Powered by Blogger.

दगाबाज तोरी बतियाँ कह दूंगी..हाय राम कह दूंगी !


ताऊ डाट इन की यह   शुरूआती पोस्ट्स (अक्टूबर-2008) में थी जो  राष्ट्रीय समाचार पत्र हमारा मैट्रो में 20 मई 2013 को प्रकाशित हुई है. जिसकी सूचना श्री रतन सिंह जी शेखावत द्वारा फ़ेसबुक पर   मिली. मूल पोस्ट में हरयाणवी शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा हुआ था. हरयाणवी शब्दों के साथ पढने की इच्छा हो तो यहां पर मूल पोस्ट उपलब्ध है.  यहां शब्दों को थोडा बदल दिया गया है   जिससे सभी समझ सकें तो थोडे हेर फ़ेर के साथ  इस गर्मी के मौसम में यह पोस्ट आपको असली हरयाणवी फ़्लेवर की कुल्फ़ी फ़ालूदा विद रूहाफ़्जा  का आनंद देगी, लीजिये नोश फ़रमाईये.



अक्सर ऐसा हो जाता है की हम अपने बारे में किसी दुसरे द्वारा कही बात को, अपने  मनघडंत डर से अपने बारे में ग़लत तरीके से समझ लेते हैं.  भले ही वो बात  हमारे बारे में नही कही गई हो,  और परिणाम स्वरुप हम बिना बात दुःख पाते हैं.   ताऊ ने इसी बेवकूफी में अपना पैसा भी गंवाया और ख़ुद अपनी ही बेवकूफी से इस भरी गर्मी में   इज्जत का कुल्फ़ी  फालूदा बनवा लिया.

ये घटना काफ़ी ज्यादा पुरानी है.  बात उन दिनों की है जब हम खेती बाडी किया करते थे.  और म्हारै बाबू (पिताजी)  के डर से हम खेत पै जाकै दोपहर में छुपकर  ताश पत्ते वाला जुआ 5/7 जने मिलकै खेल्या करते थे. म्हारा खेत भी बिल्कुल रोड के किनारे पर  ही था पर गांव  से थोडा दूर. उन दिनों   गांव में हमसे   ज्यादा पढा लिखा भी कोई और  नही था,   इसलिये गांव में  सब हमारी बहुत ज्यादा  इज्जत भी करते  थे.   हर अच्छे बुरे काम में हमारी सलाह आखरी सलाह हुआ करती थी गांव  वालों के लिए.
                                         
उस समय में खेती बाडी करने वाले लोगों को जेठ वैशाख के गर्मी भरे दिनों में कोई काम नही होता था.  भारत खेती प्रधान देश था  (अब कौन सा है? भगवान जाने), खेत खाली रहते थे. इसी वजह से इस खाली समय का उपयोग शादी ब्याह जैसे जरूरी काम निपटाने में होता था या खाली बैठे समय काटने के लिये ताश-पत्ती चौपड वाले खेल खेलते हुये बीतता था.

नब्बे फ़ीसदी शादी विवाह के काम इसी समय में निपटाये जाते थे क्योंकि बारात के परिवहन का साधन उस समय ऊंट, घोडे,  बैलगाडी या रथ हुआ करते थे जो गर्मी में कोई काम नही होने की वजह से खाली मिल जाते थे. खेत भी खाली रहते थे जहां बारात के सोने के लिये रात में गांव से मांगकर लायी हुयी खटियाएं डाल दी जाती थी. दूल्हे और दूल्हन के लिये विशेष रूप से रथ का इंतजाम किया जाता था.

उन दिनों  हमारे गाँवों में सांग, भजनी और मंडली बहुत लोक प्रिय थे. मनोरंजन के उन दिनों में यही साधन हुआ करते थे.  कई लोगो का तो अब भी इनमें   नाम चलता है.  पर अब वो बात नही रही. ये सारी लोक संगीत की परंपराएं अब विलोप होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं.

उन दिनों  मंडली में स्त्री पात्रों को  भी पुरूषों द्वारा निभाया जाता था.  पर हम जिस समय की बात कर रहे हैं उस समय स्त्री पात्र करने  के लिए कुछ मंडली वालों  ने स्त्री पात्रों के लिये  लड़कियां रखनी शुरू कर दी थी. इस आकर्षण के कारण  उन मंडलियों की काफी डिमांड रहती थी.  शादी ब्याह में बारात के साथ यह भी रुतबे के लिए जरुरी था. जो मंडली का खर्च नही उठा सकता था वो भजन मंडली ले जाता था. और ज्यादा  कुछ ना हो तो   ग्रामोफोन रिकार्ड बजाने वाले को ही ले जाता था.  आदरणीय सतीश सक्सेना व डा. दराल जैसे बुढे  बुजुर्ग लोगो ने ऐसे ही मौको पर "काली छींट को घाघरों निजारा मारै रे" खूब सूना होगा. जो चाबी वाले ग्रामोफ़ोन से बजाया जाता था और    इसका स्पीकर किसी ऊँचे से पेड़ पर लगा दिया जाता था.  यानी सब अपनी  अपनी हैसियत के हिसाब से बारात के मनोरंजन का इंतजाम रखते थे.  उन दिनों बारात भी 3 से 5  दिन तो ठहरती ही थी.  ज्यादा जिसकी जैसी श्रद्धा हो.

एक दिन, गर्मी भरी  दोपहर काटने के लिये   हम कुछ दोस्त लोग  खेत के  कुँए पर  बैठ कर  ताश पत्ते वाला जुआ  खेल रहे थे. तभी उधर से मंडली करने वाले जा रहे  थे. उसके साथ भी दो लड़कियां नाच गाने के लिए थी.    वो मंडली हमारे ही गांव  में जा रही थी.  गरमी ज्यादा थी.  उनका सामान ऊँटो पर लदा  था और साथ में  एक बैलों से जुता हुआ  रथ भी  था.  छाया और पानी का इंतजाम देखकर वो  आकर हमारे कुएं पर   रुक गये. हमने भी उनको  पानी वानी पिलवाया.  उनके ऊँटो और बैलों ने भी पानी पीया. वो लोग सुस्ताने लगे और हम अपने दोस्तों के साथ अपनी ताश की अधूरी छूटी बाजी पूरी करने में लग गये.

थोडी ही देर बाद  उस रथ में से दो सुंदर सी लड़कियां भी उतर के बाहर  आई और उन्होंने  हमारी तरफ़ एक अजीब सी नजर डालते हुये कुएं पर   पानी पीकर  वापस रथ में जा कर बैठ गई. हमारे ही  गांव में  रात को  उनका प्रोग्राम था. पहले ही बता चुके हैं कि हम गांव के अति गणमान्य और सबसे ज्यादा पढे लिखे थे सो  हम भी आमंत्रित थे उस जगह.

रात को हम सबसे अगली लाइन में बैठे थे  बिल्कुल स्टेज के  सामने.  और चुंकी लड़कियां मंडली में  आई थी नाचने के लिए,  तो आसपास के गाँवों के लोगो की जबरदस्त भीड़ टूट पडी   थी. कहीं पांव रखने की  भी जगह नही मिल पा रही  थी.  जहां तक मुझे याद पडता है यह नेकीराम की मंडली थी जिसे गांवों में नेकीडा की मंडली कह कर बुलाया जाता था और उस समय की यह  बहुत प्रसिद्ध मंडली  थी. शायद महिला पात्रों को महिलाएं ही निभायें, की शुरूआत इसने ही की थी.

जैसे ही वो नर्तकियां स्टेज पर आई , चारों तरफ़ सीटियाँ बजने लगी और लोग सिक्के नोट फेंकने लगे.  उस जमाने का इससे बढिया मनोरंजन नही था.  सक्सेना जी व  दराल साहब जैसे  पुराने लोग तो इसको याद कर कर के अभी भी  रोमांचित हो रहे होंगे और नए शायद महसूस कर पाये.  मतलब मंडली में  महिला नर्तकी का होना भी उस समय आश्चर्य था.  सो भीड़ ऐसी मंडलियों में जुटती ही थी और जनता से कमाई भी तगडी होती थी.
                                                                     
जैसे ही नर्तकी स्टेज पर आई उसने ताऊ की तरफ़ झुक कर सलाम पेश किया.  ताऊ बड़ा हैरान परेशान.  फ़िर ताऊ ने सोचा की दोपहर ये अपने कुए पर पानी पीने रुकी थी सो शायद पहचान गई है अपने को. इसलिये सलाम किया होगा.

