा बनने लगा जैसे गमी वाला घर हो, बिना हल्दी मिर्च के छौंके वाला खाना. पप्पू की अम्मा की तानाकशी से तंग आकर हमने भी घर पर रहना कम ही कर दिया. अपना ज्यादातर समय “रमलू” चाय वाले के ठीये पर या “संटू भिया कबाडी” के ठीये पर ही बीतने लगा.

पप्पू की अम्मा की तबियत भी नासाज सी दिखने लगी थी हमें आजकल. हां एक बात आते जाते हमने जरूर नोटिस की कि पप्पू की अम्मा का मन पूजा पाठ और ज्योतिषियों में ज्यादा लगने लगा था. घर में बने पूजाघर में ही ज्यादातर समय दिया बत्ती करती रहती थी. क्या पता कोई ज्योतिषियों के बताये टोने टोटके भी करती हों,  हमने सोचा चलो, इसी पूजा पाठ के बहाने इनको शांति मिलती रहेगी, हम तो लाल बत्ती का जुगाड कर वीवीआईपी बनने से रहे.

आज सुबह सुबह हम तो सोकर उठे भी नही थे कि हाथों में अखबार लहराती हुई पप्पू की अम्मा ने ऐसी आवाज लगाई मानों उनको ही लाल बत्ती मिल गई हो. ऐसी खुश दिखाई दे रही थी जितनी की ट्रंप की जीत पर उसकी लुगाई “मेलानिया” भी नही हुई होगी. हमने पूछा – भागवान, ये सुबह सुबह क्या बचपना कर रही हो बुढापे में? साफ़ साफ़ बताओ कि हुआ क्या है?

वो बोली – देखो ये खबर…..आज से कोई नेता, मिनिस्टर, अफ़सर और वीवीआईपी…… कोई भी लाल बत्ती नही लगायेगा, ऐसा आर्डर सरकार ने निकाल दिया है…...वो एक सांस में ही बोले जा रही थी….. अरे मैं कोई रोज पूजाघर में यूं ही फ़ोकट थोडे ही बैठी रहती थी. आखिर भगवान ने मेरी सुन ही ली…..अब देखती हूं गुप्ताईन कैसे ठसके से बैठेगी लाल बत्ती में….बडी वीवीआईपी बनी फ़िरती थी….. जब भी लाल बत्ती में बैठती थी तब मेरी तरफ़ ऐसे देखती थी जैसे मैं कोई चींटी हूं और वो हाथी….ले गुप्ताईन अब बैठ तू लाल बत्ती में… और पप्पू की अम्मा अपनी पूजा का फ़ल पाने की खुशी में चाय बनाने चली गई.

हम बाहर बरामदे में आकर अखबार के पन्ने पलटाने लगे. बगल में झांककर देखा तो गुप्ता जी और उनका ड्राईवर  कार से लाल बत्ती उतार रहे थे…..गुप्ताईन जी भी बगल में खडी थी जिनका चेहरा कल तक अनीता भाभी जैसा लगता था अब हमे अधेड से भी ज्यादा बूढा लगने लगा था.   

ब्लागिंग का स्वर्णिंम काल और EVM से मठाधीषों के चुनाव



आज पता नही क्यों, ब्लागिंग के पुराने जमाने की बहुत याद आ रही है. वर्च्युअल दुनियां होते हुये भी कभी यह एहसास हुआ ही नही कि ये ”सूत ना कपास जुलाहों में लठ्ठमलठ्ठा” वाला काम है. पिछले तीन चार साल से ब्लागिंग भी बंद सी ही थी और फ़ेसबुक अपने को कभी रास आई ही नही थी. सो इन सबसे दूरी बनी ही रही.

