
बहुत तेज गति से चलते हुये ताऊ और रामप्यारी उज्जैन गधा सम्मेलन स्थल तक पहुंच गये हैं. चारों तरफ़ गधे और गधियों की बहार ही बहार आई हुई है. देश विदेश से नाना प्रकार के गधे और गधियां इसमे शिरकत करने आये हुये हैं. कुछ ही समय मे सम्मेलन शुरु होजायेगा.
रामप्यारी को फ़िल्मों का बडा शौक है सो जैसे ही उसको मालूम पडा कि करीना, ऐश्वर्या, रानी आदि भी आई हुई हैं ओ वो तो उनके साथ इंटर्व्यु की जोगाड मे निकल ली और ताऊ सम्मेलन स्थल का मुआयना करने लगा. अभी पंडाल और स्टेज का बनने का काम फ़ायनल हो चुका था.
रामप्यारी एक प्रसिद्ध हिरोइन के बच्चे के साथ खेलते हुये
मिडिया मे भी इसके कवरेज के लिये भारी होड मची है. पूरे देश विदेशों का मिडिया यहां इककठा होगया है. जर्मनी से
राज भाटिया आगये कवरेज के लिये. जिनका शानदर जेडोंक सबसे अनूठा लग रहा था. और सभी लोग उसको देखना छूना चाह रहे थे.
राज भाटिया जर्मनी से अपने जेडोंक पर सम्मेलन स्थल पहुंचते हुये
तभी
योगिंद्र मोदगिल जी का भी फ़ोन आगया कि ताऊ क्या करुं रास्ते मे नदी पड गई है और कैसे पहुंचू? तो ताऊ ने बताया कि गधे सहित पानी मे घुस जावो आंख मींच कर. भगवान भोले नाथ सब भली करेंगे. और उन्होने ऐसा ही किया
योगिंद्र मोदगिल रास्ते मे क्षिप्रा नदी पार करते हुयेऔर करीब एक घंटा बाद ताऊ और राज भाटिया के विशेष आग्रह पर अपने गधे पर जगाधरी के घडे लादे हुये, और मुस्कराते हुये योगिंद्र मोदगिल भी आ पहुंचे गधा सम्मेलन के कवरेज के लिये.
योगिंद्र मोदगिल जगाधरी के घडे लादे सम्मेलन स्थल पहुंचते हुयेअब हुआ यह कि ताऊ, राज भाटिया जी और योगिंद्र मोदगिल जी यानि तीन तीन हरयाणवी एक जगह मिल गये तो फ़िर क्या कहने जब जगाधरी के घडे भी साथ हों? यूं भी तीनो काफ़ी दिनों बाद मिले थे सो प्रेम भी काफ़ी उमड घुमड रहा था सो तीनों ने एक ही तंबू मे ठहरना उचित समझा. तो तीनों ने एक साथ ही रहने ठाह्रने की व्यवस्था करली और कवरेज भी साथ साथ ही करने लगे.
जो अतिथी पहुंच चुके हैं उनका रहने ठहरने का माकूल प्रबंध किया गया है. अतिथियों के लिये एक बहुत ही बडी भोजन शाला सम्मेलन स्थल के नजदीक ही बनाई गई है. आईये हम आपको सबसे पहेले इस अथिति शाला के अंदर की झलक आपको दिखलाते हैं.
जैसे ही हम भोजन शाला के गेट पर पहुंचते हैं वहां पर हमारा स्वागत अथितिशाला के मेनेजर श्री संतानंद गर्दभराज करते हैं. और हमने उनसे प्रश्न पूछना शुरु किया.
ताऊ : संतानंद जी साहब आप किस तरह का भोजन अथितियों को परोसते हैं?
संतानंद : जी देखिये, हम बहुत ही उच्च गुणवत्ता वाला भोजन परोसते हैं जिसमे साफ़ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखा जाता है. हमारे अधिकतर मेहमान विदेश से भी आते हैं इसलिये हम इस मामले मे कोई कंप्रोमाइज नही कर सकते;
राज भाटिया : संतानंद जी आप ये बताईये कि आपका आज का मेनू क्या है? यानि आप आज गधों को..माफ़ किजिये .. यानि मेहमानों को क्या परोस रहे हैं?