अब सारंगिये ने जैसे ही सारंगी पर गज फेरा और नर्तकी  ने  घुंघरू बंधे बाएँ पाँव की जो ठोकर स्टेज पर मारी तो पब्लिक वाह वाह कर उठी.  सब झुमने  लग गये.  नर्तकी ने नृत्य के दो चार तोडे दिखाये और इतराते हुये गाना शुरू किया ...दगाबाज तोरी बतियाँ कह दूंगी ... हाय राम .. कह दूंगी .... दगाबाज.....   



उधर तबलची ने तबले पर तिताला मारा और नर्तकी लहरा गई.   ताऊ का कलेजा धक् धक करने लगा.... अरे ये क्या गजब कर रही है ? बड़ी दुष्ट है ये तो.   ताऊ ने समझा की कुएं पर दोपहर में इसने पानी पीते समय ताऊ को  ताश पती से जुआ खेलते  देख लिया था..... और अब  सबके  सामने  पोल खोल कर  इज्जत ख़राब करेगी.

ताऊ को  अपनी इज्जत बचाने का और कोई तरीका नही सूझा सो  डर के   मारे जल्दी से सौ रूपये का नोट नर्तकी को न्योछावर कर दिया....चलो...सौ का नोट गया कोई बात नही...इज्जत बची तो सब कुछ बच जायेगा.
ताऊ ने यह नोट बतौर राज को राज ही रहने देने के लिये दिया था. वर्ना उस जमाने में सौ का नोट.... अरे भाई कोई  किस्मत वाला ही उसके दर्शन कर पाता था.  पर ताऊ को इज्जत बडी प्यारी थी.

इधर  नर्तकी ने  सोचा कि   ताऊ को यह  गाना बहुत पसंद आया है और मालदार आसामी लग रहा है तो वह   और लहरा लहरा कर गाने लग गई... दगाबाज... तेरी...बतियाँ  कह दूंगी ! ताऊ ने समझा की अब तो  ये  सीधे सीधे ब्लेक्मेकिंग पर  उतर आई है और इज्जत का बचना जरूरी है सो एक एक करके  जेब के सारे नोट देने के बाद  आखिर में अंगुली में पहनी सोने की अंगूठी भी रिश्वत में दे आया.  पर ससुरी इज्जत को नही बचना था सो कुछ नोट और अंगूंठी से कैसे बचती? इज्जत इतनी सस्ती भी नही होती.

जब ताऊ ने इतने सारे नोट और सोने की अंगूठी भी दे दी तो नर्तकी ने समझा कि आज तो ताऊ बडा प्रसन्न हो गया है, माल पर  माल लुटाये जा रहा है. लगता है गाना बहुत ही पसंद आ गया है....उधर तबलची ने फ़िर तबले पर हाथ मारा और नर्तकी ने फ़िर से आलाप लेते हुये    झुमकर  गाना शुरू कर दिया ..दगाबाज तोरी...बतियाँ... कह दूंगी ! अब ताऊ क्या करे ?  घबरा गया बिचारा. कहीं हार्ट अटेक ना आ जाये....क्या करे अब? और उधर तो आलाप पूरे शबाब पर था ... बतिया. कह दूंगी... हाय राम ...कह दूंगी .... जी कह दूंगी ! 

इधर ताऊ का सारा ध्यान अपनी इज्जत बचाने पर टिका था....   ताऊ ने  सोचा की शायद इसकी नजर अब मेरे  गले में पडी  सोने की आखिरी बची चैन पर है...अंगूठी तो पहले ही दे चुका था...नोटों से भरी जेब भी खाली हो चुकी थी..... सो इज्जत बचाने की आखिरी कोशीश में  उठकर वो सोने की चैन भी उस को दे आया.

अब क्या था ? अब तो मंडली का  मास्टर जो हारमोनियम बजा रहा था.    वो भी जम गया वहीं पर और हारमोनियम पर झूम उठा.   तबलची ने  जो एक रपटता हुआ टुकडा फ़िर  बजाया तो पब्लिक  झूम उठी. चारों तरफ़ सीटियां ही सीटियां.... और नर्तकी  बेसुध होकर  गाये जा रही थी .. दगाबाज   तोरी बतियाँ कह दूंगी.. !   हाय..हाय..राम  बतियाँ ..कह दूंगी...दगाबाज..तोरी...  तबलची  उसे जरा भी सांस लेने का मौका नही देना चाहता था ...क्या पता ताऊ जैसा दिलदार आसामी फ़िर कब फ़ंसे? नर्तकी जी जान लगाकर   बेसुध सी  नाचे जा रही थी... पता नही अब वो  ताऊ से और क्या महले दुमहल्ले लेना चाहती थी? अब तो ताऊ के शरीर पर सिर्फ़  कोरे  लत्ते ही बचे थे.

इधर  ताऊ बिचारा परेशान हो गया और उधर जोर शोर से  बतियाँ कह देने की धमकी मिले जा रही थी.  ताऊ की  हालत सांप छछूंदर जैसी देखने लायक हो रही  थी. आखिर कब तक धमकियां बर्दाश्त करता?

ताऊ   खडा होकर  जोर से चिल्ला कर बोला  -- अरे इब के म्हारै प्राण लेगी ? जेब खाली कर दी , गात ( शरीर)  नंगा कर दिया ! बतियाँ बता दूंगी... बतियाँ बता दूंगी....  तो ले इब तू के बतावैगी ? मैं ही बता देता हूँ की हम कुँए पै बैठ कै जुआ खेल्या करते हैं ! इब तो हो गई तेरी मर्जी पूरी ?  

क्या है ताऊ का अस्तित्व और हकीकत?


श्री ज्ञानदत्त जी पांडे  जो कि ब्लागजगत के सम्माननिय और प्रथम पीढी के ब्लागरों में से एक हैं,  और जो अपनी नियमित और सारगर्भित पोस्ट्स के लिये जाने जाते हैं, ने शायद  सबसे पहले 3 dec. 2008 को  अपनी पोस्ट यह ताऊ कौन है  के द्वारा जिज्ञासा प्रकट की.



इसके पश्चात सभी ब्लागर्स में ताऊ शब्द एक पहेली बना रहा. मेरे ही शहर के सम्माननीय ब्लागर श्री दिलीप कवठेकर तो एक कदम और आगे जाते हुये हमारे शहर की उस पान की दूकान तक भी पहुंच गये जहां  "कृपया यहां ज्ञान ना बांटे, यहां सभी ज्ञानी हैं" की तख्ती लगी है. वहां पूछताछ करने पर पान वाले ने ताऊ के विषय में अनभिज्ञता ही जताई. यदि कोई ताऊ होता  तो वह बता पाता.

इस दरम्यान कुछ ब्लागर्स ने ताऊ से उसके आफ़िस/घर में मुलाकात का दावा किया पर अंतर सोहिल ने अपनी पोस्ट क्या हम असली ताऊ से मिले थे  लिख कर वापस उन दावों को शक के घेरे में ला दिया. 

ऐसा ही एक दावा डा. टी.सी. दराल ने अपनी पोस्ट    "ताऊगिरी का इस्तेमाल करते हुये तनाव हटायें"   में किया है कि वो ताऊ से एक बार मिले हैं लेकिन जिस ताऊ से मिले हैं उसकी शक्लो सूरत बिल्कुल जुदा थी. यानि बात यहां भी और उलझती नजर आ रही है.  

इसी पोस्ट पर की गई अपनी टिप्पणी में सुश्री   अल्पना वर्मा  ने निम्न टिप्पणी करते हुये मामला कुछ सुलझाने की कोशीश की है.