हां तो हमको याद आ रही थी ब्लागिंग के स्वर्णिम काल की तो उस कालखंड में बडे बडे मठाधीषों जैसे मठ बने हुये थे. और जैसे सच के मठाधीषों में तलवारें खिंच जाती हैं कुछ इसी तरह की तलवारें ब्लागिंग में भी खिंच जाया करती थी. कई मसले तो ऐसे होते थे जो भारतीय राजनिती के चुनावों से भी अहम होते थे मानो ब्लागिंग का मठ जीत लिया तो राज करेंगे.

वैसे तो कई खेमें बने हुये थे पर नामचीन मठाधीषों के दो ही खेमे थे जैसे कौरव और पांडवों के थे. कई कई मसले ऐसे रहे जिनमें कोई भी हथियार डालने को तैयार नही होता था. सुबह से शाम पूरी दुनियां में फ़ोन खडकते रहते थे समर्थन पाने के लिये, सामने वाले योद्धा को अपने पक्ष में करने के लिये. हालात यहां तक पहुंच चुके थे कि कभी हिंदी सम्मेलन होता तो लगे हाथ गधा स्म्मेलन आहूत कर लिया जाता.

भारत पाकिस्तान की तरह कभी समाप्त ना होने वाली इस जंग को जड से समाप्त करने और ब्लागर भाईचारा बढाने के लिये एक सर्व मठाधीष सम्मेलन आहूत किया गया जिसमे सभी छोटे बडे मठाधीशों ने शिरकत की. सम्मेलन मे यह तय पाया गया कि वर्चस्व की इस लडाई को चुनावों के माध्यम से हल कर लिया जाये और हिंदी सेवा का यह यज्ञ जारी रखा जाये.

अब सवाल उठा कि निष्पक्ष चुनाव कैसे हों? उस समय तक EVM मशीनें आ चुकी थी सो निष्पक्षता के लिये EVM मशीनों के इस्तेमाल का सुझाव सर्वसम्मति से पारित हो गया. EVM मशीनों का इंतजाम करने का जिम्मा सत्य की मूर्ति ताऊ को सौंप दिया गया.  ताऊ को कोई काम दे दिया जाये और वो अंजाम तक नहीं पहूंचाये ऐसा मुमकिन नहीं है सो ताऊ तुरंत निकल लिये EVM के जोगाड के लिये और सीधे पहुंचे संटू भिया कबाडी के तेलीबाखल वाले ठीये पर. 

वहां भिया तो आये नही थे पर आठ दस जिंदा EVM मशीने वहां रखी थी और दो चार बच्चे उनसे चुनाव चुनाव खेल रहे थे. फ़िर उनमें इस बात को लेकर झगडा शुरू हो गया कि कौन बीजेपी बनेगा, कौन कांग्रेस और…सपा…बसपा इत्यादि. थोडी देर में उनमें ब्लागिंग के मठाधीषों की तरह सरफ़ुट्टोवल शुरू होगई. एक तगडे से दिखने वाले लडके ने, जो बीजेपी बनने की कोशीश कर रहा था, उसने कुछ् EVM मशीनों को उठाया और एक टाट के बोरे में भरकर भाग लिया कि लो अब मैं बीजेपी बनूंगा….कल्लो जो करना है. बाकी के छोरे उसके पीछे लपक लिये. अब वहां रह गया ताऊ और बाकी बची दो तीन EVM मशीनें.

और बाकी रह गया संटू भिया का कबाड और तीन नग EVM मशीनों और ताऊ.  काफ़ी देर तक भिया नही आये तो बोरियत होते देख उनमें से एक बूढी सी दिखने वाली EVM ने सन्नाटा तोडा और ताऊ से आने का सबब पूछा. ताऊ ने पूरा किस्सा बताया तो वो बूढी EVM बोली – ताऊ, कैसा कलयुग आ गया, जहां कोई हार जाये तो दोष हम पर और वो ही पार्टी कहीं जीत जाये तो हम ईमानदार. तुम मनुष्य लोगों की फ़ितरत भी बहुत ही अजीब है. मन तो ऐसा करता है कि तुम सबको सबक सिखाया जाये. 