संतानंद : हां ये आपने अति उत्तम सवाल किया है. देखिये आज हम सबसे पहले तो उज्जैनी दाल बाफ़ला परोस रहे हैं और उसके साथ लड्डू तो है ही.
योगिंद्र मोदगिल : और स्वीट डिश मे क्या परोसेंगे आज?
संतानंद : देखिये युं तो लड्डू अपने आप मे दाल बाफ़लों के साथ स्वीट डिश होता है पर मेहमानों की पसंद का खयाल रखते हुये आज विषेष रुप से केशरिया जलेबी और गुलाब जामुन भी परोसा जा रहा है. आईये आपको दिखाता हूं.
मेहमान दाल बाफ़ले, जलेबी और गुलाब जामुन खाते हुयेतीनों बडे खुश होते हैं और संतानंद जी के प्रबंध की बडी तारीफ़ करते हैं और उनकी इस खान पान की बहुत बढिया रिपोर्टिंग करने का आश्वासन देते हैं. उसके बाद तीनों को भोजन शाला मे दाल बाफ़ले खिलाये जाते हैं. और तीनों बडे मस्त होकर संतानंद जी तारीफ़ करते हैं.
ताऊ : संतानंद जी आपने हमें सिर्फ़ जलेबियां ही खिलाई पर गुलाब जामुन तो खिलाये ही नही?
संतानंद : देखिये..गुलाब जामुन सिर्फ़ गधों के खाने के लिये हैं आप तो गधे नही हैं?
ताउ : अरे संतानंद जी, गोली मारिये. ये तो कहने की बातें हैं कि गुलाबजामुन गधों के खाने के लिये हैं? अरे इतने सुंदर गुलाब जामुन हैं कि मुंह मे पानी आरहा है. आप ओ खिलवाईये हमको भी. लोग तो गुलाब जामुन खाने के लिये गधे को बाप बना लेते हैं फ़िर क्या गुलाब जामुन खाने के लिये हम खुद गधे नही बन सकते क्या?
संतानंद : जी बिल्कुल ताऊ, आप तो लगते भी पैदायशी गधे हैं. और संतानंद आवाज लगाता है और एक गधेडी आती है. संतानंद उसको इनके लिये गुलाब जामुन लाने के लिये कहता है. पर वो बताती है कि अभी खत्म होगये हैं. अब एक घंटे बाद ही तैयार हो पायेंगे.
संतानंद उन तीनों को आश्वस्त करता है कि शाम को गुलाब जामुन आपके तंबू पर पहुंच जायेंगे. ये तीनों भी सोचते हैं कि ये अच्छा रहेगा..अभी तो दाल बाफ़ले से पेट भी फ़ुल है..शाम को तबियत से दबाकर गुलाब जामुन खायेंगे और आकर अपने तंबू मे सो जाते हैं.
आगे का हाल खूंटे पै पढो.
इब खूंटे पै पढो:-
ताऊ, राज भाटिया और योगिंद्र मोदगिल दाल बाफ़ले खाकर सोने के बाद ऊठे तो देखा कि गुलाब जामुन अभी तक नही आये हैं. संतानंद जी को फ़ोन किया तो उन्होने कहा कि गुलाब जामुन भिजवा दिये हैं बस पहुंचते ही होंगे.
थोडी देर बाद एक कंटेनर आधा किलो गुलाब जामुन का एक आदमी देकर गया.
ताऊ बोला - यार भाटिया जी इत्ते से क्या होगा? इससे तो मेरा ही पेट नही भरेगा तो तीनों का तो कोई सवाल ही नही है.
भाटिया जी और मोदगिल जी बोले बात तो एकदम ठीक है, पर एक काम करिये इनको बांट कर खा लेते हैं..बहुत ही जोरदर लग रहे हैं देखने में तो?