बहुत सही लिखा है आप ने.
यूँ तो बहुत से लोग आज तक नहीं जान पाए हैं कि आखिर ये ताऊ कौन है?
फिर भी काफी लोग अब उनकी सही पहचान जानते हैं.
शुरू में तो लोग अंदाज़ा लगाते थे कि शायद कोई महिला है ,
या कोई जाना माना ब्लोगर छद्म नाम से लिख रहा है.
लेकिन सभी के अनुमानों पर पानी फेरते हुए उन्होंने अपना एक मुकाम बना लिया है.
अब यहाँ एक सशक्त पहचान हैं.उनका साक्षात्कार का कार्यक्रम भी बहुतों से परिचय करने में सक्षम रहा.
ताऊ पहेली तो यादगार है ही !
उन्हें ढेरों शुभकामनाएँ कि ऐसे ही सब को हँसाते -गुदगुदाते रहें.

वैसे स्वयं  ताऊ ने  आज तक  किसी भी दावे का समर्थन या खंडन नही किया है.  जैसा कि सभी जानते हैं  ताऊ को फ़ेसबुक के फ़ंडों का अभी कोई विशेष ज्ञान नही है,  लेकिन आज अचानक फ़ेसबुक पर Like का चटका लगाते लगाते गलती से खुद के  मेसेज बाक्स पर तगडा चटका लग गया और निम्न मेसेज दिखा.


  • Conversation started March 27

    i have never seen such a human face

इस मेसेज को पढकर ताऊ विवश हो गया है कि भक्तों की जिज्ञासा का शमन करना अति अनिवार्य है वर्ना मुश्किलें और बढ सकती हैं.

वैसे  ताऊ का मुख व ताऊ  शब्द कौन से तत्व और कौन सी धातु से बना है? तकनीकी रूप से  यह तो शब्दों का सफ़र वाले श्री  अजित बडनेरकर ही बता सकते हैं या सिर्फ़ ताऊ ही, क्योंकि इस  शब्द की  पौराणिक कहानी कोई नही जानता. यह शब्द आज तक रहस्य ही बना हुआ है.

श्री राबिन दत्ता साहब के मेसेज द्वारा अभिव्यक्त जिज्ञासा  का जवाब  फ़ेसबुक पर देने की बजाये यहां ब्लाग पर देना उचित जान पड रहा है.   आशा है ताऊ के बारे में फ़ैली  सभी भ्रांतियां और कल्पनाएं दूर हो सकेंगी.

जहां तक ताऊ की उत्पत्ति का सवाल है यह   रामायण कालीन बात है. जब माता सीता का अपहरण दादा लंकेश्वर ने कर लिया था और उन्हें लंका की अशोक वाटिका में सख्त  पहरे में रखा गया था. पहरेदारों में अनेकों राक्षस/राक्षसनियां ऐसे भी थे जो माता सीता के प्रति सहानुभुति व स्नेह  रखते थे.  और उनका हर प्रकार से मनोबल बढाकर  ध्यान रखते थे.

सेवक/सेविकाओं द्वारा लाख यत्न किये जाने पर भी माता सीता हमेशा  उदास व गुमशुम सी प्रभु श्रीराम की याद में खोयी रहती थी. ऐसे में वहां एक काले मुंह का बंदर फ़ल फ़ूल खाने  आया करता था. वो तरह तरह की आवाजे निकालता और अजीब सी हरकते करता था. बंदर का यह नित्य का कार्य था पर एक दिन उस बंदर की कलाबाजियां देखकर माता सीता के चेहरे पर एक मुस्कान सी दौड गयी. सभी सेवक यह देखकर आश्चर्यचकित रह गये.

बंदर का तो यह नित्य कर्म था, जैसे ही बंदर आता, माता सीता सब वेदनाएं भूलकर उसकी कारगुजारियां देखती रहती,  कभी मुस्करा उठती. धीरे धीरे उस बंदर से उन्हें पुत्रवत स्नेह हो गया. वह बंदर उनके आसपास ही रहता और दोनों में अक्सर बात चीत होती रहती.

जब हनुमान जी सीता माता की खोज में उस क्षेत्र में भटक रहे थे तब इसी काले मुंह के बंदर ने अपनी सांकेतिक भाषा में उन्हें माता सीता के अशोक वाटिका में होने की सूचना दी थी वर्ना इतने राक्षसों की पहरेदारी में  हनुमान जी का वहां पहुंचना असंभव ही था.

समय बीतने के साथ राम रावण युद्ध समाप्त हुआ. भगवान श्रीराम के साथ  माता सीता पुष्पक विमान पर सवार होकर अयोध्या प्रस्थान की तैयारी कर रही थी. माता सीता ने उनकी सेवा में रहे सभी सेवक सेविकाओं को उनकी इच्छा के मुताबिक वरदान दिये. लेकिन उस समय यह काले मुंह का बंदर कहीं दिखाई नही दे रहा था. माता सीता उस बंदर से मिले बिना जाना नही चाहती थी.

भगवान श्रीराम अयोध्या गमन को उतावले हो रहे थे. उन्होनें माता सीता से पूछा कि उस बंदर में ऐसा क्या है जो तुम फ़ालतू में विलंब कर रही हो? माता सीता ने बताया कि नजरबंदी की अवधि में एक वही बंदर था जो मुझे हंसाया करता था वर्ना मैं तो हंसना ही भूल चुकी थी. आप भी मिलोगे तो वो आपको भी हंसा देगा, उसकी शक्ल ही ऐसी है.

भगवान राम भी उस से मिलने को आतुर होगये.  उस बंदर की खोज करायी गई  तो मालूम हुआ कि माता सीता के अशोक वाटिका से जाने की बात पर वह उदास होकर एक कंदरा में पडा है. उसे समझा बुझाकर अशोक वाटिका में लाया गया. बंदर की बातों से भगवान श्रीराम भी चौदह वर्षों  मे जितना नही हंसे थे उससे भी ज्यादा हंसे और युद्ध की सारी थकान भूल गये. बंदर को अपने साथ ले जाने के लिये  उन्होंने विभीषण को आग्रह किया. विभिषण को भला क्या आपत्ति हो सकती थी? यह काले मुंह का बंदर भी उनके साथ पुष्पक विमान में सवार हो गया.

हवाई यात्रा के दौरान  रास्ते में वह सबका मनोरंजन करता रहा. अचानक माता सीता को ख्याल आया कि यह जंगल का जीव है और मैं इसे अपने स्वार्थ वश राजमहल ले जा रही हूं. यह इसके साथ अन्याय होगा. उन्होंने बंदर से पूछा कि क्या वो बंदर से मनुष्य बनना चाहेगा? बंदर ने चूहिया वाली कहानी सुन रखी थी सो विनम्रता पूर्वक बंदर ही बने रहने का कहा.

अब तक विमान अयोध्या के पहले आज के शेखावाटी व  हरियाणा क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा था. अचानक माता सीता के आदेश पर विमान को वहां जंगल में उतार दिया गया. विमान के उतरते समय उस बंदर ने कुछ अजीब सी हरकत और आवाजें की जिससे माता सीता खुलकर हंस पडी, हंसते हंसते उनके पेट में बल पडने लगे, किसी तरह अपनी हंसी काबू में करते हुये वो बंदर से कहना चाह रही थी कि हे तात....और हंसी आने के कारण उनके मुंह से निकला हे ता..ऊऊऊ.... बंदर ने जब अपना ताऊ नाम सुना तो अति प्रसन्न हो गया और माता के चरण स्पर्श करते हुये बोला - माता आपने आज मेरा सही नामकरण कर दिया.

माता सीता ने उसको आशीर्वाद देते हुये कहा - हे ताऊ, तुमने मेरे दुखों के दिनों में हंसा हंसाकर मुझे जीवन दान दिया है. मैं तुम्हारी आभारी हूं और बदले में तुम्हें ऐसा कुछ देना चाहती हूं जिससे  युगों तक तुमको दुनियां याद रखेगी. बंदर बोला - माते,  जो आपकी इच्छा हो मेरे लिये वही आज्ञा है.