हम कुछ जवाब सोच ही रहे थे कि इतनी देर में संटू भिया कबाडी आ गये. आते ही उन्होंने पूछा कि कैसे आना हुआ और हमने पूरा किस्सा बयान कर दिया.
भिया बोले – ताऊ चिंता मत करो, चुनाव के लिये हमारे पास EVM मशीने तैयार हैं. जब हमने बताया कि मशीने तो कुछ छोरे उठा ले गये तो भिया मुस्कराते हुये बोले – अरे ताऊ, इत्ती सी बात पर चिंता नही करने का……मशीन हमारी हैं और वे इत्ती समझदार हैं कि अपने आप हमारी आवाज सुनते ही वापस लौट आयेंगी. तुम तो किराया तय करो, तुमको किसको जितवाना है इस पर किराया तय होगा?

हमारी तो सांस ऊपर नीचे होने लगी कि भिया क्या उवाच रहे हैं? कहीं भरी दोपहरी भंग भवानी की चपेट में तो नही आ लिये? हमने ठोंक बजाकर पूछा तो उन्होने ईमानदारी से चुनाव कराने का किराया डेढ लाख प्रतिदिन बताया और किसी पार्टी को श्योरशाट चुनाव जिताने का साढे ग्यारह लाख. हमारा तो सर चकराने लगा कि भिया ने तो हमारे अरमान ठंडे कर दिये.

इता होने पर हमने अपने खेमे के महा मंडलेश्वर (नाम नही बतायेंगे वर्ना ये चलती फ़ेसबुक का हाल भी ब्लागर जैसा हो जायेगा) को फ़ोन लगाकर सारा किस्सा बयान किया. महा मंडलेश्वर खुशी से चीख ही पडे थे हमारी बात सुनकर और बोले – वाह ताऊ तुमसे यही उम्मीद थी, जैसे दुर्योधन ने कर्ण को पाला था अर्जुन को मारने के लिये, उसी तरह हमने तुमको भी इसी विजयश्री का वरण करने को तो  रखा है. शाबाश ताऊ……फ़टाफ़ट साढे ग्यारह लाख की जगह इसको साढे बारह लाख दो और जीत पक्की करो.

नियत तिथी पर चुनाव हो गये, उसमे EVM ने कुछ किया या नही यह शोध का विषय है कि भिया ने EVM में कुछ सेटिंग की थी या जीत का तुक्का लगा था पर उस चुनाव के बाद ब्लागिंग हार गई. भिया के दावे की वजह से राजनीती भी लगता है हार ही गई.

आज कुछ लिखने का मूड नही है ताऊ

आज एक अक्षर भी लिखने का मूड नही है। अब ये किसी के हाथ में तो है नही की मोबाईल हाथ मे पकड़ा दिया और कहा कि लिखो। लिखने के लिए कोई मूड होता है, कोई टॉपिक होता है जिस पर निगाह गड़ जाए और पोस्ट बाहर निकल आये।

आज जब दिमाग एकदम पैदल चल रहा है तो कहां से लिखें? ना जी ना, आज दिमाग खाली है। और तो और आज कमेंट करने के लिए भी दिमाग में कोई खुराफाती आईडियाज नही उछले हैं सुबह से अभी तक तो पोस्ट चेपना तो दूर की बात है।

आप भी गजब के पाठक हैं जो अभी तक यह नहीं पूछा कि ताऊ क्या बात हो गई जो दिमाग बन्द होगया? हाँ तो ये हुई ना कोई बात, हम बिना पूछे ही बता देते हैं कि आज सुबह सुबह उठते ही ताई ने आदेश दिया कि फ्रिज में दूध रखा है जरा चाय तो बनाते जाना मार्निंग वाक पर जाने से पहले। इतने में घर के बाहर से गुप्ताजी ने बांग लगादी की चलो घूमने का टाइम हो गया है।