ताऊ बोला - अरे भाई ..गधों के गुलाब जामुन देखने मे ही क्या खाने मे भी जोरदार होते हैं. एक काम करो..तीनों को तो इसमे कोई मजा नही आयेगा..और ना ही पेट भरेगा... एक काम करता हूं..मैं तीनों मे बडा हूं तो इनको मैं खा लेता हूं. तुम दोनों को इतना त्याग तो करना ही चाहिये? आखिर भरत और लक्ष्मण ने भी तो किया था?
योगिंद्र मोदगिल जी बोले - भ्राताश्री और तो जो इच्छा हो वो त्याग करवा लो पर गुलाब जामुन वाली बात पर त्याग नही चलेगा और आप दोनों बडे हो तो आप लोगों को यह त्याग मेरे हक मे करना चाहिये. जैसे राम ने भरत के हक मे किया था और तीनों झगडने लगे.
राज भाटिया जी ने सोचा - ये तो छोटे बडे बनकर गुलाब जामुन खा ही जायेंगे. मैं बीच में अच्छा फ़ंसा सो वो बोले - भाई न्याय की बात तो ये है कि इनको रख दो और सो जावो. रात मे जो भी सबसे बढिया सपना देखेगा वो ये गुलाब जामुन सुबह ऊठकर खा लेगा.
इस बात पर तीनों तैयार होगये और सो गये.
अब सुबह तीनो ऊठे और राज भाटिया ने सपना सुनाना शुरु किया. वो बोले भाई रात को अरविंद मिश्रा जी मेरे सपने मे आये और मुझे काशी विश्वनाथ के दर्शन करवा दिये. वाह क्या सुंदर सपना था? इससे सुंदर तो कुछ सपना हो ही नही सकता.
अब योगिंद्र मोदगिल ने सपना सुनाना शुरु किया - अरे भाटिया साहब..आपने तो मुर्ती के दर्शन किये होंगे. मेरे साथ क्या हुआ कि समीरलाल जी अपनी उडनतश्तरी लेके आगये और बोले - चलो कवि महाराज, हम कैलाश पर्वत जा रहे हैं दर्शन करने. आप को भी करवाये देते हैं. ओहो हो..क्या साक्षात भोलेनाथ और मां पार्वती के दर्शन हुये...मैं तो धन्य होगया. और इससे बढिया सपना तो अब ताऊ का भी क्या होगा? अब गुलाब जामुन मैं ही खा लेता हूं. और गुलाब जामुन का कंटेनर हाथ मे ऊठा लिया.
गुलाब जामुन का कंटेनर खाली पडा था..बस थोडी सी चाशनी लगी थी उसमे.
योगिंद्र मोदगिल और राज भाटिया जी ने ताऊ से पूछा तो ताऊ रोते हुये बोला - यारो मेरा सपना सुन लो ...सब कुछ समझ आ जायेगा. अब ताऊ ने बोलना शुरु किया -
भाईयो, रात को सपने मे आपको तो भले आदमी मिल गये और भोले नाथ के दर्शन करवा दिये और मेरे सपने मे ब्लाग सुर्पणखां आगयी. और क्या बताऊं? आते ही लाल आंखे निकाल कर मेरी छाती पर सवार होगई.

भाटिया जी : फ़िर क्या हुआ?
ताऊ - अरे भाटिया साहब होना क्या था? मुझसे कहने लगी की ताऊ जल्दी से ये गुलाब जामुन खा जावो..मुझे इसकी गंध अच्छी नही लगती...वर्ना मैं तुमको खा जाऊंगी और मेरी गर्दन पकड कर ऊपर उठा लिया... और लाल आंखे चुडैल सरीखी दिखाई तो मजबूरी मे डर के मारे मुझे वो गुलाब जामुन खाने पडे.
योगिंद्र मोदगिल बोले - तो उस समय हमको उठाना था ना ..सब बांटकर खा लेते?
ताऊ बोला - अरे भाई..मैने तुम दोनों को बहुत ढूंढा पर तुम तो कैलाश पर्वत गये हुये थे और भाटिया जी वाराणसी गये हुये थे. तो क्या करता? अगर तुम दोनों मुझे अकेला छोडकर नही जाते तो उस सूर्पणखां की इतनी मजाल की मुझे अकेले को गुलाब जामुन खाने को कहने का साहस भी कर पाती?