माता सीता ने कहा - हे वानर, अब से तुम  ताऊ नाम से पुकारे जावोगे, आज से   इस सुरम्य शेखावाटी व  हरियाणा प्रदेश का समस्त क्षेत्र मैं  तुम्हारे लिये आरक्षित करवा रही हूं, अब से इस प्रदेश पर तुम्हारा यानि ताऊओं का ही राज रहेगा.  अब से इस प्रदेश में घर घर में ताऊ पैदा होंगे जो दुखी इंसानों के चेहरे पर खुशियां बिखरने का काम करेंगे. घर में छोटे बडे सभी उनको तात की जगह ताऊ से संबोधित करते हुये  आदर और सम्मान देंगे. तुम्हें और तुम्हारी ताऊ प्रजाति को कभी  भी दुख नही व्याप्त होगा, तुम अनंतकाल तक  इस धरा पर सुखपूर्वक आनंद लेते रहोगे.

यह कहते हुये माता सीता ने बंदर ताऊ के सर पर स्नेह वश हाथ फ़िराया, हाथ फ़िराते ही बंदर का शरीर तो मनुष्य का हो गया और मुंह उस काले बंदर जैसा ही रहा क्योंकि बंदर पूर्ण रूप से मनुष्य नही बनना चाहता था.

प्रभु श्रीराम ने बंदर ताऊ पर सीता जी का इतना स्नेह देखा तो उन्होनें कृपा पूर्वक बंदर ताऊ को सम्मान स्वरूप एक पगडी (साफ़ा) अपने हाथों से  पहनायी साथ ही एक  लठ्ठ भी भेंट में देते हुये कहा -   जब तक यह संसार रहेगा ताऊ,  तब तक तेरा नाम रहेगा. इस लठ्ठ से अपनी व दीन दुखियों की रक्षा करना. कलियुग में घोर गमों का दौर आयेगा जब इंसान हंसना ही भूल जायेगा. तब  भी तुम  सारे जगत को हंसाते रहना, इससे बडा पुण्य नही है. तुमने देवी सीता को इतने गहरे गम में भी हंसाया है तो बाकी लोग तो तुम्हारे नाम और शक्ल देखकर ही खुशी पूर्वक प्रसन्न होंगे. तुम्हारे नाम और दर्शन से,  कलियुग के प्रभाव से संतप्त और दुखी मनुष्य,  हर्ष का अनुभव करेंगें. यह मेरा वरदान है जो मिथ्या नही हो सकता.

इतना सब होने के बाद हनुमान जी क्यों पीछे रहते सो उन्होंने  ताऊ को गले लगाते हुये कहा - हे भाई, तुमने   तात से ताऊ बनकर हमारी जाति का गौरव बढाया है. मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि जो भी दुखी सुखी तुम्हारी शरण में आयेगा मैं उसके सारे कष्ट दूर करूंगा. और कलियुग मे जब ब्लागिंग शुरू होगी तब तुम्हारे ब्लाग पर जो भक्त आकर श्रर्द्धा पूर्वक तुम्हें टिप्पणी रूपी फ़ल फ़ूल अर्पण करेगा उसके समस्त कष्ट विकार मेरे द्वारा दूर किये जायेंगे.

इसके बाद पुष्पक विमान उड चला और तभी से ताऊ ताऊत्व  के प्रचार प्रसार  में लगा हुआ है.


अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन के छठे सत्र में पुस्तक विमोचन एवम बाबाश्री दर्शन



अंतर्राष्ट्रीय  ब्लागर सम्मेलन पर चतुर्थ पोस्ट

अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर पंचम पोस्ट



अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन के छठे  सत्र में आपका स्वागत है. आज के सत्र में   ताऊ सद साहित्य प्रकाशन  की आठ   पुस्तकों का विमोचन किया जायेगा. तदुपरांत समानुपाति भाव से   आपका कल्याण करने हेतु आपको  यथा शक्ति ज्यादा से ज्यादा चढावा बाबा जी के श्री चरणों में अर्पित करने का मौका दिया जायेगा. चढावे के समानुपाति भाव से   आप सभी भक्तजनों को बाबाजी से आशीर्वाद लेने का अवसर भी  दिया जायेगा.  

निष्णांत ब्लागर्स  द्वारा लिखित नई पुस्तकों का मूल्य एवम संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है :-

1. ब्लाग टिप्पणी उपनिषद : महाराज खुरपेचिया विरचित इस ग्रंथ को बहुत ही सहज और सरल भाषा में लिखा गया है. टिप्पणी तंत्र की कोई ऐसी विधा नही है जो इस अनुपम और परम पावन ग्रंथ में ना लिखी गई हो. यों तो खुरपेंचिया महाराज द्वारा विरचित अनेकों ग्रंथों का विभिन्न विद्वानों ने अपने अपने विवेक अनुसार टीका लिखी है लेकिन यह पुस्तक सार रूप में लिखी गई है इसलिये इसका नाम भी ब्लाग टिप्पणी उपनिषद रखा गया है. टिप्पणियों के मूल्यांकन से लेकर उनके प्रकार व धाराओं पर प्रयाप्त खोज बीन के बाद यह ग्रंथ इस रूप में आपके सामने है. जो कोई भक्त सुबह शाम इस परम पावन उपनिषद का सुबह शाम पठन पाठन और श्रवण मनन करेगा उसकी समस्त टिप्पणी विषयक एवम सांसारिक बाधायें दूर होने की ग्यारंटी दी जाती है. सीमित मात्रा में उपलब्ध, शीघ्रता पूर्वक अपना आर्डर बुक करें. 


लेखिका : डा. श्रीमती अजीत गुप्ता
कीमत : 4,155/- मात्र
*****

2. सफ़ल चर्चाकार कैसे बनें? : खुरपेचिया महाराज ने चर्चाकार कैसे बनें, इस विषय  पर कहीं भी विस्तृत रोशनी नही डाली है पर विद्वान लेखिका ने अपने अंतर्ज्ञान से चर्चाकार विषय की बारीकियां खोजी और फ़लस्वरूप यह अनमोल ग्रंथ आपके हाथ में है. सफ़ल चर्चाकार बनने के क्या फ़ायदे हैं? कैसे बने सफ़ल चर्चाकार? यह सब गूढ बातें इस ग्रंथ की विषय वस्तु हैं.  ब्लाग जगत में आज तक जितने भी सफ़ल चर्चाकार हुये हैं उन सबका यह अति परम पावन और पूज्य ग्रंथ है. सभी चर्चाकार सुबह शाम इस ग्रंथ का पठन पाठन और पूजा आरती करते हैं, उसी के बदौलत आज वे चर्चाकार के रूप में ब्लागजगत में स्थापित होकर नाम और दाम कमा रहे हैं. आप भी यह मौका मत चूकिये, सीमित पुस्तके हीं शेष हैं, शीघ्रतापूर्वक अपना आर्डर बुक करवाएं. 


लेखिका : डा. संध्या शर्मा
कीमत : 2,955/- मात्र
*****


3.प्रकाशक से पुस्तक छपवाने के 243 अचूक नुस्खे : यह इस पुस्तक की द्वितीय आवृति है, पहले यह पुस्तक जब छपी थी तब यह जन सामान्य को उपलब्ध नही हो सकी थी. क्योंकि प्रकाशकों के कार्टेल ने इस पुस्तक की सभी कापियां बाजार से खरीदवा कर उन्हें भूमिगत कर दिया  था. इस पुस्तक में विद्वान लेखिका ने सभी लेखकों को सफ़लता पूर्वक  यह समझाने की कोशीश की है कि लेखकगण अपने आपको प्रकाशकों के शोषण से कैसे बचाएं? अपनी रायल्टी की उचित राशि किस तरीके से प्राप्त करें? किन्हीं भी विवादों की स्थिति में कानून का सहारा कैसे लें? प्रकाशकों की मनमानी से कैसे बचें? शीघ्रता करें, यह पुस्तक हमने यों तो यथेष्ठ मात्रा में छपावायी है पर हमें लगता है कि प्रकाशक गण अपने निज धर्म  का पालन करते हुये पूर्नुवासार इस पुस्तक को गायब करवा सकते हैं. तुरंत आर्डर करके इस पुस्तक को अभी प्राप्त करें, वैसे हम भी प्रकाशक हैं और अपने धर्म का पालन करना शाश्त्र सम्मत है.   