अपना मूड तो था नही पर यह सोच कर बनाने लगे कि सुबह सुबह कौन झखमारी करेगा, चलो बना देते हैं। हमने चाय पत्ती पानी शक्कर मिलाकर गैस पर चढ़ा दिया और मार्निंग वाक के लिए निकलने लगे तो याद आया कि चाय को दूध की भी जरूरत होगी सो जल्दी में फ्रिज में से दूध समझकर छाछ को पतीले में डाला और यह कहते हुए निकल लिए की चाय 5 मिनट बाद तैयार हो जाएगी, तुम छानकर पी लेना, हम गुप्ताजी के साथ घूमने जा रहे हैं।

वापसी में देखा तो ताई लठ्ठ लिए बैठी थी, ये हमारा रोज का काम है सो हड्डियों को थोड़ा कड़क करके खड़े होगये की दो चार पड़ने ही वाली है। आप जानते हैं कि ताऊ की कसूर पूछने की आदत नही है, चुपचाप हड्डियां कड़क करके खड़ा होजाता है।

ताई आंख दिखाते हुए बोली, आज लठ्ठ का इस्तेमाल नहीं करूंगी बस आज तो तुम जो चाय चढ़ाकर गए थे उसे पीयो, यही सजा है तुम्हारी। और वो छाछ वाली चाय का पतीला हमारी तरफ खिसका दिया।
पहली ही घूँट में जो मुंह का स्वाद किरकिरा हुआ वो अभी तक नही सुधरा। हम चाय छोड़कर निकल भागने की फिराक में थे पर देखा वो लठ्ठ लिए दरवाजे पर पीढ़े पर बैठी खुद की बनाई चाय पी रही थी।

डर के मारे सारी चाय पी गए जैसे भगवान भोलेनाथ ने विष का आचमन किया था। वो तो भगवान थे सो इतने युगों से भी विष उनके गले मे ही विराजमान है। हम ठहरे साधारण प्राणी , हमको गले मे अटकाने की कला आती नही सो गले से होती हुई सीधी पेट मे उतर गयी। पेट में पहुंचकर उस चाय ने हमारी क्या हालत की होगी, यह आप समझ सकते हैं।

अब बताइये ऐसे में कोई कैसे पोस्ट लिख सकता है। तो आज अपुन कुछ नही लिखेंगे और कमेंट में भी सिर्फ लाइक बटन ही दबाएंगे।

ताऊ की कार मक्खियों के दहेज में

कल IPL का मैच देखने जाना था तो कई महीनों से धूल फांकती कार की सुध ली। स्टेडियम जाते समय कार में चार पांच मक्खियां को आपस मे बात करते सुना। शायद ये एक आदर्श मक्खियों का परिवार होगा।  पहली वाली अपने मोबाइल को दोनों हाथों में दबाए की बोर्ड को जोरों से दबाए जा रही थी तो दूसरी इयरफोन कान में लगाये झूमे जा रही थी जैसे उसमे माताजी आगई हों।
तीसरी वाली ने पहली से कहा - अरे बहुत देर से देख रही हूं तू फोन छोड़ ही नही रही है, ला अब मुझे देदे, बस बहुत होगया, मेरा ब्वायफ्रेंड चैट के लिए कबसे फ्री के हॉटस्पॉट पर इंतजार करता होगा। और उसने झट से अपना फोन उसके हाथ से खींच लिया और अपने वाले को चैट पर लेने लगी। शायद नेट कनेक्शन कमजोर रहा होगा तो उसने फोन लगा कर बोला - जानू ये तुमने जो फोन दिया है ना इसमें नेट ढंग से नही चलता। मुझे ना... तुम वो 4G वाला फोन दिला दो।

