ताऊ उवाच :-:


विजेट आपके ब्लॉग पर

"नाचै कुदै बान्दरी और खीर मदारी खाय"

बन्दर बडी अकड मे चश्मा वश्मा लगाके. और शूट बूट पहन कर, हाथ में छाता लिये हुये बडे तैश मे मदारी के केबिन मे घुस गया.

मदारी अपने आफ़िस में बैठा अगला मजमा लगाने की प्लानिंग कर रहा था. डमरू पर घुग्घी कबूतर बैठ कर बता रहा था कि वह खेल के दौरान कैसे डमरू पर से ऐसे गायब हो जायेगा जैसे ताऊ के तबेले से भैंस. वहीं कडकनाथ मुर्गा जी अपनी प्लानिंग बता रहे थे कि अंडे कैसे गायब करने हैं? पास में ही रामप्यारी सारी प्लानिंग को ध्यान से चौकन्नी होकर सुन रही थी जिससे खेल में कोई कमी ना रह जाये. यानि पूरा स्टाफ़ अपने काम में लगा हुआ था.

मदारी ताऊ मजमा लगाने की तैयारी करता हुआ!


अचानक बन्दर को घुसते हुये देखा तो मदारी बोला - आ भई बन्दर आ ! भई घणै दिन मे दिख्या ? कित का सैर सपाटा कर आया ?

बन्दर वहीं रामप्यारी के पास डरता डरता सा एक मुड्डा (बैठने का छोटा स्टूल) खींचकर उस पर बैठते हुये बोला --सैर सपाटा काहे का ? खाने के ठिकाने नही, पर तुम्हारी तो मस्ती है । बन्दर मरे या जिये, तुम्हारी बला से.

मदारी ने सोचा- बन्दर कुछ नाराज सा है.. चलो इसको बीडी वीडी पिला पिलूकर चलता करते हैं.

मदारी - क्युं भई बन्दर बीडी पिवैगा ?

बन्दर - ना जी ना ? थारी बीडी थमनै मुबारक.

मदारी - के बात सै, भई बन्दर आज तो तू बडा उखडा उखडा सा दिखै सै ?

बन्दर - थानै मालूम सै की मैं सिर्फ़ डनहिल या 555 किंग साईज सिगरेट ही पीता हूं. फ़िर बीडी के लिये पूछ्ने का मतलब ? और वो भी थारै केबिन में आगया तो?

मदारी ने देखा कि आज बन्दर का मूड खराब दिख रहा है सो तुरन्त डनहिल सिगरेट निकाल कर बन्दर के सामने पेश की और पास ही एक जमुरा बैठा था, उससे कहा... जमुरे...

जमुरा - हुक्म मेरे आका ?

मदारी - जमुरे... जरा बन्दर साहब आये हैं इन के लिये नाश्ता पानी तो बुलवावो.

इतने मे बन्दर बोला नही नही मुझे नही करना तुम्हारा नाश्ता पानी । मैं तो जा रहा हूं ।

मदारी को लगा आज कुछ गड बड है. यह बंदर सच में कहीं भग गया तो खेल कौन दिखायेगा? सो बडे शातिर अंदाज में बोला - अरे यार बैठो भी बन्दर साब. ऐसी गर्मी में कहां जावोगे? कहीं लू वू लग गई तो....

बन्दर बात काट कर बोला - अच्छा तो हम साब कब से हो गये ? हम जिये या मरे तुमको उससे क्या ? आज तक भी कभी पूछा कि यार बन्दर भाई, तुम जिन्दा हो या मर गये? बन्दर जिये या मरे...तुमने कभी पूछा भी? कभी नही. अरे तुम्हारी बात छोड भी दूं, तब भी तुम्हारे जमुरे भी मेरी नही सुनते. मैं दिन भर धूप में तमाशा दिखाता हूं. पर तुम्हारे जमुरे मेरा फोन भी नही उठाते. और तो और मुझको लिमिट भी नही देते... फ़िर मैं खेल किस तरह दिखाऊं ? जितनी लिमिट मिलती है उतने खेल से कुछ कमाई होती नही. मतलब ये कि हमको तो पागल समझ रखा है. तुम्हारे जमुरे चाहे जब माल काट देते हैं...ठीक है मैं तो जा रहा हूं...ये भी साली कोई तमीज हुयी? बन्दर पुरी तरह तैश मे आ चुका था.

मदारी भी पूरा घुटा हुआ घाघ था सो हंसते हुये बोला - अमां यार बंदर भाई..आप तो बहुत जल्दी जमूरों की बात का भी बुरा मान जाते हैं. अरे हमारा और आपका तो चोली दामन का साथ है. अब बैठो जरा ...

बन्दर खीज कर बोला - मैं तो जा रहा हूं, नया मदारी खोजने....खोजने क्या , तुम्हारे पुराने जमुरे ने ही मदारी की दूकान खोली है अब मैं तो उसके साथ ही खेल दिखाऊंगा.