लेखिका :  प्रोफ़ेसर अंशुमाला
कीमत : 3,455/- मात्र
*****


4. श्री ब्लाग - भारत पुराण : यह पुस्तक अपने आप में एक अनुपम ग्रंथ हैं. खुरपेंचिया महाराज विरचित सूत्रों को सुलझाते हुये विद्वान लेखिका ने इस पुराण को बहुत ही सहज और जन भाषा में लिखा है. यह पुराण पाषानयुगीन ब्लाग यात्रा से आधुनिककालीन ब्लाग यात्रा  तक का एक अदभुत समन्वय करते हुये  आपको सीधे शिखर की ऊंचाईयों का बोध करवाता है.  आपने अभी तक तो महाराज खुरपेचिया का नाम ही सुना होगा. इस श्री ब्लागपुराण में आप उनकी आत्मा से सीधे संवाद स्थापित कर सकते हैं. ब्लाग पुराण का एक एक अध्याय कल्याणमय है. इस पुराण के पठन पाठन और मनन श्रवण से समस्त भय विकार पीडा दूर होकर ब्लागोन्नति के शिखर पर पहुंचने की पक्की ग्यारंटी दी जाती है.  शीघ्रता करें वर्ना इस परम पावन ग्रंथ से आपको वंचित होना पड सकता है. मात्र कुछ ही प्रतियां उपलब्ध हैं.


लेखिका : डा. रश्मि रविजा
कीमत : 3,355/- मात्र
*****



5. ब्लागर भविष्य चिंतामणी : अपने आपमें अदभुत और परम  मनोहारी ग्रंथ का नाम है "ब्लागर भविष्य चिंतामणी". ब्लाग संसार की आने वाली तमाम परेशानियों का हल मय उपाय के बताया गया है. आपको इस क्षेत्र की ऐसी अनोखी पुस्तक कहीं नही मिलेगी. सभी को भविष्य जानने की जिज्ञासा होती है. ब्लाग का भविष्य क्या था? क्या है? और क्या होगा? यह तीनों कालों की जिज्ञासा शांत करने वाला अदभुत ग्रंथ है. इस पुस्तक की एक और विशेषता है कि यह सिर्फ़ तीनों कालों की भविष्यवाणी ही नही करती बल्कि उनके सफ़ल  उपाय इलाज टोने टोटके सहित बताती है. विद्वान लेखिका ने   पुस्तक में समस्त ब्लाग पूजा मंत्रों का सार व उपाय बताते हुये इसे बहुत ही सरल गम्य बना दिया है. आज ही तुरंत आर्डर करें, एक बार चूके कि फ़िर मौका नहीं मिलेगा.


लेखिका : प्रोफ़ेसर अंशुमाला
कीमत : 4,755/- मात्र
*****



6. ब्लाग पीडा शमन गुटिका : यह  एक बहुत ही  अनुपम और लोक कल्याणकारी ग्रंथ है जिसे आपको अपने घर में अवश्य स्थापित करना चाहिये. हर प्रकार की पीडा भय ताप का निवारण करने वाला एक अदभुत ग्रंथ, जो परम विद्वान लेखिका ने लोक परोपकारी भावना से लिखकर सहज सुलभ बना दिया है. महाराज खुरपेचिया के गूढ श्लोकों का सटीक भावार्थ करके यह अदभुत ग्रंथ लिखा गया है. किसी भी तरह ब्लागिक व सांसारिक भय ताप पीडा अनुभव करने पर इस ग्रंथ का केवल पठन पाठन ही मुक्ति कारक है.  विशेष परिस्थितियों मे जरूरत अनुसार झाड फ़ूंक के समस्त मंत्र और उनके तरीके भी बता दिये हैं. ऐसा पहली बार हुआ है कि इतने गूढ ज्ञान का भेद जनता के कल्याणार्थ खोल दिया गया है बिना किसी निजी स्वार्थ के. इस परम मनोहारी ग्रंथ को खरीदने के लिये तुरंत आर्डर करें, सिर्फ़ गिनी चुनी प्रतियां शेष हैं.


लेखिका : डा. हरकीरत ’हीर’
कीमत : 4,155/- मात्र
*****


7. इदं न त्वम ब्लागर : हे ब्लागर, ये तुम  नही हो...क्यों बेकार की चिंता करते हो? तुम्हारे आने से पहले बःई यह ब्लाग संसार यहीं था और तुम्हारे जाने के बाद भी यहीं रहेगा. बेकार की चिंता ना कर, टिप्पणी का भय लालच मोह मद छोड...और ब्लाग पोस्ट लिखता रह, तेरा कल्याण होगा. यह इस पुस्तक का एक वाक्यांश भर है. इस पुस्तक को ब्लाग संसार में महागीता की उपाधि प्राप्त है. सभी ब्लागरों को यह अनुपम ग्रंथ परम वंदनीय है. इस ग्रंथ के घर में होने मात्र से समस्त पीडा दूर होती है.  जो भी इस ग्रंथ का पठन पाठन करेगा उसकी समस्त पीडा विकार, भय ताप दूर होने की ग्यारंटी दी जाती है. बस कुछ ही प्रतियां बची हैं, अभी की अभी आर्डर करें जिससे पछताना ना पडे.

लेखिका : प्रोफ़ेसर अंजू (अनु) चौधरी
कीमत : 3,955/- मात्र
*****

8. ब्लागिंग में छायावाद का प्रभाव : यह एक बहुत ही गहन खोज बीन के बाद लिखा गया ग्रंथ है. ब्लागिंग में छायावाद का प्रभाव कब आया? क्यूं आया? और कब तक रहेगा? इन समस्त विषयों पर विद्वान लेखिका ने गहन खोजबीन के बाद यह पुस्तक लिखी है. पुस्तक अपने आपमें छायावाद पर एक डाक्यूमैंट है जिसे आप अवश्य पढना चाहेंगे. ब्लागिंग में छायावाद के प्रभाव से मलिनता छा गई है, ब्लाग संसार के  सभी वाशिंदे निष्प्राण से हो गये हैं, क्या यह छायावाद का प्रभाव है? कैसे दूर होगा छायावाद का प्रभाव? किसने फ़ैलाया ब्लागजगत में यह छायावाद? क्या छायावादी युग से निकलकर ब्लाग संसार अब भक्तिकाल की  ओर बढेगा या रीतिकाल की ओर? अति महत्व पूर्ण और पठनीय ग्रंथ. इस ग्रंथ के पठन पाठन और मनन श्रवण से आपकी समस्त इच्छाओं की पुर्ति की ग्यारंटी दी जाती है. पुस्तक खरीदने हेतु तुरंत आर्डर करें क्योंकि इस पुस्तक की अधिकतम प्रतियां  विश्वविद्यालयों और स्कूल कालेजों ने अग्रिम बुक करवा ली हैं. हाथ आया मौका जाने ना दें वर्ना पछताना पडेगा. 


लेखिका : डा. वंदना गुप्ता
कीमत : 3,444/- मात्र
*****


आज की सभी किताबों का संपूर्ण सेट एक साथ खरीदने वाले भक्तों को बाबाश्री विशेष दर्शन देकर आने वाली पूर्णमासी पर  एक विशेष साधना करवायेंगे जिससे आपके समस्त कष्ट दूर होकर धन धान्य की विशेष प्राप्ति होने की ग्यारंटी दी जाती है.

 ॐ हास्यम हास्यम हास्यम.



ताऊ सद साहित्य की पुस्तकें खरीदने के पहले यह डिस्कलेमर अवश्य पढ लें.

डिस्क्लेमर : हमारी कोई ब्रांच नही है.
पुस्तके संपूर्ण अग्रिम पर ही भेजी जाती हैं.
इन पुस्तकों को किसी भी रुप मे कापी करने की सख्त मनाही है.
बिका हुआ माल किसी भी कीमत पर वापस नही होगा.
इन पुस्तकों में दिये गये फ़ार्मुले अपनी रिस्क पर ट्राई करें,  प्रकाशक या लेखक इसके लिये जिम्मेदार नही होंगे.