 
 उधर इसका ब्वायफ्रेंड जो कि एक दुबला पतला कॉकरोच था उसकी आवाज आई - तुमको नए फोन की सूझ रही है और यहां धंधा पानी मन्दा चल रहा है ऊपर से सरकार का सफाई अभियान चल रहा है, जान बचाने के लाले पड़े हुए हैं, कहीं कुछ खाने छिपने को सीलन भरी वातानुकूलित जगह नही मिल रही है।
इस पर मक्खी छोरी भड़क गई और बोली - जा आज से अपनी दोस्ती खत्म... तू अपनी देखभाल नही कर सकता तो मेरी क्या करेगा? तेरे से अच्छी तो मैं हूँ जो ताऊ की कार में जगह बनाली। ताऊ ना कभी बाहर से कार पर कपड़ा मारता है और ना अंदर से। बस एकदम 5 स्टार में रह रहे हैं आराम से।

चौथी मक्खी जो शायद पहली व दूसरी की अम्मा रही होगी वो धीरे से बोली - अरी ओ नाशपीटी, जरा धीरे बोल,  कहीं ताऊ ने सुन लिया तो कार सर्विस पर डाल देगा और रोओगी अपनी किस्मत को।
पहली मक्खी बोली - अरी अम्मा, तू भी बहुत भोली है, ताऊ ने पैदा होने से लेकर आज तक अपनी प्रोफाइल फोटो तो बदली नही वो क्या खाक कार की सर्विस करवाएगा?

तभी उस मक्खी छोरी का ब्वायफ्रेंड कॉकरोच भी वहां आ पहुंचा। वो बेचारा शायद दोस्ती टूटने की गीदड़ भभकी की वजह से डरकर सर पे टांगे लटकाए चला आया होगा। उसको आते ही मक्खी अम्मा ने एक बून्द पानी पिलाया और बोली -  देखो बेटा, हमारे पास भगवान का दिया सब कुछ है, ये 5 स्टार घर है जिसमे गर्मी के लिये ये बीच का हिस्सा है और सर्दी के लिये आगे का हीटर वाला इंजन रूम है।  अब तो तुम दोनों शादी कर ही लो। रहने की फिक्र मत करो। ताऊ की कार की डिक्की में तुम दोनों अपना घर बसा लेना और इसे हमारी तरफ से दहेज समझ लेना। मक्खी छोरी और कॉकरोच दोनों प्रसन्न मुद्रा में डिक्की का मुआयना करने चले गए।

सेल्फी और कृष्ण कन्हैया की मुरली

यूं तो सेल्फी का जन्म 1839 में फिलाडेल्फिया के रॉबर्ट कॉर्नेलिअस'  के नाम दर्ज हुआ सुनते हैं पर यह बात गले नही उतरती। सेल्फी का जन्म कन्हैया ने किया था। असल मे उनकी मुरली कोई साधारण मुरली नही थी बल्कि उस मुरली में एक सेल्फी कैमरा भी लगा था।

इंसान सेल्फी का इतना दीवाना क्यों है क्योंकि सेल्फी दूसरों का ध्यान अपनी तरफ खींचने का एक शानदार माध्यम है। कन्हैया ने इस विधा का भरपूर दोहन किया, इसी सेल्फी कला में निपुण होने के कारण वो चौसठ कला निधान बन पाए थे। गोपियों का संग साथ भी इसी सेल्फी की बदौलत था, चली आती थी सेल्फी खिंचवाने। अब बताइये भला आज कौन चौसठ कला निधान नही बनना चाहेगा? बच्चे बूढढे जवान सभी कृष्ण बनने की जुगत भिड़ा रहे हैं इसके पीछे मुख्य कारण यही है। और इसी कारण सब कम्पनियां फोन भी सेल्फी कैमरे के गुणगान के साथ बेचती हैं।

पुराने जमाने मे एक छोरा और एक छोरी कहीं एकांत में दिख जाए तो जो लठ्ठ परसाद की परसादी भोग में मिलती थी वो कई सठियाये लोगों को याद होगी।