मदारी भी खेला खाया था । इसके जैसे कई बन्दर पाल के छोड चुका था. और इससे भी बडे बन्दर तो क्या लाल और काले मूंह के लंगूर उसने अब भी पाल रखे थे । सो बिल्कुल शातिर अन्दाज में बोला- अरे यार बन्दर साब आप तो बिल्कुल ही नाराज हो गये. अब ऐसी मदारी बदलने वाली कौन सी बात हो गयी ?

बन्दर : - क्युं आपने कभी मेरे राशन पानी का इन्तजाम किया ? कभी व्हिस्की सोढा के लिये पूछा कि इस महिने
तुमने खाया पीया या नही. दो महिने से तो गला भी तर नही किया...तुमसे अच्छा तो पुराना मदारी ही था जो महीने के राशन पानी और खम्बे का इन्तजाम बिना कहे ही कर देता था । अब उसकी कीमत मालूम पड रही है । उसके यहां रहते तो मैने कभी उसकी कद्र ही नही की ....पर अब मालूम पडा की वो ही ठीक था. और हमारे साथ का एक ताऊ बन्दर सही ही कहता है कि "नाचै कुदै बान्दरी और खीर मदारी खाय" तो अब ऐसा नही चलेगा...खीर मे से एक दो किलो नही तो एक दो कटोरी तो हमको भी मिलनी चाहिये । पर तुमको तो पुरी खीर का भगोना ही पीने की आदत पड गयी है. अब अपने को ये बिल्कुल भी मन्जूर नही है.

बन्दर अब तक काफ़ी तैश मे आकर मदारी को उसकी खरी खोटी करतूते सुना रहा था.

बीच मे मदारी ने टोका.... अरे बन्दर भाई सुनो तो ..पर बन्दर सुनने को तैय्यार ही नही हो रहा था. बंदर फ़िर आगे बोल पडा.. बोल तो क्या पडा .. बस फ़ट ही पडा...बोला - और तुम्हारे जमुरों से कहो कि मेरा फोन रिसीव करें और मेरी रस्सी जो तुमने 5 फ़ीट की कर रखी है उसको खेल दिखाते समय कम से कम 20 फ़ीट की करवावो. और दारु पानी खंबे का इन्तजाम समय से करवावो. तो कुछ विचार करूं.... बन्दर एक सांस मे ही ये सारी बातें कह गया.

मदारी भी घुटा हुवा था-- ठन्डे छींटे मारते हुये बोला - अरे यार बन्दर भाई आपके लिये तो मेरी जान हाजिर है....जहां तक आपकी रस्सी का सवाल है तो आप खातिरी रखो....कल से ही खेल दिखाते समय आपकी रस्सी मैं ही थामुंगा. और 20 फ़ीट तो क्या आपको रस्सी मे जितनी छूट (लिमिट) चाहिये उतनी मैं दूंगा. और जहां तक दारु पानी और खर्चे का सवाल है तो मुझे आप थोडा सा समय दो मैं ऊपर मेरे बाजीगर (बास) से बात करके नक्की करवा दूंगा ...इमान से...आप तसल्ली रखो...नाराज मत होवो यार बंदर भाई. आप चिन्ता मत करो. आप तो पब्लिक को बढिया खेल दिखाते रहो. यानि पब्लिक का सारा माल अपनी जेब में होना चाहिये... बाकी मै सम्भाल लूगा.

बन्दर भी अब थोडा ठन्ढा पड चुका था. बन्दर ने भी सोचा चलो घुडकी का कुछ तो असर होगा. और सोचा की ये मदारी यों ही छोडने वाला भी नही है अगर इसने 5 फ़ीट की रस्सी को छोडने के बजाये और घुटने के पास बांध लिया तो और दम घुट जायेगा. सो बन्दर भी खींसे निपोरता हुवा मदारी के केबिन से निकल लिया और मदारी ने अपने जमुरे से गहन विचार विमर्श शुरु कर दिया । .........(क्रमश:)

नोट : मदारी अब यह कंपनी छोडकर जा चुका है. और बंदर साहब का आकस्मिक निधन हो चुका है. मेरी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि. बंदर की अब सिर्फ़ यादें ही शेष बची हैं.

Indli - Hindi News, Blogs, Links

ताऊ पहेली - 84 (बेलूर मठ, प. बंगाल]) विजेता : उडनतश्तरी

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 84 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है Belur Math [West Bengal]

और इसके बारे मे संक्षिप्त सी जानकारी दे रही हैं सु. अल्पना वर्मा.


आप सभी को मेरा नमस्कार,

पहेली में पूछे गये स्थान के विषय में संक्षिप्त और सारगर्भित जानकारी देने का यह एक लघु प्रयास है.