यह पोस्ट शुद्ध मनोरंजन के लिये लिखी गई है. कोई भी सज्जन दिल-दिमाग, कलेजे-जिगर पर ना ले  क्योंकि आजकल लू चल रही है. ताऊ प्रकाशन की पुस्तकों  को  पढने की वजह से कोई बीमार पड गया तो  हमारी किसी भी तरह की कॊई जिम्मेदारी नही होगी. 

ह पोस्ट किसी को किसी भी रूप मे छोटा या बडा  दिखाने के लिये नही लिखी गई है सिर्फ़ मनोरंजन,  मनोरंजन और सिर्फ़ मनोरंजन के लिये लिखी गई है. फ़िर भी किसी को ऐतराज हो तो उसका नाम हटा दिया जायेगा.

डा. संगीता स्वरूप (गीत) की पुस्तक "ब्लाग टिप्पणी प्रबोधिनी" की समालोचना


मुझे नितांत खुशी हो रही है कि  ताऊ सद साहित्य प्रकाशन की पुस्तक ब्लाग टिप्पणी प्रबोधिनी की मुझे  समीक्षा करने को कहा गया है.  

समीक्षा से पहले बताना चाहुंगा कि पुस्तक की प्रिंटिंग और पेपर बहुत ही उच्च क्वालिटी का है, जिल्द और मुख पृष्ठ बहुत आकर्षक और मनमोहक है. पुस्तक की साज सज्जा के अलावा  इस पुस्तक का कंटेंट बहुत ही उच्च गुणवता वाला है. जो इसे पठनीय व संग्रहणीय बनाता है.



विद्वान लेखिका डा. संगीता स्वरूप (गीत) ने ब्लाग टिप्पणी प्रबोधिनी पुस्तक को लिखने से पहले शायद महाभारत कालीन महाराज खुरपेंचिया  रचित सूत्रों का गहन अध्ययन किया है और वर्तमान कालखंड की  ब्लाग टिप्पणियों का भी यथेष्ठ अध्ययन किया है. उनके लेखन से साफ़ झलकता है कि यह ग्रंथ  उन्होंने दिल की गहराईयों से लिखा है.

विद्वान लेखिका एक जगह लिखती हैं कि टिप्पणियां तो बेटी की तरह होती  हैं जिन्हें एक बार घर से विदा कर दिया तो वो हमेशा के लिये पराई हो जाती हैं. विवाह के समय विदा की हुई बेटी से तुलना बहुत यथार्थ परक लगी. सही भी है कि टिप्पणियां भी कभी लौट कर नही आती.

आगे लेखिका ने लिखा है कि जिस तरह बेटी का विवाह करते समय योग्य वर और घर तलाशा जाता है उसी तरह टिप्पणी भी योग्य पोस्ट पर करनी चाहिये, यानि जैसी पोस्ट हो वैसी ही टिप्पणी करनी चाहिये. जैसे लडकी ज्यादा पढी लिखी है तो उसके समकक्ष वर ढूंढा जाता है किसी अयोग्य के गले उसे नहीं बांधा जाता. उसी प्रकार टिप्पणी दान भी यथेष्ठ और योग्य पोस्ट के अनुरूप ही करना चाहिये. यदि आप किसी सांसारिकता में फ़ंसकर अपने निजी जान पहचान वाले ब्लाग पर झूंठी प्रसंशा करने वाली टिप्पणी करेंगे तो पाप के भागी बन सकते हैं, और इस पाप से मुक्ति पाने के लिये बाबाश्री  ताऊ महाराज के आश्रम जाना पड सकता है. अत: इस प्रकार अयोग्य पोस्ट को महंगी वाली  टिप्पणी दान नहीं करें.

आगे विद्वान लेखिका ने लिखा है कि जैसे सामाजिक व्यवहार में कन्यादान का रूपया वापस किया जाता है उसी प्रकार टिप्पणी दान भी आवश्यक रूप से किया जाना चाहिये. जैसे यदि कोई आपके यहां सामाजिक रूप से शादी विवाह में 1100/- रूपये का लिफ़ाफ़ा देता है तो आपको भी कम से कम 1100/- रूपये या अधिक लौटाना चाहिये.

यहां पाठक टिप्पणी दान और कन्यादान के बीच आकर उलझन सी महसूस करता है. पाठक को लगता है कि यहां लेखिका विषय से कुछ हट गयी हैं. पर यही इस पुस्तक का कमाल है कि इसके बाद के बीस पेज पढते ही आप लेखिका की भूरी भूरी प्रसंशा करने लगते हैं. गजब का ट्विस्ट है इस जगह पर,   जो कोई मंजा हुआ लेखक ही दे सकता है.

लेखिका ने यही से आगे बढते हुये टिप्पणी दान का महत्व और लोक व्यवहार का समन्वय बैठाया है और टिप्पणी के प्रकारों की विस्तारित  चर्चा की है. जैसे टिप्पणियों के प्रकार से उसके लेखक को पकडना. यानि टिप्पणी पढकर ही आप समझ सकते हैं कि यह टिप्पणी यानि लिफ़ाफ़ा किसके यहां से आया. 

लिफ़ाफ़ों के मुख्य प्रकार कितने हैं?  टिप्पणी के शब्दों से लिफ़ाफ़े के अंदर कितने रूपये के जज्बात रखे हैं?  यह भी बताया गया है. यानि आपकी पोस्ट पर आई टिप्पणी देने वाले ने कितने रूपये लौटाये हैं यह जानने के लिये लेखिका ने विस्तारित टिप्पणी मूल्य का भी आकलन किया है. उनमें कुछ को नीचे लिख रहा हूं बाकी आप पुस्तक पढकर विस्तारित रूप से जान ही लेंगे.

बहुत सुंदर. ( 11रूपये  )
अति सुंदर. (21 रूपये)
जय हो. (5 रूपये)
अति सशक्त. (10 रूपये)
दिल को छू गई आपकी रचना (15रूपये
बहुत मार्मिक. (21रूपये)
अच्छी रचना. (5 रूपये)
Nice (5 रूपये)
Like in  Face Book style - ( 0.20 पैसे यानि 1 रूपये की पांच )
बहुत बढिया. (10 रूपये)
सार्थक पोस्ट (5 रूपये)
बधाई (10 रूपये)
मार्मिक रचना. (11 रूपये)
सुंदर लगी रचना. (15 रूपये)
वाह वाह. (5 रूपये)
वाह वाह क्या बात है. (10 रूपये)
गंभीर रचना. (5 रूपये)
  
कुल मिलाकर एक टिप्पणी लिफ़ाफ़े का मूल्य 0.20  पैसे  से शुरू होकर 5100 रूपये तक का हो सकता है. ऊपर तो 0.20 पैसे  से लेकर  21 रूपये तक की कीमत वाली टिप्पणियों का ही सिर्फ़ नमूने के तौर पर जिक्र किया गया है.  

पुस्तक की एक विशेषता है जो बताती  है कि टिप्पणी लिफ़ाफ़े के शब्दों का मूल्य कैसे निर्धारित करें?   टिप्पणी के  अंदाज से  पता  लगाना  कि आपकी पोस्ट किस तरह पढी गयी? या नही पढी गयी सिर्फ़ टिप्पणी दान का  व्यवहार निभाया गया? इसके अलावा विस्तारित रूप से पढने के लिये पुस्तक खरीदें.

अंत में यही कहूंगा कि  पुस्तक अपने आप में विषय की अनुपम और अनोखी है. ब्लाग जीवन की व्यवहारिकता समझने हेतु पुस्तक पढना अति अनिवार्य है. 

 पुस्तक का मूल्य Rs. 3,955/- रखा गया है जो पुस्तक की गुणवत्ता  और उपयोग  के सामने कम ही पडता है. पुस्तक की लोकप्रियता का इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि  ब्लाग टिप्पणी प्रबोधिनी का प्रथम संस्करण  आऊट आफ़ स्टाक है और द्वितीय संस्करण की प्रिंटिंग चालू है जो शीघ्र ही बाजार में प्राप्य होगा.