पर आज...साहब आज के जमाने का क्या कहना, अभी परसों का किस्सा है, पड़ौस की छोरी राधा भरी दोपहर जलेबी घाट पर रमलू धोबी के छोरे सखिया के साथ पकड़ी गई। होहल्ला मचा, छोरी के बापू तक शिकायत पहुंच गई और छोरी से पूछा तो वो बोली -  बापू ये सारे मुझसे जलते हैंगे, मैं तो सखिया के पास सेल्फी खिंचाने आई थी। कसम से बापू उसने सेमसंग का मस्त सेल्फी वाला फोन खरीदा है, आ चल तेरी भी खिंचवा देती हूँ।

हम तो सन्न रह गए छोरी की हाजिर जवाबी और हिम्मत पर। हमने तो ना जाने सेल्फी खिंचवाने वाले पोज में पकड़े जाने पर कितना लठ्ठ परसाद खाया था और एक ये जमाना है।  कसम ऊपर वाले तूने भी ताऊ से खूब दुश्मनी निकाली है जो 60 वर्ष पहले ही इस दुनिया मे टपका दिया। अरे ताऊ तेरी कौनसी भैस खोल लेता जो तू सेल्फी वाले जमाने मे ताऊ को इस दुनिया मे उतारता तो।

शेयर मार्केट में ताऊत्व का महत्व

भक्त जनों, आजकल शेयर मार्केट उछाल पर है और हमेशा से ही शेयर मार्केट को लोग शार्टकट में पैसा कमाने का जरिया समझते आये हैं। और ताऊ गवाह है , और थोड़ा बहुत इतिहास और भगवान भी गवाह है कि इस मार्केट से ताऊओ के अलावा कोई भी कमाना तो दूर, अपना पैसा भी वापस घर नहीं ले जा पाया है। 

बॉलीवुड में पहले एक कहावत प्रसिद्द थी की हर आदमी अपना भाग्य आजमाने फिल्म लाइन में आता है अपना लौटा भर कर और अपना लौटा मुम्बई के समंदर में खाली करके लौट जाता है और बॉलीवुड के समंदर में इन लौटो की वजह से ही कभी सूखने की कोई नौबत नही आती। और यही कहावत शेयर मार्केट पर भी लागू होते दिखाई देती है, ये ताऊ का अपना नजरिया है आपका कुछ और भी हो सकता है।

यहां ललचाने के तरीके आला दर्जे के हैं, कल ही  Dishman Pharma 20 % प्रतिशत बढा और आज भी 10% प्रतिशत बढा, लेकिन कमाया किसने? कमाने वाले सिर्फ वो हैं जिन्होंने लम्बे समय से निवेश कर रखा था। 

इसलिए भक्तजनों आपको सावधान करना ताऊ का फर्ज है कि आप किसी आवेश में ना आये और अपनी गाढ़ी खून पसीने की कमाई को सोच समझकर निवेश करें।

एक बात का ध्यान रखें कि किसी भी तरह के लालच में ना आये, अक्सर आपके पास भी मेसेज आते होंगे की ये शेयर 2 रूपये चल रहा है और पांच सात दिन में ही 20 रूपये हो जाएगा। और होता ये है आपके वो दो रुपये भी खत्म हो जाते हैं। आपको देखना ही हो तो kabra drugs  का उदाहरण देखले की कैसे चवन्नी छाप शेयर 180 रूपये हो गया और वापस चवन्नी छाप हो गया। जिन्होंने पैसा लगाया था उनको बेचने का मौका तक नही मिला।

और अब तो Reliace Industries पर ही 2007 के मामले में वायदा कारोबार में प्रतिबन्ध और पेनाल्टी का आदेश हुआ है। 

याद रखे, इस बाजार में अपने को ताऊ समझने वाले छोटे ताऊओ को बड़े ताऊ नाश्ता पानी समझकर डकार जाते हैं।
रामराम।