आशा है, आप को यह प्रयास पसन्द आ रहा होगा,अपने सुझाव और राय से हमें अवगत अवश्य कराएँ.


संत रामकृष्ण परमहंस जी के बारे में हमने पिछली एक पोस्ट में बताया था आज संक्षेप में दोहराते हुए यही कहते हैं कि वे भारत के एक महान संत एवं विचारक थे जिन्होंने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए स्वयं उन्होंने कठोर साधना और भक्ति का जीवन बिताया वे सच्चे अर्थों में मानवता के पुजारी थे.

Swami Ramakrishna Statue


इन्हीं के शिष्य थे स्वामी विवेकानंद.उनके नाम से भला कौन सा भारतीय परिचित न होगा,जो परिचित नहीं हैं उनके लिए संक्षेप में जानकारी इस प्रकार है.

Swami Vivekananda


युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानंद जी का जन्म कलकत्ता में 12 जनवरी 1863 को वहां के प्रतिष्ठित वकील विश्वनाथ दत्त और भुवनेश्वरी दत्त के घर पर हुआ . उन का पूर्व नाम नरेन्द्र दत्त था .1884 में पिता के निधन के बाद वे गुरुदेव कि शरण में आ गये.25 वर्ष की अवस्था में संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद हुआ.[स्वामी विवेकानन्द नरेन्द्रनाथ दत्त ने अपने को विविदिषानंद कहलाना चाहा परंतु खेतडी़ के राजा अजितसिंह ने उन्हें विवेकानन्द नाम दिया. ].
वे वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे.

संत रामकृष्ण ने उन्हें कहा था कि संसार के हज़ारों लोगों का कष्ट दूर करने के लिए तुम्हारा जन्म हुआ है.
कहा जाता है कि श्री रामकृष्ण ने महासमाधी के तीन दिन पहले अपनी सम्पूर्ण शक्ति विवेकानन्द जी को दे दी थी .
उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो नगर में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासम्मेलन में सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था वहीँ तीन वर्ष के प्रवास के दौरान उन्होंने लोगों को भारतीय तत्वज्ञान से परिचय कराया . उनकी वक्ततृत्व शैली तथा ज्ञान को देखते हुये वहाँ के मीडिया ने उन्हें 'साइक्लॉनिक हिन्दू 'का नाम दिया था . भारत का वेदान्त अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानंद की वक्तृता के कारण ही पँहुचा.

भारत लौटने के बाद उन्होंने संत रामकृष्ण मिशन की स्थापना की.उन्होंने स्वयं ४ जुलाई सन १९०२ में समाधि ली.इनका जन्म दिन राष्ट्रीय युवा दिवस और कैरियर डे के रूप में मनाया जाता है।'स्वामी विवेकानन्द के व्याख्यान 'आप अंतर्जाल पर पढ़ सकते हैं.

जिस स्थान का चित्र हमने आप को पहेली में दिखाया था वह स्थान रामकृष्ण मंदिर /बैलूर मठ कहलाता है.
रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन ये दोनों एक ही उद्देश्य के लिए काम करते हैं.

Belurmath


रामकृष्ण मठ एवं मिशन की स्थापना १८९८ में स्वामी रामकृष्ण परमहंस के परम् शिष्य स्वामी विवेकानंद ने की थी .
रामकृष्ण मिशन का ध्येय वाक्य है - आत्मनो मोक्षार्थं जगद् हिताय च (अपने मोक्ष और संसार के हित के लिये)"/For one's own salvation, and for the welfare of the world"..वेदांत के सिद्धांतों पर चलते हुए सम्पूर्ण जगत में शांति और सद्भाव बढ़ाने के लिए प्रयास किये जाते हैं.रामकृष्ण मिशन और मठ की संयुक्त रूप से पुरे विश्व में ११७ शाखाएं हैं .बैलूर में इस का मुख्यालय है .यह मठ पश्चिम बंगाल की हुगली नदी के पश्चिमी किनारे पर कोलकता से लगभग पांच मील दूर ,हावड़ा जिले के बैलूर में स्थित है.इस भवन की वास्तुकला में बोद्ध,हिन्दू , मुस्लिम और ईसाई शैलियों का मिश्रण है.यह विश्व प्रसिद्द शांति स्थल हैं.गुरुकुल परम्परा के अंतर्गत यहाँ वेदों की शिक्षा भी दी जाती है.सभी धर्मो के मुख्य पर्व भी मनाये जाते हैं.

Swami Vivekanand Temple


यहाँ रामकृष्ण संग्रहालय , रामकृष्ण मंदिर ,स्वामी विवेकानन्द जी का कक्ष जहाँ उन्होंने जीवन के अंतिम दिन बिताए और महासमाधि ली थी,सम्मि ब्रहमानंद मंदिर ,माता शारदा देवी मंदिर ,स्वामी विवेकानन्द मंदिर और संत रामकृष्ण जी के १६ भक्तों की समाधी स्थल ,पुराना मठ देखने के स्थल हैं.