  अंतर्राष्ट्रीय समालोचक
-प्रोफ़ेसर ताऊ रामपुरिया लठ्ठ वाले

ताऊ का खूंटा "रेडियो प्लेबैक इंडिया" पर.....!


ताऊ के खूंटे से एक खूंटा जो 2 जनवरी 2009 को  ताऊ के सैम और बीनू फ़िरंगी की पोस्ट  के अंत में " इब खूंटे पै पढो"  के अंतर्गत  प्रकाशित हुआ था उसे आज रेडियो प्लेबैक इंडिया पर श्री अनुराग शर्मा जी की आवाज में आप सुन सकते हैं. आपकी सुविधा के लिये गद्य पुन:  नीचे दिया गया है.

चुनाव जीतने के लिये  जनता को झांसा देता हुआ ताऊ


 " इब खूंटे पै पढो"
चुनाव में  ताऊ की जमानत जप्त हो चुकी थी और सभी प्रकार के   काम धंधों में फ़ेल हो चुका था.  घर खर्चे से भी घणा परेशान     हो लिया था। यहां तक की  बाल बच्चों के  भूखों मरने की नौबत आ गई तो ताऊ के मित्र  राज भाटिया जी ने सलाह दे डाली की ताऊ अब ये उठाईगिरी, चोरी-चकोरी और डकैती डालने के धंधे बंद कर और   सीधे रास्ते चलना शुरू करके  कहीं इमानदारी तैं नौकरी करले. 

बात ताऊ के समझ म्ह आगई और भाटिया जी ने ताऊ को एक सेठ के यहां मुनीम की नौकरी के लिये  इन्टर्व्यू देने भेज दिया. 

सेठ का हैड मुनीम ताऊ का इन्टर्व्यू लेने लगा.  उसने पूछा - ताऊ हिसाब किताब आता है कि नही? 

ताऊ - जी बिल्कुल पक्का आता है.   सारी उम्र हिसाब किताब करते ही निकाली है. 

हैड मुनीम -  अच्छा तो बताओ कि आठ और आठ कितने होते हैं? 

ताऊ बोला  -  मालिक साहब,  अब आप कहोगे उतने ही कर दूंगा जी.   आप कहो तो आठ और आठ को 24  कर दूं और आप कहो तो  सिर्फ़  6  ही  कर दूं? 

हैड मुनीम ने सोचा कि ये ताऊ काम का आदमी लगता है.  मैं  सेठ के यहां  जो घपले करता हूं उसमे ये ताऊ सहायक ही रहेगा.  सो उसने सेठ को ताऊ की सिफ़ारिश कर दी कि ताऊ बहुत मेहनती, इमानदार,  नेक,  शरीफ़ और मेहनती  आदमी है,  इसे काम पर रख लिया  जाये. 

अगले दिन सेठ ने फ़ायनल ईण्टर्व्यू खुद लेने के लिये ताऊ को बुलाकर  इंटर्व्यु लेना शुरू  किया.  ताऊ घुटा घुटाया आदमी था सो  सेठ भी ताऊ  की बातों से  संतुष्ट हो गया. 

आखिर में सेठ ने अपाइंटमैंट लेटर देने के पहले  फ़ार्मिलिटि के बतौर   ताऊ से पूछा - ताऊ तुम्हारा कोई अपराधिक रिकार्ड तो नही है न? क्योंकि आजकल ये आपराधिक रिकार्ड वालों को हम नौकरी पर नहीं रखते. 

ताऊ ने भोला बनते हुये कहा - सेठ जी ये अपराध और अपराधिक रेकार्ड क्या होता है ? मेरा तो इनसे कभी काम ही नही पडा. 

सेठ मन ही मन बडा खुश हुआ कि ये आज के जमाने मे कितना नेक और  शरीफ़ आदमी मिल गया अपने को और बोला - मेरा मतलब है कि तुम कभी गिरफ़्तार तो नही हुये ना? 

अब  आदमी कितना भी नेक बनने का नाटक करले पर  असली  बात कोई कितने समय तक छुपा सकता है सो ताऊ भी अनजाने  मे बोल ऊठा -  ना जी  सेठ जी ना ! आप भी कैसी बातें करते हो?   अगर कभी पकडा गया होता तो  गिरफ़्तार होता ना ! भगवान कसम  मैं तो आज तक  कभी पकडा ही नही गया.

अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन में अत्यंत दुर्लभ पुस्तकों का विमोचन



अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर  प्रथम पोस्ट

अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर द्वितीय पोस्ट 

अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन पर तृतीय पोस्ट

अंतर्राष्ट्रीय  ब्लागर सम्मेलन पर चतुर्थ पोस्ट

अंतर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन के पंचम  सत्र में आपका स्वागत है. आज के सत्र में सबसे पहले  ताऊ सद साहित्य प्रकाशन  की  पुस्तकों का विमोचन किया जायेगा. तदुपरांत  आप सभी भक्तजनों को बाबाजी से आशीर्वाद लेने का अवसर दिया जायेगा जिससे कि आप अपनी यथा शक्ति ज्यादा से ज्यादा चढावा बाबा जी के श्री चरणों में अर्पित कर सकें. ध्यान रहे कि चढावे के समानुपाति भाव से आपका कल्याण किया जायेगा.

निष्णांत ब्लागर्स  द्वारा लिखित नई पुस्तकों का मूल्य एवम संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है :-

1. ब्लाग टिप्पणी प्रबोधिनी :  यह ग्रंथ महाभारत काल में रचा गया था. इसकी भाषा अत्यंत क्लिष्ठ होने के कारण यह जन सामान्य से अभी तक दूर ही रहा है. विद्वान लेखिका ने अपने अथक परिश्रम और ज्ञान की वजह से इस परम मनोहारी और कल्याणकारी ग्रंथ को सहज भाषा में लिखा है. इस ग्रंथ के पठन पाठन से आपकी सभी टिप्पणी संबंधित जिज्ञासाएं दूर होंगी. टिप्पणी  के कितने प्रकार के रहस्य हैं?  अधिकतम टिप्पणियां कैसे प्राप्त  की जाये? आटोमेटिक टिप्पणियां कैसे की जायें? इस ब्लाग टिप्पणी प्रबोधिनी पुस्तक के श्रवण मनन से समस्त प्रकार के क्लेश दूर हो कर आपका ब्लाग सुख समृद्धि, टिप्पणी और पोस्ट धन से मालामाल हो जाने की ग्यारंटी दी जाती है. शीघ्रता करें, सीमित स्टाक उपलब्ध है, पछताना ना पडे.



कीमत :  3,955/- मात्र
*****

2. ब्लाग पोस्टोपनिषद :  इस ग्रंथ की रचना महान ब्लागर शिरोमणी खुरपेंचिया द्वारा 420 BC में की गई थी. विद्वान लेखिका ने अपने सुक्ष्म ज्ञान से इस ग्रंथ के भेद जन सामान्य के लिये खोल कर रख दिये है. इस उपनिषद के नित्य पाठ किये बगैर कोई भी ब्लागर यदि ब्लागिंग करता है तो पाप का भागी होकर अपना जीवन खराब करता है. अत: तुरंत यह परम पवित्र पुस्तक खरीद कर नित्य पाठ करें और अपने ब्लागिंग जीवन को धन्य करें. इस पुस्तक के  पास रहने से  समस्त ब्लाग पाप दूर होकर आप परम मोक्ष के अधिकारी बनेंगे, इस बात की ग्यारंटी दी जाती है. सीमित स्टाक ही शेष है, तुरंत खरीदें.


कीमत :  3,455/- मात्र
*****

3. ब्लागिंग का वर्तमान संक्रमण काल :  आजकल ब्लागिंग में चारों तरफ़ सूनापन फ़ैला  है, कहीं कोई हाहाकार करने वाला भी नही है. ज्यादातर  ब्लागर अब फ़ेसबुकिये हो गये हैं. यह ब्लागिंग का संक्रमण काल चल रहा है. विद्वान लेखिका ने इस संक्रमण काल पर अपने ज्ञान और तथ्यों के आधार पर रोशनी डाली है. हर ब्लागर के कल्याण के लिये  यह एक अनुपम ग्रंथ है. ब्लागिंग के सूने पन की वजह से आपके दिल में जो बेचैनी छाई हुई है, उस बेचैनी का हल आपको इस पुस्तक को पढने के बाद मिलेगा. बहुत ही सीमित स्टाक बचा है, ज्यादातर प्रतिया लाईब्रेरीज वालों ने बुक करवा ली हैं, कहीं पछताना ना पडे. तुरंत आर्डर किजिये.  

कीमत :  3,755/- मात्र
*****

4. त्वं किं करोति ब्लागर: - महाराज खुरपेचिया विरचित यह ग्रंथ पहली बार इस रूप में आपके सामने है. विद्वान लेखिका ने अथक खोज बीन के बाद खुरपेचिया महाराज के ग्रंथ की बारीकियां समझायी है. ब्लागर के क्या कर्तव्य हैं? ब्लागिंग कैसे करनी चाहिये? अनामी पोस्ट के कितने प्रकार के भेद हैं? अनामी का पता कौन से मंत्र से लगाया जाये? इत्यादि समस्त बातों और मंत्रों सहित उनका उपाय इस अनुपम ग्रंथ में दिया गया है. इस पुस्तक की कुछेक प्रतियां ही शेष हैं. यदि आप इसे खरीदने से चूक गये तो आपका यह ब्लागर जन्म तो व्यर्थ ही समझिये. अत: तुरंत आर्डर करके अपने जन्म को सार्थक किजिये. इस पुस्तक के नित्य पाठ करने से समस्त दोषों की शांति होने की ग्यारंटी दी जाती है.

कीमत :  3,655/- मात्र
*****

5. ब्लाग चिंता चुडामणी : यह पुस्तक एक अनुपम ग्रंथ है जो पाली भाषा में खुरपेचिया महाराज ने रचा था. आज तक इस ग्रंथ की एक भी प्रति किसी के पास नही है. विद्वान लेखिका ने बहुत ही मेहनत और मनोयोग से महाराज खुरपेचियां के दांव पेंच इस पुस्तक में सहज भाषा में लिखे हैं. इस ग्रंथ के पठन पाठन और मनन श्रवण से समस्त प्रकार की चिंताएं और मन के विकार दूर होते हैं.  ब्लाग और दैनिक जीवन में कोई परेशानी नही आती. इस ग्रंथ का सुबह शाम पाठ करने से ब्लागिंग की वजह से घर में होने वाली खिचखिच की  शांति होती है. आज और अभी यह ग्रंथ खरीदिये और ब्लाग चिंता से मुक्त हो जाईये. सिर्फ़ चंद प्रतियां ही शेष हैं. जल्दी किजिये.

कीमत :  3,455/- मात्र
*****

6. ब्लाग भैरव टिप्पणी पूर्ति गुटिका:  एक ऐसी पुस्तक, जिसका हर ब्लागर को बेसब्री से इंतजार था. इस पुस्तक की जितनी तारीफ़ की जाये वह कम पडेगी. इस पावन ग्रंथ के पठन पाठन से आपकी सभी तरह की टिप्पणी समस्या दूर होती है. आपकी ब्लाग पोस्ट टिप्पणियों से महक उठेगी. इस पुस्तक में दिये गये अति प्राचीन मंत्रों को सिद्ध कर लेने के बाद आप बिना लेपटोप, बिना  नेट कनेक्शन के भी सिर्फ़ अपने मनोबल द्वारा किसी भी ब्लाग पर अपनी मनचाही  टिप्पणी कर सकते हैं. यह पुरातन मंत्रों की अनुपम गुटिका है जिसे आप तुरंत प्राप्त करना चाहेंगे.  सभी टिप्पणी मंत्रों को सिद्ध करने की सरल विधी इसी ग्रंथ मे दी गई है. इस पुस्तक के अंदर ही आपको ब्लाग भैरव देवता का चित्र भी मिलेगा, जिसके सामने बैठकर आपको मंत्र सिद्ध करने हैं.  मंत्रो को सिद्ध करने के लिये  पूजा पाठ एवम अन्य सामग्री आप निर्धारित मूल्य पर ताऊ प्रकाशन के आफ़िस से प्राप्त कर सकते हैं. अत्यंत ही सीमित स्टाक उपलब्ध है. इस अवसर को हाथ से जाने मत दिजिये. ऐसे मौके बार बार नही आते. तुरंत आर्डर करें.   

लेखिका :  डा. अनिता
कीमत :  3,350/- मात्र
*****



7. ब्लाग बकरे बक बक रे :  मौज लेने वाली विधा का यह एक  अदभुत और अनुपम  ग्रंथ हैं जो सिद्ध तंत्र मंत्र की कलाओं से भरा पडा है, आसान विधी से सिद्ध होने वाले मंत्रों और विधियों सहित अन्यत्र अप्राप्य दुर्लभ ग्रंथ, जो सिर्फ़ हमारे यहीं पर उपलब्ध है.  ब्लाग बकरे कैसे मौज लेते हैं?  कैसे आप बकरे को बकरा बनाकर खुद का भला करना चाहते हैं पर विधि गलत हुई तो आप स्वयं बकरा बन सकते हैं. स्वयं बकरा बनने से बचने के लिये ही यह अनुपम ग्रंथ लिखा गया है.  यह आप इस अनुपम ग्रंथ को पढकर ही जान पायेंगे. बिना मौज लिये ब्लागर का जीवन बेकार बकरे का जीवन है. जिसे कोई भी हलाल करने की सोच सकता है.  अपना जीवन व्यर्थ मत जाने दिजीये.  इस पुस्तक की रचना विशेष आपको बकरा बनने से रोकने को  ध्यान में रख कर ही की गई है. पुस्तक अपने आपमें एक अनमोल खजाना है जो आपकी जबान को बक बक करने की आदत से निजात दिलाकर आपको मौज लेने  में प्रवीण बना देगी. यदि आप मौज  समझना चाहते है, मौज में लिखना सीखना चाहते  है,  या फ़िर मौज लेना चाहते  है तो यह अनुपम ग्रंथ आपके लिये ही है. शीघ्रता किजीये, सीमित मात्रा में ही स्टाक बचा है. तुरंत आर्डर करें. 

कीमत :  3,955/- मात्र
*****


आज की सभी किताबों का संपूर्ण सेट एक साथ खरीदने वाले भक्तों को बाबाश्री विशेष दर्शन देकर आने वाली पूर्णमासी पर  एक विशेष साधना करवायेंगे जिससे आपके समस्त कष्ट दूर होकर धन धान्य की विशेष प्राप्ति होने की ग्यारंटी दी जाती है.

 ॐ हास्यम हास्यम हास्यम.



ताऊ सद साहित्य की पुस्तकें खरीदने के पहले यह डिस्कलेमर अवश्य पढ लें.

डिस्क्लेमर : हमारी कोई ब्रांच नही है.
पुस्तके संपूर्ण अग्रिम पर ही भेजी जाती हैं.
इन पुस्तकों को किसी भी रुप मे कापी करने की सख्त मनाही है.
बिका हुआ माल किसी भी कीमत पर वापस नही होगा.
इन पुस्तकों में दिये गये फ़ार्मुले अपनी रिस्क पर ट्राई करें,  प्रकाशक या लेखक इसके लिये जिम्मेदार नही होंगे.

यह पोस्ट शुद्ध मनोरंजन के लिये लिखी गई है. कोई भी सज्जन दिल-दिमाग, कलेजे-जिगर पर ना ले  क्योंकि आजकल लू चल रही है. ताऊ प्रकाशन की पुस्तकों  को  पढने की वजह से कोई बीमार पड गया तो  हमारी किसी भी तरह की कॊई जिम्मेदारी नही होगी. 

ह पोस्ट किसी को किसी भी रूप मे छोटा या बडा  दिखाने के लिये नही लिखी गई है सिर्फ़ मनोरंजन,  मनोरंजन और सिर्फ़ मनोरंजन के लिये लिखी गई है. फ़िर भी किसी को ऐतराज हो तो उसका नाम हटा दिया जायेगा.