बैलूर मठ की जानकारी अधिकारिक साईट से हिंदी में अनुवादित कर के लिखी गयी है.
अधिक जानकारी के लिए अधिकारिक साईट पर जाएँ-
http://www.belurmath.org/

चलते -चलते पाठकों से मेरा एक प्रश्न -: क्या आप चाहते हैं कि पहेली में पूछे गए स्थानों के सम्बन्ध में जानकारी देने का यह क्रम जारी रखा जाये?अगर आप को यह उपयोगी नहीं लगता है तो मैं इस क्रम को समाप्त करना चाहती हूँ.



आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" की नमस्ते!

प्यारे बहनों और भाईयो, मैं आचार्य हीरामन “अंकशाश्त्री” ताऊ पहेली के रिजल्ट के साथ आपकी सेवा मे हाजिर हूं. उत्तर जिस क्रम मे मुझे प्राप्त हुये हैं उसी क्रम मे मैं आपको जवाब दे रहा हूं. एवम तदनुसार ही नम्बर दिये गये हैं.



सभी विजेताओं को हार्दिक शुभकामनाएं.


 

श्री उडनतश्तरी अंक 101

seema-gupta-2

सुश्री सीमा गुप्ता अंक 100

lalit 50

श्री ललित शर्मा अंक 99

skgupta

श्री सूर्यकान्त गुप्ता अंक 98

AshaSureshNY2001

Mrs. Asha Joglekar अंक 97

श्री प्रकाश गोविंद   अंक 96

darshan-baweja

श्री Darshan Lal Baweja  अंक 95

indu-arora

सुश्री  इंदू अरोडा अंक 94

श्री अंतरसोहिल अंक 93

श्री संजय बेंगाणी अंक 92

प. श्री.  डी. के. शर्मा “वत्स” अंक 91

श्री नीरज गोस्वामी अंक 90

archana

सुश्री अर्चना अंक 89

gagansharma

 श्री Gagan Sharma, Kuchh Alag sa अंक 88

smartindian

श्री स्मार्ट इंडियन  अंक 87

श्री रतनसिंह शेखावत अंक 86

ajju5

Dr.Ajmal Khan  अंक 85

m a sharma 'sehar'

सुश्री M A Sharma “सेहर” अंक 84

श्री मनोज कुमार अंक 83

My Photo

श्री पी.एन.सुब्रमनियन अंक 82


आईये अब रामप्यारी मैम की कक्षा में





हाय गुड मार्निंग एवरीबड्डी... मेरे सवाल का सही जवाब है : बया पक्षी (weaver bird) निम्न सभी प्रतिभागियों को सवाल का सही जवाब देने के लिये 20 नंबर दिये हैं सभी कॊ बधाई.






इस खूबसूरत पक्षी की दर्जीगिरी आप निम्न विडियो में भी देख सकते हैं कितनी खूबसूरती से इसने घौंसला शुरु से अंत तक बनाया. और इस वजह से इसको दर्जिन पक्षी भी कहा जाता है.



सुश्री सीमा गुप्ता
श्री Darshan Lal Baweja
श्री नीरज जाटजी
सुश्री इंदु अरोड़ा
श्री प्रकाश गोविंद

अब अगले शनिवार को फ़िर यहीं मिलेंगे. तब तक जयराम जी की!

अब आईये आपको उन लोगों से मिलवाता हूं जिन्होने इस पहेली अंक मे भाग लेकर हमारा उत्साह वर्धन किया. आप सभी का बहुत बहुत आभार.

श्री दिनेशराय द्विवेदी
श्री रंजन
श्री महेंद्र मिश्र
श्री काजलकुमार,
श्री संजय भास्कर
श्री ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
भारतीय नागरिक - Indian Citizen
श्री गगन शर्मा
श्री अविनाश वाचस्पति
श्री दिलीप कवठेकर
श्री राम त्यागी

अब अगली पहेली का जवाब लेकर अगले सोमवार फ़िर आपकी सेवा मे हाजिर होऊंगा तब तक के लिये आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" को इजाजत दिजिये. नमस्कार!


आयोजकों की तरफ़ से सभी प्रतिभागियों का इस प्रतियोगिता मे उत्साह वर्धन करने के लिये हार्दिक धन्यवाद. !

ताऊ पहेली के इस अंक का आयोजन एवम संचालन ताऊ रामपुरिया और सुश्री अल्पना वर्मा ने किया. अगली पहेली मे अगले शनिवार सुबह आठ बजे आपसे फ़िर मिलेंगे तब तक के लिये नमस्कार.

Indli - Hindi News, Blogs, Links
www.blogvani.com

Followers